# फिल्म सर्टिफिकेशन के नियमों में तीन दशक बाद बड़ा सुधार, हिंसा और नशे के दृश्यों पर नए कड़े निर्देश

> दिसंबर 1991 के पुराने दिशा-निर्देशों की जगह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने नया ढांचा लागू किया है, जिसमें उम्र आधारित श्रेणियों के साथ संवेदनशील दृश्यों पर सख्त निगरानी तय की गई है।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/cbfc-ne-30-sala-bada-badale-philma-sartiphikeshana-niyama-hinsa-aura-dragsa-sinsa-para-sakhta-nirdesha-34184 · **Language:** Hindi
**Tags:** सेंसर बोर्ड, सीबीएफसी, फिल्म सर्टिफिकेशन, सिनेमा नियम, मनोरंजन, फिल्म गाइडलाइंस, बॉलीवुड

भारतीय सिनेमा के लिए प्रमाणन प्रणाली में तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद व्यापक बदलाव लागू किए गए हैं। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के नवनियुक्त 18 सदस्यों को इन अद्यतन नियमों के तहत फिल्मों के मूल्यांकन का दायित्व सौंपा गया है। इन नए सदस्यों में प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी और पंकज त्रिपाठी जैसी जानी-मानी फिल्मी हस्तियां शामिल हैं। नए दिशा-निर्देशों का मूल उद्देश्य प्रमाणन की प्रक्रिया को आधुनिक सामाजिक प्राथमिकताओं और वर्तमान मानकों के अनुकूल बनाना है, जबकि व्यवस्था के कई बुनियादी सिद्धांतों को पहले की तरह सुरक्षित रखा गया है। नए नियमों का सीधा प्रभाव फिल्म निर्माण से जुड़े रचनात्मक निर्णयों पर पड़ेगा, जहां सामाजिक मूल्यों और संवेदनशील विषयों के चित्रण में अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी।

## सर्टिफिकेशन का नया उम्र आधारित ढांचा
दिसंबर 1991 के पुराने नियमों को विस्थापित करते हुए नए प्रावधानों के तहत फिल्मों के वर्गीकरण को अधिक सूक्ष्म बनाया गया है। अब सिनेमाई सामग्री को दर्शकों की उम्र के अनुसार स्पष्ट सीमाओं में बांटा जाएगा। इसके लिए U और A श्रेणियों के अलावा विशेष तौर पर UA 7+, UA 13+, UA 16+ और S जैसी श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। बच्चों और किशोर दर्शकों के लिए उम्र के अलग-अलग पड़ावों को ध्यान में रखकर यह विभाजन किया गया है, जिससे अभिभावकों को यह निर्णय लेने में आसानी होगी कि कौन सी सामग्री किस आयु वर्ग के लिए उपयुक्त है।

## नशीले पदार्थों और हिंसा के चित्रण पर कड़ाई
मादक पदार्थों के सेवन और अवैध तस्करी के दृश्यों को लेकर नियामक तंत्र ने अपनी नीति अत्यंत सख्त कर दी है। यदि किसी दृश्य में नशीली दवाओं का इस्तेमाल या तस्करी दिखाई जाती है, तो निर्माताओं के लिए उस दृश्य के साथ स्पष्ट कानूनी चेतावनी प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही हिंसा, आपराधिक कृत्यों और समाज-विरोधी आचरण को सही ठहराने वाले दृश्यों की प्रस्तुति पर कड़ी सीमाएं तय की गई हैं। दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी असामाजिक व्यवहार या गैरकानूनी हिंसा को पर्दे पर महिमामंडित या तर्कसंगत सिद्ध करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

## संवेदनशील विषयों और सामाजिक संदर्भ का मूल्यांकन
संवेदनशील सामाजिक मुद्दों के फिल्मांकन को लेकर भी स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। फिल्मों में बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार, मूक जीवों के प्रति क्रूरता और दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े प्रसंगों को बेवजह या गैर-जरूरी तरीके से प्रस्तुत करने पर रोक रहेगी। इसके अतिरिक्त सांप्रदायिक सौहार्द को चोट पहुंचाने वाले अथवा राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को भड़काने वाले दृश्यों पर नियामक समिति विशेष निगरानी रखेगी। फिल्मों के दृश्यों का आकलन करते समय बोर्ड सामग्री के समग्र संदर्भ, कहानी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समकालीन सामाजिक मानकों का समग्रता से विश्लेषण करेगा।

