# कानपुर के डिग्री कॉलेजों में आधी सीटें रह गईं खाली, दाखिले बढ़ाने के लिए अब इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब का सहारा

> उत्तर प्रदेश के कानपुर में 21 एडेड डिग्री कॉलेजों की 60 हजार सीटों में से केवल 30 हजार पर दाखिले होने के बाद सीएसजेएमयू की पहल पर डिजिटल प्रचार अभियान शुरू किया गया है।

**Type:** article · **Category:** शिक्षा · **Published:** 2026-08-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/education/kanpur-ke-digri-kolejon-men-adhi-siten-raha-gain-khali-dakhile-barhane-ke-lie-aba-instagram-reels-aura-youtube-ka-sahara-16336 · **Language:** Hindi
**Tags:** कानपुर डिग्री कॉलेज, सीएसजेएमयू प्रवेश, उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा, डिजिटल एडमिशन अभियान, प्रोफेसर विनय पाठक, बीएनडी डिग्री कॉलेज

कानपुर के एडेड डिग्री कॉलेजों में इस शैक्षणिक सत्र में प्रवेश को लेकर अभूतपूर्व संकट देखा जा रहा है। पारंपरिक रूप से बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद कॉलेज ब्रोशर, पर्चे और बड़े विज्ञापनों के जरिए नए छात्रों तक जानकारी पहुंचाते थे। लेकिन बदलते दौर और जेन-जी पीढ़ी की डिजिटल आदतों को देखते हुए अब प्रचार का तरीका पूरी तरह बदल गया है। शहर के डिग्री कॉलेज नए छात्रों को आकर्षित करने के लिए इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियो का उपयोग कर रहे हैं। इनके माध्यम से कॉलेज अपने परिसर, उपलब्धियों, उपलब्ध सुविधाओं, प्लेसमेंट रिकॉर्ड और अलग-अलग पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं।

## सीटों के खाली रहने से बढ़ा संकट और डिजिटल बदलाव
डिग्री कॉलेजों में प्रचार के इस डिजिटल तरीके को अपनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण दाखिलों में आई भारी गिरावट है। कानपुर शहर में स्थित 21 एडेड डिग्री कॉलेजों में कुल मिलाकर लगभग 60 हजार सीटें उपलब्ध हैं। हालांकि, चालू शैक्षणिक सत्र में अब तक केवल 30 हजार सीटों पर ही प्रवेश हो पाए हैं, जिससे आधी सीटें पूरी तरह खाली पड़ी हैं। इस स्थिति को देखते हुए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को पारंपरिक माध्यम छोड़कर डिजिटल मीडिया अपनाने का परामर्श दिया। इसके बाद से ही शहर के कॉलेजों ने सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियों और मौजूदगी को तेज कर दिया है।

## रॉ वीडियो को विश्वविद्यालय की मीडिया टीम ने बनाया आकर्षक
कुलपति की सलाह के बाद विभिन्न डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों ने अपने परिसरों में तैयार किए गए शुरुआती यानी रॉ वीडियो विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजे। इन शुरुआती वीडियो में कॉलेज की बुनियादी जानकारी तो शामिल थी, लेकिन वे युवा छात्रों को आकर्षित करने के लिहाज से पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं थे। इसके बाद सीएसजेएमयू की विशेषज्ञ सोशल मीडिया टीम ने इन वीडियो को पेशेवर रूप से रिफॉर्म किया। इनमें कॉलेज की प्रमुख उपलब्धियों, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, प्रयोगशालाओं, खेल सुविधाओं और पाठ्यक्रमों की जरूरी जानकारियों को आकर्षक तरीके से जोड़ा गया। संपादन पूरा होने के बाद इन वीडियो को संबंधित डिग्री कॉलेजों के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड कराया गया।

## विश्वविद्यालय परिसर का सफल मॉडल और पूर्व छात्रों का योगदान
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. दिवाकर अवस्थी के अनुसार, सीएसजेएमयू पिछले दो वर्षों से सोशल मीडिया रणनीति पर लगातार कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय ने अपने विभिन्न विभागों में कार्यरत शिक्षकों और अध्ययनरत छात्रों के सहयोग से अलग-अलग विषयों तथा पाठ्यक्रमों की जानकारी देने वाले वीडियो निर्मित किए हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले सफल पूर्व छात्रों की सफलता की कहानियों को भी वीडियो माध्यम से नियमित रूप से साझा किया गया। इस डिजिटल अभियान का प्रत्यक्ष लाभ विश्वविद्यालय परिसर के प्रवेश आंकड़ों में देखने को मिला, जहां इस वर्ष मुख्य परिसर में करीब 7500 प्रवेश हुए और सभी उपलब्ध सीटें पूरी तरह भर गईं।

