# चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से दो हफ्ते की मोहलत, जमा करने होंगे 2 करोड़ रुपये

> सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को दो हफ्ते के भीतर रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा कराने और पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है, जबकि उनके वकील ने इसे बड़ी राहत बताया है।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/cheka-baunsa-mamale-men-rajpal-yadav-ko-supreme-court-se-do-haphte-ki-mohalata-jama-karane-honge-2-karora-rupaye-34833 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजपाल यादव, सुप्रीम कोर्ट, चेक बाउंस, बॉलीवुड, सूर्यकांत, भास्कर उपाध्याय, अता पता लापता

बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता राजपाल यादव को वर्षों पुराने चेक बाउंस विवाद में देश की शीर्ष अदालत से शर्तों के साथ कुछ वक्त की राहत मिली है। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता को अपना पक्ष रखने और बकाया राशि के एक हिस्से का भुगतान करने के लिए दो हफ्ते का अंतिम समय दिया है। इस निर्धारित समयावधि में उन्हें शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में कम से कम 2 करोड़ रुपये जमा करने का स्पष्ट आदेश दिया गया है। इसके अलावा, अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक को अगली सुनवाई तक बरकरार रखा है, जिससे उन्हें फिलहाल हिरासत में जाने से सुरक्षा मिल गई है।

## पासपोर्ट सरेंडर करने की शर्त और अगली सुनवाई
अदालत ने राहत देने के साथ ही अभिनेता पर कुछ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। पीठ ने निर्देश दिया है कि राजपाल यादव को तुरंत अपना पासपोर्ट सक्षम प्राधिकारी के पास सरेंडर करना होगा। मामले की अगली सुनवाई अब 5 अक्टूबर के लिए तय की गई है, तब तक के लिए उनकी अंतरिम सुरक्षा जारी रहेगी। इस कानूनी कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान तय शर्तों का पूरी तरह पालन हो।

## कोर्ट रूम में सख्त टिप्पणी और वकील का पक्ष
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजपाल यादव के पुराने आचरण को लेकर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके पिछले रवैये को देखते हुए उन पर सहजता से भरोसा करना कठिन है। पीठ ने बॉलीवुड में अभिनय और अदालत के भीतर ‘ड्रामा’ किए जाने को लेकर भी तीखे सवाल उठाए। हालांकि, इन तल्ख टिप्पणियों के बाद भी अदालत ने उन्हें एक अंतिम अवसर प्रदान किया।

शीर्ष अदालत के इस रुख के बाद अभिनेता के कानूनी प्रतिनिधि भास्कर उपाध्याय ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस अदालती आदेश को अपने मुवक्किल के लिए अनुकूल बताते हुए कहा कि पहले जहां 5 करोड़ रुपये जमा कराने की मांग सामने थी, वहीं अब अदालत ने इस राशि को घटाकर 2 करोड़ रुपये निर्धारित कर दिया है। वकील ने भरोसा दिलाया कि उनकी लीगल टीम न्यायिक निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करेगी और दो सप्ताह की तय सीमा में 2 करोड़ रुपये जमा करवा दिए जाएंगे।

## 15 साल पुराना विवाद और अता पता लापता फिल्म का कर्ज
यह पूरा कानूनी विवाद लगभग 15 वर्ष पुराना है, जिसका संबंध राजपाल यादव के निर्देशन में बनी फिल्म ‘अता पता लापता’ से है। साल 2010 में इस सिनेमाई परियोजना को पूरा करने के लिए अभिनेता ने दिल्ली स्थित एक कंपनी से लगभग 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त की थी। दुर्भाग्यवश, रिलीज के बाद यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों को आकर्षित करने में नाकाम रही और बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

परियोजना के व्यावसायिक रूप से असफल होने के बाद वित्तीय देनदारियों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहरा गए। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, साल 2013 में कर्ज के निपटारे के उद्देश्य से अभिनेता ने लगभग 1.05 करोड़ रुपये के मूल्य वाले सात अलग-अलग चेक जारी किए थे। बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर ये सभी चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला दीवानी और आपराधिक कानूनी धाराओं के तहत अदालत की चौखट तक पहुंच गया।

