कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को मिला विशाल भारद्वाज का साथ, चुनाव आयोग पर उठे सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट रिवीजन के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज का समर्थन मिला है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को अब सिनेमा जगत से भी समर्थन मिलने लगा है। जाने-माने फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज ने इस आंदोलन के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कहा कि किसी भी सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे पर खड़ा होना हर व्यक्ति का निजी फैसला होता है। इससे पहले भी कला और सिनेमा जगत के कई जाने-माने चेहरे इस मुहिम से जुड़ चुके हैं, जिससे यह विरोध प्रदर्शन लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। मुद्दों पर अपनी राय रखना हर नागरिक का निजी अधिकार: विशाल भारद्वाज प्रदर्शन स्थल पर बातचीत के दौरान विशाल भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि वे इस पूरे विवाद की हर बारीकी से शायद वाकिफ न हों, लेकिन वे इस आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे हैं। उनका कहना था कि किसी मुद्दे पर आवाज उठाना किसी दबाव में नहीं बल्कि अपनी व्यक्तिगत सोच पर निर्भर करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकारों को ऐसे मामलों पर बोलना चाहिए या नहीं, यह पूरी तरह से उनका व्यक्तिगत फैसला होना चाहिए। विशाल भारद्वाज के अनुसार, यदि किसी को महसूस होता है कि कुछ अनुचित हो रहा है, तो उसे खुलकर सामने आना चाहिए और अपनी बात रखनी चाहिए। वहीं अगर किसी को ऐसा नहीं लगता, तो उसके पास खामोश रहने या अलग रहने का भी पूरा अधिकार है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही फैसला लेना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर रोकने की मांग यह विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में आयोजित किया गया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी मतदाता सूची से जुड़ी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग भी उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के चलते कई वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने की आशंका पैदा हो रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य केवल डुप्लीकेट, मृत और अयोग्य मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम हटाना है, ताकि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। शिवाजी पार्क में जुटे दिग्गज कलाकार, शबाना आजमी ने उठाया हक का मुद्दा इस आंदोलन की गूंज तब और तेज हो गई थी जब 2 अक्टूबर को दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और संगीतकार विशाल ददलानी जैसे प्रमुख चेहरे शिवाजी पार्क पहुंचे। इन कलाकारों ने वहां पहुंचकर अभिजीत दीपके से मुलाकात की और आंदोलनकारियों की मांगों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई। शबाना आजमी ने प्रदर्शन के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए मतदान के अधिकार को संविधान प्रदत्त सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जब नागरिकों से उनका मताधिकार छीनने या मतदाता सूची से नाम गायब होने जैसी स्थिति बनती है, तो शांतिपूर्ण विरोध जताना लोकतांत्रिक अधिकार बन जाता है। उनका कहना था कि नागरिकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहना होगा और किसी भी प्रकार की अनुचित प्रक्रिया को स्वीकार नहीं करना चाहिए। इसका आप पर असर इस विरोध प्रदर्शन और वोटर लिस्ट संशोधन विवाद का सीधा असर आम मतदाताओं की जागरूकता और उनके मताधिकार पर पड़ सकता है। • भारत में: देश भर के नागरिकों को अपनी स्थानीय वोटर लिस्ट में नाम की स्थिति दोबारा जांचने के लिए प्रेरित होना पड़ेगा। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान किसी वैध वोटर का नाम गलती से न कट जाए। • महाराष्ट्र में: शिवाजी पार्क में इस विरोध प्रदर्शन के चलते मुंबई और आसपास के इलाकों में नागरिक संगठनों की सक्रियता बढ़ सकती है। स्थानीय निवासी चुनाव आयोग के दावों और राजनीतिक दलों के आरोपों के बीच अपने मतदाता पहचान पत्रों के सत्यापन में तेजी ला सकते हैं। • सिनेमा और कला जगत पर: मशहूर हस्तियों के खुले समर्थन से अन्य कलाकारों पर भी सार्वजनिक मुद्दों पर स्टैंड लेने का दबाव बढ़ सकता है। इससे यह तय होगा कि सांस्कृतिक हस्तियां भविष्य में राजनीतिक विमर्श में कितनी भागीदारी करती हैं। • प्रशासनिक स्तर पर: चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की अपनी प्रक्रिया में और अधिक स्पष्टता तथा पारदर्शिता दिखाने का दबाव रहेगा। इसके चलते आयोग को मतदाताओं के सवालों के जवाब देने के लिए अतिरिक्त सूचना तंत्र स्थापित करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से मतदाता सूची में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया और इसके संचालन को लेकर उपजे अविश्वास के कारण शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे एक नियमित सुधार बता रहा है। • सीजेपी की आपत्तियां: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का आरोप है कि वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा के नाम पर योग्य मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। इसी के चलते संगठन ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। • चुनाव आयोग का तर्क: चुनाव आयोग का रुख है कि यह अभियान पूरी तरह से पारदर्शी है और इसका उद्देश्य केवल मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाना है। आयोग ने किसी भी प्रकार की अनुचित प्रक्रिया या धांधली के आरोप को पूरी तरह गलत बताया है। • कलाकारों का जुड़ना: 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और बाद में विशाल भारद्वाज के शामिल होने से इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली। कलाकारों ने मताधिकार के संरक्षण को बुनियादी लोकतांत्रिक कर्तव्य मानकर आंदोलनकारियों के पक्ष में आवाज उठाई। सवाल-जवाब 1. विशाल भारद्वाज ने किस विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है? विशाल भारद्वाज ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन का समर्थन किया है। 2. कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं? पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही है। 3. चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या सफाई दी है? चुनाव आयोग ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का उद्देश्य केवल डुप्लीकेट, मृत और अयोग्य मतदाताओं को बाहर करना है। 4. विशाल भारद्वाज के अलावा कौन-से प्रमुख कलाकार इस प्रदर्शन में शामिल हुए? शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और संगीतकार विशाल ददलानी भी 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। https://trendkia.com/entertainment/cockroach-janata-party-ke-pradarshana-ko-mila-vishal-bhardwaj-ka-satha-election-commission-para-uthe-savala-42440 TrendKia — Har trend, sabse pehle.