महाराष्ट्र सरकार कसने जा रही है कोचिंग संस्थानों पर शिकंजा, एंटी कोचिंग बिल का ड्राफ्ट हुआ तैयार महाराष्ट्र सरकार ने नीट परीक्षा में पेपर लीक के मामलों के बाद निजी कोचिंग सेंटरों पर नकेल कसने के लिए एक कड़े नए विधेयक का मसौदा तैयार किया है। इस ड्राफ्ट पर आम जनता से चार सितंबर तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। महाराष्ट्र में निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने एक सख्त कानूनी दस्तावेज तैयार कर लिया है। राज्य सरकार द्वारा लाए जाने वाले 'महाराष्ट्र निजी कोचिंग सेंटर (पंजीकरण और विनियमन) विधेयक, 2026' का यह मसौदा नीट-यूजी परीक्षा के दौरान सामने आए पेपर लीक कांड के ठीक तीन महीने बाद सार्वजनिक किया गया है। उस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार कुल 13 आरोपियों में से 9 संदिग्ध अकेले महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते थे, जिसके बाद राज्य के प्रमुख शिक्षा हब माने जाने वाले लातूर और पुणे शहर इस पूरे जांच चक्र के केंद्र में आ गए थे। जनता से मांगे गए हैं बहुमूल्य सुझाव देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार इस नए विधायी ढांचे के जरिए निजी शिक्षण संस्थानों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। इसी कड़ी में स्कूली शिक्षा और खेल विभाग ने इस प्रस्तावित कानून का ड्राफ्ट आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। सरकार ने इस मसौदे पर आम नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षाविदों से प्रतिक्रिया, राय और आपत्तियां मांगी हैं, जिसकी अंतिम तिथि चार सितंबर को शाम छह बजे तक तय की गई है ताकि सभी पक्षों की बात सुनी जा सके। नए प्रस्तावित विधेयक के कड़े प्रावधान इस नए कानून के दायरे में आने वाले संस्थानों के लिए कई तरह की सख्त शर्तें और सीमाएं तय की गई हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा। प्रस्तावित मसौदे में डमी स्कूल मॉडल और इंटीग्रेटेड कोर्स की अवधारणाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, बेसमेंट में या भूमिगत परिसरों में संचालित होने वाले किसी भी कोचिंग क्लास के संचालन पर रोक होगी। किसी भी संज्ञेय अपराध में आरोपित व्यक्ति को संस्थान में शिक्षक या कर्मचारी के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से कोचिंग सेंटरों को कम से कम एक महीने तक का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। साथ ही, भवनों के लिए फायर सेफ्टी और बिल्डिंग सेफ्टी के वैध प्रमाण पत्र होना भी जरूरी कर दिया गया है। ये तमाम नियम उन सभी कोचिंग संस्थानों पर लागू होंगे जहाँ एक साथ 25 से अधिक छात्र अध्ययन करते हैं। प्रत्येक संस्थान का पंजीकरण तीन साल के लिए वैध रहेगा, जिसकी अवधि पूरी होने के बाद दोबारा नवीनीकरण कराना होगा। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षकों की कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य अवकाश तय किया गया है और इस साप्ताहिक छुट्टी के ठीक अगले दिन कोई भी परीक्षा आयोजित करने पर सख्त पाबंदी रहेगी। किसी भी दिन संस्थान में अधिकतम पाँच घंटे ही पढ़ाई कराई जा सकेगी। फीस नियंत्रण और भारी जुर्माने की व्यवस्था कोचिंग संस्थानों द्वारा अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। संस्थान निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क नहीं मांग सकेंगे और एक बार शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद उसके शुल्क या पाठ्यक्रम में किसी भी प्रकार की मनमानी बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी। यदि कोई संस्थान इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर पचास लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। विशेष रूप से, परिसर में यौन उत्पीड़न की कोई भी शिकायत मिलने पर प्रबंधन को चौबीस घंटे के भीतर त्वरित कार्रवाई करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण के कोचिंग संस्थान चलाना, छात्रों को आकर्षित करने के लिए भ्रामक विज्ञापन देना और नाबालिग बच्चों का गलत तरीके से दाखिला कराना जैसे गंभीर अपराधों में दस लाख से पचास लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, दोषी पाए जाने वाले संबंधित कोचिंग सेंटर को निलंबित किया जा सकता है, पूरी तरह बंद किया जा सकता है या फिर उसका पंजीकरण सदा के लिए रद्द किया जा सकता है। केंद्रीय दिशानिर्देशों से कितना अलग है महाराष्ट्र का कानून केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जनवरी 2024 में देश भर के लिए कुछ सामान्य दिशानिर्देश जारी किए गए थे, जिनके आधार पर राजस्थान, झारखंड, असम और हरियाणा जैसे राज्यों ने भी कोचिंग उद्योग के लिए विशेष नियम बनाए हैं। हालांकि, इन अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र का यह प्रस्तावित कानून कहीं अधिक व्यापक और सख्त नजर आता है। इसमें कोचिंग सेंटरों की परिभाषा, उनके अधिकार क्षेत्र, शिक्षकों की पात्रता तय करने के मानक, भारी-भरकम जुर्माने और प्रशासनिक कार्रवाई के प्रावधान बहुत ज्यादा स्पष्ट और कड़े रखे गए हैं, जबकि अन्य राज्यों ने मुख्य रूप से सामान्य दिशा-निर्देशों को ही लागू किया था। इसका आप पर असर • भारत में: देश भर में कोचिंग संस्थानों की मनमानी फीस और सुरक्षा मानकों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इस तरह के कड़े नियम अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन सकते हैं। • महाराष्ट्र में: राज्य के छात्रों और अभिभावकों को अब उच्च फीस के शोषण, असुरक्षित बेसमेंट क्लास और डमी स्कूलों से राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही लातूर और पुणे जैसे शिक्षा केंद्रों में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। सवाल-जवाब 1. महाराष्ट्र सरकार नया एंटी कोचिंग बिल क्यों ला रही है? नीट-यूजी परीक्षा के दौरान हुए पेपर लीक मामलों और कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए यह बिल लाया जा रहा है। 2. इस नए विधेयक के दायरे में कौन से कोचिंग सेंटर आएंगे? यह विधेयक उन सभी कोचिंग संस्थानों पर लागू होगा जहाँ एक साथ 25 से अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं। 3. नियमों का उल्लंघन करने पर कितने जुर्माने का प्रावधान है? कानून का उल्लंघन करने पर पचास लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। 4. आम नागरिक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव कब तक दे सकते हैं? नागरिक चार सितंबर की शाम छह बजे तक इस प्रस्तावित मसौदे पर अपने सुझाव और आपत्तियां भेज सकते हैं। https://trendkia.com/education/maharashtra-prepares-anti-coaching-bill-draft-to-regulate-tuition-centers-20814 TrendKia — Har trend, sabse pehle.