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  "title": "उत्तर प्रदेश के जौनपुर में छत से टपकता पानी और गिरती कंक्रीट बनी खतरा, कल्याणपुर के विद्यार्थियों के लिए मंदिर बना नया स्कूल",
  "summary": "जौनपुर जिले के कल्याणपुर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन जर्जर होने के कारण बच्चों की कक्षाएं मंदिर परिसर में चलाई जा रही हैं। सुरक्षा कारणों से लिए गए इस फैसले के बाद बेसिक शिक्षा विभाग नए भवन का प्रस्ताव राज्य परियोजना कार्यालय भेजने की बात कह रहा है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के कल्याणपुर इलाके में स्थित सरकारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय की जर्जर स्थिति ने बच्चों की सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। विद्यालय की पुरानी इमारत के अत्यंत खस्ताहाल होने के कारण हादसे की आशंका बनी हुई थी, जिसके बाद प्रशासन ने मजबूरी में कक्षाओं को एक मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया। वर्तमान समय में स्कूली बच्चे मंदिर के प्रांगण में जमीन पर बैठकर अपनी दैनिक पढ़ाई पूरी कर रहे हैं, जबकि सरकारी स्कूल का जर्जर ढांचा पूरी तरह लावारिस स्थिति में पड़ा हुआ है।\n\nजर्जर इमारत और टपकती छत ने बढ़ाया हादसे का खतरा\nकल्याणपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की पुरानी इमारत की हालत पिछले काफी समय से बेहद दयनीय बनी हुई थी। बरसात और सामान्य दिनों में भी भवन की छत से पानी लगातार टपकता रहता था। इमारत के बाहरी हिस्सों के बारजे गिर चुके थे और दीवारों तथा लेंटर से कंक्रीट झड़ने के बाद अंदर लगी लोहे की सरिया साफ दिखाई देने लगी थी। इस तरह के खतरनाक माहौल में छोटे बच्चों को बैठाकर पढ़ाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा था। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षक बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित थे, क्योंकि इमारत का कोई भी हिस्सा कभी भी गिर सकता था।\n\nसुरक्षा संबंधी गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए विद्यालय प्रशासन ने उच्च अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। इसके बाद बच्चों की जान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कक्षाओं को मंदिर परिसर में चलाने का फैसला लिया गया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कल्याणपुर की इंचार्ज चंदा देवी ने बताया कि विद्यालय का संचालन 26 मार्च से मंदिर प्रांगण में किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी के भारी रिसाव और बारजे गिरने की वजह से बच्चों को वहां बैठाना संभव नहीं रह गया था, इसलिए अधिकारियों की सहमति के बाद यह वैकल्पिक कदम उठाया गया।\n\nनामांकन बचाने के लिए कल्याणपुर में दोबारा शुरू हुआ था स्कूल\nविद्यालय के संचालन का इतिहास भी चुनौतियों से भरा रहा है। इंचार्ज चंदा देवी के अनुसार, वर्ष 2024 में विद्यालय भवन की खराब स्थिति के कारण इसे अस्थायी रूप से निकटवर्ती गांव बीबीपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि, स्थान बदलने का बुरा असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के नामांकन पर पड़ा। कल्याणपुर से दूरी अधिक होने की वजह से कई बच्चों ने स्कूल आना छोड़ दिया और छात्र संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। विद्यालय को बंद होने से बचाने और स्थानीय बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के उद्देश्य से इसे वापस कल्याणपुर लाया गया था।\n\nकल्याणपुर वापस आने के बाद भी मूल भवन की मरम्मत या नए निर्माण की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप, जर्जर इमारत में बच्चों को बैठाना असुरक्षित होने के कारण मंदिर ही एकमात्र सहारा बना। विद्यालय को बचाने की इस कवायद में शिक्षकों ने स्थानीय समुदाय के सहयोग से मंदिर परिसर को पठन-पाठन का केंद्र बनाया, ताकि बच्चे अपनी प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहें।\n\nविभाग की कार्रवाई और राज्य परियोजना कार्यालय को भेजा गया प्रस्ताव\nजर्जर भवन की गंभीर स्थिति के संबंध में विद्यालय इंचार्ज द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायतें सौंपी गई थीं। इमारत की दयनीय अवस्था की तस्वीरें और रिपोर्ट मिलने के बाद उच्च अधिकारियों ने सख्त निर्देश जारी किए कि किसी भी परिस्थिति में जर्जर भवन के भीतर कक्षाएं संचालित न की जाएं। लंबे समय से खाली पड़े इस भवन की देखभाल न होने से इसकी स्थिति और अधिक खराब हो चुकी है तथा बच्चे लगातार खतरे के साए से दूर मंदिर में पढ़ रहे हैं।