# कक्षा 6 के बच्चों को तीन-भाषा फॉर्मूले से शीर्ष अदालत ने दी बड़ी छूट

> सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को निर्देश दिया है कि मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले से वैसी ही राहत मिले जैसी कक्षा 7 से 9 के विद्यार्थियों को दी गई है।

**Type:** article · **Category:** शिक्षा · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/education/kaksha-6-ke-bachchon-ko-tina-bhasha-phormule-se-supreme-court-ne-di-bari-chhuta-40096 · **Language:** Hindi
**Tags:** सीबीएसई, सुप्रीम कोर्ट, शिक्षा, तीन भाषा नीति, कक्षा 6

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई के स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मौजूदा समय में छठी कक्षा में पढ़ाई कर रहे बच्चों को भी त्रि-भाषा नीति से वही छूट दी जाए, जो व्यवस्था पहले से कक्षा 7, कक्षा 8 और कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की गई थी। इस मामले में केंद्र सरकार का रुख अलग था, लेकिन शीर्ष अदालत ने विद्यार्थियों के हित को प्राथमिकता देते हुए यह अहम राहत प्रदान की है।

## केंद्र के तर्कों के बावजूद अदालत ने दिया निर्देश
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत को बताया था कि वह कक्षा 6 के विद्यार्थियों को इस छूट के दायरे में शामिल करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। केंद्र की दलील थी कि करीब 99 प्रतिशत सीबीएसई स्कूल इस त्रि-भाषा फॉर्मूले को अपने यहां जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, सरकारी पक्ष की इन दलीलों के बावजूद पीठ ने वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थियों को राहत देने का फैसला सुनाया और उन्हें भी उच्च कक्षाओं की तरह ही छूट प्रदान करने के निर्देश जारी किए।

## नियमों को लेकर विवाद की मुख्य वजह
इस पूरे मामले में विवाद की शुरुआत तब हुई जब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के भीतर तीन भाषाओं को अनिवार्य रूप से पढ़ने की व्यवस्था लागू कर दी गई। इससे पहले शीर्ष अदालत ने सीबीएसई को सुझाव दिया था कि वह दो भारतीय भाषाओं सहित कुल तीन भाषाओं की अनिवार्य पढ़ाई वाली नीति को 2027 से प्रारंभ होने वाले अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने पर विचार करे।

## न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष हुई विस्तृत चर्चा
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। बोर्ड का प्रतिनिधित्व कर रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को यह भरोसा दिलाया था कि सीबीएसई अदालत के सुझावों पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने विशेष रूप से यह राय रखी थी कि छोटे स्कूली बच्चों को राहत देने के मकसद से सीबीएसई को इस नीति का क्रियान्वयन आगामी शैक्षणिक सत्र तक टालने पर ध्यान देना चाहिए।

इसके साथ ही पीठ ने यह विकल्प भी खुला रखा कि यदि मौजूदा समय में कक्षा 6 में पढ़ रहे कोई छात्र स्वेच्छा से इसी वर्ष से तीन भाषाएं पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने की पूरी अनुमति दी जा सकती है। बोर्ड की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया था कि संस्था इस पूरे बिंदु पर एक नया नोट तैयार करके पेश करेगी।

## इसका आप पर असर
इस अदालती फैसले से सीबीएसई स्कूलों में कक्षा 6 में पढ़ रहे लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों पर से पढ़ाई का तात्कालिक मानसिक तनाव पूरी तरह हट गया है।

- **अभिभावकों और छात्रों के लिए:** वर्तमान सत्र में पढ़ रहे कक्षा 6 के छात्रों पर तीन भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़ने का दबाव अब लागू नहीं होगा। बच्चे अपनी सुविधानुसार नियमित पाठ्यक्रम जारी रख सकते हैं और यदि वे चाहें तो ही तीसरी भाषा स्वेच्छा से चुन सकते हैं।
- **पाठ्यक्रम और किताबों की तैयारी:** नए भाषा विषय की किताबें खरीदने या अतिरिक्त ट्यूशन लगाने की तात्कालिक मजबूरी खत्म हो गई है। परिवार बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय या मानसिक दबाव के वर्तमान अध्ययन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
- **स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों पर असर:** स्कूलों को आनन-फानन में नए भाषा शिक्षकों की नियुक्ति या टाइम-टेबल बदलने की जल्दबाजी नहीं करनी होगी। प्रबंधन को 2027 के अगले सत्र के अनुसार संसाधन जुटाने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।
- **सीबीएसई बोर्ड का रुख:** बोर्ड को अब अदालत के सुझावों के आधार पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इसके बाद ही स्कूलों और अभिभावकों को अगले सत्र की आधिकारिक रूपरेखा स्पष्ट रूप से समझ आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी विवाद तब खड़ा हुआ जब केंद्र सरकार और सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 में तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की व्यवस्था लागू कर दी थी।

- **कक्षा 6 को अचानक शामिल करना:** बोर्ड ने पहले कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को तो छूट दे दी थी, लेकिन कक्षा 6 को इस नीति के दायरे में बनाए रखा। इस असमानता और छोटे बच्चों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार के कारण मामला अदालत तक पहुंच गया।
- **केंद्र का व्यावहारिक रुख:** केंद्र सरकार का तर्क था कि करीब 99 प्रतिशत स्कूल इसे लागू करने के लिए संसाधन जुटा चुके हैं और वे नीति को लागू करना चाहते थे। सरकार चाहती थी कि नई व्यवस्था को तय समय सीमा में जमीन पर उतारा जाए।
- **अदालत का छात्र-हित दृष्टिकोण:** पीठ का मानना था कि छोटी उम्र के बच्चों पर बिना तैयारी के अचानक अतिरिक्त भाषा का बोझ डालना ठीक नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने नीति को अगले शैक्षणिक सत्र 2027 से शुरू करने का सुझाव दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों के लिए क्या आदेश दिया है?
शीर्ष अदालत ने सीबीएसई को निर्देश दिया है कि मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को भी त्रि-भाषा नीति से वही छूट दी जाए जो कक्षा 7, 8 और 9 को मिली है।

### 2. क्या केंद्र सरकार कक्षा 6 को छूट देने के पक्ष में थी?
नहीं, केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि वह छूट देने के पक्ष में नहीं है और लगभग 99 प्रतिशत सीबीएसई स्कूल इस नीति के लिए तैयार हैं।

### 3. यह विवाद किस शैक्षणिक सत्र से शुरू हुआ था?
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई को अनिवार्य किया गया।

### 4. सुप्रीम कोर्ट की पीठ में कौन-कौन से न्यायाधीश शामिल थे?
इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।

### 5. यदि कोई छात्र अभी से तीन भाषाएं पढ़ना चाहे तो क्या नियम है?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि वर्तमान कक्षा 6 का कोई छात्र स्वेच्छा से इसी वर्ष से तीन भाषाएं पढ़ना चाहता है, तो उसे इसकी अनुमति मिल सकती है।

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