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  "type": "article",
  "title": "देहरादून के एनआईपीवीडी में दृष्टिबाधित लोगों के लिए विशेष प्रशिक्षण, कंप्यूटर और ब्रेल लिपि से संवर रहा भविष्य",
  "summary": "देहरादून स्थित एनआईपीवीडी में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को तीन महीने का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें मोबिलिटी, ब्रेल लिपि और कंप्यूटर कोर्स शामिल हैं। केंद्र सरकार द्वारा रहने, खाने और पढ़ाई का सारा खर्च उठाया जाता है ताकि लोग आत्मनिर्भर बन सकें।",
  "content": "अचानक किसी दुर्घटना या बीमारी के कारण आंखों की रोशनी खो देने वाले लोगों के लिए जीवन पूरी तरह बदल जाता है। ऐसे कठिन दौर में मानसिक आघात से उबरना और रोजमर्रा के सामान्य कार्य करना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है। दुनिया के अंधकारमय हो जाने के बाद दैनिक जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी करने और खुद को फिर से खड़ा करने के लिए देहरादून का राष्ट्रीय दृष्टिबाधित सशक्तिकरण संस्थान एक बड़ा सहारा बन रहा है। इस संस्थान में दृष्टिबाधित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के कोर्स और विशेष प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिनमें कंप्यूटर की शिक्षा से लेकर चलने-फिरने के हुनर तक सब कुछ शामिल है।\n\nसभी आयु वर्ग के लोगों के लिए निःशुल्क प्रवेश\nदृष्टिबाधित हो चुके लोग इस संस्थान में प्रवेश ले सकते हैं और इसके लिए आयु की कोई पाबंदी नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से यह पूरी ट्रेनिंग पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यहां तीन महीने का विशेष एडजस्टमेंट कोर्स संचालित किया जाता है। संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. विनोद कुमार केन के अनुसार, शुरुआत में इस संस्थान में केवल उन फौजियों को प्रशिक्षित किया जाता था जिन्होंने सेवा के दौरान अपनी दृष्टि खो दी थी। समय के साथ इस दायरे को बढ़ाया गया और अब देश के किसी भी हिस्से से आने वाले सामान्य दृष्टिबाधित लोग भी यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। अभ्यर्थियों के रहने, खाने और प्रशिक्षण का संपूर्ण वित्तीय भार केंद्र सरकार द्वारा उठाया जाता है, जिससे हर आर्थिक वर्ग का व्यक्ति यहां आसानी से शिक्षा ले पाता है।\n\nसंतुलन और मोबिलिटी की विशेष तकनीक\nअचानक नजर चले जाने पर व्यक्ति के लिए शरीर का संतुलन बनाए रखना और बिना सहारे के चलना बेहद कठिन हो जाता है। मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर देवी लाल बताते हैं कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत ‘ओरिएंटेशन एंड मोबिलिटी’ के पाठों से होती है। इस चरण के दौरान प्रशिक्षुओं को अपने आसपास का मानसिक नक्शा तैयार करना सिखाया जाता है। इसके अलावा, उनकी बची हुई अन्य संवेदी क्षमताओं जैसे सुनने और छूने की ताकत को धार दी जाती है। इन तकनीकों के अभ्यास से व्यक्ति बिना किसी बाहरी मदद के सही शारीरिक संतुलन के साथ चलना और अपने दैनिक कामकाज करना आसानी से सीख जाता है.