बचपन में टीवी देखने पर पड़ोसियों ने भगाया था, भारती सिंह ने सुनाई अपने पुराने दिनों की दास्तान भारती सिंह ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि बचपन में उनके पास टीवी नहीं था और पड़ोसियों के घर जाने पर उन्हें डांटकर निकाल दिया जाता था. मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह ने मनोरंजन जगत में अपनी खास पहचान बनाने से पहले जीवन में कड़े इम्तिहान देखे हैं. आज भले ही वह छोटे पर्दे का एक बेहद लोकप्रिय चेहरा बन चुकी हैं, लेकिन उनका शुरुआती सफर आसान नहीं रहा. हाल ही में अपने गेम शो के एक नए एपिसोड के दौरान उन्होंने 90 के दशक से जुड़ी अपनी एक पुरानी और दिलचस्प याद साझा की. उन्होंने बताया कि बचपन के दिनों में जब उनके अपने घर में टेलीविजन सेट नहीं था, तब टीवी देखने की चाहत में उन्हें किस तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था. पड़ोसियों के घर टीवी देखने पर झेलनी पड़ती थी बेरुखी भारती सिंह ने 'द इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष' में पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उस दौर में मोहल्ले के बहुत कम घरों में टेलीविजन हुआ करता था. ऐसे में पड़ोस के घर जाकर कार्यक्रम देखना आम बात थी, लेकिन वहां का अनुभव हमेशा सुखद नहीं रहता था. जब भी वह टीवी देखने की उम्मीद लेकर पड़ोसी के दरवाजे पहुंचती थीं, तो अक्सर उन्हें वहां से लौटा दिया जाता था. लोग स्क्रीन के आगे पर्दा गिरा देते थे ताकि कोई बाहर से न देख सके. इसके साथ ही उन्हें यह कहकर भगा दिया जाता था कि घर जाओ, क्या तुम्हें पढ़ाई नहीं करनी है. पुराने तानों को बनाया आगे बढ़ने की ताकत भारती ने इस कड़वे अनुभव को बेहद हल्के-फुल्के और मजाकिया लहजे में याद किया. उन्होंने कहा कि वह उन पड़ोसियों का शुक्रिया अदा करना चाहती हैं जिन्होंने उन्हें अपने घर से बाहर निकाला था. भारती के मुताबिक, उस दौर की बेरुखी और तानों ने ही उनके भीतर कुछ बड़ा करने की जिद पैदा की. उसी अपमान की वजह से उन्होंने दिन-रात मेहनत करने की ठानी, जिसका नतीजा यह निकला कि आज वह खुद टीवी की दुनिया पर राज कर रही हैं. मंच पर मौजूद दर्शक और मेहमान उनकी इस बात को सुनकर मुस्कुराए बिना नहीं रह सके. शो का प्रारूप और दर्शकों का मनोरंजन भारती सिंह अक्सर अपने संघर्ष भरे दिनों की बातें खुलकर करती हैं, जिससे कई लोगों को जीवन में आगे बढ़ने का हौसला मिलता है. जिस मंच पर उन्होंने यह किस्सा सुनाया, वह 'द इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष' एक मनोरंजक गेम शो है. इस शो में कई जाने-माने सितारे हिस्सा लेते हैं और अलग-अलग तरह की दिलचस्प चुनौतियों का सामना करते हैं. इसमें शारीरिक फुर्ती, हास्य और हुनर पर आधारित विभिन्न खेल आयोजित किए जाते हैं. मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए जाते हैं, जबकि खेल में पीछे रह जाने वाले कंटेस्टेंट्स को मजाकिया सजाएं भुगतनी पड़ती हैं. इसका आप पर असर भारती सिंह का यह अनुभव दिखाता है कि बचपन की चुनौतियां और दूसरों का नकारात्मक व्यवहार व्यक्ति की सफलता की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है. • प्रेरणा का स्रोत: सीमित संसाधनों में पले-बढ़े युवाओं के लिए यह कहानी एक बड़ा संदेश देती है. अभावों और अपमान से निराश होने के बजाय उसे अपनी मेहनत की ताकत में बदला जा सकता है. • दृष्टिकोण में बदलाव: अतीत के कड़वे अनुभवों को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना मानसिक मजबूती