सिंटा फंड विवाद में उपासना सिंह के तीखे तेवर, पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर बिना इजाजत 90 लाख की एफडी तोड़ने का लगाया आरोप सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट्स एसोसिएशन में वित्तीय विवाद गहराया, जहां उपासना सिंह और नगमा ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर फ्रीज बैंक खाते दोबारा चालू कर फंड निकालने के आरोप लगाए हैं। सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी सिंटा की अंदरूनी कलह अब वित्तीय अनियमतताओं के गंभीर आरोपों के साथ खुलकर सामने आ गई है। संस्था की आंतरिक खींचतान के बीच बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा पैसों के दुरुपयोग का मसला गहरा गया है। पूर्व पदाधिकारी और अभिनेत्री उपासना सिंह ने संस्था की वरिष्ठ अभिनेत्रियों पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फंड का गलत इस्तेमाल करने के सीधे आरोप जड़े हैं। बिना सदस्यों की सहमति के 90 लाख रुपये की एफडी तोड़ने का दावा उपासना सिंह और अभिनेत्री नगमा का कहना है कि संस्था की पुरानी कमेटी भंग होने के बावजूद नियमों की अनदेखी की गई। उनका दावा है कि पहले से फ्रीज करवाए गए बैंक खातों को मनमाने ढंग से दोबारा चालू कराया गया और सिंटा की करीब 90 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी तोड़कर पैसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। उपासना सिंह के अनुसार, जब तक आम सदस्यों की आधिकारिक मंजूरी नहीं होती, तब तक किसी भी रजिस्टर्ड संस्था की एफडी को इस तरह नहीं तोड़ा जा सकता, लेकिन यहां सभी स्थापित नियमों को ताक पर रख दिया गया। पांच बैंकों में मौजूद खातों को एक्टिवेट कराने का घटनाक्रम उपासना सिंह ने मामले का ब्योरा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि सिंटा के खाते और एफडी अलग-अलग पांच बैंकों में मौजूद हैं। जब पुरानी कमेटी भंग हुई थी, उस समय दीपक पाराशर ट्रेजरर पद पर कार्यरत थे। उस दौरान संबंधित सभी पांचों बैंकों को औपचारिक पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता या फिर नई कमेटी विधिवत गठित नहीं हो जाती, तब तक इन सभी खातों को पूरी तरह फ्रीज रखा जाए। उपासना का आरोप है कि इस स्पष्ट रोक के बावजूद नियमों को दरकिनार करते हुए खाते दोबारा शुरू कराए गए और रकम दूसरी जगह स्थानांतरित की गई। केवाईसी प्रक्रिया और पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल इस पूरे मामले में उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों, पद्मिनी कोल्हापुरे और पेंटल पर सीधा निशाना साधा है। उनका आरोप है कि ये लोग ऑफिस के स्टाफ को साथ लेकर बैंक शाखा पहुंचे थे। वहां सिंटा के पुराने दस्तावेजों और आधिकारिक मुहर का इस्तेमाल करके केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराई गई। उपासना के मुताबिक, इन लोगों ने खुद को सिंटा की वर्तमान संचालन कमेटी का सदस्य बताकर फ्रीज पड़े बैंक खातों को फिर से एक्टिवेट करवाया। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि किसी भी संस्था के फंड के संचालन के लिए लोकतांत्रिक सहमति अनिवार्य होती है, जिसकी इस पूरी प्रक्रिया में घोर अनदेखी की गई। कर्मचारियों के वेतन और कोर्ट की तारीख पर नगमा का विरोध वहीं अभिनेत्री नगमा ने भी सिंटा के सुरक्षित फंड को इस तरह खर्च किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नगमा का कहना है कि एफडी तोड़कर उससे दफ्तर के कर्मचारियों का वेतन बांटा जा रहा है, जो किसी भी सूरत में उचित नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि यह पूंजी कलाकारों की गाढ़ी कमाई से जुड़ी है और इसका इस तरह मनमाना इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। नगमा ने जानकारी