# नीम की पत्तियां और शैंपू मिलाकर देसी कीटनाशक बनाते हैं सारण के नरेंद्र सिंह, 2000 से ज्यादा फूलों की ऐसे करते हैं सुरक्षा

> बिहार के सारण जिले के निवासी नरेंद्र सिंह पिछले 10 सालों से उबले नीम के पानी और शैंपू के घोल से अपने बगीचे के 2,000 से अधिक पौधों को कीड़ों से बचा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** DIY · **Published:** 2026-08-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/diy/nima-ki-pattiyan-aura-shainpu-milakara-desi-kitanashaka-banate-hain-saran-ke-narendra-singh-2000-se-jyada-phulon-ki-aise-karate-ha-23602 · **Language:** Hindi
**Tags:** गार्डनिंग टिप्स, देसी कीटनाशक, नीम और शैंपू घोल, सारण गार्डनिंग, पौधों की देखभाल, बिहार समाचार

घर के बगीचे या बालकनी में लगे हरे-भरे पेड़-पौधे और खिलते फूल हर किसी का मन मोह लेते हैं। लेकिन जब इनमें कीड़े लग जाते हैं और पौधे मुरझाने लगते हैं, तो गार्डनिंग के शौकीनों की चिंता बढ़ जाती है। अक्सर लोग पौधों को बचाने के लिए बाजार से महंगे और रासायनिक कीटनाशक खरीदते हैं, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। बिहार के सारण जिले के दिघवारा प्रखंड स्थित आमी गांव के निवासी नरेंद्र सिंह ने इस समस्या का एक बेहद सस्ता और कारगर देसी उपाय ढूंढ निकाला है। वे पिछले 10 वर्षों से नीम की पत्तियों के उबले पानी और शैंपू के अनोखे मिश्रण से अपने बगीचे को कीटों से पूरी तरह सुरक्षित रख रहे हैं।

## घर पर ही तैयार करते हैं रसायन मुक्त देसी कीटनाशक
नरेंद्र सिंह बताते हैं कि बाजारू केमिकल पेस्टिसाइड की जगह घर पर प्राकृतिक सामग्री से तैयार घोल का उपयोग करना बेहद आसान और सुरक्षित है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले नीम की ताजी पत्तियों को साफ पानी में अच्छी तरह उबाला जाता है। जब पानी में नीम का पूरा रस आ जाता है, तो उसे छानकर ठंडा कर लिया जाता है। इसके बाद इस नीम के पानी में थोड़ी मात्रा में शैंपू मिलाया जाता है। यह घोल पौधों के कीड़ों को दूर भगाने में अचूक असर दिखाता है। शैंपू में मौजूद सामान्य सफाई घटकों के अलावा इसमें कोई भी खतरनाक केमिकल नहीं होता, जिससे आसपास का वातावरण जहरीले रसायनों से पूरी तरह मुक्त रहता है।

## 2,000 से अधिक फूलों की किस्मों का रख-रखाव
फूलों के बेहद शौकीन नरेंद्र सिंह के पास वर्तमान में 2,000 से भी अधिक किस्मों के फूलों के पौधे मौजूद हैं। विशाल बगीचे की देखभाल करना आसान काम नहीं होता, खासकर तब जब पौधों में कीड़े लगने की समस्या आम हो जाए। नरेंद्र सिंह के अनुसार, जब भी उनके किसी पौधे में कीड़ों का हमला होता है, तो वे तुरंत अपने इस देसी कीटनाशक का छिड़काव कर देते हैं। इस छिड़काव से पौधों की सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता और कीड़े तुरंत भाग जाते हैं। उनके इस प्राकृतिक नुस्खे से पूरा बगीचा साल भर हरा-भरा और फूलों से महकता रहता है।

## अड़हुल के सफेद धब्बों की बीमारी में बेहद असरदार
पेड़-पौधों में अक्सर ‘उजाला धब्बा’ जैसी फंगल और कीड़ों वाली बीमारियां देखने को मिलती हैं। खासतौर पर अड़हुल के फूलों में सफेद धब्बे वाली बीमारी बहुत तेजी से फैलती है, जो पत्तियों और कलियों को सुखा देती है। नरेंद्र सिंह का कहना है कि जिन पौधों में सफेद धब्बे या कीट का संक्रमण दिखे, वहां नीम के पानी और शैंपू का घोल बनाकर छिड़काव करने से तुरंत राहत मिलती है। यह घरेलू उपाय पौधों की सुरक्षा करने के साथ-साथ फूलों की रंगत और ताजगी को भी बनाए रखता है।

