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  "title": "इफ़्लू हैदराबाद में एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच हिंसक टकराव, 7 छात्र घायल और 14 पर पुलिस की कार्रवाई",
  "summary": "हैदराबाद स्थित इफ़्लू कैंपस में हॉस्टल विवाद को लेकर एबीवीपी और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प में 7 छात्र घायल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने 14 छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की है।",
  "content": "तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित प्रसिद्ध इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी (इफ़्लू) परिसर में छात्र संगठनों के बीच भीषण हिंसक झड़प का मामला सामने आया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच 14 अगस्त को हुई इस हिंसक झड़प में कम से कम 7 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। हिंसा के दौरान सिर पर गंभीर चोटें आने के कारण कई पीड़ित छात्रों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय उस्मानिया यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने दोनों ही गुटों के सदस्यों के खिलाफ परस्पर शिकायत के आधार पर आपराधिक मामले दर्ज कर लिए हैं और 14 छात्रों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की है।\n\nछात्रावास के मुद्दों और अभद्रता से सुलगी विवाद की चिंगारी\nपरिसर में इस हिंसक टकराव की नींव मुख्य रूप से 13 अगस्त को हुए एक घटनाक्रम के दौरान पड़ी थी। उस दिन छात्रावास में रहने की अनुमति मांगने पहुंची 2 छात्राएं जब हॉस्टल प्रशासन के पास गईं, तो वहां मौजूद वार्डन ने उनके साथ अनुचित और बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। इस दुर्व्यवहार की खबर फैलते ही एबीवीपी की इफ़्लू इकाई के कार्यकर्ताओं ने महिला हॉस्टल के बाहर एकत्र होकर छात्राओं के समर्थन में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी के सदस्यों ने न केवल छात्राओं के सम्मान का मुद्दा उठाया, बल्कि हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी जैसे साफ वॉशरूम और पीने के लिए सुरक्षित पानी की व्यवस्था को लेकर भी जोरदार आवाज बुलंद की। इसी विरोध प्रदर्शन के समय एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहसबाजी और कहासुनी शुरू हो गई। एबीवीपी का आरोप है कि एनएसयूआई के सदस्यों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन में खलल डालने का जानबूझकर प्रयास किया।\n\n14 अगस्त को खूनी संघर्ष में तब्दील हुआ तनाव\n13 अगस्त को शुरू हुआ यह वैचारिक और जबानी तनाव अगले ही दिन 14 अगस्त को खुले खूनी संघर्ष में बदल गया। दोनों छात्र गुटों के समर्थक परिसर में आमने-सामने आ गए और उनके बीच जमकर मारपीट हुई। एनएसयूआई ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने एक छात्र के खिलाफ बेहद जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं। इसके साथ ही एनएसयूआई का यह भी दावा है कि विरोधी गुट ने इफ़्लू छात्र संघ के उपाध्यक्ष के साथ मारपीट की। एनएसयूआई प्रतिनिधियों के अनुसार, एबीवीपी सदस्यों के एक समूह ने उनके कार्यकर्ताओं पर लकड़ी की लाठियों और कांच की बोतलों से हमला कर दिया। कांच की बोतलों और लाठियों के इस हमले में एनएसयूआई के कई सदस्य लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।\n\nपुलिस की कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारियों का ब्योरा\nघटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने रविवार को पूरे मामले का विस्तृत ब्योरा साझा किया। पुलिस जांच के अनुसार, 14 अगस्त की इस हिंसा में कुल 7 छात्र शारीरिक रूप से घायल हुए थे, जिनमें एनएसयूआई के 4 सदस्य और एबीवीपी के 3 सदस्य शामिल हैं। जिन छात्रों के सिर में गंभीर चोटें आई थीं, उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई और अस्पताल में भर्ती किया गया। उस्मानिया यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन में दोनों पक्षों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत और जवाबी शिकायत के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए एबीवीपी के 7 सदस्यों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, एनएसयूआई के भी 7 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में उन्हें पुलिस स्टेशन से ही जमानत पर रिहा कर दिया गया।\n\nनिष्पक्ष जांच और साथियों की रिहाई की उग्र मांग\nकानूनी कार्रवाई के बाद परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। इस बीच एबीवीपी की इफ़्लू इकाई ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही एबीवीपी संगठन ने हिरासत में भेजे गए अपने 7 साथियों की तुरंत और बिना शर्त रिहाई की पुरजोर मांग उठाई है। शैक्षणिक संस्थान के भीतर सुरक्षा और छात्र अधिकारों को लेकर उठे इस विवाद ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और परिसर में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह घटना विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र गुटबाज़ी और सुरक्षा इंतज़ामों को लेकर गंभीर सवाल उठाती है, जिससे छात्रों का शैक्षणिक माहौल प्रभावित होता है।\n\nहैदराबाद में: इफ़्लू परिसर और आसपास के उच्च शिक्षण संस्थानों में पुलिस सतर्कता बढ़ सकती है, जिससे छात्रों की दैनिक गतिविधियों और हॉस्टल नियमों की निगरानी सख्त हो सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इफ़्लू परिसर में 14 अगस्त को हिंसा क्यों भड़की?\n13 अगस्त को हॉस्टल वार्डन द्वारा दो छात्राओं से दुर्व्यवहार और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान छात्र गुटों में तीखी बहस हुई, जो 14 अगस्त को हिंसक झड़प में बदल गई।\n\n2. इस घटना में कितने छात्र घायल हुए और उनकी हालत कैसी है?\nझड़प में कुल 7 छात्र घायल हुए, जिनमें 4 एनएसयूआई और 3 एबीवीपी सदस्य शामिल हैं। सिर में गंभीर चोट वाले छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।\n\n3. पुलिस ने दोनों छात्र गुटों पर क्या कानूनी कार्रवाई की है?\nउस्मानिया यूनिवर्सिटी पुलिस ने परस्पर शिकायतों पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने एबीवीपी के 7 सदस्यों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा, जबकि एनएसयूआई के 7 सदस्यों को गिरफ्तार करने के बाद स्टेशन से जमानत दे दी।\n\n4. एबीवीपी की पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से क्या मांग है?\nएबीवीपी की इफ़्लू इकाई ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और न्यायिक हिरासत में भेजे गए अपने 7 कार्यकर्ताओं की तुरंत तथा बिना शर्त रिहाई की मांग की है।",
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  "category": "शिक्षा",
  "publishedAt": "2026-08-16",
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