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  "type": "article",
  "title": "छह राष्ट्रीय पुरस्कार और 40 हजार से अधिक गीतों की विरासत छोड़ गए एसपी बालासुब्रमण्यम",
  "summary": "पांच दशकों से अधिक के संगीत सफर में 16 भाषाओं में अपनी आवाज देने वाले दिग्गज गायक एसपी बालासुब्रमण्यम की पुण्यतिथि पर उनके असाधारण रिकॉर्ड और उपलब्धियों पर एक नजर।",
  "content": "भारतीय संगीत जगत में अपनी अनूठी गायकी और असीम बहुमुखी प्रतिभा के दम पर करोड़ों दिलों पर राज करने वाले महान गायक एसपी बालासुब्रमण्यम की 25 सितंबर को पुण्यतिथि है। उनका संपूर्ण जीवन सुरों की अनवरत साधना का ऐसा असाधारण दस्तावेज रहा है, जिसने भारतीय सिनेमा की कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। संगीत और कला के क्षेत्र में दिए गए उनके ऐतिहासिक योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल करने की अद्वितीय उपलब्धि भी दर्ज की।\n\nचार अलग भाषाओं में छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने का कीर्तिमान\nएसपी बालासुब्रमण्यम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने केवल एक क्षेत्र या भाषा तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्हें जिन छह राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया, वे अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों के गानों के लिए थे। इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत साल 1979 में तेलुगु फिल्म ‘शंकराभरणम’ से हुई थी, जिसके जरिए उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके फौरन बाद उत्तर भारत और बॉलीवुड में भी उनकी मखमली आवाज का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा।\n\nसाल 1981 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ के मशहूर गीत ‘तेरे मेरे बीच में’ ने पूरे देश को उनका दीवाना बना दिया और इसके लिए उन्हें बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके बाद तेलुगु सिनेमा में उनकी बादशाहत लगातार कायम रही। साल 1983 में उन्होंने फिल्म ‘सागर संगमम’ और फिर साल 1988 में आई फिल्म ‘रुद्रवीणा’ के गीतों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए। किसी भी किरदार के हाव-भाव और मिजाज के अनुकूल अपनी आवाज को ढाल लेने का उनका फन उन्हें अपने दौर के अन्य सभी गायकों से मीलों आगे रखता था।\n\nदो दशकों तक लगातार चलता रहा राष्ट्रीय सम्मान का सफर\nराष्ट्रीय मंच पर अपनी गायकी का परचम लहराने का यह सिलसिला लगभग बीस वर्षों तक अनवरत चलता रहा। साल 1995 में कन्नड़ फिल्म ‘संगीत सागर गानयोगी पंचाक्षर गवई’ में गाए गीतों के लिए उन्हें एक बार फिर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर चुना गया। इस ऐतिहासिक सफर का छठा राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें इसके ठीक अगले ही साल 1996 में तमिल फिल्म ‘मिनसारा कनवु’ के चर्चित गीत ‘थंगा थमराई’ के लिए मिला। इस तरह उन्होंने तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ और तमिल जैसी चार प्रमुख भारतीय भाषाओं में गाए गानों के दम पर छह राष्ट्रीय ट्रॉफियां अपने नाम कीं।\n\nसिनेमाई पुरस्कारों के अलावा राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक समृद्धि में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2001 में उन्हें पद्म श्री और साल 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। 25 सितंबर 2020 को उनका देहांत हो गया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति सचिवालय की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर साल 2021 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा।\n\nराज्य स्तरीय सम्मान और अनगिनत उपाधियां\nफिल्म उद्योग और संगीत सभाओं में एसपी बालासुब्रमण्यम का कद बेहद विशाल था। आंध्र प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित नंदी अवॉर्ड्स में उनका दबदबा कई वर्षों तक देखा गया, जहां उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने विभिन्न श्रेणियों में कुल 25 नंदी पुरस्कार जीते। इसके अतिरिक्त तमिलनाडु सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मान कलैमामणि अवॉर्ड से सम्मानित किया, जबकि साल 2008 में कर्नाटक सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित कर्नाटक राज्योत्सव अवॉर्ड प्रदान किया। इसके साथ ही कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधियां और अनगिनत अन्य प्रतिष्ठित सम्मान भेंट किए।\n\nपांच दशकों का शानदार सफर और 40 हजार से अधिक गाने\nएसपी बालासुब्रमण्यम का कलात्मक सफर पांच दशकों से भी अधिक समय तक फैला रहा। इस दौरान उन्होंने 16 विभिन्न भाषाओं में 40 हजार से ज्यादा गानों की रिकॉर्डिंग करके गायकी के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया। हालांकि उनकी पहचान केवल एक पार्श्व गायक तक ही सीमित नहीं रही। उन्होंने कई फिल्मों में यादगार अभिनय किया, संगीत निर्देशन की बागडोर संभाली, फिल्मों के लिए डबिंग की और निर्माता के तौर पर फिल्म निर्माण में भी अपना उल्लेखनीय योगदान दिया। भले ही 25 सितंबर 2020 को वे इस भौतिक दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनके गाए कालजयी गीत आज भी करोड़ों श्रोताओं के दिलों में जीवित हैं।