# उत्तर प्रदेश के मेरठ में दृष्टिबाधित युवाओं के लिए शुरू हुआ पहला फ्री AI और कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर

> मेरठ के वेस्टर्न कचहरी रोड स्थित त्यागी हॉस्टल में शुरू हुए इस पहले ऑफलाइन केंद्र में दृष्टिबाधित युवाओं को कंप्यूटर, एआई गॉगल्स और दैनिक जीवन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** शिक्षा · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/education/uttar-pradesh-ke-meerut-men-drishtibadhita-yuvaon-ke-lie-shuru-hua-pahala-phri-ai-aura-knpyutara-treninga-sentara-31380 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेरठ न्यूज़, दृष्टिबाधित शिक्षा, फ्री एआई ट्रेनिंग, उत्तर प्रदेश न्यूज़, एनएबी मेरठ, दिव्यांग सशक्तिकरण

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले दृष्टिबाधित युवाओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। आधुनिक तकनीक के इस दौर में अब वे भी सामान्य लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर अपने भविष्य को संवार सकते हैं। इसके लिए मेरठ के वेस्टर्न कचहरी रोड स्थित त्यागी हॉस्टल में एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की गई है। एनएबी मेरठ संस्था द्वारा संचालित इस केंद्र में दृष्टिबाधित युवाओं को पूरी तरह से निशुल्क आधुनिक प्रशिक्षण और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान की जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

## ऑनलाइन शिक्षा से ऑफलाइन केंद्र तक का सफर
यह नया केंद्र पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का पहला ऑफलाइन प्रशिक्षण संस्थान है। दृष्टिबाधित शिक्षक समीर विश्नोई ने इस बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि एनएबी मेरठ की संस्थापक पूनम त्यागी के कुशल मार्गदर्शन में संस्था पिछले कई वर्षों से लगातार ऑनलाइन माध्यम से ऐसे युवाओं को ट्रेनिंग दे रही थी। हालांकि, समय की मांग और व्यावहारिक ज्ञान की आवश्यकता को देखते हुए अब एक स्थाई ऑफलाइन केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य उन सभी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना है जो जन्म से दृष्टिबाधित हैं, या फिर किसी दुर्घटना अथवा बीमारी के कारण युवावस्था में अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने की जरूरत है, जैसे कि 'हनुमान अंश' फिल्म में सुनील लोधी द्वारा गाए गए गाने की प्रतिभा आज हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है।

## एआई गॉगल्स और कंप्यूटर ट्रेनिंग से संवरेगा भविष्य
इस संस्थान में युवाओं को आधुनिक युग की सबसे उन्नत तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान दृष्टिबाधित छात्रों को विशेष प्रकार के स्मार्ट गॉगल्स (चश्मे) दिए जा रहे हैं। ये आधुनिक गॉगल्स मोबाइल फोन और ब्लूटूथ एआई कनेक्टिविटी के जरिए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन से जुड़े होते हैं। यह तकनीक इन युवाओं के लिए कैमरे की तरह काम करती है, जिससे उन्हें अपने आसपास की हर हलचल और वस्तुओं की सटीक जानकारी मिल जाती है। एनएबी मेरठ की संस्थापक पूनम त्यागी के अनुसार, युवाओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहाँ कई तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से कंप्यूटर ट्रेनिंग, ब्रेल शिक्षा, मोबिलिटी और ओरिएंटेशन (आने-जाने का प्रशिक्षण), अनुकूलित कुकिंग (विशेष रसोई प्रशिक्षण) और दैनिक जीवन से जुड़े सभी तरह के आवश्यक कौशल शामिल हैं। इन आधुनिक और पारंपरिक माध्यमों के मेल से दृष्टिबाधित युवा समाज में अपनी एक नई पहचान बना सकेंगे।

## इसका आप पर असर
यह पहल वंचित वर्गों, विशेष रूप से दृष्टिबाधित लोगों के लिए तकनीक को सुलभ बनाने और उनके करियर को संवारने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

