चर्च में शादी की शपथ दोहराकर सूर्या और ज्योतिका ने मनाया अपने 20 साल के रिश्ते का सफर अभिनेता सूर्या और अभिनेत्री ज्योतिका ने अपने वैवाहिक जीवन के 20 वर्ष पूरे होने पर एक ईसाई रीति-रिवाज वाले निजी समारोह में एक-दूसरे संग दोबारा विवाह की कसमें खाईं। दक्षिण भारतीय सिनेमा के जाने-माने कलाकार सूर्या और ज्योतिका ने अपने वैवाहिक रिश्ते के 20 शानदार वर्ष पूरे होने का जश्न एक बेहद निजी और आत्मीय अंदाज में मनाया है। इस खास अवसर पर दोनों कलाकारों ने एक गिरजाघर में ईसाई परंपरा के तहत दोबारा शादी की कसमें दोहराईं। मूल रूप से इस जोड़े का विवाह 11 सितंबर 2006 को संपन्न हुआ था, और सितंबर 2026 में इनके दांपत्य जीवन के दो दशक पूरे हो चुके हैं। इस बार किसी पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज के स्थान पर उन्होंने चर्च में एक शांत समारोह आयोजित किया, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे के प्रति अपने समर्पण को फिर से व्यक्त किया। चर्च समारोह और बच्चों की मौजूदगी का भावुक दृश्य अभिनेत्री ज्योतिका ने इस सुंदर आयोजन का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा किया। इस वीडियो क्लिप में ज्योतिका सफेद रंग के खूबसूरत गाउन में अपने बेटे के साथ चर्च के गलियारे से वेदी की ओर कदम बढ़ाती दिखाई दे रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, अभिनेता सूर्या अपनी बेटी के साथ खड़े होकर उनका इंतजार कर रहे थे, जिसमें सूर्या ने सफेद सूट जैकेट के साथ काले रंग की पैंट पहनी हुई थी। दोनों ने जब एक-दूसरे के सामने खड़े होकर अपनी प्रतिज्ञाएं लीं, तो माहौल काफी भावुक हो गया। इस वीडियो में उनकी वैवाहिक यात्रा और इस खास दिन की यादगार तस्वीरों का एक मोंटाज भी शामिल किया गया है। 20 वर्षों के उतार-चढ़ाव और आपसी समझ का उत्सव अपनी इस पोस्ट के साथ ज्योतिका ने दांपत्य जीवन की असल सच्चाई को रेखांकित करते हुए एक बेहद भावपूर्ण संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि यह अवसर 20 वर्षों के प्रेम और छोटी-मोटी तकरार को संजोने का है, जिसके तहत उन्होंने फिर से अपनी कसमें ली हैं। उनके अनुसार, यह आयोजन किसी परिपूर्ण वैवाहिक रिश्ते का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह उन इंसानी कमियों, समझौतों, एक-दूसरे को गहराई से समझने, अनगिनत बलिदानों और निस्वार्थ प्रेम की स्वीकृति का पर्व है। उन्होंने इसे पूरी तरह से अपनी साझी पहचान और उस सफर का उत्सव बताया कि इतने सालों में वे दोनों एक-दूसरे के लिए क्या बन चुके हैं। सपनों के सच होने और कभी शिकायत न करने की प्रतिज्ञा अपने विचार साझा करते हुए ज्योतिका ने आगे लिखा कि जो बात कभी एक बहुत दूर के सपने जैसी लगती थी, आज वही उनकी जीती-जागती हकीकत बन चुकी है और वे अपनी पूरी जिंदगी इसी तरह जीना चाहती हैं। अपनी कसमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे सदैव खुश रहने का संकल्प लेती हैं, क्योंकि उन्होंने जीवन के सिर्फ सकारात्मक पहलू को देखना चुना है। उन्होंने जीवन को एक अनमोल उपहार मानते हुए उसका उत्सव मनाने की कसम खाई। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब किसी को ऐसा जीवनसाथी मिले जो आपका खुद से भी अधिक सम्मान करता हो और कभी कोई गिला-शिकवा न रखे, तो ऐसे में वे भी जीवन भर कभी कोई शिकायत न करने का वादा करती हैं। अधूरेपन की खूबसूरती और बच्चों से मिली नई दिशा रिश्तों की गहराई पर बात करते हुए अभिनेत्री का मानना है कि दुनिया में कोई भी रिश्ता पूरी तरह मुकम्मल नहीं होता और हर चीज में थोड़ा अधूरापन रहता है। अपनी बात समझाते हुए उन्होंने लिखा कि जिस तरह इतना विशाल आसमान भी कभी जमीन को पूरी तरह नहीं छू पाता, उसी तरह जीवन में भी कुछ खालीपन हमेशा बना रहता है, और यह इंसान पर निर्भर करता है कि वह उन खाली जगहों को किस तरह भरता है। उन्होंने इस बात पर आभार व्यक्त किया कि वे हर सुबह एक ऐसे इंसान के आलिंगन में जागती हैं जो हमेशा उनकी रक्षा करता है। साथ ही उन्होंने अपने प्यारे बच्चों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उनके अस्तित्व को सही मायने दिए और जीने का उद्देश्य प्रदान किया। मकानों की मरम्मत का उदाहरण और अच्छी मां बनने का वादा ज्योतिका ने ठोस ईंटों से बने घरों का व्यावहारिक उदाहरण देकर समझाया कि कोई भी चीज खामियों से मुक्त नहीं होती। उन्होंने लिखा कि सबसे आलीशान और मजबूत ईंटों के मकानों में भी समय-समय पर सीलन, रिसाव या दीमक लग सकती है और उन्हें नियमित देखरेख और मरम्मत की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए वे हमेशा स्वस्थ रहने की कसम खाती हैं, क्योंकि स्वास्थ्य ही इंसान की सबसे असली संपत्ति है। एक मां के तौर पर अपनी भूमिका पर उन्होंने कहा कि वे सबसे अच्छी मां बनने का वादा करती हैं, और ऐसा इसलिए नहीं कि वे खाना बनाती हैं, घर संभालती हैं या मदद करती हैं, बल्कि इसलिए कि उनके चेहरे पर हमेशा वह मुस्कान रहे जो उनके बच्चों को अपने माता-पिता के उस खूबसूरत सफर को दोबारा जीने के लिए प्रेरित कर सके। सूर्या के नाम खास पैगाम और आने वाले बीस साल अपने पति सूर्या के लिए एक बेहद निजी संदेश में ज्योतिका ने कहा कि वे जीवन भर वही नासमझ पत्नी बनी रहने की कसम खाती हैं, जो बात-बात पर झगड़ती है और फिर खुद ही मान जाती है, ताकि हर झगड़े के बाद उनके और करीब आ सके। उन्होंने कहा कि वे अपने बीच की दोस्ती को सबसे ज्यादा सहेज कर रखना चाहती हैं, क्योंकि एक ही इंसान में आपका हमकदम, राजदार, बातों का साथी और सबसे अच्छा दोस्त मिल जाना बहुत बड़ी किस्मत की बात होती है, जो आपका पति भी हो और आपके बच्चों का पिता भी। अंत में उन्होंने अपने आने वाले बीस वर्षों के लिए एक-दूसरे के अधूरेपन को पूरी समझदारी के साथ अपनाने का संकल्प दोहराया। इसका आप पर असर प्रशंसकों और आम पाठकों के लिए यह खबर वैवाहिक रिश्तों में धैर्य, संतुलन और आपसी सम्मान बनाए रखने की एक व्यावहारिक सीख देती है। • रिश्तों में परिपक्वता: यह घटना दिखाती है कि लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते परफेक्शन के बजाय आपसी समझ और निरंतर समझौतों पर टिकते हैं। आम जोड़े भी अपने जीवन में खामियों को स्वीकार कर रिश्तों को मजबूत बना सकते हैं। • पारिवारिक संवाद: अपनी कमियों और जरूरतों पर खुलकर बात करने से परिवार में तालमेल बेहतर होता है। जीवनसाथी को दोस्त और बराबर का भागीदार मानने से गृहस्थी में तनाव कम होता है। • मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य: संबंधों में खुशहाली बनाए रखने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच को प्राथमिकता देना आवश्यक