# धर्म पर टैक्स लगाने की बात कहकर विवादों में घिरे विवेक अग्निहोत्री, विश्व हिंदू परिषद ने लगाई तीखी फटकार

> कैंची धाम में उमड़ी भीड़ का वीडियो साझा कर धर्म पर कर लगाने की वकालत करने वाले फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री पर विश्व हिंदू परिषद भड़क उठी है।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/dharma-para-taiksa-lagane-ki-bata-kahakara-vivadon-men-ghire-vivek-agnihotri-vishva-hindu-parishad-ne-lagai-tikhi-phatakara-46576 · **Language:** Hindi
**Tags:** विवेक अग्निहोत्री, विश्व हिंदू परिषद, विनोद बंसल, कैंची धाम, धार्मिक परंपराएं, उत्तराखंड

फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री अपने बयानों के चलते एक नए बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं। हिंदू धार्मिक परंपराओं और तीर्थस्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं को लेकर की गई उनकी हालिया टिप्पणी पर विश्व हिंदू परिषद ने बेहद तल्ख रुख अपनाया है। संगठन की ओर से उनके इस दृष्टिकोण की सख्त शब्दों में मजम्मत की गई है और उनके रुख को कृतघ्नता करार दिया गया है। परिषद के नेताओं का कहना है कि जिस आस्था और धार्मिक समाज ने इस फिल्म निर्देशक को शोहरत और मुकाम बख्शा, आज वे उसी की नींव पर चोट करने की कोशिश कर रहे हैं।

## कैंची धाम के वीडियो से उपजा सारा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए एक दृश्य से हुई। विवेक अग्निहोत्री ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ से जुड़ा एक वीडियो रीपोस्ट किया था। इस फुटेज को आगे बढ़ाते हुए फिल्म निर्माता ने तर्क दिया कि यदि हुकूमत धर्म और धार्मिक गतिविधियों पर कर लगा दे, तो भारत पलक झपकते ही पूरी दुनिया का सबसे दौलतमंद मुल्क बन सकता है। आस्था के इस केंद्र पर जुटी भीड़ को वित्तीय चश्मे से देखने की इस कोशिश ने इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दे दिया।

## विश्व हिंदू परिषद की तीखी प्रतिक्रिया और गंभीर सवाल
अग्निहोत्री की इस दलील के सामने आने के बाद रविवार को विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर फिल्म निर्माता को आड़े हाथों लिया। बंसल ने स्पष्ट किया कि जिस समाज के संबल और प्यार से किसी को बुलंदी मिलती है, उसी धर्म, उसके विश्वास और प्राचीन रीति-रिवाजों को निशाना बनाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अग्निहोत्री लगातार हिंदू समाज की आस्था में खोट तलाशने में जुटे हैं, जो बेहद निराशाजनक है।

प्रवक्ता ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि अग्निहोत्री अब कुंभ मेले, पवित्र तीर्थयात्राओं, देवालयों, संतों और सदियों से चली आ रही भजन-कीर्तन की समृद्ध परंपराओं की नुक्ताचीनी करने की सीमा तक पहुंच गए हैं। बंसल ने सीधे तौर पर यह सवाल दागा कि क्या फिल्म निर्माता खुद को सनातन परंपरा का अनुयायी मानते हैं अथवा वे केवल नाममात्र के लिए हिंदू हैं। उनका आरोप था कि अग्निहोत्री उन करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को आहत कर रहे हैं, जिन्होंने उनके काम को स्वीकार किया और उन्हें एक पहचान दी।

## सांस्कृतिक पहचान और आत्मसम्मान का दिया संदेश
संगठन के प्रवक्ता ने फिल्म निर्माता को नसीहत दी कि उन्हें भारत की सांस्कृतिक धरोहर, उसकी ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सदियों पुरानी विरासत पर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी या अन्य सभ्यताओं से प्रभावित होकर अपने ही पूर्वजों के संस्कारों के प्रति हीन भावना पालने के बजाय, लोगों को अपनी मूल संस्कृति को गहराई से समझना चाहिए और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। इस बीच, धार्मिक अनुष्ठानों और तीर्थयात्राओं पर कर लगाने के विचार को लेकर जनमानस में बहस छिड़ी हुई है, जबकि परिषद ने इसे आस्था पर सीधा आघात करार दिया है।

