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  "title": "4000 करोड़ की नई रामायण के बीच याद आई रामानंद सागर की कला, अगरबत्ती के धुएं और कागज के आभूषणों से रचा था इतिहास",
  "summary": "नितेश तिवारी की 4,000 करोड़ रुपये के बजट वाली फिल्म रामायण के ट्रेलर के बाद 1987 के पौराणिक धारावाहिक की तकनीक और सीमित बजट में किए गए अनूठे प्रयोगों की चर्चा फिर से छिड़ गई है।",
  "content": "भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के इतिहास में जब भी महाकाव्य रामायण के चित्रण की बात होती है, रामानंद सागर का नाम सबसे पहले आता है। इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा की नई महत्वाकांक्षी फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता देखी जा रही है। अभिनेता रणबीर कपूर और अभिनेत्री साई पल्लवी के अभिनय से सजी इस बड़ी फिल्म का ट्रेलर हाल ही में 30 जुलाई को शुभ ब्रह्म मुहूर्त के समय जारी किया गया। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इसके विजुअल एफेक्ट्स (वीएफएक्स), भव्य सेटों और विशिष्ट कलर स्कीम की तीखी समीक्षाएं हो रही हैं। लगभग 4,000 करोड़ रुपये के विशाल बजट में तैयार हो रही इस आधुनिक फिल्म की तुलना स्वाभाविक रूप से रामानंद सागर के कालजयी धारावाहिक रामायण से की जाने लगी है। दूरदर्शन के उस सुनहरे दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद जिस भव्यता और भक्ति भाव के साथ इस पौराणिक कथा को प्रस्तुत किया गया था, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। जहाँ आज की फिल्म का बजट हजारों करोड़ तक पहुंच चुका है, वहीं रामानंद सागर ने मात्र 8 से 9 करोड़ रुपये की कुल लागत में पूरे 78 एपिसोड्स की शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली थी।\n\nसीमित संसाधनों में महाकाव्य का निर्माण\nवर्ष 1987 में प्रसारित हुए इस ऐतिहासिक सीरियल में अरुण गोविल ने भगवान राम, दीपिका चिखलिया ने माता सीता और सुनील लहरी ने लक्ष्मण की यादगार भूमिकाएं निभाई थीं। भले ही उस जमाने में दूरदर्शन और प्रोड्यूसर्स के पास आज जितना बजट उपलब्ध नहीं था, लेकिन निर्देशक रामानंद सागर ने तकनीकी कमियों को अपनी रचनात्मक सोच से पूरा किया। उन्होंने न केवल इस सीरियल के हर एक पहलू पर बारीकी से काम किया, बल्कि पूरी स्टारकास्ट की फीस समेत पूरे 78 एपिसोड्स को 8 से 9 करोड़ रुपये के सीमित बजट के भीतर ही समेट दिया। इस छोटे से बजट के बावजूद उन्होंने दृश्य गुणवत्ता, कला निर्देशन, वेशभूषा और गहनों के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं होने दिया।\n\nअगरबत्ती के धुएं और कैमरा एंगल से रचा गया कोहरा\nअस्सी के दशक में जब डिजिटल विजुअल एफेक्ट्स और वीएफएक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीक का अस्तित्व नहीं था, तब रामानंद सागर ने अपनी व्यावहारिक सूझबूझ और रचनात्मक जुगाड़ का सहारा लिया। धारावाहिक में जब भी रहस्यमयी वातावरण, कोहरे या धुंध वाले सीन की जरूरत होती थी, तब वे सेट पर बड़े पैमाने पर अगरबत्ती जलाया करते थे। अगरबत्ती से निकलने वाले घने धुएं से ही पूरे फ्रेम में प्राकृतिक कोहरे जैसा मनमोहक प्रभाव उत्पन्न किया जाता था। इसके अलावा विशाल पर्वतों, दिव्य दृश्यों या भव्य संरचनाओं को पर्दे पर उभारने के लिए वे महंगे स्पेशल एफेक्ट्स के बजाय कैमरे की स्थिति, लेंस के सामने रखे जाने वाले विशेष कटआउट्स और अलग-अलग कोणों का उपयोग करते थे।