# एनसीईआरटी की 11वीं और 12वीं राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम पुनरीक्षण समिति में 20 नए सदस्य शामिल, चार प्रमुख विशेषज्ञों का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव

> एनसीईआरटी ने कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तकों के पुनरीक्षण के लिए 20 सदस्यीय समिति गठित की है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष बल दिया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** शिक्षा · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/education/ncert-ki-11vin-aura-12vin-rajaniti-vijnana-pathyakrama-punarikshana-samiti-men-20-nae-sadasya-shamila-chara-pramukha-visheshajnon--18758 · **Language:** Hindi
**Tags:** एनसीईआरटी, राजनीति विज्ञान, सिलेबस बदलाव, आरएसएस, भारतीय ज्ञान परंपरा, कक्षा 11 और 12

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने उच्च माध्यमिक स्तर पर राजनीति विज्ञान विषय के पाठ्यक्रम को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। संस्थान ने कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने हेतु 20 विशेषज्ञों की एक नई समिति का पुनर्गठन किया है। इस 20 सदस्यीय टीम की स्थापना 14 अगस्त को आधिकारिक रूप से की गई। इससे पहले जून 2025 में गठित की गई पिछली समिति को निरस्त कर दिया गया था। दरअसल, कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक के न्यायपालिका से संबंधित अध्याय पर उपजे विवाद और उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों के चलते पुरानी टीम को हटाने का निर्णय लिया गया था। सामने आई जानकारी के मुताबिक, 14 अगस्त को गठित इस नई समिति में शामिल कम से कम 4 सदस्य ऐसे हैं जिनके संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या उससे जुड़े विभिन्न संगठनों से रहे हैं।

## संघ से जुड़े सदस्यों का प्रोफाइल और अनुभव
पाठ्यक्रम निर्माण टीम में शामिल चार सदस्यों की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़ी बताई गई है। इनमें यदुनाथ देशपांडे शामिल हैं, जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में विभिन्न संगठनात्मक उत्तरदायित्व निभा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि एबीवीपी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का छात्र संगठन माना जाता है। इसके अतिरिक्त उनके प्रोफाइल में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व राजनीतिक सलाहकार के रूप में भी रेखांकित किया गया है। समिति के दूसरे सदस्य डॉ. प्रशांत दिवेकर पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी संस्थान में शिक्षक शिक्षा और अनुसंधान कार्यक्रम का संचालन करते हैं। यह संस्था संघ के पूर्व प्रचारक विनायक विश्वनाथ से जुड़ी रही है।

## जेएनयू के प्रोफेसरों की भूमिका और पृष्ठभूमि
समिति में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़ी दो प्रमुख हस्तियों को भी स्थान मिला है। इनमें जेएनयू की प्रोफेसर वंदना मिश्रा शामिल हैं, जो पूर्व में एबीवीपी की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं। इनके साथ ही जेएनयू के ही डॉ. रवि रामचंद्र शुक्ला को भी समिति में शामिल किया गया है। डॉ. शुक्ला संघ से संबद्ध विचार मंच रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी द्वारा प्रकाशित पत्रिका के संपादकीय मंडल से जुड़े हुए हैं। इन विशेषज्ञों की उपस्थिति से नई पाठ्यपुस्तकों की दिशा और विषय सामग्री के चयन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

## भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों पर ध्यान
एनसीईआरटी द्वारा नई समिति को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि राजनीति विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तकों में भारतीय ज्ञान परंपरा (इंडियन नॉलेज सिस्टम) और भारत के समृद्ध सांस्कृतिक संदर्भों को प्राथमिकता दी जाए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए समिति को एनसीईआरटी के उन विभिन्न विभागों के साथ मिलकर कार्य करने की सलाह दी गई है जो भारतीय ज्ञान प्रणाली, सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, पर्यावरण शिक्षा और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके साथ ही, अध्यायों का मसौदा तैयार होने के उपरांत एक विशेष टेक्सबुक कोर ग्रुप उनकी गहन समीक्षा करेगा। यह कोर ग्रुप इस बात की जांच करेगा कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक ज्ञान को पुस्तकों में किस प्रकार समाहित किया गया है।

## समिति का नेतृत्व और नई पुस्तकों की समय-सीमा
इस 20 सदस्यीय पाठ्यक्रम निर्माण समिति का नेतृत्व निट्टे यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संदीप शास्त्री को सौंपा गया है। उनके साथ डॉ. वंथांगपुई खोबुंग को सदस्य के रूप में और डॉ. सुभाष सिंह को समन्वयक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। एनसीईआरटी ने नई पाठ्यपुस्तकों के निर्माण के लिए एक निश्चित समयावधि तय की है। इसके तहत कक्षा 11वीं की राजनीति विज्ञान की नई किताब को 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं कक्षा 12वीं की राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक का कार्य 30 जुलाई 2027 तक संपन्न करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

## इसका आप पर असर
इस फैसले का छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों पर सीधा असर पड़ेगा:

- **देशभर के छात्रों के लिए:** कक्षा 11वीं और 12वीं के नए राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पहलुओं का अधिक समावेश देखने को मिलेगा, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को नए दृष्टिकोण से अध्ययन करना होगा।
- **शैक्षणिक सत्र और तैयारी:** 11वीं की नई किताब 30 नवंबर 2026 तक और 12वीं की किताब 30 जुलाई 2027 तक आने के कारण आगामी शैक्षणिक सत्रों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को नए सिलेबस के अनुसार अध्ययन सामग्री में बदलाव देखने को मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. एनसीईआरटी ने 11वीं और 12वीं राजनीति विज्ञान की किताबों के लिए नई समिति का गठन कब किया?
एनसीईआरटी ने 14 अगस्त को 20 सदस्यों की नई समिति का गठन किया है।

### 2. पुरानी समिति को क्यों हटाया गया?
जून 2025 में बनाई गई पिछली टीम को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के न्यायपालिका अध्याय से जुड़े विवाद के बाद हटा दिया गया था।

### 3. नई किताबों में किन विषयों पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा?
नई पुस्तकों में भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

### 4. 11वीं और 12वीं कक्षा की नई किताबें कब तक तैयार होंगी?
कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान पुस्तक 30 नवंबर 2026 तक और कक्षा 12 की पुस्तक 30 जुलाई 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है।

### 5. इस नई समिति का नेतृत्व कौन कर रहा है?
निट्टे यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संदीप शास्त्री इस नई समिति का नेतृत्व कर रहे हैं।

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