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  "title": "वर्दी छोड़ थामी कलम: पटना साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार शाम होते ही फोन पर बांटते हैं मुफ्त ज्ञान",
  "summary": "बिहार पुलिस के पूर्व डीएसपी डॉ. अखिलेश कुमार पटना साइंस कॉलेज में पढ़ाने के साथ-साथ हर शाम देश-विदेश के प्रतियोगी छात्रों को फोन कॉल के जरिए बिना किसी शुल्क के करियर गाइडेंस और मेंटरशिप दे रहे हैं।",
  "content": "आज के इस आधुनिक दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना बेहद खर्चीला सौदा बन चुका है। युवा छात्र बड़ी कोचिंग संस्थाओं में लाखों रुपये की फीस भर रहे हैं या फिर महंगे मोबाइल एप्लिकेशन के पेड सब्सक्रिप्शन पर निर्भर हैं। इस व्यावसायिक माहौल के बीच बिहार की राजधानी पटना में एक ऐसा शिक्षक भी है जो शिक्षा की इस पारंपरिक और महंगी होती जा रही अवधारणा को पूरी तरह से बदल रहा है। यह शिक्षक बिना किसी फीस के, बिना किसी तकनीकी तामझाम के, केवल एक सामान्य फोन कॉल के माध्यम से देश के सुदूर इलाकों में बैठे छात्रों का भविष्य संवार रहे हैं। हर दिन शाम को ठीक 6 बजे से रात 9 बजे तक चलने वाली इस अनूठी पाठशाला के सूत्रधार डॉ. अखिलेश कुमार हैं, जो स्वयं प्रशासनिक सेवा का हिस्सा रह चुके हैं और अब युवाओं को सफलता का मार्ग दिखा रहे हैं।\n\n \n\nपुलिस की वर्दी छोड़ क्यों चुनी शिक्षा की राह\n\nडॉ. अखिलेश कुमार का शैक्षणिक और व्यावसायिक सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। मूल रूप से बिहार के रहने वाले डॉ. अखिलेश का शैक्षणिक बैकग्राउंड बायोलॉजिकल साइंस का रहा है। उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान उच्च स्तरीय शैक्षणिक योग्यताएं हासिल कीं, जिसमें प्रतिष्ठित IIT GATE परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ NET-JRF की परीक्षा पास करना भी शामिल है। इसके बाद उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की सिविल सेवा परीक्षा में असाधारण प्रदर्शन करते हुए पूरे राज्य में 9वीं रैंक हासिल की थी। इस सफलता के बाद वे बिहार पुलिस सेवा में उपाधीक्षक यानी DSP के पद पर चयनित हुए थे।\n\nपुलिस सेवा में उनका करियर लगभग छह वर्षों का रहा। उनके पुलिस सेवा के सफर की शुरुआत सुपौल जिले से हुई थी। इसके बाद वे किशनगंज जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिले में एसडीपीओ यानी SDPO के रूप में तैनात रहे। उन्होंने रेल पुलिस में भी रेल DSP के पद पर अपनी सेवाएं दीं। नवंबर 2019 में जब वे बिहार के सबसे बड़े अनुमंडलों में से एक किशनगंज जिले में SDPO के पद पर कार्यरत थे, तब उन्होंने अपने जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने पुलिस सेवा के इस प्रतिष्ठित पद से इस्तीफा दे दिया। इस निर्णय के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को सीधे शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना था। पुलिस सेवा में आने से पहले भी वे देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी करने वाले छात्रों को जीव विज्ञान पढ़ाते थे।