देवेंद्र फडणवीस से मिली 'हनुमान अंश' की टीम, निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के प्रयासों की हुई सराहना महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने आवास 'वर्षा' पर फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम से मुलाकात कर उनकी सफलता पर बधाई दी। इससे पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी इस आध्यात्मिक सिनेमाई प्रस्तुति की तारीफ कर चुके हैं। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर बनी सिनेमाई प्रस्तुति ‘हनुमान अंश’ को दर्शकों और राजनीतिक हस्तियों से व्यापक प्रशंसा मिल रही है। इसी कड़ी में फिल्म निर्माण से जुड़े सदस्यों ने शनिवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से औपचारिक भेंट की। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के नेतृत्व में पूरी टीम मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पहुंची, जहां उन्होंने सौहार्दपूर्ण माहौल में संवाद किया और साथ ही प्रथम पूज्य गणपति बप्पा का आशीर्वाद भी लिया। मुख्यमंत्री आवास वर्षा पर मुलाकात और अभिनंदन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने आवास पर पधारे फिल्म दल का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म की विषयवस्तु, तकनीकी पहलुओं और उसके संदेश की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री ने पूरी टीम को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए साधुवाद दिया और भविष्य की यात्रा के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। देवेंद्र फडणवीस ने इस यादगार भेंट की झलकियां सोशल मीडिया पर भी साझा कीं। उन्होंने अपने संदेश में उल्लेख किया कि अपने आधिकारिक आवास वर्षा में ‘हनुमान अंश’ के रचनाकारों से मिलना और साथ में गणपति बप्पा की वंदना करना अत्यंत सुखद अनुभव रहा। उन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और उनके सहयोगियों की मेहनत को सराहते हुए कहा कि ऐसे सार्थक प्रयास भारतीय जनमानस को गहराई से छूते हैं। मोहन यादव भी कर चुके हैं फिल्म के आध्यात्मिक संदेश की प्रशंसा महाराष्ट्र में हुए इस सम्मान से पूर्व, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी ‘हनुमान अंश’ को देखकर अपनी गहरी प्रतिक्रिया व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने फिल्म में भारतीय जीवन मूल्यों, अटूट आस्था और सनातन परंपराओं के सजीव चित्रण को बेहद प्रभावशाली बताया था। मोहन यादव का मानना था कि यह सिनेमाई कृति नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक विचारों और भगवान हनुमान के प्रति अगाध श्रद्धा को समझने का एक सुंदर माध्यम बनकर उभरी है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया था कि फिल्म केवल धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा भाव, परोपकार और समाज सुधार में भक्ति के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने पर्दे पर नीम करोली बाबा के स्वरूप को जीवंत करने वाले अभिनेता शोभिनव सत्या के अभिनय की भी विशेष प्रशंसा की थी और कहा था कि उनका समर्पण पर्दे पर स्पष्ट झलकता है। नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की पहल फिल्म की सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए मोहन यादव ने यह विचार भी रखा था कि भारत की समृद्ध परंपराएं सदैव पूज्य संतों के तपस्वी जीवन से आलोकित रही हैं। आधुनिक परिवेश में जब युवा वर्ग अपनी जड़ों से दूर हो रहा है, तब ऐसे प्रेरक विषयों पर बनी फिल्में उन्हें देश के सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिक चेतना और आध्यात्मिक धरोहर से जोड़े रखने में अहम सेतु का काम करती हैं। सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मोहन यादव ने रेखांकित किया था कि नीम करोली बाबा के जीवन दर्शन पर आधारित यह कृति मानवतावाद, करुणा और वंचितों के उत्थान का सशक्त संदेश देती है। अब जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी फिल्म के काम को सराहा है, तब से ‘हनुमान अंश’ के निर्माताओं का उत्साह और बढ़ गया है। विभिन्न मंचों से मिल रही इस सकारात्मक प्रतिक्रिया ने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और पूरी टीम के प्रयासों को एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। इसका आप पर असर फिल्म को प्रमुख नेताओं द्वारा दिए जा रहे