# धार्मिक आस्था और काम को अलग रखें: एकता कपूर के बयान पर बोलीं पूनम पांडे, इमरान खान को दी देश के मामलों से दूर रहने की सलाह

> अभिनेत्री पूनम पांडे ने एकता कपूर के धार्मिक पहचान वाले बयान का समर्थन करते हुए अपनी आस्था पर सवाल उठाने वालों को जवाब दिया। उन्होंने राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और अभिनेता इमरान खान को मिले भारत छोड़ने के नोटिस पर भी बेबाक राय रखी।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-10-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/dharmika-astha-aura-kama-ko-alaga-rakhen-ekta-kapoor-ke-bayana-para-bolin-poonam-pandey-imran-khan-ko-di-desha-ke-mamalon-se-dura--49203 · **Language:** Hindi
**Tags:** पूनम पांडे, एकता कपूर, इमरान खान, ज्ञानेंद्र कुमार, सीजेपी, अगस्त क्रांति मैदान, जंतर मंतर

फिल्म और टीवी निर्माता एकता कपूर द्वारा अपनी धार्मिक मान्यताओं को लेकर दिए गए हालिया बयान के बाद अब अभिनेत्री पूनम पांडे ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने व्यक्तिगत आस्था और पेशेवर छवि को अलग रखने पर जोर देते हुए कहा कि किसी के पहनावे या काम के आधार पर उसकी धार्मिक निष्ठा का आकलन करना पूरी तरह गलत है। इसके साथ ही उन्होंने देश में चल रहे राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों, चुनाव आयोग से जुड़े विवादों और अभिनेता इमरान खान को मिले देश छोड़ने के निर्देश पर भी कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

## काम और कपड़ों से आस्था तय नहीं होती
एकता कपूर ने कुछ समय पहले एक बातचीत में साझा किया था कि माथे पर तिलक लगाने और गले में धार्मिक धागा पहनने की वजह से लोग उन्हें अजीब नजरों से देखते थे और कुछ ने तो उन्हें तांत्रिक तक कह दिया था। इस संदर्भ का जिक्र करते हुए पूनम पांडे ने कहा कि समाज में धार्मिक प्रतीकों और पौराणिक विश्वासों को लेकर लोगों का नजरिया अक्सर संकीर्ण हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति अपनी परंपराओं का पालन कर रहा है, तो दूसरों को इस पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।

अपनी खुद की जिंदगी का उदाहरण देते हुए पूनम पांडे ने स्पष्ट किया कि जब भी वह पूजा करने मंदिर जाती हैं, तो लोग उनके पहनावे और बोल्ड छवि को देखकर अचरज में पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर यह टिप्पणी करते हैं कि ग्लैमरस कपड़े पहनने वाली अभिनेत्री को मंदिर जाने की क्या आवश्यकता है। इस पर अपना कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने कहा कि वह एक कट्टर हिंदू हैं और उन्हें हनुमान चालीसा भी पूरी तरह याद है। उनके मुताबिक किसी भी इंसान के काम और उसकी व्यक्तिगत आस्था को आपस में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

## सीजेपी के प्रदर्शन और हिंसा पर जताई चिंता
कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए पूनम पांडे ने सार्वजनिक आंदोलन के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान विद्यार्थियों और पुलिसकर्मियों के चोटिल होने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उनका मानना है कि दोनों पक्षों के अपने-अपने परिवार हैं और ऐसे टकरावों में लोग अपनी संवेदनशीलता खोते जा रहे हैं। आपसी नफरत का यह बढ़ता माहौल समाज और देश के भविष्य के लिए कतई उचित नहीं माना जा सकता।

पूनम पांडे ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी सड़क पर उतरने वाले नागरिक को पहले यह अच्छी तरह मालूम होना चाहिए कि आंदोलन का असली कारण क्या है और उनकी वास्तविक मांगें क्या हैं। बिना सोचे-समझे भीड़ का हिस्सा बनने से केवल अव्यवस्था पैदा होती है। विरोध के नाम पर होने वाली हिंसा के बजाय मानवता और शांति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

## इस्तीफे की मांगों और प्रशासनिक विवाद पर प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से हटने की मांग को लेकर आयोजित धरनों पर भी पूनम पांडे ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी बिना किसी ठोस आधार या पूरी जानकारी के सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की आवाज उठाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का पद अत्यंत जिम्मेदारी और संवैधानिक गरिमा का होता है, ऐसे में बिना सोचे-समझे किसी का भी इस्तीफा मांगना एक गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार जैसा लगता है।

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एसआईआर के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के साथ बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसी मुद्दे को लेकर मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में भी लोग इकट्ठा हुए थे। इन आंदोलनों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी और प्रदर्शन की आधिकारिक अनुमति को लेकर काफी तीखा विवाद देखने को मिला।

