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  "title": "बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रत्युषा बनर्जी आत्महत्या मामले में राहुल राज सिंह को किया बरी",
  "summary": "टेलीविजन अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की मौत के करीब एक दशक बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके पार्टनर राहुल राज सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने समेत सभी आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है.",
  "content": "लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक 'बालिका वधू' में आनंदी के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की मौत के मामले में कानूनी प्रक्रिया एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके पार्टनर रहे राहुल राज सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के पास राहुल के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार और ठोस सामग्री मौजूद नहीं है, जिसके चलते उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया।\n\nजस्टिस एसजी डिगे की बेंच का फैसला\nइस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस एसजी डिगे की एकल पीठ ने राहुल राज सिंह की डिस्चार्ज याचिका को स्वीकार किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों से ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आता जो आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी साबित करने के लिए ट्रायल का आधार बन सके। अदालत ने यह भी माना कि यदि पर्याप्त सबूतों के अभाव में भी मुकदमा जारी रखा जाता, तो यह कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा होता। इस निर्णय के साथ ही राहुल राज सिंह पर दर्ज आपराधिक मामले पर पूर्ण विराम लग गया है।\n\nगोरेगांव स्थित आवास पर हुई थी घटना\nयह मामला 1 अप्रैल 2016 का है, जब 24 वर्षीय प्रत्युषा बनर्जी मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित अपने किराए के फ्लैट में फंदे से लटकी पाई गई थीं। उनके अचानक चले जाने से पूरे मनोरंजन जगत को गहरा धक्का लगा था। घटना के बाद अभिनेत्री की मां सोमा बनर्जी ने बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने राहुल राज सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। परिजनों ने दावा किया था कि राहुल प्रत्युषा को शारीरिक, मानसिक और वित्तीय रूप से प्रताड़ित कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा।\n\nसेशन कोर्ट से हाई कोर्ट तक कानूनी सफर\nमामले की जांच के दौरान जुलाई 2016 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहुल राज सिंह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए अग्रिम जमानत मंजूर की थी। पुलिस ने अपनी लंबी जांच के बाद वर्ष 2018 में अदालत के समक्ष आरोप पत्र पेश किया था। इसके बाद राहुल राज सिंह ने कानूनी राहत की मांग करते हुए स्वयं को आरोपमुक्त करने के लिए अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल की। हालांकि, अगस्त 2023 में डिंडोशी सेशन कोर्ट ने उनकी यह याचिका खारिज कर दी थी। उस दौरान सेशन कोर्ट का मानना था कि गवाहों के बयानों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपी के आचरण की वजह से मृतका का जीवन अत्यंत कठिन हो गया था। सेशन कोर्ट के इसी रुख को राहुल ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।\n\nबचाव पक्ष की प्रमुख दलीलें और साक्ष्य\nहाई कोर्ट में राहुल राज सिंह का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा और श्रेयांश मिठारे ने मजबूती से रखा। वकीलों ने अदालत को बताया कि घटना के तुरंत बाद दर्ज की गई प्राथमिकी अत्यंत जल्दबाजी में कराई गई थी और पुलिस को घटनास्थल से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट नहीं मिला था। बचाव पक्ष ने मामले के सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य यानी प्रत्युषा की मौत से लगभग एक घंटा पहले हुई आखिरी फोन कॉल की रिकॉर्डिंग का हवाला दिया। वकीलों के अनुसार, उस फोन कॉल में राहुल स्पष्ट तौर पर प्रत्युषा को ऐसा कोई आत्मघाती कदम न उठाने के लिए समझाते हुए सुनाई दे रहे थे और उन्होंने उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार भी किया था। इसके अलावा यह तथ्य भी अदालत के सामने रखा गया कि घटना की जानकारी मिलते ही राहुल ने ही फ्लैट का दरवाजा खुलवाया था और प्रत्युषा को तुरंत चिकित्सा सहायता दिलाने के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया था। इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने माना कि यह मामला आत्महत्या के लिए उकसाने का नहीं बनता और आरोपी को आरोपमुक्त कर दिया।