## पारंपरिक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर प्रभाव
डिजिटल प्रचार के प्रभाव पर डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों का आकलन थोड़ा भिन्न है। बीएनडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विवेक द्विवेदी का मानना है कि सोशल मीडिया अभियान का सकारात्मक असर सभी पाठ्यक्रमों पर एक समान नहीं पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे माध्यमों से व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों को अधिक लाभ पहुंचा है। इसके विपरीत बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों में इसका प्रभाव फिलहाल काफी सीमित है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का सहयोग सराहनीय है, लेकिन कॉलेजों को स्वयं भी अपनी डिजिटल मौजूदगी बढ़ानी होगी। केवल विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए वीडियो के भरोसे पूरी समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि कॉलेजों को अपनी पढ़ाई, फैकल्टी, बुनियादी ढांचे और प्लेसमेंट की नियमित जानकारी छात्रों तक खुद पहुंचानी होगी।

## संबद्ध डिग्री कॉलेजों के कुल आंकड़े और भावी रणनीति
सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने बताया कि आज का युवा वर्ग सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय है और वह किसी भी विषय की पूरी जानकारी बहुत कम समय में प्राप्त करना चाहता है। ऐसे में भारी-भरकम ब्रोशर और विज्ञापनों की तुलना में छोटे वीडियो तथा रील्स अधिक असरदार साबित हो रहे हैं, क्योंकि छात्र एक क्लिक में कॉलेज की सभी सुविधाएं देख सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि सीएसजेएमयू से कुल 600 से अधिक डिग्री कॉलेज संबद्ध हैं, जिनमें सामान्यतः हर साल लगभग 1.80 लाख से 1.90 लाख नए प्रवेश होते हैं। हालांकि इस वर्ष संबद्ध कॉलेजों में कुल मिलाकर लगभग 1.25 लाख दाखिले ही हो सके हैं। आने वाले समय में कॉलेजों की डिजिटल पहुंच कितनी सुदृढ़ होती है, इसका सीधा प्रभाव अगले प्रवेश सत्र के आंकड़ों में देखने को मिलेगा।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** उच्च शिक्षा में पारंपरिक विज्ञापनों की जगह डिजिटल रील्स और वीडियो का बढ़ता उपयोग देश भर के छात्रों को घर बैठे कॉलेजों की सही जानकारी चुनने में मदद करेगा।

**कानपुर में:** डिग्री कॉलेजों में आधी सीटें खाली रहने के कारण देर से प्रवेश लेने के इच्छुक स्थानीय छात्रों के पास पसंदीदा कॉलेजों में आवेदन करने का अवसर बना हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. कानपुर के एडेड डिग्री कॉलेजों में कितनी सीटें खाली हैं?
कानपुर के 21 एडेड डिग्री कॉलेजों में कुल 60 हजार सीटों में से इस सत्र में केवल 30 हजार पर ही प्रवेश हुए हैं, जिससे करीब 30 हजार सीटें खाली हैं।

### 2. दाखिले बढ़ाने के लिए कॉलेजों ने क्या नया तरीका अपनाया है?
कॉलेजों ने पारंपरिक ब्रोशर और विज्ञापनों के बजाय इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियो के जरिए कोर्स, सुविधाओं और प्लेसमेंट का डिजिटल प्रचार शुरू किया है।

### 3. डिजिटल वीडियो बनाने में विश्वविद्यालय की क्या भूमिका है?
सीएसजेएमयू की सोशल मीडिया टीम कॉलेजों द्वारा भेजे गए रॉ वीडियो को रिफॉर्म करके उनमें प्लेसमेंट, कैंपस और सुविधाओं की आकर्षक जानकारी जोड़ रही है।

### 4. क्या सोशल मीडिया प्रचार का असर सभी कोर्स पर एक जैसा है?
बीएनडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य के अनुसार, सोशल मीडिया प्रचार का लाभ व्यावसायिक और तकनीकी कोर्सों में अधिक देखा गया है, जबकि पारंपरिक कोर्सों पर इसका प्रभाव अभी कम है।

### 5. सीएसजेएमयू से संबद्ध कॉलेजों में इस साल कुल कितने प्रवेश हुए हैं?
सीएसजेएमयू से जुड़े 600 से अधिक कॉलेजों में आमतौर पर हर साल 1.80 से 1.90 लाख प्रवेश होते हैं, लेकिन इस साल कुल लगभग 1.25 लाख प्रवेश ही हो पाए हैं।

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