समर्थन से दर्शकों और सांस्कृतिक सिनेमा के परिदृश्य पर स्पष्ट प्रभाव देखने को मिल रहा है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: आध्यात्मिक और संत जीवन पर आधारित प्रेरक फिल्मों को मुख्यधारा में नया स्थान मिल रहा है। दर्शक पारिवारिक परिवेश में भारतीय दर्शन और आस्था पर केंद्रित प्रामाणिक सामग्री देखने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। • फिल्म निर्माताओं के लिए: सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर काम कर रहे निर्देशकों को उच्च स्तर से मान्यता मिलने से नया प्रोत्साहन मिलता है। इससे भविष्य में भक्ति, सेवा और सुधार के संदेश पर केंद्रित गंभीर बजट की परियोजनाओं को गति मिलेगी। • युवा वर्ग के लिए: आधुनिक पीढ़ी को सरल और दृश्य माध्यम के जरिए पारंपरिक मूल्यों को समझने का अवसर प्राप्त हो रहा है। वे मनोरंजन के साथ-साथ संत परंपराओं और निःस्वार्थ सेवा भाव के नैतिक महत्व को आसानी से आत्मसात कर सकते हैं। • सामुदायिक जीवन में: लोक कल्याण और सेवा कार्यों के प्रति समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ती है। फिल्म का संदेश लोगों को जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक सौहार्द की दिशा में प्रेरित करता है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम तब घटित हुआ जब फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम ने अपनी सफलता के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। • सफलता का अभिनंदन: फिल्म द्वारा अर्जित लोकप्रियता और प्रशंसा के बाद निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने अपनी टीम के साथ मुख्यमंत्री आवास जाकर भेंट की। मुख्यमंत्री ने उनके सिनेमाई प्रयासों और रचनात्मक निष्ठा को औपचारिक रूप से सराहा। • सांस्कृतिक सिनेमा को प्रोत्साहन: शासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा अक्सर ऐसी कलाकृतियों को बढ़ावा दिया जाता है जो सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को रेखांकित करती हैं। इसी क्रम में यह शिष्टाचार बैठक आयोजित हुई। • पूर्व में मिली सराहना की निरंतरता: इससे पूर्व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा भी फिल्म के संदेश और अभिनय की खुलकर तारीफ की जा चुकी थी। इस सकारात्मक माहौल ने फिल्म दल को अन्य प्रमुख मंचों तक पहुंचने का आत्मविश्वास दिया। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम ने किससे मुलाकात की? फिल्म की टीम ने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके आधिकारिक आवास 'वर्षा' पर मुलाकात की। 2. देवेंद्र फडणवीस ने फिल्म टीम के बारे में क्या कहा? उन्होंने फिल्म के बेहतरीन काम की प्रशंसा की, पूरी टीम को बधाई दी और भविष्य के लिए सफलता की शुभकामनाएं दीं। 3. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फिल्म को लेकर क्या राय दी थी? मोहन यादव ने कहा था कि यह फिल्म भारतीय परंपराओं, आस्था और नीम करोली बाबा से जुड़ी आध्यात्मिक विरासत को समझने का एक सुंदर माध्यम है। 4. फिल्म में नीम करोली बाबा का किरदार किस अभिनेता ने निभाया है? फिल्म में नीम करोली बाबा का किरदार अभिनेता शोभिनव सत्या ने निभाया है, जिनके अभिनय की विशेष रूप से सराहना की गई है। प्रेरणा और सबक फिल्म की यात्रा और संतों के जीवन दर्शन से आम नागरिकों के लिए कई सार्थक जीवन मूल्य उभरते हैं। • निःस्वार्थ सेवा की भावना: व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर समाज और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए काम करना ही सच्ची भक्ति है। जीवन में परोपकार को प्राथमिकता देना स्थायी संतोष प्रदान करता है। • सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव: आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपने मूल नैतिक मूल्यों और परंपराओं का सम्मान करना आवश्यक है। यह संतुलन समाज में व्यक्ति के चरित्र को सुदृढ़ बनाता है। • सार्थक उद्देश्य के प्रति निष्ठा: यदि कोई रचनात्मक कार्य नेक नीयत और प्रामाणिक भावना से किया जाए, तो उसे हर स्तर पर स्वाभाविक सम्मान प्राप्त होता है। अपने लक्ष्य पर अडिग रहकर कठिनाइयों को पार किया जा सकता है। https://trendkia.com/entertainment/devendra-fadnavis-se-mili-hanuman-ansh-ki-tima-nirdeshaka-vishal-chaturvedi-ke-prayason-ki-hui-sarahana-34313 TrendKia — Har trend, sabse pehle.