स्कूल-कॉलेज में छात्रों के प्रदर्शन पर CM योगी आदित्यनाथ सख्त, अफसरों को आवाज दबाने के बजाय तुरंत समाधान के दिए निर्देश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों की समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। छात्र आंदोलनों को लेकर संवेदनशील रवैया अपनाने की वकालत करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि छात्र अपनी किसी शिकायत या मांग को लेकर प्रदर्शन करते हैं, तो उनकी आवाज को दबाने का प्रयास बिल्कुल न किया जाए। इसके बजाय, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर छात्रों की बात ध्यानपूर्वक सुनें और उनकी समस्याओं का त्वरित व ठोस समाधान निकालें। बीते तीन दिनों में लखनऊ, महोबा, उन्नाव और कन्नौज समेत विभिन्न जिलों में छात्रों द्वारा किए गए प्रदर्शनों के बाद मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान यह कड़ा रुख अपनाया है। छात्रों की आवाज दबाने के बजाय समाधान निकालने के सख्त निर्देश शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छात्र-छात्राओं से जुड़ी हर शिकायत को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भी शिक्षण संस्थानों में अव्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं की कमी या प्रशासनिक ढिलाई दिखाई दे, उसे तुरंत दूर किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में हिदायत दी कि छात्रों के प्रदर्शन को केवल कानून-व्यवस्था का विषय न माना जाए, बल्कि उनकी वास्तविक परेशानियों को समझा जाए। पिछले तीन दिनों के भीतर लखनऊ, महोबा, उन्नाव और कन्नौज जिलों में छात्रवृत्ति रुकावट, खराब सड़क और स्कूल परिसरों में संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं पर छात्रों ने अपनी आवाज उठाई थी, जिसके बाद शासन स्तर से यह सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिलाधिकारियों को मिला स्कूलों का औचक निरीक्षण और मिड-डे मील जांचने का आदेश सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में व्यापक सुधार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) को अपने-अपने जिलों के प्राथमिक व माध्यमिक सरकारी विद्यालयों का नियमित और औचक निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में जाकर स्वयं मिड-डे मील की गुणवत्ता और स्वच्छता का निरीक्षण करें। इसके साथ ही, बच्चों को मिलने वाली मुफ्त ड्रेस और पाठ्यपुस्तकों का वितरण समय पर हुआ है या नहीं, इसकी भी गहन जांच की जाए। अगर किसी स्कूल की इमारत जर्जर स्थिति में है अथवा वहां पेयजल या शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्था में कोई कमी है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक करवाया जाए। शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियों पर सतत नजर रखने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं। ये नोडल अधिकारी संस्थानों में दैनिक व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और छात्रों की समस्याओं की निगरानी करेंगे। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि जो अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतेगा या जिम्मेदारी से पीछे हटेगा, उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी। कन्नौज में स्कॉलरशिप आंदोलन: 1 सितंबर से दोबारा आवेदन और 27 सितंबर से भुगतान का आश्वासन मुख्यमंत्री के सख्त रुख का सीधा असर जिलों में धरातल पर भी नजर आने लगा है। कन्नौज जिले के एक कॉलेज में छात्रवृत्ति रुकने से नाराज छात्र-छात्राएं विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। मामले की सूचना मिलते ही समाज कल्याण अधिकारी वेदप्रकाश मिश्रा छात्रों से वार्ता करने पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाया कि तकनीकी खामियों के कारण कुछ छात्रों के खातों में स्कॉलरशिप की राशि अटक गई है और इन तकनीकी समस्याओं को जल्द दुरुस्त किया जा रहा है। हालांकि, छात्र इस मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और अपना धरना जारी रखा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कन्नौज के तिर्वा की एसडीएम (SDM) वैशाली मौके पर पहुंचीं। उन्होंने छात्रों को यूपी सरकार के मंत्री असीम अरुण द्वारा जारी आधिकारिक पत्र दिखाया और छात्रवृत्ति भुगतान के संबंध में लिखित भरोसा दिलाया। एसडीएम ने छात्रों को स्पष्ट जानकारी दी कि जिन छात्रों के फॉर्म तकनीकी कमियों के कारण रुक गए हैं, वे 1 सितंबर से दोबारा आवेदन दर्ज कर सकेंगे। साथ ही प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि 27 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच सभी पात्र छात्रों के खातों में स्कॉलरशिप की राशि स्थानांतरित कर दी जाएगी। इस निश्चित समय-सीमा और आधिकारिक लिखित आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। महोबा में जर्जर सड़क पर बच्चों का हाईवे जाम, डीएम की पहल के बाद खत्म हुआ विरोध इसी प्रकार का एक अन्य मामला महोबा जिले से सामने आया, जहां स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों ने अपने विद्यालय तक पहुंचने वाली सड़क की जर्जर हालत के विरोध में मोर्चा खोल दिया। सड़क पर बने गहरे गड्ढों और जलभराव से परेशान बच्चों ने अपनी मांग की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए नेशनल हाईवे पर बैठकर जाम लगा दिया। स्कूली बच्चों द्वारा हाईवे जाम किए जाने की खबर मिलते ही महोबा की जिलाधिकारी (DM) गजल भारद्वाज और पुलिस अधीक्षक (SP) स्वयं मौके पर पहुंचे। उच्च प्रशासनिक अधिकारियों ने सड़क पर बैठे बच्चों से बातचीत की और उनकी परेशानी को समझा। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने बच्चों को आश्वस्त किया कि मानसून का मौसम खत्म होते ही स्कूल तक पक्की और मजबूत सड़क का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से तुरंत मिले इस लिखित व मौखिक आश्वासन के बाद बच्चों ने हाईवे खाली कर दिया और अपनी कक्षाओं में वापस लौट गए। महोबा प्रशासन ने इसके बाद सड़क निर्माण की कागजी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ा दी। लखनऊ समेत अन्य जिलों में शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई और व्यवस्था सुधार राजधानी लखनऊ में भी मुख्यमंत्री के निर्देशों का तत्काल असर देखा गया, जहां शिक्षा विभाग के आला अधिकारी जमीनी स्तर पर सक्रिय हो गए। विभागीय अधिकारियों ने जिले के विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ सीधा संपर्क साधा और विद्यालयों में आ रही व्यावहारिक समस्याओं का ब्योरा जुटाया। अधिकारियों ने विशेष रूप से स्कूलों में शिक्षकों की कमी के संबंध में आंकड़े मांगे ताकि खाली पड़े पदों को भरने और वैकल्पिक व्यवस्था करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। जिन विद्यालयों में शिक्षक व अन्य ढांचागत सुविधाएं पहले से बेहतर थीं, वहां भी साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश जारी किए गए। लखनऊ समेत अन्य जिलों में इन सुधारात्मक कदमों पर अमल भी शुरू हो चुका है, जिससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके। प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही तय करने का बड़ा संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन कड़े निर्देशों को शासन और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों में व्यवस्थाओं की कमी पर छात्रों के आक्रोश को पुलिस बल या दबाव से दबाने के बजाय संवाद और त्वरित समाधान की नीति अपनाई जानी चाहिए। हाल ही में कन्नौज, महोबा और लखनऊ में अधिकारियों द्वारा छात्रों के बीच पहुंचकर जिस तेजी से समस्याओं का निस्तारण किया गया है, उसने राज्य प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यकुशलता की नई मिसाल पेश की है। इसका आप पर असर भारत में: सरकारी संस्थानों में छात्रों की समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का एक मजबूत मॉडल सामने आया है। उत्तर प्रदेश में: राज्य के छात्रों को रुकी हुई स्कॉलरशिप के त्वरित भुगतान (1 सितंबर से दोबारा आवेदन), गुणवत्तापूर्ण मिड-डे मील, मुफ्त किताबों-ड्रेस के समय पर वितरण और बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा लाभ मिलेगा। सवाल-जवाब 1. छात्रों के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या मुख्य निर्देश दिए? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अगर छात्र प्रदर्शन करते हैं तो उनकी आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याएं सुनी जाएं और तुरंत समाधान निकाला जाए। 2. जिलाधिकारियों (DM) को स्कूलों में निरीक्षण के क्या आदेश मिले हैं? जिलाधिकारियों को सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण करने, मिड-डे मील की गुणवत्ता जांचने, मुफ्त ड्रेस और किताबों के वितरण की पुष्टि करने और जर्जर भवनों की मरम्मत करवाने के आदेश दिए गए हैं। 3. कन्नौज में कॉलेज के छात्र किस बात को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे? कन्नौज में कॉलेज के छात्र तकनीकी कारणों से रुकी हुई स्कॉलरशिप न मिलने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। 4. कन्नौज में स्कॉलरशिप भुगतान के लिए क्या समय-सीमा तय की गई है? जिन छात्रों की स्कॉलरशिप रुकी है वे 1 सितंबर से दोबारा आवेदन कर सकेंगे और 27 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच स्कॉलरशिप राशि उनके खातों में भेज दी जाएगी। 5. महोबा में स्कूली बच्चों ने नेशनल हाईवे क्यों जाम किया था? महोबा में स्कूली बच्चों ने अपने स्कूल तक जाने वाली जर्जर और खराब सड़क के विरोध में नेशनल हाईवे जाम कर दिया था। 6. महोबा में बच्चों का प्रदर्शन कैसे खत्म हुआ? महोबा की डीएम गजल भारद्वाज ने बच्चों से मुलाकात कर आश्वासन दिया कि बारिश का मौसम खत्म होते ही स्कूल तक पक्की सड़क बनवा दी जाएगी। 7. लखनऊ में शिक्षा विभाग ने क्या कदम उठाए हैं? लखनऊ में शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों से संपर्क कर समस्याओं और शिक्षकों की कमी की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है ताकि खाली पद भरे जा सकें। https://trendkia.com/education/skula-koleja-men-chhatron-ke-pradarshana-para-cm-yogi-adityanath-sakhta-aphasaron-ko-avaja-dabane-ke-bajaya-turnta-samadhana-ke-di-19258 TrendKia — Har trend, sabse pehle.