\n\nब्रेल लिपि और आधुनिक तकनीक का संगम\nजीवन में रोशनी न होने के बावजूद पढ़ाई लिखाई और संचार माध्यमों से जुड़े रहने के लिए प्रशिक्षुओं को ब्रेल लिपि का पूरा ज्ञान दिया जाता है। इसके साथ ही आज के डिजिटल दौर को ध्यान में रखते हुए उन्हें आधुनिक स्मार्ट उपकरणों का इस्तेमाल करने के लिए भी तैयार किया जाता है। संस्थान के भीतर कंप्यूटर और मोबाइल फोन चलाने की विधिवत ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अतिरिक्त, भारतीय स्टेट बैंक के मुद्रा की पहचान कराने वाले विशेष ऐप्स के साथ-साथ ‘सीइंग एआई’ और ‘बी माय आइज’ जैसे सहायक ऐप्स का उपयोग करना भी सिखाया जाता है, जिससे डिजिटल दुनिया उनके लिए सुलभ हो जाती है।\n\nसम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम\nएनआईपीवीडी में प्रदान किए जाने वाले इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य दृष्टिबाधित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा के साथ जोड़ना है। सही तरीके से भोजन करने, बैठने और चलने जैसे साधारण कामों से लेकर तकनीकी शिक्षा हासिल करने तक, यह ट्रेनिंग इंसान को गहरे मानसिक अवसाद से बाहर निकालने में मदद करती है। हादसे के बाद ठहर जाने वाली जिंदगी को यहां से एक नई राह मिलती है, जिससे कोई भी व्यक्ति किसी पर बोझ बने बिना आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह प्रशिक्षण कार्यक्रम दृष्टिबाधित व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए जीवन में एक नई उम्मीद और व्यावहारिक आत्मनिर्भरता लेकर आता है।\n\n• भारत में: देश भर के दृष्टिबाधित नागरिक इस निःशुल्क योजना का लाभ उठाकर बिना किसी आर्थिक दबाव के व्यावहारिक कौशल सीख सकते हैं।\n• देहरादून में: स्थानीय निवासी और आसपास के क्षेत्रों के लोग बिना किसी आयु सीमा के एनआईपीवीडी में प्रवेश पाकर आवासीय सुविधा के साथ अपना पुनर्वास सुनिश्चित कर सकते हैं।\n• वित्तीय राहत: केंद्र सरकार द्वारा रहने, खाने और प्रशिक्षण का पूरा खर्च उठाने से गरीब परिवारों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है।\n• तकनीकी कौशल: आधुनिक ऐप्स और कंप्यूटर की ट्रेनिंग मिलने से प्रशिक्षु डिजिटल युग में आत्मनिर्भर बनते हैं और रोजगार के रास्ते खुलते हैं।\n• दैनिक स्वतंत्रता: मोबिलिटी और ओरिएंटेशन की शिक्षा मिलने के बाद व्यक्ति बिना किसी अन्य सहारे के अपने रोजमर्रा के कार्य खुद कर सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एनआईपीवीडी संस्थान कहाँ स्थित है?\nयह संस्थान देहरादून में स्थित है।\n\n2. इस ट्रेनिंग कोर्स की अवधि कितने दिनों की है?\nयह प्रशिक्षण कार्यक्रम तीन महीने की अवधि का होता है।\n\n3. इस कोर्स के लिए प्रवेश लेने की आयु सीमा क्या है?\nकिसी भी उम्र के दृष्टिबाधित लोग इस संस्थान में प्रवेश ले सकते हैं।\n\n4. प्रशिक्षण के दौरान रहने और खाने का खर्च कौन उठाता है?\nअभ्यर्थियों के रहने, खाने और प्रशिक्षण का पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।\n\n5. प्रशिक्षण के दौरान सबसे पहले क्या सिखाया जाता है?\nट्रेनिंग की शुरुआत में ओरिएंटेशन और मोबिलिटी की शिक्षा दी जाती है जिसके तहत मानसिक मैप तैयार करना सिखाया जाता है।\n\n6. प्रशिक्षुओं को कौन-कौन से आधुनिक ऐप्स चलाना सिखाया जाता है?\nप्रशिक्षुओं को सीइंग एआई, बी माय आइज और एसबीआई के मुद्रा पहचान वाले ऐप्स का उपयोग करना सिखाया जाता है।\n\n7. इस संस्थान के कार्यवाहक निदेशक कौन हैं?\nडॉ. विनोद कुमार केन इस संस्थान के कार्यवाहक निदेशक हैं।",
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  "category": "शिक्षा",
  "publishedAt": "2026-08-30",
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    "एनआईपीवीडी देहरादून",
    "दृष्टिबाधित ट्रेनिंग",
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