अनुशक्ति नगर की हरियाली से मायानगरी के मंच तक, श्रेया घोषाल के शुरुआती दिनों की कहानी गायिका श्रेया घोषाल ने मुंबई में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि अनुशक्ति नगर का शांत और हरा-भरा माहौल आम मुंबई की भीड़भाड़ से बिल्कुल जुदा था। देश और दुनिया भर में अपनी सुरीली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली मशहूर गायिका श्रेया घोषाल के शानदार संगीत सफर के पीछे वर्षों का कठिन परिश्रम, समर्पण और कई शहरों से जुड़ाव रहा है। पश्चिम बंगाल में जन्मीं और राजस्थान की वादियों में पली-बढ़ीं श्रेया का परिवार जब पहली बार देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंचा, तो उनके सामने इस महानगर का एक बेहद अनोखा रूप सामने आया था। अधिकांश लोग मुंबई की कल्पना ऊंची इमारतों, तेज रफ्तार जिंदगी और भारी भीड़भाड़ के रूप में करते हैं, लेकिन श्रेया के जीवन का शुरुआती मुंबई अध्याय एक ऐसे शांत कोने से शुरू हुआ, जो इस शहर के आम मिजाज से पूरी तरह अलग था। मैशबल इंडिया के शो में बयां की मुंबई की पहली यादें मैशबल इंडिया के लोकप्रिय शो ‘द बॉम्बे जर्नी’ में खास बातचीत के दौरान श्रेया घोषाल ने अपने बचपन, परिवार के स्थानांतरण और मुंबई के शुरुआती अनुभवों पर खुलकर चर्चा की। इस बातचीत में जब उनसे यह सवाल किया गया कि जब वह पहली बार कोलकाता से मुंबई पहुंचीं तो वह महानगर के किस इलाके में रुकी थीं, तो उन्होंने फौरन अनुशक्ति नगर का नाम लिया। इस इलाके की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा, ‘अनुशक्ति नगर चेम्बूर के सामने और ट्रॉम्बे (तुरभे) वाले रास्ते पर स्थित है।’ श्रेया के अनुसार, यह आवासीय परिसर इतना अधिक हरा-भरा, शांत और विशाल है कि वहां रहने वाले किसी भी इंसान को यह अहसास ही नहीं होता कि वह मुंबई जैसे घनी आबादी और आपाधापी वाले महानगर के बीच रह रहा है। पेड़ों की छांव और व्यवस्थित माहौल ने उन्हें एक ऐसा शांत वातावरण दिया, जहां वह महानगर के शोरगुल से दूर अपने सपनों को तराश सकीं। रावतभाटा से मुंबई तक का पारिवारिक सफर श्रेया घोषाल की पारिवारिक पृष्ठभूमि विज्ञान और तकनीक से जुड़ी रही है। उनका जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन उनके पिता विश्वजीत घोषाल न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में बतौर इंजीनियर कार्यरत थे। पिता की नौकरी के कारण उनका बचपन राजस्थान के रावतभाटा में गुजरा, जहां उन्होंने जिंदगी के शुरुआती सबक सीखे। साल 1997 में उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ आया, जब उनके पिता का तबादला मुंबई स्थित प्रतिष्ठित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में हो गया। पिता के इस ट्रांसफर के चलते पूरा घोषाल परिवार राजस्थान से मुंबई आ गया। मुंबई आने के बाद श्रेया ने अपनी स्कूली पढ़ाई अनुशक्ति नगर में स्थित ‘एटॉमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल’ से पूरी की। संगीत के लिए साइंस छोड़कर लिटरेचर का रास्ता चुना स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद श्रेया ने एटॉमिक एनर्जी जूनियर कॉलेज में साइंस स्ट्रीम में दाखिला लिया था। हालांकि, संगीत के प्रति उनके गहरे समर्पण और बढ़ते रियाज के कारण उन्हें समझ आया कि साइंस की पढ़ाई के साथ गायकी को पूरा वक्त दे पाना आसान नहीं होगा। संगीत साधना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उन्होंने स्ट्रीम बदलने का साहसिक फैसला किया। इसके बाद उन्होंने ‘SIES कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स’ में एडमिशन लिया और वहां से अंग्रेजी साहित्य में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इस फैसले ने उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए संगीत की बारीकियों पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरी आजादी दी। चार साल की उम्र से रियाज और टीवी शो से मिली ऐतिहासिक पहचान श्रेया की संगीत यात्रा बेहद कम उम्र में ही शुरू हो चुकी थी। उन्होंने महज चार साल की उम्र में सुर साधना शुरू की और जब वह छह साल की हुईं, तब से उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का विधिवत और कड़ा प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। पिता के तबादले और मुंबई आने के बाद भी उनके दैनिक रियाज में कोई रुकावट नहीं आई। उनकी वर्षों की तपस्या साल 2000 में रंग लाई, जब महज 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने प्रतिष्ठित टीवी सिंगिंग रियलिटी शो ‘सा रे गा मा’ का खिताब अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनके पार्श्व गायन करियर ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी। जिस मुंबई शहर को उन्होंने कभी अनुशक्ति नगर की हरी-भरी वादियों के बीच एक शांत और अलग दुनिया की तरह देखा था, वही शहर आगे चलकर उनकी पेशेवर जिंदगी और भारतीय संगीत उद्योग में उनकी पहचान का सबसे मजबूत केंद्र बन गया। इसका आप पर असर यह संस्मरण दर्शाता है कि सही प्राथमिकताओं, शांत