\n\nइसका आप पर असर\nएसपी बालासुब्रमण्यम की संगीत यात्रा भारतीय संस्कृति और कला प्रेमियों के लिए एक अद्वितीय प्रेरणा है।\n\n• संगीत साधकों और कलाकारों के लिए: भाषा की सीमाओं से परे जाकर किसी भी बोली में सहज गायन सीखने की मिसाल पेश करता है। युवा गायकों को यह सिखाता है कि मेहनत और बहुमुखी प्रतिभा से किसी भी भाषा के श्रोताओं का दिल जीता जा सकता है।\n• सिनेमा और संगीत प्रेमियों के लिए: विभिन्न भाषाओं के क्लासिक गीतों का एक विशाल खजाना उपलब्ध कराता है। श्रोता आज भी उनके 40 हजार से अधिक गानों के जरिए भारतीय संगीत के स्वर्णिम काल का आनंद ले सकते हैं।\n• कला जगत के लिए: गायकी के साथ अभिनय, डबिंग और संगीत निर्देशन में बहुआयामी प्रतिभा का मानक स्थापित करता है। यह रचनात्मक उद्योग से जुड़े युवाओं को कई विधाओं में निपुणता हासिल करने की प्रेरणा देता है।\n• सांस्कृतिक एकता के लिए: उत्तर और दक्षिण भारत के संगीत को एक धागे में पिरोने का सशक्त माध्यम बना। यह दिखाता है कि कला किस प्रकार देश के सभी राज्यों और संस्कृतियों को आपस में जोड़ सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएसपी बालासुब्रमण्यम की पुण्यतिथि पर उनके जीवन और अभूतपूर्व उपलब्धियों को उनकी बहुमुखी प्रतिभा और राष्ट्रीय योगदान के कारण विशेष रूप से याद किया जाता है।\n\n• असाधारण भाषाई और वोकल रेंज: वे किसी भी भाषा के उच्चारण और किरदार की मनोदशा को बारीकी से समझकर गाते थे। इसी कारण उन्हें तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और हिंदी चारों भाषाओं में अलग-अलग राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए।\n• विभिन्न सिनेमाई क्षेत्रों में निरंतरता: उन्होंने पांच दशकों तक अपनी लोकप्रियता को बरकरार रखा और हर दौर के संगीत निर्देशकों के साथ काम किया। 1970 के दशक से लेकर 2020 तक उनकी आवाज का जादू कभी धीमा नहीं पड़ा।\n• सर्वोच्च राष्ट्रीय और राज्यीय सम्मान: उनके इस अप्रतिम योगदान के कारण ही भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और मरणोपरांत 2021 में पद्म विभूषण से अलंकृत किया। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक की सरकारों ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एसपी बालासुब्रमण्यम का निधन कब हुआ था?\nएसपी बालासुब्रमण्यम का निधन 25 सितंबर 2020 को हुआ था।\n\n2. एसपी बालासुब्रमण्यम ने अपने करियर में कितने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते?\nउन्होंने अपने करियर में कुल छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था।\n\n3. उन्हें हिंदी सिनेमा में किस गाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था?\nउन्हें 1981 की हिंदी फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ के गाने ‘तेरे मेरे बीच में’ के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।\n\n4. एसपी बालासुब्रमण्यम को किन प्रमुख नागरिक सम्मानों से नवाजा गया?\nउन्हें 2001 में पद्म श्री, 2011 में पद्म भूषण और 2021 में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।\n\n5. उन्होंने अपने पूरे करियर में कुल कितने गाने रिकॉर्ड किए?\nउन्होंने पांच दशकों से ज्यादा लंबे करियर में 16 भाषाओं में 40 हजार से ज्यादा गानों की रिकॉर्डिंग की थी।\n\n6. आंध्र प्रदेश सरकार से उन्हें कौन सा प्रमुख पुरस्कार मिला था?\nउपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित नंदी अवॉर्ड्स में अलग-अलग श्रेणियों में 25 पुरस्कार जीते थे।\n\nप्रेरणा और सबक\nएसपी बालासुब्रमण्यम का जीवन यह सिखाता है कि बहुमुखी प्रतिभा, लगातार सीखने की इच्छा और अपनी कला के प्रति अटूट समर्पण किसी भी इंसान को अमर बना सकता है।\n\n• भाषाई सीमाओं को तोड़ें: अपनी मातृभाषा के अलावा अन्य भाषाओं और संस्कृतियों को अपनाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। उन्होंने 16 भाषाओं में गाकर साबित किया कि संगीत की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।\n• हर विधा में खुद को परखें: केवल एक काम तक सीमित न रहकर नई भूमिकाओं को सीखने के लिए तैयार रहें। गायकी के साथ-साथ अभिनय, डबिंग और संगीत निर्देशन में उनका योगदान यही संदेश देता है।\n• निरंतरता और अनुशासन बनाए रखें: पांच दशकों से अधिक समय तक शीर्ष पर बने रहना केवल कड़ी मेहनत और अनुशासन से ही संभव है। 40 हजार से अधिक गानों की रिकॉर्डिंग उनकी अद्भुत लगन का प्रमाण है।\n• हर काम में स्वाभाविकता लाएं: जिस भी किरदार या प्रोजेक्ट के लिए काम करें, उसमें पूरी ईमानदारी से खुद को ढाल लें। किरदारों के अनुसार अपनी आवाज में बदलाव लाना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।",
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  "category": "मनोरंजन",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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