को दर्शाता है. पुरानी कड़वाहट को भुलाकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने से ही मुकाम हासिल होता है. • मेहनत का मूल्य: आज के समय में छोटे पर्दे पर पहचान बनाना आसान नहीं है. निरंतर लगन और खुद पर भरोसे के दम पर ही लंबे समय तक इंडस्ट्री में टिके रहा जा सकता है. • पारिवारिक बातचीत: 90 के दशक के अनुभवों से आज की पीढ़ी को यह समझने में मदद मिलती है कि तकनीक और सुख-सुविधाएं कितनी आसानी से उपलब्ध हो चुकी हैं. इससे वर्तमान संसाधनों की कद्र करने की सीख मिलती है. ऐसा क्यों हुआ यह वाकया 90 के दशक में टेलीविजन की सीमित उपलब्धता और पड़ोसियों के कड़े रवैये की वजह से सामने आया था, जिसे भारती ने अपने शो के दौरान साझा किया. • सुविधाओं का अभाव: उस दौर में मध्यमवर्गीय और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों में निजी टेलीविजन सेट होना आम बात नहीं थी. इस कमी के कारण बच्चों को मनोरंजन के लिए पड़ोसियों के घरों पर निर्भर रहना पड़ता था. • पड़ोसियों का व्यवहार: मोहल्ले के जिन घरों में टीवी होता था, वे अक्सर अन्य बच्चों के जमावड़े को पसंद नहीं करते थे. इसी वजह से वे पर्दे लगाकर या डांटकर बच्चों को भगा दिया करते थे. • चुनौतियों को ताकत बनाना: भारती सिंह ने उस तिरस्कार को अपनी जिद बनाया और खुद को स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत शुरू की. उसी फैसले ने उनके पूरे करियर की दिशा बदल दी. सवाल-जवाब 1. भारती सिंह ने बचपन से जुड़ा कौन सा किस्सा साझा किया? भारती ने बताया कि बचपन में उनके घर टीवी नहीं था, और जब वह पड़ोसियों के यहां देखने जाती थीं, तो वे पर्दा गिराकर उन्हें डांटकर भगा देते थे. 2. भारती सिंह ने किस शो में अपने पुराने दिनों को याद किया? उन्होंने 'द इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष' के एक एपिसोड में 90 के दशक की इन यादों को ताजा किया. 3. भारती सिंह ने अपने पड़ोसियों का धन्यवाद क्यों किया? उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि पड़ोसियों के घर से निकाले जाने की वजह से ही उन्होंने इतनी मेहनत की और आज खुद टीवी पर नजर आ रही हैं. 4. 'द इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष' किस तरह का कार्यक्रम है? यह एक मनोरंजक गेम शो है जिसमें सेलिब्रिटीज शारीरिक, हास्य और हुनर पर आधारित मजेदार खेलों और चुनौतियों में मुकाबला करते हैं. प्रेरणा और सबक भारती सिंह का यह जीवन प्रसंग सिखाता है कि कैसे शुरुआती अभाव और तिरस्कार को सफलता की सीढ़ी बनाया जा सकता है. • अपमान को ईंधन बनाएं: जब कोई आपको कमतर आंके या अपने दरवाजे बंद करे, तो हताश होने के बजाय उस चुनौती को अपनी मेहनत में बदलें. भारती ने पड़ोसियों के तानों को अपनी सफलता की प्रेरणा बनाया. • अतीत से कड़वाहट मिटाएं: पुराने कटु अनुभवों को दिल में रखने के बजाय उन्हें मुस्कुराकर स्वीकार करना ही आगे बढ़ने का रास्ता है. भारती आज उन पड़ोसियों को भी धन्यवाद देती हैं जिनकी वजह से उन्होंने मेहनत करना सीखा. • अपनी जमीन न भूलें: शिखर पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों और पुराने संघर्षों को याद रखना एक कलाकार को मानवीय और प्रेरणादायक बनाता है. अपनी पुरानी कहानियों को साझा करने से दूसरों को हिम्मत मिलती है. https://trendkia.com/entertainment/bachapana-men-tivi-dekhane-para-parosiyon-ne-bhagaya-tha-bharti-singh-ne-sunai-apane-purane-dinon-ki-dastana-37995 TrendKia — Har trend, sabse pehle.