है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ही परिवार को लंबे समय तक खुश रखा जा सकता है। • बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव: माता-पिता का आपस में सम्मानजनक व्यवहार बच्चों को भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कराता है। यह उन्हें भविष्य में स्वस्थ और परिपक्व संबंध बनाने की दिशा दिखाता है। ऐसा क्यों हुआ सूर्या और ज्योतिका ने अपने दांपत्य जीवन के 20 साल पूरे होने के अवसर को यादगार बनाने के लिए गिरजाघर में दोबारा विवाह की कसमें खाईं। इस निजी आयोजन का उद्देश्य दो दशकों के साझी यात्रा, त्याग और आपसी प्रेम का सम्मान करना था। • 20वीं सालगिरह का पड़ाव: 11 सितंबर 2006 को विवाह बंधन में बंधे इस जोड़े ने सितंबर 2026 में अपने रिश्ते के बीस वर्ष पूरे किए। इस ऐतिहासिक पड़ाव को उन्होंने एक शांत और निजी समारोह के रूप में मनाने का निर्णय लिया। • कसमें दोहराने की इच्छा: दोनों कलाकारों ने अपने दांपत्य जीवन के उतार-चढ़ाव, समझौतों और अनकहे बलिदानों को स्वीकार करते हुए एक-दूसरे के प्रति अपनी निष्ठा फिर से प्रकट करने के लिए यह कदम उठाया। • परिवार की साझी उपस्थिति: अपने बच्चों को इस यात्रा का प्रत्यक्ष भागीदार बनाने और उनके सामने अपनी प्रतिज्ञाओं को नए सिरे से जीने के उद्देश्य से उन्होंने इस समारोह का आयोजन किया। सवाल-जवाब 1. सूर्या और ज्योतिका की शादी कब हुई थी? सूर्या और ज्योतिका की शादी 11 सितंबर 2006 को हुई थी। 2. कपल ने अपनी 20वीं सालगिरह पर दोबारा शादी कैसे की? उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों के बजाय एक गिरजाघर में ईसाई परंपरा के अनुसार निजी समारोह में दोबारा विवाह की कसमें खाईं। 3. इस समारोह में उनके बच्चे किस तरह शामिल हुए? वीडियो में ज्योतिका अपने बेटे के साथ चर्च में आगे बढ़ती दिखीं, जबकि उनकी बेटी सूर्या के साथ खड़ी नजर आईं। 4. समारोह के दौरान दोनों ने किस रंग की पोशाक पहनी थी? ज्योतिका ने सफेद गाउन पहना था, जबकि सूर्या ने सफेद सूट जैकेट और काली पैंट पहनी थी। 5. ज्योतिका ने अपनी कसमों में किस बात का विशेष उल्लेख किया? उन्होंने हमेशा खुश रहने, कभी शिकायत न करने, स्वस्थ रहने और सूर्या के साथ अपनी दोस्ती को सहेजने की कसमें खाईं। प्रेरणा और सबक सूर्या और ज्योतिका का दांपत्य सफर आधुनिक दौर के जोड़ों के लिए रिश्तों को सहेजने और आपसी विश्वास कायम रखने की एक वास्तविक प्रेरणा है। • खामियों को स्वीकारना: किसी भी संबंध में पूर्णता खोजने के बजाय एक-दूसरे की कमजोरियों और गलतियों को खुले दिल से अपनाना ही रिश्ते की असली ताकत बनता है। • दोस्ती को प्राथमिकता: अपने जीवनसाथी को सबसे पहले अपना सबसे अच्छा दोस्त और बराबर का भागीदार समझना वैवाहिक जीवन की नींव को मजबूत करता है। • लगातार संवाद और समझ: हर छोटे-मोटे झगड़े के बाद बातचीत के जरिए दूरी मिटाना और अहंकार को दूर रखना रिश्तों को टूटने से बचाता है। • स्वास्थ्य को असली दौलत मानना: परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती को बनाए रखना ही जीवन की सबसे मूल्यवान पूंजी है। https://trendkia.com/entertainment/charcha-men-shadi-ki-shapatha-doharakara-suriya-aura-jyotika-ne-manaya-apane-20-sala-ke-rishte-ka-saphara-34861 TrendKia — Har trend, sabse pehle.