\n\n \n\nदिन में कॉलेज की क्लास और शाम को फोन पर देशव्यापी मेंटरशिप\n\nपुलिस सेवा से त्यागपत्र देने के बाद डॉ. अखिलेश कुमार ने शिक्षण कार्य को पूरी तरह से अपना लिया। वर्तमान में वे पटना साइंस कॉलेज में सहायक प्रोफेसर यानी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका दिनचर्या बेहद व्यस्त रहती है। वे दिनभर कॉलेज में नियमित रूप से क्लास लेते हैं और वहां के छात्रों को पढ़ाते हैं। इसके बाद जैसे ही शाम होती है, वे देश के अलग-अलग कोनों से जुड़े प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध हो जाते हैं। उनकी इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य उन आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों तक उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और सही मार्गदर्शन पहुंचाना है जो बड़े शहरों में आकर महंगी कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं।\n\nजब उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़ी थी, तभी उनके मन में यह विचार आ गया था कि वे समाज के पिछड़े और सुदूर इलाकों के उन युवाओं की मदद करेंगे जिन्हें सही रणनीतिक मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का उनके पास स्वयं का एक लंबा और बेहद सफल अनुभव था। वे चाहते थे कि उनके इस व्यक्तिगत अनुभव और ज्ञान का लाभ अधिक से अधिक छात्रों को मिले, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें।\n\n \n\nबिना किसी ऐप और व्यावसायिक तामझाम के सीधा संवाद\n\nशुरुआती दौर में इस अभियान को गति देना काफी चुनौतीपूर्ण था। डॉ. अखिलेश कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया था। शुरुआत में लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ और शुरुआती कुछ दिनों में उन्हें बहुत कम प्रतिक्रिया मिली। लेकिन धीरे-धीरे छात्रों के बीच यह बात फैलने लगी कि कोई पूर्व पुलिस अधिकारी फोन पर व्यक्तिगत रूप से छात्रों की समस्याओं का समाधान करता है। इसके बाद उन्होंने रोजाना शाम को 6 बजे से लेकर रात के 9 बजे तक का तीन घंटे का समय पूरी तरह से छात्रों के लिए आरक्षित कर दिया। वर्तमान समय में इस तय समय अवधि के दौरान उनके फोन पर हजारों कॉल आते हैं। छात्र बेझिझक अपनी शैक्षणिक और रणनीतिक समस्याओं को उनके सामने रखते हैं और वे तुरंत फोन पर ही उसका समाधान करते हैं।\n\nइस पूरी पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि डॉ. अखिलेश ने इसे कभी भी किसी व्यावसायिक रूप में नहीं बदलने दिया। उन्होंने न तो कोई ऑनलाइन ऐप बनाया और न ही किसी प्रकार का कोई पेड कोर्स लॉन्च किया। वे पूरी तरह से सीधे फोन कॉल या जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉल के जरिए ही छात्रों से संपर्क बनाए रखते हैं। इस व्यवस्था में किसी भी बाहरी स्टाफ या तकनीकी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती है। चूंकि इस पूरी प्रक्रिया में कोई अतिरिक्त प्रशासनिक या तकनीकी खर्च नहीं होता है, इसलिए वे छात्रों से किसी भी रूप में एक पैसा भी शुल्क नहीं लेते हैं। यह पूरी तरह से एक नि:शुल्क और स्वैच्छिक सेवा है।\n\n \n\nतैयारी की रणनीति से लेकर स्टडी मैटेरियल तक की मदद\n\nकॉल करने वाले अभ्यर्थी डॉ. अखिलेश से हर प्रकार के सवाल पूछते हैं। इन सवालों में परीक्षाओं की तैयारी की शुरुआत कैसे करें, कौन-सी प्रामाणिक किताबें पढ़नी चाहिए, दैनिक दिनचर्या और टाइम टेबल का निर्धारण कैसे हो, परीक्षा के दौरान किस तरह की रणनीति अपनाई जाए और किन विशिष्ट विषयों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाए जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल होते हैं। यदि कोई छात्र किसी कठिन शैक्षणिक विषय या टॉपिक को समझने में परेशानी महसूस करता है, तो डॉ. अखिलेश उसे फोन पर ही बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझा देते हैं। इसके अतिरिक्त यदि किसी छात्र को विशेष अध्ययन सामग्री यानी स्टडी मैटेरियल की आवश्यकता होती है, तो वे उसे भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध करवाते हैं।