अमिताभ बच्चन के 90 करोड़ के कर्ज और वापसी पर रजनीकांत का संस्मरण फिर चर्चा में रजनीकांत ने याद किया कि कैसे अमिताभ बच्चन ने गंभीर आर्थिक संकट और भारी कर्ज से उबरने के लिए 64 साल की उम्र में रोजाना कड़ा परिश्रम किया। सिनेमा जगत के दो सबसे बड़े दिग्गज, अमिताभ बच्चन और रजनीकांत, दशकों पुरानी एक अटूट मित्रता साझा करते हैं। हाल ही में फिल्म 'जेलर 2' के माहौल के बीच रजनीकांत का एक पुराना वाकया इंटरनेट पर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस संस्मरण में उन्होंने विस्तार से बताया था कि जब अमिताभ बच्चन अपने जीवन के सबसे गहरे वित्तीय भंवर में फंस गए थे, तब उन्होंने किस असाधारण लगन के साथ उस दलदल से खुद को बाहर निकाला था। सफलता के शिखर से भारी वित्तीय संकट का सफर रजनीकांत के अनुसार, अमिताभ बच्चन जब अपनी शोहरत और कामयाबी के चरम मुकाम पर थे, तब उन्होंने अपने करियर की राह बदलते हुए एक व्यावसायिक उपक्रम की नींव रखी थी। उन्होंने अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड नाम की प्रोडक्शन कंपनी स्थापित की। हालांकि, यह महत्वाकांक्षी व्यापारिक कदम सफल नहीं हो सका और धीरे-धीरे कंपनी गंभीर नुकसान में चली गई। इस विफलता ने उन्हें दिवालियेपन के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया और उनके सिर पर तकरीबन 90 करोड़ रुपये की विशाल देनदारी आ गई। उस दौर की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए रजनीकांत ने बताया कि आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया था कि बिग बी को अपनी निजी संपत्तियों पर समझौता करना पड़ा। उन्हें जुहू स्थित अपना प्रतिष्ठित मकान और मुंबई की कई अन्य अचल संपत्तियां तक बेचनी पड़ी थीं। अपने सारे दायित्वों और कर्ज को उतारने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया और कठोर परिश्रम की राह चुनी। 64 की उम्र में कड़ा परिश्रम और जुहू में तीन संपत्तियां उद्योग जगत के कई लोग इस अचानक आए संकट को देखकर स्तब्ध थे और तरह-तरह की बातें बना रहे थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी अमिताभ बच्चन विचलित नहीं हुए। रजनीकांत ने बताया कि उस समय अमिताभ बच्चन की आयु 64 वर्ष थी और उनका शरीर कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहा था, फिर भी वे लगातार तीन वर्षों तक रोजाना 18-18 घंटे काम करते रहे। इस अटूट निष्ठा का नतीजा यह निकला कि उन्होंने अपनी पूरी 90 करोड़ रुपये की देनदारी चुका दी। ## ‘यही तो अमिताभ बच्चन हैं!’ रजनीकांत ने इस अदम्य साहस को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल कर्ज मुक्त होकर अपना पुराना घर वापस हासिल किया, बल्कि उसी सड़क पर कुल तीन संपत्तियां खरीदकर अपनी गरिमा फिर स्थापित की। चार दशकों की दोस्ती और साथ में की गई फिल्में दोनों महानायकों के आपसी सहयोग की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। वर्ष 1983 में आई फिल्म 'अंधा कानून' से रजनीकांत ने हिंदी सिनेमा में अपना पहला कदम रखा था। अमिताभ बच्चन के साथ की गई यह फिल्म टिकट खिड़की पर बेहद सफल रही और 1983 की पांचवीं सर्वाधिक कमाई करने वाली भारतीय फीचर फिल्म बनी। इसके बाद 1985 की फिल्म 'गिरफ्तार' में दोनों ने फिर पर्दे पर मौजूदगी दर्ज कराई, जिसमें रजनीकांत ने एक विशेष भूमिका निभाई थी। नब्बे के दशक में यह जोड़ी बेहद लोकप्रिय फिल्म 'हम' में एक साथ दिखाई दी थी। लंबे अंतराल के बाद, निर्देशक टीजे ज्ञानवेल की फिल्म 'वेट्टैयन' के जरिए दोनों कलाकार 33 साल बाद एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ आए। इस परियोजना की घोषणा के दौरान रजनीकांत ने सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए उन्हें अपना गुरु बताया था और उनके साथ दोबारा काम करने पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की थी। मौजूदा दौर के प्रोजेक्ट्स अमिताभ बच्चन की कार्यशैली आज भी नए कलाकारों के लिए एक मिसाल बनी हुई है। वे हालिया समय में प्रभास, दीपिका पादुकोण और कमल हासन के साथ बड़े बजट की फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' में नजर आए थे। इसके अतिरिक्त, वे भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के मेजबान के रूप में दर्शकों से लगातार जुड़े हुए हैं। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम दिखाता है कि गंभीर आर्थिक संकट और कर्ज के दबाव से भी दृढ़ अनुशासन और कड़े परिश्रम के जरिए बाहर निकला जा सकता है। • पेशेवर अनुशासन: विपरीत परिस्थितियों में भी लगातार काम करने की लगन किसी भी व्यक्ति को आर्थिक दलदल से उबारने की क्षमता रखती है। यह सिखाता है कि उम्र और शारीरिक सीमाओं के बावजूद काम के प्रति प्रतिबद्धता बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाल सकती है। • वित्तीय प्रबंधन का सबक: किसी भी नए व्यवसाय या उपक्रम में अत्यधिक विस्तार भारी जोखिम ला सकता है। इसलिए हर निवेशक और पेशेवर को जोखिम प्रबंधन और देनदारियों के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए। • साख और प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना: कानूनी व वित्तीय जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने के बजाय उनका सामना करने से समाज में खोया हुआ सम्मान वापस मिल सकता है। अपनी देनदारियों का ईमानदारी से भुगतान करने पर विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होती है। • करियर में निरंतरता: उम्र के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत करना संभव है। व्यक्ति चाहे जिस मुकाम पर पहुंच चुका हो, विफलता के बाद दोबारा जमीनी स्तर से मेहनत करके मुकाम हासिल किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ अमिताभ बच्चन का यह ऐतिहासिक वित्तीय संकट उनकी प्रोडक्शन कंपनी के व्यावसायिक रूप से असफल हो जाने के बाद उपजा था। • कंपनी की विफलता: अमिताभ बच्चन ने अपने अभिनय करियर के चरम पर अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की शुरुआत की थी। यह व्यावसायिक मॉडल वित्तीय रूप से टिक नहीं सका और भारी नुकसान के कारण उन पर लगभग 90 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया। • संपत्तियों की बिक्री: देनदारों की देनदारी चुकाने के लिए कानूनी और वित्तीय दबाव बढ़ गया था। इस कारण उन्हें अपना जुहू स्थित आवास और मुंबई की अन्य मूल्यवान संपत्तियां बेचने के लिए विवश होना पड़ा। • सख्त कार्यतालिका: इस संकट से निकलने के लिए उन्होंने दिन में 18-18 घंटे काम करना शुरू किया। तीन वर्षों के लगातार परिश्रम और नए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से उन्होंने अपने सभी कर्ज चुकाकर वित्तीय स्वतंत्रता पुनः प्राप्त की। सवाल-जवाब 1. अमिताभ बच्चन पर कितना कर्ज हो गया था? अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के असफल होने के बाद उन पर लगभग 90 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया था। 2. कर्ज चुकाने के लिए अमिताभ बच्चन ने क्या कदम उठाए? उन्होंने अपना जुहू वाला घर और मुंबई की कई संपत्तियां बेचीं और तीन साल तक रोजाना 18 घंटे काम करके सारा कर्ज चुकाया। 3. उस संकट के समय अमिताभ बच्चन की उम्र कितनी थी? उस कठिन दौर में अमिताभ बच्चन की आयु 64 वर्ष थी। 4. रजनीकांत ने अमिताभ बच्चन के साथ किस फिल्म से बॉलीवुड डेब्यू किया था? रजनीकांत ने 1983 की सफल फिल्म 'अंधा कानून' से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था। 5. अमिताभ बच्चन और रजनीकांत कितने वर्षों बाद फिल्म 'वेट्टैयन' में साथ आए? दोनों दिग्गज अभिनेता 33 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद फिल्म 'वेट्टैयन' में एक साथ नजर आए। प्रेरणा और सबक अमिताभ बच्चन की यह वापसी किसी भी संघर्षरत व्यक्ति के लिए आत्मबल और पुनरुत्थान का एक बेहतरीन उदाहरण है। • विफलता को अंतिम न मानना: व्यावसायिक रूप से पूरी तरह टूट जाने के बाद भी उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया। जीवन के किसी भी मोड़ पर आई असफलता अंत नहीं, बल्कि नए सिरे से की गई शुरुआत हो सकती है। • उम्र की बाधाओं को तोड़ना: 64 वर्ष की आयु और शारीरिक व्याधियों के बावजूद उन्होंने रोजाना 18 घंटे काम करने का साहस दिखाया। लगन और इच्छाशक्ति हो तो उम्र कभी भी कड़ी मेहनत के आड़े नहीं आती। • नैतिक जिम्मेदारी निभाना: उन्होंने भागने के बजाय हर एक देनदारी को ईमानदारी से चुकाने का रास्ता चुना। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति यह निष्ठा व्यक्ति के चरित्र को असाधारण बनाती है। https://trendkia.com/entertainment/amitabh-bachchan-ke-90-karora-ke-karja-aura-vapasi-para-rajinikanth-ka-snsmarana-phira-charcha-men-47588 TrendKia — Har trend, sabse pehle.