## इसका आप पर असर
सिनेमा प्रेमियों और फिल्म उद्योग दोनों के लिए यह सुधार सीधे तौर पर देखने के अनुभव और निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

- **दर्शकों के लिए:** टिकट खरीदते समय अब दर्शकों को आयु वर्ग की अधिक सटीक जानकारी मिलेगी। इससे माता-पिता अपने बच्चों के लिए फिल्म चुनते समय उपयुक्त उम्र सीमा का सही आकलन कर सकेंगे।
- **फिल्म निर्माताओं के लिए:** पटकथा और दृश्यों के फिल्मांकन में कानूनी चेतावनियों और सीमाओं का ध्यान रखना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने पर फिल्म के प्रमाणन और रिलीज में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
- **संवेदनशील सामग्री पर असर:** पर्दे पर नशे और क्रूरता के दृश्यों को बिना चेतावनी दिखाए जाने पर पूरी तरह रोक लगेगी। इसके चलते सिनेमाघरों में दर्शकों को अधिक जिम्मेदारी से तैयार किया गया कॉन्टेंट देखने को मिलेगा।
- **उद्योग में जवाबदेही:** ऐतिहासिक या सामाजिक संदर्भों को सही परिप्रेक्ष्य में पेश करने की जिम्मेदारी बढ़ेगी। इससे गैर-जरूरी विवादों और कानूनी अड़चनों से बचने में फिल्मकारों को सहायता मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म प्रमाणन प्रणाली को आधुनिक युग के अनुरूप बनाने और दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तीन दशक बाद इन नियमों को संशोधित किया गया है।

- **पुराने नियमों की अप्रासंगिकता:** इससे पूर्व लागू दिशानिर्देश दिसंबर 1991 में जारी किए गए थे, जो समकालीन मीडिया और समाज के बदलते स्वरूप से मेल नहीं खा रहे थे। आधुनिक सामाजिक मानकों को शामिल करने के लिए पुराने ढांचे में सुधार की लंबे समय से आवश्यकता थी।
- **दर्शक वर्ग का वर्गीकरण:** पहले की सीमित श्रेणियों के कारण बच्चों और किशोरों के लिए स्पष्ट उम्र सीमा तय करना कठिन था। इसीलिए माता-पिता के मार्गदर्शन को सुगम बनाने के लिए कई स्तरों में आयु आधारित उप-श्रेणियां जोड़ी गई हैं।
- **संवेदनशील विषयों पर निगरानी:** सामाजिक स्तर पर नशीले पदार्थों, हिंसा और असामाजिक गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कड़े नियम बनाए गए हैं। फिल्मों के माध्यम से समाज-विरोधी कृत्यों को सही ठहराने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म सर्टिफिकेशन के नए नियम कितने वर्षों बाद बदले गए हैं?
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के दिशानिर्देशों में 30 साल बाद बदलाव किए गए हैं। इससे पहले के नियम दिसंबर 1991 में जारी किए गए थे।

### 2. नए नियमों के तहत फिल्मों को किन श्रेणियों में बांटा जा सकता है?
अब फिल्मों को सामग्री के आधार पर U, UA 7+, UA 13+, UA 16+, A या S श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।

### 3. फिल्मों में ड्रग्स या नशे के दृश्यों को लेकर क्या नया नियम बनाया गया है?
नशीले पदार्थों के सेवन या उनकी तस्करी दिखाने पर फिल्म निर्माताओं को उस दृश्य के साथ कानूनी चेतावनी दिखाना अनिवार्य होगा।

### 4. सेंसर बोर्ड के नवनियुक्त 18 सदस्यों में कौन से प्रमुख अभिनेता शामिल हैं?
नए सदस्यों में अभिनेता सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी और अभिनेत्री प्रीति जिंटा शामिल हैं।

### 5. किन संवेदनशील विषयों के चित्रण पर विशेष रोक लगाई गई है?
बच्चों के साथ गलत बर्ताव, जीवों के प्रति क्रूरता, दिव्यांगों के अनुचित चित्रण और सांप्रदायिक या देश-विरोधी दृश्यों पर कड़ी पाबंदी रहेगी।

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