\n\nमगनलाल ड्रेसवाला ने तैयार की थी पौराणिक वेशभूषा\nरामानंद सागर अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की हर एक छोटी-बड़ी बारीकी पर निजी तौर पर ध्यान देते थे। कास्टिंग से लेकर मुख्य पात्रों के पहनावे तक की जिम्मेदारी उन्होंने खुद संभाली थी। सीरियल में दीपिका चिखलिया के लिए सीता के परिधान और अरुण गोविल के लिए श्री राम की पोषाक डिजाइन करने का काम उस दौर की प्रसिद्ध कंपनी मगनलाल ड्रेसवाला को सौंपा गया था। इस प्रतिष्ठित संस्थान ने रामायण की पूरी स्टारकास्ट के कपड़े विशेष रूप से तैयार किए थे। परिधान निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही यह कंपनी आज 100 से भी अधिक वर्षों का लंबा और गौरवशाली इतिहास रखती है।\n\nकागज पर हाथ से चित्र बनाकर बनाए गए आभूषण\nकेवल वेशभूषा ही नहीं, बल्कि पात्रों के आभूषण और विशाल सेटों का निर्माण भी बेहद अनोखे तरीके से किया गया था। रामानंद सागर ने धारावाहिक के भव्य सेट और गहन आभूषण डिजाइन करने का जिम्मा अपने प्रसिद्ध आर्ट डायरेक्टर हीराभाई पटेल को सौंपा था। हीराभाई पटेल ने ही रावण के भव्य सोने के महल, विशाल लंका और सुंदर अशोक वाटिका के सेटों की रूपरेखा तैयार की थी। आभूषणों के निर्माण के लिए हीराभाई पटेल कागज के टुकड़ों पर अपने हाथों से गहनों के डिजाइन बनाते थे और फिर उन पर रंग भरकर फाइनल लुक तय करते थे। इस पूरी कलात्मक प्रक्रिया के दौरान रामानंद सागर स्वयं उनके सामने बैठकर हर एक गहने के स्केच को बारीकी से देखते और मंजूरी देते थे।\n\nइसका आप पर असर\nभारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए: यह तुलना दर्शाती है कि भारतीय सिनेमा 8-9 करोड़ रुपये के सरल उत्पादन युग से निकलकर 4,000 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय स्तर के वीएफएक्स दौर में प्रवेश कर चुका है।\n\nकला और सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह उदाहरण साबित करता है कि सांस्कृतिक प्रभाव केवल बजट से नहीं, बल्कि निर्देशक की दूरदर्शिता, व्यक्तिगत निष्ठा और रचनात्मक प्रयोगों से बनता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नितेश तिवारी की नई फिल्म रामायण का बजट कितना है?\nनितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा की नई फिल्म रामायण का अनुमानित बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपये है।\n\n2. रामानंद सागर ने अपनी 1987 की टीवी रामायण कितने बजट में बनाई थी?\nरामानंद सागर ने पूरी स्टारकास्ट की फीस सहित महज 8 से 9 करोड़ रुपये की कुल लागत में रामायण के सभी 78 एपिसोड शूट किए थे।\n\n3. 1987 की रामायण में धुंध और कोहरे के दृश्य कैसे बनाए जाते थे?\nउस दौर में वीएफएक्स तकनीक न होने के कारण सेट पर अगरबत्ती जलाकर उसके धुएं से कोहरे का प्रभाव उत्पन्न किया जाता था।\n\n4. रामानंद सागर की रामायण में पात्रों के परिधान किसने डिजाइन किए थे?\nभगवान राम और सीता सहित पूरी स्टारकास्ट के परिधान 100 से अधिक वर्ष पुरानी प्रसिद्ध कंपनी मगनलाल ड्रेसवाला ने तैयार किए थे।\n\n5. सीरियल के आभूषण और सेट किसके द्वारा तैयार किए गए थे?\nआर्ट डायरेक्टर हीराभाई पटेल ने लंका और अशोक वाटिका के सेट बनाए थे और कागज पर हाथ से पेंट करके सभी आभूषणों के डिजाइन तैयार किए थे।\n\nप्रेरणा और सबक\nसीमित संसाधनों में श्रेष्ठता: रामानंद सागर ने सिद्ध किया कि बजट की कमी कभी भी महान कला के निर्माण में बाधा नहीं बन सकती।\n\nप्रत्यक्ष नेतृत्व: कास्टिंग से लेकर कपड़ों और गहनों के स्केच तक, उन्होंने हर काम में खुद शामिल होकर गुणवत्ता सुनिश्चित की।\n\nव्यावहारिक नवाचार: तकनीक न होने पर अगरबत्ती के धुएं और कैमरा एंगल जैसे साधारण तरीकों का इस्तेमाल कर अविश्वसनीय दृश्य प्रभाव बनाए।",
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  "category": "मनोरंजन",
  "publishedAt": "2026-08-01",
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