\n\nजौनपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी समीर यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी के जरिए उन्हें कल्याणपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय के मंदिर में संचालित होने की सूचना प्राप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि विभाग की तकनीकी जांच के बाद विद्यालय भवन को आधिकारिक तौर पर जर्जर घोषित कर दिया गया है। जर्जर इमारत के स्थान पर नए भवन के निर्माण या पुनर्निर्माण के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करके राज्य परियोजना कार्यालय को भेज दिया गया है, ताकि वहां से बजट और प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो सके।\n\nस्थायी भवन का इंतजार और भविष्य की चुनौतियां\nबेसिक शिक्षा अधिकारी समीर यादव ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भवन की समस्या के कारण बच्चों के नामांकन और शैक्षणिक सत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसी वजह से फिलहाल मंदिर के रूप में वैकल्पिक स्थान का चयन किया गया है। उन्होंने स्कूल के शिक्षकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि पठन-पाठन का माहौल प्रभावित नहीं होना चाहिए और बच्चों की पढ़ाई में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। विभागीय स्तर पर जल्द ही किसी अन्य उपयुक्त सरकारी भवन या किराए के स्थान की व्यवस्था करने के प्रयास जारी हैं।\n\nराज्य परियोजना कार्यालय से नए भवन के निर्माण अथवा बजट स्वीकृति के निर्देश मिलने तक यह अस्थायी व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, मंदिर परिसर में पढ़ाई संचालित होना एक तात्कालिक समाधान तो है, लेकिन मौसम के बदलाव और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों के बीच यह दीर्घकालिक उपाय नहीं हो सकता। कल्याणपुर के ग्रामीण, अभिभावक और छात्र अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब शासन से नए भवन की मंजूरी मिलेगी और कब बच्चों को एक सुरक्षित, आधुनिक तथा स्थायी स्कूल भवन नसीब हो पाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर असर डालती है:\n\n• भारत में: सरकारी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे की स्थिति पर ध्यान आकर्षित करती है, जिससे अन्य राज्यों में भी जर्जर स्कूल भवनों के रखरखाव और सुरक्षा समीक्षा को बढ़ावा मिल सकता है।\n• जौनपुर (उत्तर प्रदेश) में: कल्याणपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए यह सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा और निरंतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ी खबर है, जहां नया भवन बनने तक मंदिर परिसर ही पढ़ाई का साधन रहेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कल्याणपुर में स्कूल की कक्षाएं मंदिर परिसर में क्यों चलाई जा रही हैं?\nसरकारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन अत्यधिक जर्जर हो चुका है। छत से पानी टपकने, बारजे गिरने और सरिया दिखाई देने के कारण हादसों से बचने के लिए कक्षाओं को मंदिर में शिफ्ट किया गया है।\n\n2. मंदिर परिसर में स्कूल का संचालन किस तारीख से शुरू हुआ था?\nविद्यालय की इंचार्ज चंदा देवी के अनुसार, 26 मार्च से बच्चों की कक्षाएं मंदिर परिसर में संचालित की जा रही हैं।\n\n3. वर्ष 2024 में विद्यालय को बीबीपुर क्यों भेजा गया था और फिर वापस क्यों लाया गया?\nभवन खराब होने पर 2024 में स्कूल को बीबीपुर स्थानांतरित किया गया था, लेकिन वहां दूरी के कारण नामांकन बहुत कम हो गया था। छात्रों का नामांकन बचाने और स्कूल को चालू रखने के लिए इसे वापस कल्याणपुर लाया गया।\n\n4. जौनपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?\nबीएसए समीर यादव ने भवन को आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित कर दिया है और नए निर्माण के लिए राज्य परियोजना कार्यालय को प्रस्ताव भेजा है।\n\n5. नया स्कूल भवन बनने तक विभाग ने क्या निर्देश दिए हैं?\nविभाग ने शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए और जल्द ही अन्य अस्थायी स्थान की व्यवस्था की जाएगी।",
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  "category": "शिक्षा",
  "publishedAt": "2026-08-07",
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