वातावरण और निरंतर अभ्यास के जरिए युवा किसी भी बड़े शहर की आपाधापी में अपनी प्रतिभा निखार सकते हैं। • कला और संगीत के छात्रों के लिए: यह कहानी स्पष्ट करती है कि अपने मुख्य लक्ष्य पर ध्यान लगाने के लिए समय प्रबंधन और अकादमिक संतुलन कितना जरूरी है। श्रेया की तरह साइंस से लिटरेचर की ओर शिफ्ट होने का निर्णय यह सिखाता है कि अपने जुनून को समय देने के लिए व्यावहारिक कदम उठाना फायदेमंद साबित हो सकता है। • मुंबई के निवासियों के लिए: यह संस्मरण शहर के उस शांत और योजनाबद्ध पहलू को रेखांकित करता है जो सामान्य भीड़भाड़ से परे है। अनुशक्ति नगर और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसी टाउनशिप यह साबित करती हैं कि महानगर के भीतर भी सुकून भरे आवासीय ठिकाने मौजूद हैं। • अभिभावकों के लिए: बच्चों की रुचि को चार और छह साल की छोटी उम्र में पहचानकर उन्हें शास्त्रीय आधार देना भविष्य की बड़ी सफलता की नींव तैयार करता है। अपने करियर के बदलावों के बीच बच्चों की प्रतिभा को प्राथमिकता देना एक मजबूत पारिवारिक सहयोग का उदाहरण पेश करता है। • करियर निर्माण के लिए: किसी भी बड़े मंच पर जाने से पहले वर्षों की बुनियादी साधना और नियमित रियाज सबसे आवश्यक शर्त है। सोलह वर्ष की उम्र में रियलिटी शो जीतने से पहले श्रेया ने दस साल तक शास्त्रीय संगीत की बुनियादी शिक्षा पूरी की थी। ऐसा क्यों हुआ श्रेया घोषाल का मुंबई आगमन उनके पिता के सरकारी ट्रांसफर के चलते हुआ, जिससे उन्हें देश की सबसे बड़ी मनोरंजन इंडस्ट्री के करीब रहने का अवसर मिला। • पिता का कार्यस्थल ट्रांसफर: श्रेया के पिता विश्वजीत घोषाल न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में कार्यरत थे, जिनका 1997 में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई में तबादला हुआ। इसी स्थानांतरण के कारण पूरे परिवार को राजस्थान के रावतभाटा से मुंबई की सरकारी टाउनशिप में शिफ्ट होना पड़ा। • अनुशक्ति नगर की अनूठी बनावट: अनुशक्ति नगर परमाणु ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के लिए बनाई गई एक योजनाबद्ध और विशाल टाउनशिप है। चेम्बूर और ट्रॉम्बे के पास स्थित होने के बावजूद यह क्षेत्र अत्यधिक हरियाली और शांति से घिरा हुआ है, जिससे बाहर के शोर का असर यहां नहीं पड़ता। • संगीत साधना के लिए स्ट्रीम बदलाव: साइंस विषय में प्रैक्टिकल और पढ़ाई का दबाव अधिक होने के कारण श्रेया ने आर्ट्स कॉलेज का रुख किया। अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई ने उन्हें रियाज के लिए अतिरिक्त समय और मानसिक एकाग्रता प्रदान की। सवाल-जवाब 1. मुंबई आने पर श्रेया घोषाल किस इलाके में रहती थीं? मुंबई आने पर श्रेया घोषाल अनुशक्ति नगर में रहती थीं, जो चेम्बूर के सामने और ट्रॉम्बे (तुरभे) वाले रास्ते पर स्थित है। 2. श्रेया घोषाल के पिता का क्या नाम है और वे कहां काम करते थे? उनके पिता का नाम विश्वजीत घोषाल है, जो न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में इंजीनियर थे और बाद में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई में पदस्थ हुए। 3. श्रेया घोषाल का परिवार मुंबई कब शिफ्ट हुआ था? साल 1997 में जब उनके पिता का तबादला भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में हुआ, तब उनका परिवार मुंबई शिफ्ट हुआ। 4. श्रेया ने साइंस छोड़कर अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएशन क्यों किया? संगीत साधना और नियमित रियाज पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने साइंस छोड़कर SIES कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएशन किया। 5. श्रेया घोषाल ने 'सा रे गा मा' का खिताब किस उम्र में और कब जीता? श्रेया घोषाल ने साल 2000 में महज 16 साल की उम्र में सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा' का खिताब जीता था। प्रेरणा और सबक श्रेया घोषाल की यात्रा यह सिद्ध करती है कि लगन, सटीक प्राथमिकताओं और वर्षों की नियमित साधना से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। • शुरुआत से लगन: चार साल की उम्र से गायन शुरू करना और छह साल में शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण लेना यह सिखाता है कि महानता की शुरुआत बचपन के अनुशासन से होती है। अपनी बुनियादी शिक्षा को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। • लक्ष्य के लिए सही चुनाव: साइंस छोड़कर लिटरेचर का रास्ता चुनना यह संदेश देता है कि अपने मुख्य पैशन को समय देने के लिए साहसी फैसले लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखना सफलता की कुंजी है। • वातावरण का सदुपयोग: अनुशक्ति नगर जैसे शांत माहौल में रहकर उन्होंने महानगर के भटकावों से दूर अपने रियाज को अनवरत जारी रखा। साधन और परिस्थितियों का सही इस्तेमाल हुनर को तराशता है। https://trendkia.com/entertainment/anushakti-nagar-ki-hariyali-se-mayanagari-ke-mncha-taka-shreya-ghoshal-ke-shuruati-dinon-ki-kahani-34687 TrendKia — Har trend, sabse pehle.