दैनिक जीवन के उदाहरणों और अनोखे फॉर्मूलों से अमित चौधरी ने गणित को बनाया आसान, दूर किया बच्चों का डर बरेली के शिक्षक अमित चौधरी 31 वर्षों के अनुभव से सिंगल लाइन फॉर्मूला और वैदिक मैथ्स के जरिए छात्रों के लिए गणित को सरल बना रहे हैं। गणित का जिक्र होते ही ज्यादातर छात्र सहम जाते हैं और माता-पिता की चिंताएं भी बढ़ जाती हैं। कई विद्यार्थियों को यह विषय बेहद जटिल और सिरदर्द जैसा महसूस होता है, मगर यदि बुनियादी अवधारणाओं को व्यावहारिक जीवन के अनुभवों से जोड़कर समझाया जाए, तो गणित सबसे सहज और पसंदीदा विषय बन सकता है। बच्चों के मन से इस फोबिया को पूरी तरह खत्म करने और विषय में स्वाभाविक रुचि जगाने के मकसद से बरेली के प्रसिद्ध शिक्षक अमित चौधरी लगातार प्रयासरत हैं। पिछले 31 वर्षों से गणित शिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय अमित चौधरी ने ऐसे कई सरल नियम और अनोखे सूत्र तैयार किए हैं, जो जटिल से जटिल समस्याओं को पलक झपकते हल करने की क्षमता देते हैं। वैदिक, एब्स्ट्रैक्ट और एप्लाइड मैथ्स का अनूठा तालमेल अमित चौधरी का मानना है कि गणित को बिना किसी तनाव के सीखने के लिए एब्स्ट्रैक्ट, एप्लाइड और वैदिक मैथ्स का सटीक संयोजन होना अनिवार्य है। कक्षा 2 से लेकर 12वीं तक के पूरे पाठ्यक्रम में कई गणितीय सिद्धांत बार-बार अलग-अलग संदर्भों और स्वरूपों में दोहराए जाते हैं। असल में एक ही बुनियादी नियम 25 से 30 अलग-अलग रूपों और भूमिकाओं में विद्यार्थियों के सामने आता है, लेकिन सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण छात्र इस अंतर्संबंध और समानता को पकड़ नहीं पाते। इसी उलझन को सुलझाने के लिए उन्होंने सिंगल लाइन फॉर्मूला सिस्टम और सिंगल डिस्टेंस फॉर्मूला का कॉन्सेप्ट पेश किया है, जिससे छात्र एक ही सूत्र से कई तरह के सवाल आसानी से हल करना सीख जाते हैं। पारिवारिक रिश्तों के उदाहरण और कलर पेन तकनीक गणित के इस चक्रीय व्यवहार को स्पष्ट करते हुए अमित चौधरी एक बड़ा ही रोचक उदाहरण देते हैं। वे समझाते हैं कि जिस तरह परिवार के भीतर एक ही इंसान किसी का मामा होता है, किसी का चाचा बन जाता है और किसी अन्य के लिए वही व्यक्ति ताऊ कहलाता है, जबकि वह मूल रूप से एक ही व्यक्ति रहता है। ठीक इसी प्रकार गणित का एक ही बुनियादी फॉर्मूला अलग-अलग कक्षाओं और विविध अध्यायों में नए-नए रूपों में सामने आता है। जब विद्यार्थी इस मूल तत्व को गहराई से समझ लेते हैं, तो भारी-भरकम सवाल भी उनके लिए बेहद आसान हो जाते हैं। इसके साथ ही प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की तैयारी को धार देने के लिए उन्होंने कलर पेन कॉम्बिनेशन तकनीक ईजाद की है। इस पद्धति में तीन अलग-अलग रंगों के पेन का इस्तेमाल किया जाता है, जिनसे आसान, मध्यम और कठिन सवालों को अलग-अलग चिन्हित किया जाता है। इससे बच्चों को यह तुरंत समझ आ जाता है कि उनकी वास्तविक कमजोरी कहां है और उन्हें किस हिस्से पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं और कैलेंडर से ज्यामिति की पढ़ाई गणित को किताबी रटंत प्रणाली से मुक्त कर रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने पर बल देते हुए अमित चौधरी बताते हैं कि घर की साधारण चीजें भी बेहतरीन शिक्षण उपकरण बन सकती हैं। उदाहरण के लिए, कमर की बेल्ट को जब खोला जाता है तो वह एक सीधी रेखा दर्शाती है और जब उसे पहन लिया जाता है तो वह एक गोलाकार आकृति ले लेती है। इस सामान्य सी चीज से बच्चे रेखा और ज्यामिति के गहरे सिद्धांतों को चुटकियों में समझ सकते हैं। इसी तरह घरों में टंगे कैलेंडर सिस्टम का इस्तेमाल करके भी गणितीय पैटर्न समझाए जा सकते हैं। वार्षिक कैलेंडर में पड़ने वाली छुट्टियों, प्रमुख त्योहारों और वेकेशन के दिनों की गिनती करवाकर बच्चों को गणना के साथ-साथ समय चक्र और पैटर्न का व्यावहारिक अभ्यास कराया जा सकता है। अमित चौधरी का स्पष्ट संदेश है कि गणित रटने का विषय बिल्कुल नहीं है, बल्कि यह शुद्ध समझ पर टिका है। सही दृष्टिकोण, व्यावहारिक उदाहरणों और तार्किक तकनीकों की मदद से हर विद्यार्थी गणित में असाधारण प्रदर्शन कर सकता है। इसका आप पर असर अमित चौधरी के बताए व्यावहारिक तरीके विद्यार्थियों के मन से गणित का फोबिया खत्म कर उनकी पढ़ाई को सरल बना सकते हैं। • छात्रों के लिए: गणितीय सूत्रों को रटने के बजाय उनके पैटर्न को समझकर सवाल हल करना आसान हो जाएगा। इससे कक्षा 2 से 12वीं तक के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम और आत्मविश्वास दोनों बेहतर होंगे। • अभिभावकों के लिए: बच्चों की पढ़ाई को लेकर होने वाले तनाव में कमी आएगी। माता-पिता घर की सामान्य चीजों का इस्तेमाल कर बच्चों को बुनियादी गणित सिखा सकेंगे। • सीखने के तरीकों में बदलाव: तीन रंगों के पेन की तकनीक से विद्यार्थी खुद अपनी कमजोरियों की पहचान कर सकेंगे। इससे उन्हें यह साफ पता रहेगा कि किस अध्याय या सवाल पर ज्यादा मेहनत करनी है। • समय की बचत: सिंगल लाइन फॉर्मूला जैसी तकनीकों से बड़े सवालों को तेजी से हल किया जा सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड इम्तिहानों में यह दक्षता काफी उपयोगी साबित होगी। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक शिक्षण में गणित को अक्सर रटने और जटिल समीकरणों तक सीमित कर दिया जाता है, जिससे बच्चों के भीतर इस विषय को लेकर गहरा डर पैदा हो जाता है। इसी मानसिक दबाव को दूर करने के लिए शिक्षकों ने व्यावहारिक और जीवन से जुड़े शिक्षण मॉडलों की जरूरत महसूस की। • बुनियादी अवधारणाओं का अलगाव: कक्षाओं में एक ही गणितीय सिद्धांत को अलग-अलग अध्यायों में नए नाम से पढ़ाया जाता है, जिससे विद्यार्थी यह समझ नहीं पाते कि मूल नियम वही है। इस संबंध को स्पष्ट करने के लिए सिंगल लाइन फॉर्मूला जैसी तकनीकों की आवश्यकता पड़ी। • व्यावहारिक उदाहरणों का अभाव: किताबों में केवल अमूर्त समीकरण होने से बच्चों की रुचि घटती है। दैनिक जीवन की वस्तुओं जैसे बेल्ट और कैलेंडर