दी कि पूरे विवाद पर अदालत ने 26 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला अदालत के विचाराधीन है, तब न्यायिक फैसले का इंतजार किए बिना ताला तोड़कर दफ्तर में काबिज होना और एफडी से पैसे निकालना पूरी तरह अनुचित है। इसका आप पर असर कलाकार संघ के फंड विवाद से फिल्म व टेलीविजन उद्योग से जुड़े सदस्यों के कल्याण और संस्थागत पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ता है। • कलाकारों की जमापूंजी: संस्था के सदस्यों की सदस्यता और कल्याण कोष से जुड़े पैसों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आम कलाकारों के हितों की रक्षा के लिए अब 26 अक्टूबर को अदालत के आदेश पर नजर रहेगी। • संस्थागत कामकाज: सिंटा के बैंक खातों पर विवाद बढ़ने से रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। जब तक अदालत का रुख स्पष्ट नहीं होता, तब तक वैध नेतृत्व को लेकर असमंजस बना रहेगा। • वेतन भुगतान का मुद्दा: कार्यालय कर्मियों को एफडी तोड़कर सैलरी दिए जाने से भविष्य के आपातकालीन फंड में कमी आ सकती है। इससे संगठन के वित्तीय संतुलन और भविष्य की योजनाओं में अड़चनें पैदा हो सकती हैं। • संगठन की साख: वरिष्ठ कलाकारों के बीच आपसी खींचतान सार्वजनिक होने से आर्टिस्ट यूनियन के भीतर पारदर्शिता का संकट खड़ा हुआ है। आम सदस्य अब एसोसिएशन के संचालन के लिए सख्त ऑडिट और नियमों की मांग कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद सिंटा की गवर्निंग कमेटी के भंग होने के बाद वित्तीय अधिकारों और संस्थागत नियंत्रण को लेकर पैदा हुआ है। • कमेटी भंग होना: कार्यकारिणी समिति के भंग होने के बाद बैंक खातों को फ्रीज करने के निर्देश दिए गए थे। नई मान्यता प्राप्त कमेटी के अभाव में संस्थागत निर्णयों पर कानूनी गतिरोध बन गया। • फंड प्रबंधन में मतभेद: पूर्व कोषाध्यक्ष दीपक पाराशर के समय दिए गए निर्देशों के बावजूद पुराने दस्तावेजों से खाते चालू कराए गए। प्रशासनिक वेतन निकालने के लिए एफडी तोड़े जाने को विरोधी पक्ष ने अवैध घोषित कर दिया। • अदालती प्रक्रिया का इंतजार न करना: मामले में अदालत ने सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय कर रखी है। न्यायिक फैसले से पहले दफ्तर में प्रवेश करने और वित्तीय लेनदेन शुरू करने के कदम से टकराव बढ़ गया। सवाल-जवाब 1. उपासना सिंह ने किन लोगों पर सिंटा का फंड गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है? उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों, पद्मिनी कोल्हापुरे और पेंटल पर बिना अनुमति बैंक खाते दोबारा खुलवाने और फंड का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। 2. सिंटा की कितनी रकम की एफडी तोड़े जाने का दावा किया गया है? आरोप है कि संस्था के फ्रीज खातों को एक्टिवेट करवाकर करीब 90 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी तोड़ी गई है। 3. सिंटा के बैंक खाते किन बैंकों में हैं और उन्हें क्यों फ्रीज कराया गया था? संस्था के खाते पांच अलग-अलग बैंकों में हैं, जिन्हें कमेटी भंग होने पर अदालत के फैसले या नई कमेटी बनने तक फ्रीज रखने का निर्देश दिया गया था। 4. अभिनेत्री नगमा ने स्टाफ की सैलरी को लेकर क्या आपत्ति दर्ज कराई है? नगमा ने कहा कि कलाकारों की जमा पूंजी वाली एफडी तोड़कर दफ्तर के स्टाफ को वेतन देना पूरी तरह गलत है। 5. अदालत में इस विवाद को लेकर अगली तारीख कब निर्धारित है? इस पूरे मामले पर अदालत में सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की गई है। https://trendkia.com/entertainment/cintaa-phnda-vivada-men-upasana-singh-ke-tikhe-tevara-poonam-dhillon-aura-padmini-kolhapure-para-bina-ijajata-90-lakha-ki-fd-toran-41121 TrendKia — Har trend, sabse pehle.