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  "title": "जयपुर के दूदू में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, शिक्षकों की कमी पर स्कूल के गेट पर जड़ा ताला",
  "summary": "जयपुर के नरेना क्षेत्र स्थित लीलवो की ढाणी के सरकारी स्कूल में सात स्वीकृत पद खाली होने से नाराज अभिभावकों ने तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। ग्रामीणों की मांग है कि बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए जल्द से जल्द विषयवार स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।",
  "content": "जयपुर ग्रामीण जिले के दूदू उपखंड में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नरेना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय लीलवो की ढाणी में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी चल रही है। इस समस्या से परेशान होकर गुरुवार को स्थानीय ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। आक्रोशित लोगों ने एकजुट होकर स्कूल के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा दिया। इसके बाद उन्होंने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें अब केवल विषयवार स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति चाहिए। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी यह मांग पूरी नहीं की गई, तो वे अपने इस आंदोलन को और भी बड़े स्तर पर ले जाएंगे।\n\nस्कूल का हुआ क्रमोन्नयन, लेकिन नहीं आए शिक्षक\nग्रामीणों ने स्कूल की वर्तमान स्थिति को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि साल 2023 में इस विद्यालय को प्राथमिक स्तर से बढ़ाकर उच्च प्राथमिक स्तर का कर दिया गया था। स्कूल का दर्जा तो बढ़ गया, लेकिन यहां पढ़ाने के लिए शिक्षकों के स्वीकृत सात पद आज भी पूरी तरह से खाली पड़े हैं। इस समय पूरे स्कूल को चलाने की जिम्मेदारी केवल दो संविदा कर्मियों के कंधों पर डाल दी गई है। प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि पिछले चार सालों से यह स्कूल केवल अस्थायी शिक्षकों के सहारे ही चल रहा है। इसका सीधा और नकारात्मक असर बच्चों के भविष्य और उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।\n\nमजबूरी में बच्चों की टीसी निकाल रहे हैं अभिभावक\nबच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए हैं। उन्होंने स्थायी शिक्षकों की मांग को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब कई अभिभावक मजबूर होकर अपने बच्चों की टीसी निकाल रहे हैं। वे अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में कराने को विवश हैं। उनका साफ तौर पर मानना है कि शिक्षकों की इस कमी के कारण उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का बुनियादी अधिकार नहीं मिल पा रहा है।\n\nतीन घंटे तक चला प्रदर्शन, फिर पहुंचे अधिकारी\nस्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगने और ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन की खबर जैसे ही शिक्षा विभाग तक पहुंची, स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। सबसे पहले नरेना पीईईओ रमेश कुमार घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद प्रदर्शनकारी ग्रामीणों और अभिभावकों से बातचीत करके उन्हें शांत करने की बहुत कोशिश की। हालांकि, लोग अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अड़े रहे और ताला खोलने से इनकार कर दिया। करीब तीन घंटे तक यह भारी विरोध प्रदर्शन चलता रहा। मामले को तूल पकड़ता देख आखिरकार सीबीईओ मुखराम चांदोलिया और एसबीईओ गिर्राज मीणा भी विद्यालय पहुंचे। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों के साथ विस्तृत वार्ता शुरू की।\n\nअस्थायी समाधान से संतुष्ट नहीं हैं ग्रामीण\nअधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के दौरान उन्हें एक तात्कालिक व्यवस्था का प्रस्ताव दिया। उन्होंने जानकारी दी कि शिक्षिका ममता वर्मा और शिक्षक दिनेश माली की प्रतिनियुक्ति आगामी अप्रैल महीने तक के लिए राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, लीलवो की ढाणी में कर दी गई है। अधिकारियों ने सभी अभिभावकों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि अब किसी भी हाल में विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसके बावजूद, ग्रामीण प्रशासन की इस व्यवस्था से बिल्कुल भी सहमत नहीं दिखे। उनका स्पष्ट तर्क है कि शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति करना केवल एक अस्थायी उपाय है, जिससे मूल समस्या का समाधान नहीं होता है। स्कूल को सुचारू और नियमित रूप से चलाने के लिए विषयवार स्थायी शिक्षकों का होना बेहद आवश्यक है। ग्रामीणों ने एक बार फिर से चेतावनी दी है कि अगर उनके स्कूल में रिक्त पदों पर जल्द से जल्द स्थायी नियुक्तियां नहीं की जाती हैं, तो वे अपने प्रदर्शन को और उग्र करेंगे। उन्होंने साफ कह दिया है कि भविष्य में पैदा होने वाले किसी भी हालात की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की होगी।\n\nइसका आप पर असर\n• छात्रों के लिए: सरकारी स्कूलों में स्थायी शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई का सीधा नुकसान होता है और उनका भविष्य खतरे में पड़ जाता है।\n• राजस्थान में: ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों को अब अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए निजी स्कूलों का महंगा विकल्प चुनने या उन्हें दूर भेजने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दूदू के लीलवो की ढाणी स्कूल में ग्रामीणों ने ताला क्यों लगाया?\nस्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे नाराज होकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया।\n\n2. स्कूल में शिक्षकों के कितने पद खाली हैं?\nसाल 2023 में स्कूल को उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत किए जाने के बावजूद, वहां शिक्षकों के स्वीकृत सात पद आज तक खाली पड़े हैं।\n\n3. स्कूल का संचालन वर्तमान में कौन कर रहा है?\nपूरे स्कूल का कामकाज वर्तमान में केवल दो संविदा कर्मियों (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स) के भरोसे चलाया जा रहा है।\n\n4. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने क्या समाधान निकाला?\nअधिकारियों ने आगामी अप्रैल तक दो शिक्षकों, ममता वर्मा और दिनेश माली, को वहां प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) पर लगाने की व्यवस्था की है।",
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  "category": "शिक्षा",
  "publishedAt": "2026-07-23",
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