## इसका आप पर असर
इस सार्वजनिक विवाद से तीर्थस्थलों की व्यवस्था और सांस्कृतिक विमर्श को लेकर सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

- **भारत में:** धार्मिक यात्राओं, मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर जारी विमर्श में नए पहलू जुड़ गए हैं। आम नागरिकों के बीच आस्था के स्थलों पर नागरिक सुविधाओं और वित्तीय अनुशासन को लेकर राय बंटती दिख रही है।
- **उत्तराखंड में:** कैंची धाम जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर दर्शनार्थियों के भारी दबाव को लेकर स्थानीय चर्चाएं तेज हो गई हैं। यहां पहुंचने वाले पर्यटकों और भक्तों के लिए यात्रा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित हो रहा है।
- **सांस्कृतिक संवाद:** सार्वजनिक हस्तियों द्वारा परंपराओं पर टिप्पणी करने को लेकर सामाजिक मर्यादाओं की सीमाएं रेखांकित हो रही हैं। इससे बौद्धिक जगत और धार्मिक संगठनों के बीच संवाद की दिशा प्रभावित हो सकती है।
- **कला और दर्शक वर्ग:** रचनाकारों और उनकी मुख्य दर्शक बिरादरी के बीच वैचारिक तालमेल पर इसका असर पड़ सकता है। फिल्मों और कलात्मक प्रयासों से जुड़े लोगों के लिए अपने समर्थकों की भावनाओं को समझना जरूरी बन रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद फिल्म निर्माता द्वारा सोशल मीडिया पर की गई एक विशिष्ट वित्तीय टिप्पणी और उसके बाद हिंदू संगठन द्वारा दी गई तीखी प्रतिक्रिया का नतीजा है।

- **प्रत्यक्ष कारण:** विवेक अग्निहोत्री ने कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का वीडियो साझा करते हुए धर्म पर कर लगाने का सुझाव दिया था। उन्होंने दावा किया था कि इससे भारत रातोंरात दुनिया का सबसे अमीर मुल्क बन सकता है।
- **विहिप की आपत्ति:** विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस टिप्पणी को हिंदू परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं पर अनावश्यक प्रहार माना। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्निहोत्री उसी समाज की मान्यताओं पर सवाल उठा रहे हैं जिसने उन्हें शोहरत दिलाई।
- **विस्तृत संदर्भ:** बंसल ने उल्लेख किया कि कुंभ, मंदिरों, संतों और भजन-कीर्तन जैसी आस्थाओं को वित्तीय नजरिए से आंकना और हीन भावना रखना गलत है। उन्होंने फिल्म निर्माता से पूछा कि क्या वे केवल नाममात्र के हिंदू हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करने की सलाह दी।

## सवाल-जवाब

### 1. विवेक अग्निहोत्री को लेकर क्या विवाद खड़ा हुआ है?
विवेक अग्निहोत्री ने कैंची धाम में जुटी भीड़ का वीडियो साझा कर धर्म पर टैक्स लगाने की बात कही थी, जिसके बाद विश्व हिंदू परिषद ने उन पर तीखा हमला बोला है।

### 2. फिल्म निर्माता ने सोशल मीडिया पर क्या टिप्पणी की थी?
उन्होंने लिखा था कि यदि सरकार धर्म पर कर लगा दे, तो भारत रातोंरात दुनिया का सबसे अमीर देश बन सकता है।

### 3. विश्व हिंदू परिषद की ओर से किसने आपत्ति जताई?
परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट लिखकर फिल्म निर्माता की तीखी आलोचना की।

### 4. विनोद बंसल ने विवेक अग्निहोत्री पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस हिंदू समाज के समर्थन से अग्निहोत्री को पहचान मिली, वे अब उसी की परंपराओं, तीर्थयात्राओं और संतों में कमियां निकाल रहे हैं।

### 5. विहिप प्रवक्ता ने फिल्म निर्माता को क्या सलाह दी?
उन्होंने अग्निहोत्री को विदेशी सभ्यताओं के प्रति हीन भावना त्यागने और भारत की सांस्कृतिक विरासत तथा मूल्यों पर गर्व करने का सुझाव दिया।

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