दायरा रिव्यू (2026): करीना कपूर और पृथ्वीराज का दमदार अभिनय लेकिन कमजोर कहानी ने बिगाड़ा खेल मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी क्राइम थ्रिलर 'दायरा' में पुलिस एनकाउंटर और त्वरित न्याय पर सवाल उठाए गए हैं, जहां बेहतरीन अभिनय के बावजूद कमजोर पटकथा दर्शकों को निराश करती है। फिल्म समीक्षकों की नजर से देखें तो दायरा रिव्यू कानून व्यवस्था और त्वरित न्याय की जटिलताओं को सामने लाता है। 'सैम बहादुर' के तीन साल बाद निर्देशक मेघना गुलजार की नई क्राइम थ्रिलर 'दायरा' सिनेमाघरों में आ चुकी है। इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन और करीना कपूर खान मुख्य किरदारों में नजर आ रहे हैं। कहानी एक चर्चित एनकाउंटर मामले के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो कानूनी प्रक्रिया, नैतिक मूल्यों और पुलिस मुठभेड़ों की जमीनी हकीकत पर तीखे सवाल खड़े करती है। हालांकि, गंभीर और जरूरी विषय पर आधारित होने के बाद भी यह फिल्म दर्शकों पर अपेक्षित गहरा प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो पाती। एनकाउंटर और नैतिक द्वंद्व की कहानी फिल्म की पटकथा में पृथ्वीराज सुकुमारन ने डीसीपी रमन कुमार की भूमिका निभाई है, जो एक मुठभेड़ के दौरान चार आरोपियों को मार गिराते हैं और रातों-रात जनता की नजरों में नायक बन जाते हैं। दूसरी तरफ, मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा डीसीपी अजूनी यानी करीना कपूर खान को सौंपा जाता है। शुरुआत में कहानी यह गंभीर सवाल उठाती है कि क्या त्वरित न्याय को वास्तव में सही न्याय माना जा सकता है। लेकिन जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती है, पटकथा अपने ही उठाए सवालों के जाल में उलझ जाती है और अंत में दर्शकों को अधूरापन महसूस होता है। इसका आप पर असर फिल्म और कला प्रेमियों के लिए यह समीक्षा सिनेमाई प्राथमिकताओं और देखने के निर्णय को प्रभावित करती है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यदि आप सिर्फ मुख्य कलाकारों के गंभीर अभिनय को देखना पसंद करते हैं, तो ही थिएटर का रुख करें। कमजोर पटकथा के कारण संपूर्ण मनोरंजन या थ्रिल की उम्मीद निराशा में बदल सकती है। • मनोरंजन बजट पर असर: दर्शक टिकट खरीदने से पहले समीक्षाओं को ध्यान में रखकर अपने पैसे और समय का बेहतर चुनाव कर सकते हैं। सिनेमाघरों में जाने के बजाय ओटीटी रिलीज का इंतजार करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। • समाजिक विमर्श: यह फिल्म समाज में त्वरित न्याय और पुलिस एनकाउंटर पर बहस छेड़ने का काम करती है। दर्शक कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मानवाधिकारों को लेकर अपने नजरिए का मूल्यांकन कर सकते हैं। • कलाकारों के प्रशंसकों के लिए: करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के प्रशंसकों को उनके संजीदा स्क्रीन प्रेजेंस की झलक मिलेगी। हालांकि फिल्म की गति और उलझी कहानी उनकी उम्मीदों को सीमित कर सकती है। ऐसा क्यों हुआ फिल्म के प्रभावहीन साबित होने के मुख्य कारणों में इसकी संरचनात्मक और कथा संबंधी कमजोरियां शामिल हैं। • कमजोर पटकथा: फिल्म एक ज्वलंत और नैतिक मुद्दे को उठाने के बाद उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने में लड़खड़ा गई। कहानी अपने ही दार्शनिक सवालों में उलझकर बिखर जाती है। • दिशाहीन गति: निर्देशक ने एक संवेदनशील विषय चुना, मगर थ्रिलर के आवश्यक तनाव को अंत तक बनाए रखने में निर्देशन कमजोर पड़ा। इसके चलते कलाकारों की सशक्त उपस्थिति भी फिल्म को उबार नहीं पाई। • अपेक्षाओं का दबाव: 'सैम बहादुर' जैसी सफल फिल्म के तीन साल बाद मेघना गुलजार से दर्शकों को एक बेहद सधी हुई कहानी की उम्मीद थी। इस स्तर पर पटकथा का ढीला होना फिल्म को और अधिक कमजोर बना देता है। सवाल-जवाब 1. क्या दायरा देखने लायक है? यदि आप करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के संजीदा अभिनय के मुरीद हैं तो इसे देख सकते हैं, लेकिन कमजोर पटकथा के कारण यह बहुत प्रभावी नहीं बन पाई है। 2. फिल्म दायरा की कहानी किस विषय पर आधारित है? यह क्राइम थ्रिलर एक पुलिस एनकाउंटर मामले और त्वरित न्याय की सच्चाई के इर्द-गिर्द घूमती है। 3. फिल्म में मुख्य किरदार किसने निभाए हैं? फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन ने डीसीपी रमन कुमार और करीना कपूर खान ने जांच अधिकारी डीसीपी अजूनी की भूमिका निभाई है। 4. फिल्म दायरा का निर्देशन किसने किया है? इस फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है, जो 'सैम बहादुर' के तीन साल बाद लौटी हैं। 5. दायरा जैसी कौन सी फिल्में हैं? यह फिल्म कानून और व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली 'सैम बहादुर', 'तलवार' और अन्य खोजी क्राइम थ्रिलर फिल्मों की श्रेणी में आती है। https://trendkia.com/entertainment/daayra-rivyu-2026-kareena-kapoor-aura-prithviraj-ka-damadara-abhinaya-lekina-kamajora-kahani-ne-bigara-khela-34458 TrendKia — Har trend, sabse pehle.