दादासाहेब फाल्के सम्मान के बाद भी कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में मिथुन चक्रवर्ती को न्योता नहीं मिलने पर सिनेमा जगत में विवाद दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का निमंत्रण नहीं मिला है। इस अनदेखी पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि कला को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। कोलकाता में आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के आमंत्रण पत्र से भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती का नाम गायब रहने पर कला जगत और प्रशंसकों के बीच गहरा असंतोष फैल गया है। हाल ही में भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने के बावजूद, अपने ही गृह नगर के इस बड़े आयोजन में न्योता न मिलने पर अभिनेता का दर्द छलक पड़ा है। उन्होंने इस उपेक्षा पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि शायद आयोजकों की दृष्टि में वे इतने बड़े कलाकार नहीं बने हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित मंच पर आमंत्रित किया जाए। अपने ही शहर में निमंत्रण न मिलने पर छलका दर्द मीडिया से बातचीत के दौरान जब अभिनेता से कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने अपनी उदासी को छुपाया नहीं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के आयोजन के लिए उन्हें कोई आधिकारिक आमंत्रण पत्र नहीं भेजा गया है। डिस्को डांसर के नाम से मशहूर इस वरिष्ठ कलाकार ने बेहद शालीन लेकिन मर्मस्पर्शी अंदाज में कहा कि अपने ही शहर में आयोजित होने वाले इतने प्रतिष्ठित सिनेमा उत्सव का हिस्सा न बनाया जाना काफी दुखद है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि संभवतः वे अभी इतने बड़े मुकाम पर नहीं पहुंचे हैं कि उन्हें इतने विशाल मंच पर याद किया जाए। इस वक्तव्य के सार्वजनिक होते ही फिल्म उद्योग से लेकर सोशल मीडिया मंचों तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कला और राजनीति के तराजू पर सिनेमा को न तोलने की अपील इस अनदेखी के पीछे किसी राजनीतिक कारण की संभावना पर पूछे गए प्रश्न का जवाब देते हुए मिथुन चक्रवर्ती ने बेहद परिपक्व और गंभीर दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से कला और राजनीति को दो अलग-अलग ध्रुव मानते हैं और दोनों का आपस में कोई घालमेल नहीं होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कोई अन्य पक्ष राजनीतिक मतभेदों या विचारों के कारण उन्हें सिनेमा के इस भव्य उत्सव से दूर रख रहा है, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अभिनेता के अनुसार, सिनेमा उनके लिए किसी पवित्र पूजा के समान है और इसे राजनीति के तराजू में तौलना कला का अपमान है। दादासाहेब फाल्के सम्मान के बावजूद उपेक्षा पर प्रशंसकों में रोष यह बात ध्यान देने योग्य है कि मिथुन चक्रवर्ती को हाल ही में देश के सबसे बड़े फिल्मी पुरस्कार दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया है। देश और विदेश में भारतीय सिनेमा की पहचान को सशक्त करने वाले इतने बड़े कद के कलाकार को कोलकाता के अपने ही फेस्टिवल में याद न किए जाने पर उनके चाहने वाले स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों ने आयोजकों के इस रवैये के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई है। समर्थकों का कहना है कि मिथुन चक्रवर्ती भारतीय फिल्म जगत के एक ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिन्हें अपनी पहचान सिद्ध करने के लिए किसी औपचारिक निमंत्रण की आवश्यकता नहीं है। प्रशंसकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की राजनीति या आपसी मतभेद के कारण इतने महान अभिनेता की उपेक्षा करना सर्वथा अनुचित है। इसका आप पर असर • भारत में: यह घटना कला और राजनीति के बढ़ते मिश्रण तथा वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान पर सिनेमा जगत में नई बहस को जन्म देती है। • पश्चिम बंगाल में: स्थानीय फिल्म प्रेमियों और आयोजकों के बीच सांस्कृतिक आयोजनों में तटस्थता बनाए रखने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल-जवाब 1. मिथुन चक्रवर्ती को किस फिल्म फेस्टिवल का न्योता नहीं मिला? उन्हें कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (KIFF) का आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला। 2. हाल ही में मिथुन चक्रवर्ती को कौन सा बड़ा सम्मान मिला है? उन्हें हाल ही में भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 3. न्योता न मिलने पर मिथुन चक्रवर्ती ने क्या प्रतिक्रिया दी? उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि शायद वे इतने बड़े अभिनेता नहीं हैं कि उन्हें इस बड़े मंच पर बुलाया जाए। 4. राजनीति के सवाल पर मिथुन चक्रवर्ती ने क्या कहा? उन्होंने कहा कि वे कला और राजनीति को अलग रखते हैं, लेकिन अगर राजनीति की वजह से उन्हें दूर रखा जा रहा है तो यह दुखद है। https://trendkia.com/entertainment/dadasaheb-phalke-sammana-ke-bada-bhi-kolkata-philma-phestivala-men-mithun-chakraborty-ko-nyota-nahin-milane-para-sinema-jagata-men-16953 TrendKia — Har trend, sabse pehle.