- **भारत में:** ब्लूटूथ से लैस एआई गॉगल्स और कस्टमाइज्ड मोबाइल ऐप्स का उपयोग यह दिखाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर सुलभ सहायक उपकरण बनाए जा सकते हैं। यह देश भर के अन्य गैर-सरकारी संगठनों के लिए अपने प्रशिक्षण मॉड्यूल को अपग्रेड करने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।
- **उत्तर प्रदेश में:** मेरठ और आसपास के जिलों के दृष्टिबाधित युवाओं के परिवारों को अब बिना किसी आर्थिक बोझ के विश्वस्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे उन्हें विशेष तकनीकी शिक्षा और दैनिक जीवन के कौशल सीखने के लिए बड़े मेट्रो शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
इस भौतिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना का मुख्य कारण दृष्टिबाधित लोगों के लिए दूरस्थ शिक्षा या ऑनलाइन ट्रेनिंग की व्यावहारिक सीमाएं थीं।

- **ऑनलाइन प्रशिक्षण की सीमाएं:** हालांकि एनएबी मेरठ कई वर्षों से ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहा था, लेकिन मोबिलिटी, ब्रेल लिपि और अनुकूलित कुकिंग जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाने के लिए आमने-सामने की निगरानी बेहद जरूरी थी।
- **एआई सहायक तकनीक का उदय:** एआई-संचालित स्मार्ट गॉगल्स और विशेष मोबाइल ऐप्स के तेजी से विकास के कारण एक ऐसी भौतिक प्रयोगशाला की आवश्यकता महसूस हुई, जहाँ छात्रों को वास्तविक दुनिया में इन उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जा सके।
- **आत्मनिर्भरता पर ध्यान:** आधुनिक नौकरियों में बढ़ती डिजिटल साक्षरता की मांग ने संस्था को बुनियादी सहायता से आगे बढ़कर उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित किया, ताकि दृष्टिबाधित युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिल सके।

## सवाल-जवाब

### 1. यह नया प्रशिक्षण केंद्र कहाँ खोला गया है?
यह केंद्र उत्तर प्रदेश के मेरठ में वेस्टर्न कचहरी रोड स्थित त्यागी हॉस्टल में खोला गया है।

### 2. इस प्रशिक्षण के लिए कौन पात्र है और इसकी फीस कितनी है?
यह प्रशिक्षण उन सभी दृष्टिबाधित युवाओं के लिए पूरी तरह से मुफ्त है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने युवावस्था में अपनी आँखों की रोशनी खो दी थी।

### 3. मेरठ केंद्र में कौन से विषय और कौशल सिखाए जाते हैं?
यह केंद्र कंप्यूटर संचालन, एआई तकनीक, ब्रेल शिक्षा, मोबिलिटी, ओरिएंटेशन और अनुकूलित कुकिंग का प्रशिक्षण देता है।

### 4. विशेष एआई गॉगल्स दृष्टिबाधित छात्रों की कैसे मदद करते हैं?
ये गॉगल्स ब्लूटूथ के जरिए मोबाइल फोन और एक विशेष ऐप से जुड़ते हैं, जो कैमरे की तरह काम करके आसपास की जानकारी यूजर को देते हैं।

### 5. इस प्रशिक्षण केंद्र का संचालन कौन सी संस्था कर रही है?
इस केंद्र का संचालन एनएबी मेरठ संस्था द्वारा उसकी संस्थापक पूनम त्यागी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

## प्रेरणा और सबक
एनएबी मेरठ और इसके शिक्षकों का यह प्रयास हमें सिखाता है कि कैसे दृढ़ संकल्प और आधुनिक तकनीक के सही उपयोग से शारीरिक सीमाओं को पार किया जा सकता है।

- **समय के साथ बदलाव:** पारंपरिक तरीकों से हटकर एआई और कंप्यूटर ट्रेनिंग को अपनाने से यह सीख मिलती है कि पुराने ढर्रे पर रहने के बजाय समय की मांग के अनुसार खुद को अपडेट करना कितना जरूरी है।
- **सहानुभूति के बजाय सशक्तिकरण:** केवल सहानुभूति दिखाने के बजाय, यह केंद्र युवाओं को तकनीकी उपकरण और दैनिक जीवन के कौशल देकर आत्मनिर्भर बना रहा है, जो कि सम्मानजनक जीवन जीने का असली रास्ता है।
- **समावेशिता के लिए तकनीक का उपयोग:** विशेष एआई गॉगल्स का उपयोग यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग समाज के हर वर्ग के बीच की दूरी को पाटने और उन्हें समान अवसर देने के लिए किया जाना चाहिए।

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