नील कमल का वो अमर गाना, जिसमें वहीदा रहमान को पुकारते थे राजकुमार और गूंजती थी मोहम्मद रफी की आवाज साल 1968 की क्लासिक फिल्म नील कमल का सुपरहिट गाना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जिसे मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज से अमर बनाया था। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी cinematic कृतियां दर्ज हैं, जिनके कलाकार, संगीत और संवाद दशकों गुजर जाने के बाद भी दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़े हुए हैं। ऐसे ही दिग्गज अभिनेताओं में शुमार राजकुमार का अंदाज बेहद जुदा था, जिसे चाहने वाले आज भी शिद्दत से याद करते हैं। उनकी बहुचर्चित फिल्मों में से एक 1968 में रिलीज हुई थी, जिसका नाम नील कमल था। इस क्लासिक ड्रामा में अभिनेता ने चित्रसेन नाम का किरदार निभाकर स्क्रीन पर एक अलग ही जादू बिखेरा था। पुनर्जन्म और अधूरे प्रेम की अनोखी दास्तान इस पूरी फिल्म की मूल पटकथा पुनर्जन्म और अधूरी प्रेम कहानी के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। इसमें अभिनेत्री वहीदा रहमान ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिन्होंने सीता नाम की लड़की का किरदार जीवंत किया था। फिल्म के भीतर एक ऐसा खास पड़ाव आता है जहां राजकुमार का पात्र चित्रसेन अपनी प्रेमिका को याद करते हुए एक ऐसा गीत गाता है जो आगे चलकर हिंदी संगीत जगत की अमूल्य थाती बन गया। इस दृश्य में वहीदा रहमान अपने पूर्व जन्म की स्मृतियों में पूरी तरह खो जाती हैं और नींद में ही सम्मोहित होकर चलने लगती हैं। मोहम्मद रफी के सुरों से सजा सदाबहार गीत इस आइकॉनिक गाने के बोल इतने मार्मिक और गहरे हैं कि आज की पीढ़ी के लोग भी इसे गुनगुनाने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। उस दौर के संगीत प्रेमियों के बीच यह रचना प्रेम और विरह का पर्याय बन गई थी। गीत के दृश्यों में वहीदा रहमान एक दुल्हन के लिबास में नजर आती हैं, जो चित्रसेन की केवल एक आवाज पर अपना घर-द्वार छोड़कर निकल पड़ती हैं। इस सिनेमैटिक मोमेंट ने स्क्रीन पर ऐसा असर पैदा किया जो आज भी दर्शकों के जेहन में जीवंत है। रवि का संगीत और साहिर लुधियानवी के बेहतरीन बोल किसी भी फिल्म की सफलता में उसके गानों का बहुत बड़ा योगदान होता है और इस प्रोजेक्ट के साथ भी यही बात लागू होती है। फिल्म के कर्णप्रिय संगीत को संगीतकार रवि ने संवारा था, जबकि इसके एक-एक शब्द को मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने अपनी कलम से गढ़ा था। इस बेहतरीन एलबम में केवल एक नहीं बल्कि कई सदाबहार रचनाएं शामिल थीं, जिनमें बाबुल की दुआएं लेती जा, रोम रोम में बसने वाले राम, और शर्मा के यूं न देख जैसे शानदार ट्रैक शामिल रहे। इन सभी गानों ने उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को सुपरहिट बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। दिग्गज कलाकारों और रचनाकारों का संगम इस सिनेमैटिक मास्टरपीस की बात करें तो इसमें राजकुमार और वहीदा रहमान के अलावा अभिनेता मनोज कुमार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिन्होंने पर्दे पर राम का किरदार अदा किया था। पूरी फिल्म का कुशल निर्देशन राम माहेश्वरी ने संभाला था। पर्दे पर उतारी गई यह कहानी मशहूर लेखक गुलशन नंदा के लोकप्रिय उपन्यास पर आधारित थी, जिसने बड़े पर्दे पर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। सवाल-जवाब 1. फिल्म नील कमल किस वर्ष रिलीज हुई थी? फिल्म नील कमल साल 1968 में रिलीज हुई थी। 2. फिल्म नील कमल का निर्देशन किसने किया था? इस फिल्म का निर्देशन राम माहेश्वरी ने किया था। 3. फिल्म में मुख्य कलाकारों के रूप में कौन नजर आया था? फिल्म में राजकुमार, वहीदा रहमान और मनोज कुमार ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। 4. इस लोकप्रिय गाने को अपनी आवाज किसने दी थी? इस मशहूर गाने को अपनी आवाज मोहम्मद रफी ने दी थी। https://trendkia.com/entertainment/1968-classic-that-stole-hearts-raj-kumar-waheeda-rehman-21914 TrendKia — Har trend, sabse pehle.