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  "title": "सिंटा चुनाव में पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों की शानदार जीत, लगे आरोपों पर दिया कड़ा जवाब",
  "summary": "सिंटा चुनाव में पद्मिनी कोल्हापुरे ने सबसे ज्यादा वोट हासिल किए, जबकि पूनम ढिल्लों दूसरे स्थान पर रहीं। जीत के बाद दोनों अभिनेत्रियों ने संगठन पर लगे चोरी और दस्तावेजों को हटाने के आरोपों पर अपनी स्थिति साफ की।",
  "content": "सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी सिंटा के कार्यकारी समिति के चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं, जिसमें अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस चुनाव में पद्मिनी कोल्हापुरे को सबसे अधिक 604 वोट मिले, जबकि उनके बाद अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने 601 वोट पाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। इस electoral सफलता के मिलने के तुरंत बाद दोनों कलाकारों ने संगठन के भीतर चल रही उठापटक और उनके ऊपर लगाए गए गंभीर इल्जामों पर खुलकर अपनी बात रखी और हर सवाल का जवाब दिया।\n\nजीत के बाद क्या बोलीं पद्मिनी कोल्हापुरे\nमतदान में शानदार प्रदर्शन के बाद पद्मिनी कोल्हापुरे ने सभी मतदाताओं के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को किसी प्रमाण पत्र के समान बताया और उन तमाम सदस्यों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उन पर भरोसा जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमेटी के भीतर कोई भी सदस्य छोटा या बड़ा नहीं होता है और सभी ने विपरीत परिस्थितियों में आपसी एकता बनाए रखी। मुश्किल दौर में साथ खड़े रहना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।\n\nचोरी और दस्तावेज हटाने के आरोपों पर सफाई\nचुनाव प्रक्रिया के दौरान संगठन की अन्य सदस्यों उपासना सिंह और कुनिका सदानंद ने पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने दोनों अभिनेत्रियों पर सिंटा के महत्वपूर्ण कागजात और सामान को अनुचित तरीके से हटाने का इल्जाम लगाया था, यहाँ तक कि चोरी के आरोप भी मढ़े गए थे। इन तमाम बातों का जवाब देते हुए पूनम ढिल्लों ने बताया कि संगठन के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था, जिसके चलते दैनिक संचालन और कलाकारों के कल्याण से जुड़े खर्चों के लिए फंड की आवश्यकता आन पड़ी थी। इसी वित्तीय जरूरत को पूरा करने के खातिर एफडी यानी फिक्स्ड डिपॉजिट को तोड़ने का निर्णय लिया गया था।\n\nपूनम ढिल्लों ने पूरी दृढ़ता से यह साफ किया कि एफडी को तोड़ने के पीछे किसी भी तरह का व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि न तो उन्होंने और न ही पद्मिनी कोल्हापुरे या किसी अन्य कमेटी सदस्य ने एक भी रुपया अपने निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किया है। उनके अनुसार, खर्च किए गए प्रत्येक पाई का पूरा लिखित रिकॉर्ड और हिसाब किताब उनके पास सुरक्षित रूप से उपलब्ध है।\n\nतीन साल के कार्यकाल और एजीएम पर रखी बात\nसिंटा में तीन साल के कार्यकाल को लेकर उठ रहे सवालों पर भी पूनम ढिल्लों ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने समझाया कि संगठन का कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं किया जाता है। इसके लिए पहले वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम बुलाई जाती है और उचित प्रस्ताव पारित किए जाते हैं। उनके अनुसार नियमों के तहत किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।\n\nपूनम ढिल्लों ने याद दिलाया कि उनके तीन साल के कार्यकाल से जुड़ा फैसला साल 2025 की एजीएम के दौरान ही लिया गया था। दिलचस्प बात यह है कि उस वक्त उपासना सिंह खुद संगठन की सचिव थीं और उन्होंने ही बैठक में इस फैसले का ऐलान किया था। अब चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद दोनों अभिनेत्रियों का मुख्य ध्यान सिंटा के कामकाज को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। तमाम विवादों और इल्जामों के बीच दोनों ने साफ कर दिया है कि संगठन के धन का दुरुपयोग कभी नहीं हुआ।\n\nइसका आप पर असर\nयह चुनाव परिणाम संगठन से जुड़े कलाकारों और उनके दैनिक कामकाज को प्रभावित करता है।\n\n• कलाकारों के लिए: संगठन के भीतर नए नेतृत्व के आने से सदस्यों के कल्याण से जुड़े मामलों पर तेजी से काम होने की उम्मीद है। कलाकारों को अपने पेशेवर मुद्दों के समाधान के लिए अब अधिक स्पष्टता मिल सकती है।\n• वित्तीय मामलों पर: विवादों के बीच खातों और फंड के उपयोग को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है। इससे भविष्य में संगठन के आर्थिक फैसलों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसिंटा संगठन के भीतर यह विवाद खातों के फ्रीज होने और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर उपजे मतभेदों के कारण पैदा हुआ था।\n\n• खातों का फ्रीज होना: संगठन के बैंक खातों के बंद होने के कारण दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। इसी वित्तीय संकट से निपटने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ी गई थी।\n• प्रशासनिक मतभेद: कमेटी के तीन साल के कार्यकाल और दस्तावेज हटाने के तरीकों को लेकर सदस्यों के बीच असहमति पैदा हो गई थी। इसी पृष्ठभूमि में विरोधियों ने चुनाव के दौरान चोरी और कागजात गायब करने के गंभीर आरोप लगाए थे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सिंटा चुनाव में सबसे ज्यादा वोट किसे मिले?\nपद्मिनी कोल्हापुरे ने सबसे ज्यादा 604 वोट हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया।\n\n2. पूनम ढिल्लों को सिंटा चुनाव में कितने वोट मिले?\nपूनम ढिल्लों ने 601 वोट हासिल कर चुनाव में दूसरा स्थान प्राप्त किया।\n\n3. पद्मिनी और पूनम पर किस तरह के आरोप लगे थे?\nउपासना सिंह और कुनिका सदानंद ने उन पर जरूरी दस्तावेज हटाने और चोरी करने के आरोप लगाए थे।\n\n4. फिक्स्ड डिपॉजिट क्यों तोड़ी गई थी?\nसंगठन के बैंक खाते फ्रीज होने के कारण कामकाज और सदस्यों के कल्याण से जुड़े खर्च चलाने के लिए एफडी तोड़ी गई थी।",
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  "category": "मनोरंजन",
  "publishedAt": "2026-10-23",
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