अजय देवगन और करिश्मा कपूर का वो 90 के दशक का रोमांटिक गाना, जो आज भी दिलों पर करता है राज साल 1992 में आई फिल्म जिगर का गाना तुझको बाहों में भर लिया आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। उदित नारायण और साधना सरगम की आवाज में सजे इस ट्रैक को आनंद-मिलिंद ने संगीतबद्ध किया था। नब्बे के दशक के रोमांटिक गानों का जादू आज भी संगीत प्रेमियों के सिर चढ़कर बोलता है। ऐसा ही एक अमर गीत साल 1992 में रिलीज हुई फिल्म जिगर का है, जिसके बोल और धुन आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। इस सदाबहार ट्रैक ने रिलीज के समय से ही श्रोताओं के दिलों में एक खास जगह बना ली थी और आज भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है। फिल्म जिगर और उसकी जादुई केमिस्ट्री निर्देशक की इस सुपरहिट फिल्म में अजय देवगन और करिश्मा कपूर की जोड़ी नजर आई थी। फिल्म के गानों ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी थी और इसका हर एक ट्रैक चार्टबस्टर साबित हुआ था। खासकर रोमांटिक गानों के शौकीनों के लिए यह फिल्म एक बेहतरीन सौगात थी, जिसमें मुख्य कलाकारों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। तुझको बाहों में भर लिया गाने के सुर और संगीत इस लोकप्रिय गाने के बोल 'तुझको बाहों में भर लिया, मैंने इतना कसूर किया' ने हर किसी को अपना दीवाना बना लिया था। इस खूबसूरत गीत को अपनी जादुई आवाजों से सजाया था उदित नारायण और साधना सरगम ने। वहीं, इस गाने का बेहतरीन संगीत आनंद-मिलिंद की जोड़ी ने तैयार किया था, जबकि इसके शानदार बोल गीतकार समीर ने लिखे थे। इन सभी दिग्गजों के मेल ने इस गाने को भारतीय संगीत उद्योग का एक अनमोल रत्न बना दिया। 90 के दशक के गानों की सदाबहार विरासत नब्बे का दशक भारतीय सिनेमा और संगीत के लिए एक स्वर्णिम काल माना जाता है, जब मेलोडी और अर्थपूर्ण शब्दों को प्राथमिकता दी जाती थी। इस दौर के गाने न सिर्फ फिल्मों की सफलता का जरिया थे, बल्कि आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए थे। आज भी जब इस तरह के पुराने रोमांटिक गीत बसों, ऑटोज या रेडियो पर बजते हैं, तो लोग पुरानी यादों में खो जाते हैं। आनंद-मिलिंद का संगीत और उदित नारायण की आवाज का यह मेल आज की पीढ़ी को भी उतना ही भाता है जितना उस समय के दर्शकों को भाया था। ऐसा क्यों हुआ नब्बे के दशक के संगीत की लोकप्रियता और उसके आज भी प्रासंगिक बने रहने के पीछे कई खास कारण हैं। इस दौर के गानों में तकनीकी शोर के बजाय मेलोडी, सीधे और सरल शब्दों तथा बेहतरीन गायकी पर जोर दिया जाता था। • संगीतकारों का योगदान: आनंद-मिलिंद और नदीम-श्रवण जैसे संगीतकारों ने उस दौर में एक से बढ़कर एक धुनें दीं जो सीधे दिल को छूती थीं। • आशिकी और भावनाएं: गानों के बोल समीर और गुलशन बवेजा जैसे गीतकारों द्वारा लिखे जाते थे जो प्रेम और दर्द को बहुत सहजता से बयां करते थे। • गायक कलाकारों की शैली: उदित नारायण, कुमार सानू और अलका याग्निक की आवाज में एक मिठास थी जो हर उम्र के श्रोताओं को अपनी ओर खींचती थी। • फिल्मों की सफलता: उस समय फिल्मों का संगीत ही उनके प्रचार का मुख्य जरिया होता था, जिससे गीत घर-घर की जुबान पर चढ़ जाते थे। सवाल-जवाब 1. जिगर फिल्म किस साल रिलीज हुई थी? फिल्म जिगर साल 1992 में रिलीज हुई थी। 2. तुझको बाहों में भर लिया गाना किसने गाया है? इस गाने को उदित नारायण और साधना सरगम ने अपनी आवाज दी है। 3. इस गाने का संगीत किसने तैयार किया था? इस गाने का संगीत आनंद-मिलिंद की जोड़ी ने तैयार किया था। 4. इस गाने के बोल किसने लिखे थे? इस गाने के खूबसूरत बोल गीतकार समीर ने लिखे थे। https://trendkia.com/entertainment/ajay-devgn-aur-karisma-kapoor-ka-wo-90-ke-dashak-ka-romantic-gana-50171 TrendKia — Har trend, sabse pehle.