## कम लागत में पर्यावरण और सेहत की सुरक्षा
रासायनिक कीटनाशकों का लगातार इस्तेमाल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को नुकसान पहुंचाता है और घर के सदस्यों व पालतू जानवरों के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम भरा होता है। इसके विपरीत, नीम और शैंपू से बना यह कीटनाशक बेहद कम लागत में तैयार हो जाता है। इसमें लगने वाली सामग्री आसानी से हर घर में उपलब्ध होती है। नरेंद्र सिंह का यह 10 साल पुराना आजमाया हुआ तरीका न केवल पौधों का जीवन बचाता है, बल्कि पर्यावरण को भी जहरीले रसायनों से मुक्त रखने की दिशा में एक बेहतरीन कदम साबित हो रहा है।

## इसका आप पर असर
यह देसी नुस्खा घरेलू गार्डनिंग करने वाले लोगों के लिए रासायनिक कीटनाशकों का एक सुरक्षित, किफ़ायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करता है।

- **भारत भर में:** घर पर देसी कीटनाशक बनाकर पौधे उगाने वाले लोग महंगे रासायनिक स्प्रे पर होने वाले खर्च को बचा सकते हैं। नीम और शैंपू का यह घोल आसानी से तैयार हो जाता है और पौधों को नुकसान पहुंचाए बिना कीड़ों का सफाया करता है।
- **बिहार और सारण जिले में:** स्थानीय गार्डनर और नर्सरी संचालक इस जैविक तकनीक को अपनाकर अपने पौधों को सुरक्षित रख सकते हैं। इससे क्षेत्र में रसायनों के अत्यधिक उपयोग को कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- **पौधों की सेहत पर प्रभाव:** अड़हुल के फूलों और अन्य पौधों में लगने वाली सफेद धब्बे की बीमारी से तुरंत निजात मिलती है। सही समय पर छिड़काव करने से पौधे मुरझाने से बचते हैं और उनकी पत्तियां और फूल तरोताजा रहते हैं।
- **स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा:** घर और बालकनी में जहरीले केमिकल का छिड़काव न होने से हवा साफ बनी रहती है। यह प्राकृतिक घोल बच्चों, बुजुर्गों और पालतू जानवरों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

## सवाल-जवाब

### 1. सारण के नरेंद्र सिंह पौधों के कीड़े भगाने के लिए किस चीज का इस्तेमाल करते हैं?
वे नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर और उसमें शैंपू मिलाकर देसी कीटनाशक घोल तैयार करते हैं।

### 2. नरेंद्र सिंह के पास फूलों के पौधों की कितनी किस्में मौजूद हैं?
उनके पास 2,000 से अधिक किस्मों के फूलों के पौधे हैं।

### 3. अड़हुल के फूलों में लगने वाली किस बीमारी पर यह घोल कारगर है?
यह घरेलू घोल अड़हुल के पौधों में लगने वाली ‘उजाला धब्बा’ या सफेद धब्बों की बीमारी पर बेहद असरदार है।

### 4. नरेंद्र सिंह पिछले कितने सालों से इस घरेलू कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे हैं?
वे पिछले 10 वर्षों से इस नीम और शैंपू वाले घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल कर रहे हैं।

### 5. नीम और शैंपू से बने कीटनाशक का क्या फायदा है?
यह घोल कम लागत में बनता है, हानिकारक रसायनों से मुक्त होता है और पौधों को नुकसान पहुंचाए बिना कीड़ों को दूर भगाता है।

## प्रेरणा और सबक
सारण के नरेंद्र सिंह का 10 वर्षों का अनुभव गार्डनिंग के शौकीनों के लिए सीख और प्रेरणा देता है।

- **देसी और प्राकृतिक समाधान अपनाना:** हर समस्या के लिए महंगे बाजारू रसायनों पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक और घरेलू विकल्पों की खोज करनी चाहिए।
- **धैर्य और निरंतरता:** 2,000 से अधिक किस्मों के पौधों का रख-रखाव निरंतर प्रयास और लगन की मांग करता है।
- **पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी:** अपने शौक को पूरा करते समय आसपास के वातावरण और प्रकृति को नुकसान न पहुंचाना एक सजग नागरिक की पहचान है।

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