# यूपी के मऊ में अब गांव में ही मिलेगी शहर जैसी लाइब्रेरी, 15 लाख की लागत से बदली प्रधान प्रतिनिधि ने तस्वीर

> मऊ जिले के याकूबपुर गांव में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत करीब 15 लाख रुपये की लागत से निशुल्क लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष बनवाया है, जिससे छात्रों को अब बाहर कोचिंग नहीं जाना पड़ेगा।

**Type:** article · **Category:** शिक्षा · **Published:** 2026-07-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/education/up-ke-mau-men-aba-ganva-men-hi-milegi-shahara-jaisi-laibreri-15-lakha-ki-lagata-se-badali-pradhana-pratinidhi-ne-tasvira-4591 · **Language:** Hindi
**Tags:** मऊ, याकूबपुर, मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना, निशुल्क लाइब्रेरी, ग्राम प्रधान, मुहम्मदाबाद गोहना, प्रतियोगी परीक्षा तैयारी

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के याकूबपुर गांव में अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को कोचिंग या लाइब्रेरी के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक की इस ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने गांव में ही निशुल्क लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष खुलवाकर एक नई मिसाल पेश की है।

अब तक गांव के छात्र-छात्राओं की सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि कंपटीशन की तैयारी के लिए उन्हें करीब चार से पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। वहां हर महीने पैसे देकर वह अपनी पढ़ाई करते थे। रोज इतनी दूर आना-जाना आसान नहीं था और घर वालों को हमेशा यह डर सताता रहता था कि आते-जाते समय बच्चों के साथ कोई घटना या दुर्घटना न हो जाए। अब गांव में ही लाइब्रेरी खुलने से यह चिंता खत्म हो गई है।

## मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना से मिला बजट
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में गांव को जो धनराशि मिली, उसी से यहां आधुनिक पंचायत भवन, लाइब्रेरी, कंप्यूटर कक्ष और कार्यालय का निर्माण कराया गया। गांव के बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी दिक्कत को देखते हुए ही उन्होंने इसी योजना के पैसे से लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष बनवाने का फैसला किया।

## एसी, वाई-फाई और कंप्यूटर से लैस है कक्ष
इस लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष को बनाने में करीब 15 लाख रुपये की लागत आई है। यहां हर तरह की आधुनिक सुविधा दी गई है ताकि छात्र-छात्राएं अपनी कंपटीशन की तैयारी या अन्य पढ़ाई गांव में ही बैठकर कर सकें और उन्हें ज्यादा पैसे खर्च करके बाहर न जाना पड़े। बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं, कंप्यूटर की व्यवस्था की गई है और वाई-फाई इंटरनेट की सुविधा भी दी गई है। पढ़ाई के दौरान बच्चों को गर्मी न लगे, इसके लिए कमरों में एसी तक लगवाए गए हैं। पहले जिस तैयारी के लिए छात्रों को दूर जाना पड़ता था, वह तैयारी अब वह गांव में ही बैठकर कर पा रहे हैं।

## जिले में सिर्फ पांच गांव हुए हैं चयनित
यह आधुनिक लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत बना है, और मऊ जिले में इस योजना के लिए अभी तक सिर्फ पांच गांव ही चुने गए हैं। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र में याकूबपुर पहला ऐसा गांव है, जहां छात्र-छात्राओं को अब किसी प्रकार की तैयारी के लिए प्राइवेट लाइब्रेरी का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। गांव में ही निशुल्क लाइब्रेरी की सुविधा मिलने से अब वह अपनी हर तरह की तैयारी यहीं करके आगे चलकर नौकरियां भी हासिल कर सकते हैं।

## योजना लाने में करना पड़ा संघर्ष
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बताते हैं कि इस योजना को गांव तक लाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। उनका मकसद यही रहा कि गांव के बच्चों का भविष्य संवर सके और उनका गांव हर क्षेत्र में आगे बढ़ सके। अब याकूबपुर गांव के छात्र-छात्राओं के लिए यह लाइब्रेरी उनके सपनों की उड़ान में एक मजबूत सीढ़ी बन गई है।

## इसका आप पर असर
यह खबर सीधे आपकी जेब से नहीं जुड़ी है, लेकिन ग्रामीण शिक्षा ढांचे में हो रहे बदलाव की एक झलक जरूर दिखाती है।

- **भारत में:** मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना जैसी सरकारी योजनाओं से गांवों में शिक्षा की बुनियादी सुविधाएं मजबूत होने का एक मॉडल सामने आया है, जिसे दूसरे राज्यों की पंचायतें भी अपना सकती हैं।
- **मऊ में:** याकूबपुर और आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं को अब कंपटीशन की तैयारी के लिए हर महीने पैसे खर्च कर चार-पांच किलोमीटर दूर जाने की जरूरत नहीं रहेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. याकूबपुर की यह लाइब्रेरी किस योजना के तहत बनी है?
मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिली धनराशि से यह लाइब्रेरी बनी है।

### 2. लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष बनाने में कितना खर्च आया?
करीब 15 लाख रुपये की लागत से यह लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष तैयार हुआ है।

### 3. पहले गांव के छात्रों को तैयारी के लिए कितनी दूर जाना पड़ता था?
पहले उन्हें करीब चार से पांच किलोमीटर दूर जाकर, हर महीने पैसे देकर तैयारी करनी पड़ती थी।

### 4. मऊ जिले में इस योजना के तहत कितने गांव चुने गए हैं?
मऊ जिले में इस योजना के तहत अभी तक सिर्फ पांच गांव चुने गए हैं।

### 5. यह पहल किसने शुरू की?
याकूबपुर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने यह पहल शुरू की।

### 6. लाइब्रेरी में छात्रों के लिए क्या-क्या सुविधाएं हैं?
यहां बैठने के लिए कुर्सियां, कंप्यूटर, वाई-फाई इंटरनेट के साथ ही कमरों में एसी की भी सुविधा दी गई है।

## प्रेरणा और सबक
याकूबपुर के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की यह पहल दिखाती है कि सही सोच और मेहनत से गांव के स्तर पर भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

- **समस्या को पहचानना जरूरी:** उन्होंने पहले गांव के बच्चों की असली दिक्कत, यानी दूर जाकर पैसे देकर तैयारी करने की मजबूरी, को समझा।
- **सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल:** मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत मिली धनराशि को उन्होंने सीधे बच्चों के भविष्य से जुड़े काम में लगाया।
- **संघर्ष से मिली सफलता:** प्रधान प्रतिनिधि खुद बताते हैं कि इस योजना को गांव तक लाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी।
- **सिर्फ इमारत नहीं, सुविधा भी जरूरी:** कुर्सी, कंप्यूटर, वाई-फाई और एसी तक लगवाकर उन्होंने प्राइवेट लाइब्रेरी जैसी सुविधा गांव में ही उपलब्ध कराई।

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