का उपयोग करके अवधारणाओं को दृश्य रूप में समझाने का रास्ता निकाला गया। • कमजोरियों की पहचान न हो पाना: छात्र अक्सर यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें किस स्तर के सवाल में दिक्कत आ रही है। कलर पेन कोडिंग तकनीक के जरिए कठिन और आसान विषयों को अलग-अलग चिन्हित करने की पद्धति विकसित की गई। सवाल-जवाब 1. अमित चौधरी कौन हैं और वे कितने समय से गणित पढ़ा रहे हैं? अमित चौधरी बरेली के एक जाने-माने गणित शिक्षक हैं, जो पिछले 31 वर्षों से गणित के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। 2. अमित चौधरी के अनुसार गणित को सरल बनाने के लिए किन चीजों का संयोजन जरूरी है? उनके मुताबिक एब्स्ट्रैक्ट, एप्लाइड और वैदिक मैथ्स का सही कॉम्बिनेशन गणित को आसान बनाने के लिए बेहद आवश्यक है। 3. गणित के सूत्रों को समझाने के लिए उन्होंने कौन सा पारिवारिक उदाहरण दिया? उन्होंने समझाया कि जिस तरह एक ही व्यक्ति किसी का चाचा, मामा या ताऊ हो सकता है, वैसे ही गणित का एक मूल सूत्र अलग-अलग कक्षाओं में अलग-अलग रूप में काम आता है। 4. कलर पेन कॉम्बिनेशन तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है? इसमें तीन रंगों के पेन से आसान, सामान्य और कठिन सवालों को अलग-अलग चिन्हित किया जाता है ताकि बच्चे अपनी कमजोरियों को पहचान सकें। 5. ज्यामिति सिखाने के लिए उन्होंने किस दैनिक वस्तु का उदाहरण दिया? उन्होंने बेल्ट का उदाहरण दिया, जो खोलने पर सीधी रेखा और पहनने पर गोलाकार आकृति का रूप ले लेती है। 6. कैलेंडर के जरिए बच्चों को क्या सिखाया जा सकता है? कैलेंडर में छुट्टियों और त्योहारों के दिनों को गिनवाकर बच्चों को गणना और गणितीय पैटर्न आसानी से सिखाए जा सकते हैं। प्रेरणा और सबक अमित चौधरी का 31 वर्षों का सफर दिखाता है कि जटिल से जटिल समस्याओं को सरल सोच और नवाचार से आसान बनाया जा सकता है। • जटिलता को सरलता में बदलना: किसी भी भारी विषय को बुनियादी सिद्धांतों में तोड़कर आसानी से समझा जा सकता है। जब हम मूल तत्व को पहचान लेते हैं, तो हर चुनौती सरल लगने लगती है। • रोजमर्रा के साधनों से सीखना: ज्ञान हासिल करने के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती। अपने आसपास मौजूद साधारण वस्तुओं के जरिए भी गहरे वैज्ञानिक और गणितीय सिद्धांत सीखे जा सकते हैं। • अपनी कमियों का निष्पक्ष विश्लेषण: कलर पेन जैसी पद्धतियों से स्पष्ट होता है कि सीखने में प्रगति तभी संभव है जब व्यक्ति अपनी वास्तविक कमजोरियों को ईमानदारी से चिन्हित करे। • निरंतरता और समर्पण: तीन दशकों से अधिक समय तक एक ही विषय की बारीकियों पर काम करना यह साबित करता है कि अनुभव और लगन से किसी भी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। https://trendkia.com/education/dainika-jivana-ke-udaharanon-aura-anokhe-phormulon-se-amit-choudhary-ne-ganita-ko-banaya-asana-dura-kiya-bachchon-ka-dara-56361 TrendKia — Har trend, sabse pehle.