धार्मिक आस्था पर अभिनेता देव शर्मा का बड़ा बयान, बोले आस्था जाहिर करने के तरीके हर किसी के लिए अलग हो सकते हैं फिल्म श्री रामायण कथा में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता देव शर्मा ने खुद को सनातनी बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति की प्रार्थना का तरीका अलग और सम्मानजनक होता है। फिल्म जगत में भगवान श्रीराम का पावन किरदार निभा रहे अभिनेता देव शर्मा ने व्यक्तिगत आस्था और भक्ति के तौर-तरीकों को लेकर अपने विचार खुलकर सामने रखे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद को बड़े गर्व के साथ एक सनातनी मानते हैं और प्रभु श्री राम पर उनका अटूट विश्वास है, जिसे बताने में उन्हें किसी भी प्रकार का संकोच महसूस नहीं होता। इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक विश्वास को जीवन में उतारने की विविधता को रेखांकित करते हुए कहा कि हर इंसान का ईश्वर को याद करने और अपने विचार प्रकट करने का ढंग पूरी तरह अलग हो सकता है। सिनेमाई उदाहरण से समझाई अभिव्यक्ति की विविधता देव शर्मा ने भक्ति की अभिव्यक्ति के अंतर को बॉलीवुड के एक दिलचस्प उदाहरण से स्पष्ट किया। उन्होंने हिंदी सिनेमा की मशहूर फिल्म 'डॉन' के दो अलग-अलग दौर का जिक्र किया। उनके अनुसार, जब अमिताभ बच्चन के अभिनय वाली पहली 'डॉन' रिलीज हुई थी, तब उसका शीर्षक गीत बेहद तेज आवाज, आक्रामकता और ऊंची पिच के साथ पेश किया गया था, जिसमें चीखते हुए यह उद्घोष किया जाता था कि 'मैं हूं डॉन'। वहीं, जब इसी कहानी को शाहरुख खान के साथ दोबारा बनाया गया, तब वही गीत बिल्कुल शांत, सौम्य और संतुलित अंदाज में सामने आया, जिसमें बिना किसी शोर-शराबे के बेहद सहजता से वही बात कही गई थी। अभिनेता का कहना है कि ठीक इसी प्रकार सनातन धर्म या किसी भी अन्य मजहब में भी व्यक्ति अपनी निष्ठा को अलग-अलग अंदाज में प्रकट कर सकता है। कुछ लोगों को अपनी पहचान और धार्मिक विश्वास को दुनिया के सामने मुखरता से रखना पसंद होता है, तो वहीं कुछ अन्य लोग अपने उसी विश्वास को खामोशी के साथ अपने आचरण और दैनिक दिनचर्या में ढालना बेहतर समझते हैं। इबादत और पूजा के हर रूप का सम्मान जरूरी देव शर्मा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि धार्मिक अभिव्यक्ति पूरी तरह व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता का विषय है। यदि कोई भक्त अपनी श्रद्धा को उत्साह और तेज आवाज के साथ प्रदर्शित करता है, तो उसमें किसी को कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए। इसी तरह, जो व्यक्ति अपने आराध्य को हृदय में रखकर मौन साधना चुनता है, उसका मार्ग भी उतना ही आदरणीय है। उन्होंने कहा कि उनके दृष्टिकोण में वह व्यक्ति भी बेहद सम्माननीय है जो दिन में तीन बार मंदिर जाता है और 108 बार ईश्वर के नाम की माला जपता है। इसके साथ ही वह उस शख्स को भी पूरा सम्मान देते हैं जो नियमपूर्वक दिन में पांच बार नमाज अदा करता है, क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह इंसान सच्चे मन से अपने रब की इबादत कर रहा है। बड़े पर्दे पर प्रभु श्रीराम की भूमिका में मौजूदगी अभिनय के मोर्चे पर बात करें तो देव शर्मा इन दिनों धार्मिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'श्री रामायण कथा' में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की भूमिका निभाने को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इस पौराणिक सिनेमाई प्रस्तुति में अंजलि अरोड़ा ने माता सीता का पवित्र किरदार निभाया है, जबकि अभिनेता रजनीश दुग्गल लंकापति रावण की सशक्त भूमिका में नजर आ रहे हैं। इस फिल्म के अन्य प्रमुख किरदारों में शील वर्मा और निर्भय वाधवा भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह पौराणिक फिल्म 25 सितंबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में दर्शकों के लिए रिलीज की जा चुकी है। इसका आप पर असर धार्मिक और पौराणिक फिल्मों से जुड़े कलाकारों के ऐसे बयान समाज में आपसी समझ और सांस्कृतिक सद्भाव को प्रोत्साहित करते हैं। