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  "title": "यूपी के शाहपुर राजा गांव में खुली मुफ्त डिजिटल लाइब्रेरी, छात्रों को मिलेगा वाई-फाई और कंप्यूटर",
  "summary": "लखीमपुर खीरी जिले के शाहपुर राजा गांव के पंचायत भवन में ₹400000 की लागत से डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई है, जहां छात्र-छात्राओं को कंप्यूटर, हाई-स्पीड वाई-फाई और पढ़ाई की तमाम सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त मिलेंगी।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील क्षेत्र में आने वाले शाहपुर राजा गांव में पहली बार डिजिटल लाइब्रेरी शुरू हुई है। पंचायत भवन में तैयार की गई इस लाइब्रेरी का मकसद यही है कि गांव के छात्र-छात्राओं को शहर की दौड़ लगाए बिना घर बैठे आधुनिक और अच्छी पढ़ाई की सुविधा मिल सके, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और बाकी पढ़ाई के लिए उन्हें शहर का रुख न करना पड़े।\n\nपैसे और समय की बर्बादी अब होगी कम\nअक्सर देखा गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले गांव के छात्र-छात्राओं को ठीक-ठाक लाइब्रेरी और पढ़ाई के माहौल के लिए घर से दूर शहर जाना पड़ता था। इसमें उनका समय भी जाता था और घर से पैसा भी लगता था। इसी दिक्कत को ध्यान में रखते हुए शाहपुर राजा गांव के पंचायत भवन में यह डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई है, जहां छात्र-छात्राएं बिना किसी शुल्क के पढ़ाई कर सकेंगे।\n\nकंप्यूटर से लेकर हाई-स्पीड वाई-फाई तक, हर सुविधा मौजूद\nइस लाइब्रेरी में कंप्यूटर सिस्टम, हाई-स्पीड वाई-फाई, बैठने के लिए कुर्सी-मेज, पर्याप्त रोशनी और शांत माहौल जैसी सुविधाएं दी गई हैं। यहां आने वाले विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई की सामग्री, ई-बुक्स, डिजिटल नोट्स, ऑनलाइन क्लास और अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगे। गांव के छात्र-छात्राओं को अब आधुनिक तकनीक के साथ पढ़ाई करने का मौका मिलेगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गांव में ही बेहतर संसाधन मिल जाएंगे। इससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी और गांव की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर मौका मिलेगा। शाहपुर राजा गांव में शुरू हुई यह डिजिटल लाइब्रेरी शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।\n\nछात्र बोले, अब शांति से हो रही है पढ़ाई\nलाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे छात्र आनंद कुमार ने बताया कि उनका परिवार मध्यवर्गीय है और परीक्षाओं की तैयारी के लिए लाइब्रेरी जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान की पहल से उनके गांव में ही डिजिटल लाइब्रेरी शुरू हो गई है और अब वे यहां आकर शांत माहौल में पढ़ाई करते हैं, जो पूरी तरह मुफ्त है।\n\nचार लाख रुपये की लागत से बनी लाइब्रेरी\nडीपीआरओ विशाल सिंह ने बताया कि डिजिटल लाइब्रेरी बनाने में ₹400000 खर्च हुए हैं। गांव के पंचायत भवन में यह लाइब्रेरी बनने से गांव के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए एक अच्छा विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा कि गांवों में ऐसे कई बच्चे होते हैं, जो पढ़ना तो चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी की वजह से उनका सपना पूरा नहीं हो पाता। डिजिटल लाइब्रेरी बनने के बाद छात्र और छात्राएं यहां पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे उनका भविष्य बेहतर हो रहा है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह पहल दिखाती है कि गांव के पंचायत भवन को ही इस्तेमाल कर कम बजट में छात्रों को मुफ्त कंप्यूटर, वाई-फाई और डिजिटल पढ़ाई की सुविधा दी जा सकती है।\n• लखीमपुर खीरी में: शाहपुर राजा गांव के छात्र-छात्राओं को अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहर जाकर पैसा और समय खर्च नहीं करना पड़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शाहपुर राजा गांव में डिजिटल लाइब्रेरी कहां बनाई गई है?\nगांव के पंचायत भवन में इसे तैयार किया गया है।\n\n2. यह डिजिटल लाइब्रेरी किस जिले और तहसील में है?\nयह लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील क्षेत्र में स्थित है।\n\n3. डिजिटल लाइब्रेरी बनाने में कितना खर्च आया?\nइसे बनाने में ₹400000 खर्च हुए हैं।\n\n4. क्या छात्रों को इस लाइब्रेरी के लिए कोई फीस देनी होगी?\nनहीं, यह सुविधा छात्र-छात्राओं के लिए पूरी तरह मुफ्त है।\n\n5. लाइब्रेरी में कौन-कौन सी सुविधाएं दी गई हैं?\nयहां कंप्यूटर सिस्टम, हाई-स्पीड वाई-फाई, कुर्सी-मेज, पर्याप्त रोशनी, शांत माहौल के साथ ई-बुक्स, डिजिटल नोट्स और ऑनलाइन क्लास जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।\n\n6. इस बारे में डीपीआरओ ने क्या कहा?\nडीपीआरओ विशाल सिंह ने बताया कि इससे गांव के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए एक अच्छा विकल्प मिल गया है और संसाधनों की कमी से जूझ रहे बच्चों का भविष्य बेहतर हो रहा है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• ग्राम प्रधान ने गांव के छात्रों की असली दिक्कत, यानी शहर तक जाने की मजबूरी को पहचानकर उसका सीधा हल निकाला।\n• महज ₹400000 के बजट में ही एक पूरा डिजिटल स्टडी सेंटर खड़ा किया जा सकता है, इसके लिए बहुत बड़ी रकम जरूरी नहीं।\n• नया भवन बनाने के बजाय पहले से मौजूद पंचायत भवन का ही इस्तेमाल किया गया, जिससे समय और पैसा दोनों बचे।\n• योजना का केंद्र आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यवर्गीय परिवारों के बच्चों को रखा गया, जैसा छात्र आनंद कुमार के अनुभव से साफ दिखता है।\n• स्थानीय स्तर पर उठाया गया एक छोटा कदम भी कई छात्रों का भविष्य बेहतर बना सकता है।",
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  "category": "शिक्षा",
  "publishedAt": "2026-07-07",
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