\n\nइसका आप पर असर\nइस अदालती फैसले से आत्महत्या के मामलों में उकसाने के कानूनी मानकों और मुकदमों की वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट होती है।\n\n• कानूनी स्पष्टता: आत्महत्या के मामलों में केवल आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक उकसावे के ठोस कानूनी सबूत न हों, तब तक व्यक्ति को वर्षों तक ट्रायल का सामना करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।\n• आरोपमुक्ति का अधिकार: यह फैसला आरोपियों के अधिकार को रेखांकित करता है कि वे कमजोर साक्ष्यों पर डिस्चार्ज की मांग कर सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए अदालतें अपर्याप्त जांच पर आरोपमुक्त करने का कदम उठाती हैं।\n• मनोरंजन उद्योग में प्रभाव: ग्लैमर जगत में व्यक्तिगत रिश्तों और कानूनी विवादों की जटिलता को यह मामला दर्शाता है। वर्षों तक चलने वाली कानूनी प्रक्रियाओं के बाद आया यह निर्णय ऐसे हाई-प्रोफाइल विवादों के लिए एक मिसाल पेश करता है।\n• साक्ष्यों का महत्व: डिजिटल और फोन रिकॉर्डिंग जैसे तकनीकी साक्ष्य अदालत में अत्यधिक निर्णायक साबित होते हैं। इस मामले में अंतिम कॉल रिकॉर्डिंग ने बचाव पक्ष के तर्कों को मजबूती प्रदान की।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबॉम्बे हाई कोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि अभियोजन पक्ष के पास राहुल राज सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का ठोस मामला साबित करने के लिए जरूरी सबूत मौजूद नहीं थे।\n\n• सबूतों का अभाव: पुलिस जांच और चार्जशीट में ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जो यह साबित कर सकें कि राहुल ने सीधे तौर पर प्रत्युषा को खुदकुशी के लिए मजबूर किया था। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला था, जिससे उकसाने के आरोप कानूनी तौर पर कमजोर पड़ गए।\n• अंतिम कॉल रिकॉर्डिंग: घटना से एक घंटा पूर्व हुई फोन बातचीत में राहुल प्रत्युषा को समझाते और ऐसा कदम न उठाने का आग्रह करते सुने गए थे। इस साक्ष्य ने अभियोजन के उस तर्क को कमजोर किया कि राहुल उन्हें आत्महत्या के लिए उकसा रहे थे।\n• तुरंत सहायता पहुंचाने का प्रयास: घटना की सूचना मिलते ही राहुल ने फ्लैट का दरवाजा खुलवाया और प्रत्युषा को अस्पताल ले जाने की कोशिश की थी। इस आचरण ने यह दर्शाया कि उनका इरादा नुकसान पहुंचाने का नहीं था।\n• सेशन कोर्ट के रुख पर पुनर्विचार: डिंडोशी सेशन कोर्ट ने पहले गवाहों के बयानों पर डिस्चार्ज अर्जी खारिज की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने कानूनी कसौटी पर परखने के बाद ट्रायल जारी रखने को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहुल राज सिंह को लेकर क्या फैसला सुनाया?\nहाई कोर्ट ने राहुल राज सिंह को प्रत्युषा बनर्जी आत्महत्या मामले में सभी आरोपों से बरी करते हुए डिस्चार्ज कर दिया है.\n\n2. अदालत ने राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त करने का क्या कारण बताया?\nकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं और ऐसे में ट्रायल चलाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.\n\n3. प्रत्युषा बनर्जी की मौत कब और कहां हुई थी?\nप्रत्युषा बनर्जी 1 अप्रैल 2016 को मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित अपने किराए के फ्लैट में फंदे से लटकी पाई गई थीं.\n\n4. राहुल राज सिंह के वकीलों ने अदालत में कौन से अहम सबूत पेश किए?\nवकीलों ने सुसाइड नोट न होने, घटना से एक घंटे पहले की कॉल रिकॉर्डिंग जिसमें राहुल उन्हें समझा रहे थे, और अस्पताल ले जाने के प्रयासों का हवाला दिया.\n\n5. क्या इससे पहले सेशन कोर्ट ने राहुल की डिस्चार्ज अर्जी खारिज की थी?\nहां, अगस्त 2023 में डिंडोशी सेशन कोर्ट ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी.",
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  "publishedAt": "2026-09-30",
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