## इमरान खान को मिली नोटिस पर पूनम की दो टूक राय
मुंबई पुलिस द्वारा अभिनेता इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिए जाने के मामले पर भी पूनम पांडे ने अपनी स्पष्ट राय साझा की। इमरान खान 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए इसी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर उन्हें नोटिस थमाते हुए 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने को कहा गया, क्योंकि वह अमेरिकी नागरिकता रखते हैं।

इस पूरे मामले पर बोलते हुए पूनम पांडे ने कहा कि एक कलाकार के तौर पर वह इमरान खान के अभिनय और उनकी प्रतिभा का बेहद सम्मान करती हैं। हालांकि, उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति विदेशी या अमेरिकी नागरिक है, तो उसे भारत के अंदरूनी राजनीतिक और सामाजिक मामलों में दखल देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां पहले से ही काफी ड्रामा और विवाद चल रहे हैं, ऐसे में बाहरी नागरिकों को घरेलू आंदोलनों से दूर रहना चाहिए, खासकर तब जब प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को खुद यह स्पष्ट नहीं होता कि असल विवाद किस बात पर है।

## इसका आप पर असर
पूनम पांडे के इस बयान ने सार्वजनिक जीवन में व्यक्तिगत आस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विदेशी नागरिकों के घरेलू आंदोलनों में भागीदारी से जुड़े नियमों पर नई बहस छेड़ दी है।

- **धार्मिक स्वतंत्रता पर:** यह मामला साफ करता है कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत पूजा-पद्धति और पेशे को एक साथ मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए। आम लोगों को अपनी आस्था प्रकट करने के लिए किसी के सत्यापन या सामाजिक प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।
- **सार्वजनिक आंदोलनों में भागीदारी:** किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले उसके कानूनी पहलुओं और वास्तविक मांगों को समझना जरूरी है। बिना अनुमति के धरनों में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई या हिरासत जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
- **विदेशी नागरिकों के लिए वीजा नियम:** विदेशी पासपोर्ट धारकों को भारत में घरेलू राजनीतिक गतिविधियों या धरनों से दूर रहने की हिदायत दी जाती है। इन नियमों की अनदेखी करने पर नोटिस जारी होना या देश छोड़ने का आदेश मिलना तय है।
- **संवैधानिक पदों की मर्यादा:** शीर्ष पदों पर आसीन अधिकारियों या नेताओं के इस्तीफे की मांग बिना पुख्ता तथ्यों के उठाना प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अविश्वास पैदा करता है। जनता को किसी भी राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनने से पहले तथ्यों की पड़ताल कर लेनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एकता कपूर ने धार्मिक प्रतीकों को लेकर समाज में फैली पूर्वाग्रहपूर्ण सोच पर सवाल उठाए और उसी दौरान मुंबई में एक राजनीतिक प्रदर्शन में विदेशी नागरिकता वाले अभिनेता इमरान खान की मौजूदगी दर्ज की गई।

- **एकता कपूर का अनुभव:** पॉडकास्ट में एकता कपूर ने बताया कि तिलक लगाने और धार्मिक धागे पहनने के कारण उन्हें समाज में अजीब नजरों से देखा गया और तांत्रिक तक कहा गया। इस बयान ने फिल्म उद्योग में धार्मिक पहचान और पूर्वाग्रह पर खुली बहस छेड़ दी।
- **सीजेपी का राजनीतिक प्रदर्शन:** 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में एसआईआर के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया था। इस दौरान पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
- **इमरान खान की उपस्थिति:** अभिनेता इमरान खान मुंबई के इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे। विदेशी नागरिकता होने के कारण मुंबई पुलिस ने इसे वीजा और विदेशी नियमों का उल्लंघन माना और उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस थमा दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. एकता कपूर के किस बयान पर पूनम पांडे ने प्रतिक्रिया दी?
एकता कपूर ने बताया था कि तिलक लगाने और धार्मिक धागा पहनने पर लोग उन्हें अजीब नजरों से देखते थे और तांत्रिक कहते थे, जिस पर पूनम पांडे ने उनका समर्थन किया।

### 2. मंदिर जाने को लेकर पूनम पांडे ने क्या कहा?
पूनम पांडे ने कहा कि वह एक कट्टर हिंदू हैं और हनुमान चालीसा जानती हैं, इसलिए उनके कपड़ों या काम को उनकी धार्मिक आस्था से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

### 3. अभिनेता इमरान खान को क्या निर्देश दिया गया है?
अमेरिकी नागरिक होने और मुंबई के राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मुंबई पुलिस ने इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है।

### 4. पूनम पांडे ने इमरान खान को क्या सलाह दी?
पूनम पांडे ने कहा कि वह इमरान खान का सम्मान करती हैं, लेकिन एक अमेरिकी नागरिक होने के नाते उन्हें भारत के आंतरिक मुद्दों में दखल नहीं देना चाहिए।

### 5. कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
सीजेपी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर और अगस्त क्रांति मैदान में एसआईआर के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।

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