\n\nअध्ययन सामग्री प्रदान करने के मामले में डॉ. अखिलेश कुमार की एक बेहद अनूठी और वैज्ञानिक सोच है। वे छात्रों को पहले से तैयार किए गए यानी रेडीमेड नोट्स या पके-पकाए स्टडी मैटेरियल देने पर विश्वास नहीं करते हैं। उनका मानना है कि इससे छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता कुंठित हो जाती है। जब भी वे किसी विषय की अध्ययन सामग्री छात्रों को देते हैं, तो वे किसी एक लेखक या संस्थान की सामग्री न देकर चार अलग-अलग बेहतरीन स्रोतों की सामग्री भेजते हैं। इसके बाद वे छात्रों को उन चारों सामग्रियों को पढ़ने और उनका तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए कहते हैं। वे छात्रों से ही पूछते हैं कि उन्हें इन चारों में से कौन-सा स्रोत सबसे अधिक उपयोगी और आसान लगा। इस अनूठी प्रक्रिया के कारण छात्र चारों सामग्रियों को गहराई से पढ़ते हैं, उनका विश्लेषण करते हैं और खुद निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। इससे उनकी विषय पर पकड़ बेहद मजबूत हो जाती है और उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास होता है।\n\n \n\nबीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 27 छात्रों की बड़ी सफलता\n\nडॉ. अखिलेश कुमार की इस फोन मेंटरशिप के परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। हाल ही में घोषित हुए BPSC के परीक्षा परिणामों में उनकी इस नि:शुल्क फोन मेंटरशिप का लाभ उठाने वाले 27 अभ्यर्थियों ने अंतिम रूप से सफलता प्राप्त की है। अपनी इस बड़ी कामयाबी के बाद कई छात्र व्यक्तिगत रूप से मिठाई लेकर पटना में डॉ. अखिलेश कुमार से मिलने पहुंचे और उनके अमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। हालांकि इतनी बड़ी सफलता के बाद भी डॉ. अखिलेश कुमार बेहद विनम्र बने हुए हैं। उनका कहना है कि इस सफलता का पूरा श्रेय केवल और केवल उन छात्रों के कठिन परिश्रम और समर्पण को जाता है। वे स्वयं को केवल एक मार्गदर्शक मानते हैं जिसने उन्हें केवल सही दिशा दिखाने का प्रयास किया था।\n\n \n\nशाम 6 बजते ही लगातार बजती है फोन की घंटी\n\nरोजाना शाम के ठीक 6 बजते ही डॉ. अखिलेश कुमार का मोबाइल फोन लगातार बजना शुरू हो जाता है और यह सिलसिला रात के 9 बजे तक बिना रुके चलता रहता है। लगातार तीन घंटे तक चलने वाली इस बातचीत के कारण शुरुआत में उनके परिवार के सदस्यों को थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ता था। लेकिन समय के साथ अब परिवार के सभी सदस्यों को इसकी आदत हो गई है। अब परिवार के लोग इस पुनीत कार्य में उनका पूरा सहयोग करते हैं। इस तीन घंटे की अवधि के दौरान वे उनकी चाय और पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं ताकि डॉ. अखिलेश बिना किसी व्यवधान के लगातार तीन घंटे तक देश के युवाओं का मार्गदर्शन कर सकें।