नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले मराठी गाने की रिकॉर्डिंग से संतुष्ट नहीं थे अभय जोधपुरकर, साझा किया किस्सा 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर चुने गए अभय जोधपुरकर ने बताया कि शुरुआत में गाने की पिच को लेकर वह नाखुश थे और रिकॉर्डिंग दो सत्रों में पूरी हुई थी। 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के मंच पर संगीत जगत के कई दिग्गजों को सराहा गया, जहां प्लेबैक सिंगर अभय जोधपुरकर ने अपनी सुरीली आवाज के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया। उन्हें मराठी फिल्म 'घराट गणपति' के लोकप्रिय गीत 'नवसाची गौरी माझी' के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड प्रदान किया गया। इस प्रतिष्ठित सम्मान को हासिल करने के बाद अभय जोधपुरकर ने उस गीत के स्टूडियो सफर से जुड़ा एक दिलचस्प और अनसुना वाकया साझा किया है। उन्होंने खुलासा किया कि इस गीत को एक ही बार में अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था, बल्कि इसकी रिकॉर्डिंग दो अलग-अलग सत्रों में पूरी की गई थी। शुरुआती सत्र और पिच को लेकर असंतोष अभय जोधपुरकर ने बताया कि जब वह पहली दफा इस गीत को स्टूडियो में गा रहे थे, तब उन्हें महसूस हुआ कि गाने की पिच उनकी वोकल रेंज के लिहाज से थोड़ी ज्यादा ऊंची थी। वह चाहते थे कि स्केल को थोड़ा नीचे लाया जाए ताकि वह अपनी आवाज के साथ पूरा न्याय कर सकें। इस वजह से वह शुरुआती नतीजे से पूरी तरह खुश नहीं थे। गायक के मन में थोड़ी निराशा भी आई क्योंकि वह पिच घटाने के पक्ष में थे, परंतु संकेत पहले ही कुछ लाइव वाद्य यंत्रों की डबिंग का काम पूरा कर चुके थे। वाद्य यंत्रों की रिकॉर्डिंग पहले हो जाने के कारण ट्रैक का मूल स्केल बदलना संभव नहीं रह गया था। ऐसे में अभय को उसी तय स्केल पर ही अपनी गायकी जारी रखनी पड़ी, हालांकि वह अपने पहले प्रयास से संतुष्ट नहीं थे। त्योहार की रस्मों और घर के उत्सव का अहसास इस गीत के पीछे की सोच को समझाते हुए अभय ने बताया कि वह इसे महज एक पारंपरिक या औपचारिक उत्सव गीत के रूप में पेश नहीं करना चाहते थे। उनकी कोशिश थी कि सुनने वाले को ऐसा लगे मानो किसी के घर के भीतर खुद गौरी के आगमन का पावन पर्व मनाया जा रहा हो। उन्होंने इस ट्रैक में अपनी गहरी भावनाएं उड़ेल दी थीं ताकि हर पंक्ति में उत्सव की आत्मीयता साफ झलक सके। पहले सत्र के बाद जब गाने की शूटिंग पूरी हो गई, तब टीम ने इसका दूसरा रिकॉर्डिंग सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया। शूटिंग के बाद दूसरा सत्र और गायकी की बारीकियां गाने के फिल्मांकन के बाद जब दूसरा सत्र रखा गया, तब तक अभय इस धुन को बेहद गहराई से समझ चुके थे और उसके साथ काफी वक्त बिता चुके थे। दूसरे दौर में सब कुछ बहुत सहज, सरल और स्वाभाविक लगने लगा था। इस बार उनका पूरा ध्यान सुरों या तकनीकी नोट्स की फिक्र करने के बजाय गीतों के भाव और एक्सप्रेशन उभारने पर केंद्रित था। उनका प्राथमिक मकसद था कि गायन में किसी भी तरह का बनावटीपन न दिखे और हर भाव स्वाभाविक रूप से श्रोताओं तक पहुंचे। इसी कारण रिकॉर्डिंग के दौरान संगीत की छोटी-छोटी बारीकियों पर खास तवज्जो देनी पड़ी, जिसके सुखद परिणाम ने बाद में नेशनल अवॉर्ड का रूप ले लिया। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान और जीत का अनुभव इस बड़ी उपलब्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गायक ने कहा, 'सच कहूं तो यह मेरे लिए काफी भावुक और हैरान करने वाला पल है।' उन्होंने आगे कहा कि वह अभी भी इस ऐतिहासिक पल को पूरी तरह आत्मसात करने की कोशिश में जुटे हैं। जिस रचना से वह व्यक्तिगत रूप से भावनात्मक लगाव रखते थे, उसी के लिए देश का सर्वोच्च सिनेमा सम्मान मिलना उनकी नजर में बेहद खास है। जब यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों द्वारा दिया गया, तो यह गौरवशाली क्षण उनके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धियों में शुमार हो गया। समारोह में अन्य विजेताओं का भी रहा दबदबा 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के इस गरिमामय आयोजन में वर्ष 2024 के उत्कृष्ट भारतीय सिनेमा को सम्मानित किया गया था। इस समारोह में फिल्म 'आर्टिकल 370' ने बेस्ट फीचर फिल्म का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया, जबकि इसी फिल्म में निभाए गए दमदार किरदार के लिए यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। अभिनय की दुनिया के शीर्ष सम्मानों में मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी ने बाजी मारी, जिन्हें फिल्म 'ब्रह्मयुगम' में अपने बेजोड़ अभिनय के लिए बेस्ट एक्टर चुना गया। इसी श्रेणी में हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता कार्तिक आर्यन को भी फिल्म 'चंदू चैंपियन' में उनके शानदार काम के लिए सम्मानित किया गया। इसका आप पर असर संगीत प्रेमियों और उभरते गायकों के लिए यह घटनाक्रम स्टूडियो अनुशासन और कलात्मक धैर्य के महत्व को रेखांकित करता है। • कलाकारों के लिए: यह प्रसंग दिखाता है कि तकनीकी बाधाओं के बावजूद निरंतर अभ्यास से काम को निखारा जा सकता है। अपनी पहली रिकॉर्डिंग से असंतुष्ट होने पर भी दूसरा प्रयास करने की सीख नए कलाकारों को प्रेरित करती है। • संगीत उद्योग में: लाइव इंस्ट्रूमेंटेशन और वोकल ट्रैकिंग के बीच तालमेल की अहमियत साफ होती है। संगीतकारों को पहले से ही स्केल और वोकल रेंज पर विस्तृत चर्चा करने का सबक मिलता है। • क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा: मराठी संगीत और सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान से स्थानीय रचनाकारों का हौसला बढ़ेगा। अन्य भाषाओं के दर्शक भी क्षेत्रीय फिल्मों के संगीत की ओर आकर्षित होंगे। • श्रोताओं के लिए: जब किसी गीत के पीछे का यह संघर्ष सामने आता है, तो दर्शक उसकी बारीकियों को अधिक गहराई से समझ पाते हैं। इससे किसी भी रचना के प्रति सम्मान और जुड़ाव बढ़ता है। ऐसा क्यों हुआ अभय जोधपुरकर को अपना गीत दो चरणों में इसलिए रिकॉर्ड करना पड़ा क्योंकि तकनीकी सीमाओं के चलते वे तुरंत गाने का स्केल नहीं बदल सके थे। • ऊंची पिच और वोकल रेंज: गीत की मूल पिच अभय की आवाज की सीमा से थोड़ी अधिक ऊंची थी, जिससे पहले सत्र में उन्हें असहजता महसूस हुई। वह स्केल कम करना चाहते थे ताकि गायन में अधिक सहजता आ सके। • वाद्य यंत्रों की पहले डबिंग: संकेत द्वारा लाइव वाद्य यंत्रों की डबिंग पहले ही पूरी कर ली गई थी, जिससे ट्रैक की पिच बदलना नामुमकिन हो गया था। इसी कारण गायक को उसी मूल स्केल पर ही अपनी आवाज देनी पड़ी। • एक्सप्रेशन पर ध्यान: गाने की शूटिंग पूरी होने के बाद धुन से परिचय बढ़ा, जिसके बाद दूसरा सत्र आयोजित कर केवल तकनीकी नोट्स के बजाय स्वाभाविक भावों को उभारा गया। सवाल-जवाब 1. 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में अभय जोधपुरकर को किस गीत के लिए पुरस्कार मिला? उन्हें मराठी फिल्म 'घराट गणपति' के गीत 'नवसाची गौरी माझी' के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 2. अभय जोधपुरकर गाने की पहली रिकॉर्डिंग से क्यों खुश नहीं थे? उन्हें लगा था कि गाने की पिच उनकी आवाज के लिहाज से ज्यादा ऊंची थी और वह इसका स्केल घटाना चाहते थे। 3. रिकॉर्डिंग के दौरान गाने का स्केल क्यों नहीं घटाया जा सका? क्योंकि संकेत पहले ही लाइव वाद्य यंत्रों की डबिंग पूरी कर चुके थे, जिससे स्केल बदलना संभव नहीं था। 4. गाने की दूसरी रिकॉर्डिंग कब और कैसे हुई? गाने की शूटिंग पूरी होने के बाद दूसरा सत्र हुआ, जिसमें अभय ने तकनीकी नोट्स के बजाय एक्सप्रेशन और भावनाओं पर ध्यान दिया। 5. 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट एक्ट्रेस और बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड किसे मिला? फिल्म 'आर्टिकल 370' को बेस्ट फीचर फिल्म और इसी फिल्म के लिए यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। 6. बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड किन अभिनेताओं को दिया गया? फिल्म 'ब्रह्मयुगम' के लिए ममूटी और फिल्म 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक आर्यन को बेस्ट एक्टर के खिताब से नवाजा गया। प्रेरणा और सबक अभय जोधपुरकर का यह अनुभव सिखाता है कि अगर शुरुआती परिणाम मनमुताबिक न हों, तो भी लगन और मेहनत से उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है। • संतुष्ट न होना ही सुधार की शुरुआत: पहले प्रयास में कमियां महसूस होने पर समझौता न करना और सुधार की गुंजाइश तलाशना जरूरी है। असंतोष को सकारात्मक बदलाव में बदलना सीखें। • सीमाओं के भीतर सर्वश्रेष्ठ देना: जब तकनीक या परिस्थितियां स्केल बदलने की इजाजत न दें, तब भी उपलब्ध संसाधनों में बेहतर प्रयास करना चाहिए। लचीलापन हर कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी है। • तकनीक से ऊपर भावनाएं: सिर्फ सही नोट्स लगाने के बजाय काम में सच्ची भावनाएं उड़ेलना किसी भी रचना को अमर बनाता है। स्वाभाविक अभिव्यक्ति हमेशा बनावटीपन पर भारी पड़ती है। https://trendkia.com/entertainment/abhay-jodhpurkar-recalls-recording-struggles-behind-national-award-winning-marathi-track-after-initially-disliking-pitch-41456 TrendKia — Har trend, sabse pehle.