## जुर्माना, ब्याज और कानूनी सजा की स्थिति
बीते एक दशक से अधिक समय में मूल रकम पर ब्याज और कानूनी शुल्क जुड़ते जाने से बकाया देनदारी काफी बढ़ गई। इस प्रकरण में अभिनेता को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और उनकी सजा के निर्धारण को लेकर भी न्यायिक प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। फिलहाल 5 अक्टूबर तक उन्हें गिरफ्तारी से राहत देते हुए अदालत ने 2 करोड़ रुपये के भुगतान और पासपोर्ट जमा करने की शर्त रखी है, जिसके आधार पर ही आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

## इसका आप पर असर
यह अदालती आदेश दिखाता है कि व्यावसायिक देनदारियों और चेक बाउंस से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया कितनी सख्त हो सकती है।

- **कानूनी जवाबदेही:** चेक बाउंस मामलों में अदालतें किसी भी सेलिब्रिटी या सार्वजनिक हस्ती को विशेष रियायत नहीं देती हैं। समझौता या राहत हासिल करने के लिए भी देनदार को एक तय राशि जमा करनी ही पड़ती है।
- **यात्रा पर पाबंदी:** बकाया वित्तीय मामलों में अक्सर विदेश जाने पर रोक लगाने के लिए पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया जाता है। इसका सीधा असर संबंधित व्यक्ति के पेशेवर दौरों और विदेशी प्रोजेक्ट्स पर पड़ता है।
- **फिल्म निवेशकों के अधिकार:** सिनेमा या किसी भी व्यवसाय में दिए गए कर्ज या निवेश की वसूली के लिए कानूनी रास्ते प्रभावी रहते हैं। यदि जारी किए गए चेक अनादरित होते हैं, तो निवेशक न्यायालय के जरिए अपनी पूंजी और ब्याज की मांग कर सकते हैं।
- **समय सीमा का दबाव:** दो हफ्ते की अंतिम मोहलत मिलने के कारण संबंधित पक्ष को बहुत कम समय में भारी रकम का प्रबंध करना होता है। तय समय पर 2 करोड़ रुपये जमा न होने पर गिरफ्तारी का सीधा जोखिम बन जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अदालती कार्यवाही एक दशक से भी अधिक पुराने कर्ज विवाद और उसके निपटारे के लिए दिए गए चेकों के अनादरित होने के कारण शुरू हुई।

- **फिल्म का वित्तीय नुकसान:** साल 2010 में फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए दिल्ली की एक कंपनी से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के फ्लॉप होने से वित्तीय संकट गहराया और रकम की वापसी अटक गई।
- **चेक बाउंस होना:** देनदारी चुकाने के लिए 2013 में करीब 1.05 करोड़ रुपये मूल्य के सात अलग-अलग चेक जारी किए गए थे। बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर ये सभी सात चेक बाउंस हो गए, जिसने इस विवाद को आपराधिक वाद में बदल दिया।
- **पुराना असहयोगात्मक आचरण:** सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि पूर्व में तय शर्तों और प्रक्रियाओं के प्रति अभिनेता का रवैया भरोसा जगाने वाला नहीं रहा है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे ड्रामा करार दिया और सख्त शर्तों के साथ ही राहत देना उचित समझा।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को क्या राहत दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है और 2 करोड़ रुपये जमा करने के लिए दो हफ्ते की मोहलत दी है।

### 2. अदालत ने अभिनेता पर कौन सी मुख्य शर्तें लगाई हैं?
उन्हें दो हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में कम से कम 2 करोड़ रुपये जमा करने होंगे और अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा।

### 3. यह विवाद किस फिल्म और रकम से जुड़ा हुआ है?
यह मामला 2010 की फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी से लिए गए करीब 5 करोड़ रुपये के कर्ज और 2013 में बाउंस हुए सात चेकों से संबंधित है।

### 4. राजपाल यादव के वकील ने अदालती आदेश पर क्या कहा?
अधिवक्ता भास्कर उपाध्याय ने इसे बड़ी राहत बताया क्योंकि जमा करने की राशि 5 करोड़ से घटकर 2 करोड़ रुपये हुई है, और उन्होंने आदेश का पालन करने का भरोसा दिया।

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