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह विचार दर्शकों को यह समझने में मदद करता है कि धार्मिक भूमिकाएं निभाने वाले कलाकार असल जिंदगी में भी आस्था के प्रति परिपक्व सोच रखते हैं। दर्शक फिल्म में कलाकारों के अभिनय के साथ उनके विचारों को भी बेहतर परिप्रेक्ष्य में देख सकते हैं। • सामाजिक सद्भाव पर: अलग-अलग तरीकों से ईश्वर को याद करने की स्वतंत्रता का समर्थन समाज में सहिष्णुता बढ़ाता है। इससे किसी भी धर्म के अनुयायियों के बीच अपनी परंपराओं को निभाने का आपसी सम्मान मजबूत होता है। • दर्शकों की पसंद पर: बड़े पर्दे पर रामायण की कथा देखने जा रहे लोगों को फिल्म के कलाकारों की पृष्ठभूमि और उनकी आस्था की समझ मिलती है। इससे सिनेमाघरों में दर्शक फिल्म के किरदारों से भावनात्मक रूप से जुड़ सकते हैं। • युवा पीढ़ी के लिए: पूजा-पाठ या इबादत के व्यक्तिगत तौर-तरीकों को स्वीकारने की यह सोच धार्मिक कट्टरता से दूर रहने की प्रेरणा देती है। युवा अपने विश्वास को किसी दबाव के बिना सहजता से जीवन में शामिल कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अभिनेता देव शर्मा द्वारा यह बयान धार्मिक भूमिका निभाने के बाद अपनी व्यक्तिगत पहचान और सामाजिक विचारों को स्पष्ट करने की दिशा में सामने आया है। • पौराणिक फिल्म की चर्चा: देव शर्मा वर्तमान में फिल्म 'श्री रामायण कथा' में भगवान राम का मुख्य किरदार निभा रहे हैं, जिसके कारण मीडिया और जनता का ध्यान उनके व्यक्तिगत विश्वास पर केंद्रित हुआ। इस भूमिका के संदर्भ में उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान पर बात की। • आस्था के प्रति दृष्टिकोण साझा करना: उन्होंने खुद को सनातनी बताते हुए यह स्पष्ट करना जरूरी समझा कि भक्ति का कोई एक तय दायरा नहीं होता। इसी सोच को साझा करने के लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की फिल्मों का तुलनात्मक उदाहरण दिया। • इबादत के सभी रूपों का सम्मान: समाज में धर्म और प्रार्थना को लेकर होने वाली बहसों के बीच उन्होंने यह रेखांकित किया कि चाहे कोई माला जपे या नमाज पढ़े, सच्ची प्रार्थना का महत्व सर्वोपरि है। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'श्री रामायण कथा' में भगवान राम की भूमिका कौन निभा रहे हैं? इस फिल्म में भगवान राम का किरदार अभिनेता देव शर्मा निभा रहे हैं। 2. देव शर्मा ने अपनी धार्मिक आस्था के बारे में क्या कहा? उन्होंने खुद को गर्व से सनातनी बताया और कहा कि हर व्यक्ति के आस्था जताने का तरीका अलग और आदरणीय होता है। 3. देव शर्मा ने आस्था को समझाने के लिए किस फिल्म का उदाहरण दिया? उन्होंने अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की फिल्म 'डॉन' के गानों के टोन का उदाहरण देकर तेज और शांत अभिव्यक्ति का अंतर समझाया। 4. फिल्म 'श्री रामायण कथा' में माता सीता और रावण के रोल में कौन हैं? फिल्म में माता सीता का किरदार अंजलि अरोड़ा और रावण का किरदार रजनीश दुग्गल ने निभाया है। 5. फिल्म 'श्री रामायण कथा' सिनेमाघरों में कब रिलीज हुई थी? यह फिल्म 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। https://trendkia.com/entertainment/dharmika-astha-para-abhineta-dev-sharma-ka-bara-bayana-bole-astha-jahira-karane-ke-tarike-hara-kisi-ke-lie-alaga-ho-sakate-hain-41877 TrendKia — Har trend, sabse pehle.