\n\nइस नि:शुल्क अभियान का दायरा अब केवल बिहार या भारत के राज्यों तक ही सीमित नहीं रह गया है। डॉ. अखिलेश कुमार के पास अब विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और छात्रों के भी फोन आने लगे हैं। कई लोग विदेशों से फोन करके बिहार और भारत की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न और रिक्तियों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। विशेष रूप से बिहार में होने वाली विश्वविद्यालय प्रोफेसरों की बहाली जैसी उच्च स्तरीय नियुक्तियों को लेकर विदेशों में रह रहे लोग उनसे नियमित रूप से संपर्क साधते हैं। हिंदी भाषी राज्यों के युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या रोजाना शाम को उनसे जुड़ती है। डॉ. अखिलेश का कहना है कि वे इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं ताकि देश के हर पिछड़े हिस्से में रहने वाले प्रतिभावान युवा को समय पर सही और मुफ्त मार्गदर्शन मिल सके।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बिना किसी खर्च के देश के बेहतरीन मार्गदर्शक से सीधे फोन पर जुड़ने और रणनीतिक तैयारी करने का अवसर मिलता है।\n\n• बिहार में: राज्य के ग्रामीण इलाकों के BPSC उम्मीदवारों को पटना आए बिना या महंगी कोचिंग ज्वाइन किए बिना एक सफल पूर्व अधिकारी से सीधे गाइडेंस मिल रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डॉ. अखिलेश कुमार कौन हैं और वे क्या करते हैं?\nडॉ. अखिलेश कुमार बिहार पुलिस के पूर्व डीएसपी हैं, जिन्होंने साल 2019 में पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था। वर्तमान में वे पटना साइंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और रोज शाम 6 से 9 बजे तक छात्रों को फोन पर मुफ्त मेंटरशिप देते हैं।\n\n2. क्या डॉ. अखिलेश कुमार इस मेंटरशिप के लिए कोई फीस लेते हैं?\nनहीं, वे इस मेंटरशिप और अपनी ओर से प्रदान की जाने वाली अध्ययन सामग्री के लिए छात्रों से कोई भी शुल्क नहीं लेते हैं। यह पूरी तरह से नि:शुल्क सेवा है।\n\n3. डॉ. अखिलेश कुमार का फोन कॉल पर मार्गदर्शन पाने का समय क्या है?\nवे हर दिन शाम को ठीक 6:00 बजे से लेकर रात के 9:00 बजे तक देश-विदेश के छात्रों के लिए फोन कॉल पर उपलब्ध रहते हैं।\n\n4. इस मेंटरशिप प्रोग्राम से अब तक कितने छात्रों को सफलता मिली है?\nइस बार की बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में नियमित रूप से उनकी फोन मेंटरशिप का लाभ उठाने वाले 27 अभ्यर्थियों ने अंतिम रूप से सफलता हासिल की है।\n\n5. अध्ययन सामग्री देने को लेकर डॉ. अखिलेश का क्या अनोखा तरीका है?\nवे छात्रों को तैयार नोट्स देने के बजाय एक ही विषय पर चार अलग-अलग स्रोतों की अध्ययन सामग्री देते हैं और छात्रों से उनका तुलनात्मक अध्ययन कर खुद निष्कर्ष निकालने को कहते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• ज्ञान बांटना: डॉ. अखिलेश कुमार का इस्तीफा यह सिखाता है कि सामाजिक बदलाव और शिक्षा के प्रसार के लिए कभी-कभी बड़े प्रशासनिक पदों को भी त्यागा जा सकता है।\n\n• सक्रिय अध्ययन (Active Learning): छात्रों को सीधे बने-बनाए नोट्स देने के बजाय अलग-अलग स्रोतों की तुलना करने के लिए प्रेरित करना विषय पर वास्तविक पकड़ मजबूत करता है।\n\n• व्यावसायिकता से दूरी: बिना किसी ऐप या पेड कोर्स के सीधे फोन पर जुड़ना यह साबित करता है कि नेक इरादों के लिए महंगे सेटअप की जरूरत नहीं होती।\n\n• पारिवारिक सहयोग का महत्व: किसी भी बड़े सामाजिक कार्य की सफलता में परिवार का धैर्य और लगातार सहयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।",
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  "publishedAt": "2026-06-27",
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