# दिया मिर्जा और ऋचा चड्ढा के बयान पर छिड़ा विवाद, बोलीं- मुगल काल में नहीं था ब्लाउज पहनने का चलन

> हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेत्री दिया मिर्जा और ऋचा चड्ढा ने महिलाओं के पहनावे और संस्कृति को लेकर खुलकर चर्चा की। इस बातचीत में दिया मिर्जा ने दावा किया कि मुगल काल में महिलाएं साड़ी के नीचे कुछ नहीं पहनती थीं और ब्लाउज पहनने की परंपरा विक्टोरियन काल की देन है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/dia-mirza-aur-richa-chadha-ke-bayan-par-chida-vivad-29181 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिया मिर्जा, ऋचा चड्ढा, ब्लाउज इतिहास, भारतीय संस्कृति, सोशल मीडिया विवाद, पारंपरिक पहनावा

हाल के दिनों में अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन को लेकर काफी हंगामा देखने को मिला था। उस विज्ञापन में वह ब्रालेट टॉप के साथ इंडो-वेस्टर्न पोशाक पहनकर राखी बांधती नजर आई थीं, जिसकी सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर आलोचना की थी। अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए इसे बिकिनी पहनकर त्योहार मनाने जैसा बताया था। इस बढ़ते विवाद के कारण कंपनी को आखिरकार वह विज्ञापन हटाना पड़ा था। इसी कड़ी में अब एक नया इंटरव्यू सामने आया है जिसमें अभिनेत्री दिया मिर्जा और ऋचा चड्ढा कपड़ों और संस्कृति को लेकर चर्चा करती दिखाई दे रही हैं, जहां उन्होंने सवाल उठाया कि पहनावे को लेकर आखिर इतना विवाद क्यों खड़ा किया जाता है।

सामने आए इस वायरल इंटरव्यू में होस्ट दोनों अभिनेत्रियों से सवाल करती हैं कि क्या महिलाओं के कम कपड़े पहनने से देश की संस्कृति खराब हो रही है। इस पर अपनी बात रखते हुए दिया मिर्जा कहती हैं कि मुगल काल के दौरान भारत में महिलाएं साड़ी के नीचे कुछ नहीं पहनती थीं, तो फिर इससे हमारी संस्कृति कैसे आहत हो रही है या नष्ट हो रही है। इस बातचीत के दौरान ऋचा चड्ढा भी अपनी बात रखती हैं और कहती हैं कि जो लोग पहनावे पर सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने शायद कभी इतिहास और धर्म का अध्ययन नहीं किया है और वे खजुराहो की कला को भी भूल गए हैं।

> 
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दिया मिर्जा कहती हैं कि जब हम वस्त्रों, पहनावे, कला और इतिहास की चर्चा करते हैं, तो लोगों को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि जब साड़ियां बुनी जाती थीं, तब उनके साथ ब्लाउज पहनने का कोई रिवाज नहीं था। जो जनजातियां आज भी प्रकृति के करीब जीवन बिताती हैं, वे भी ब्लाउज नहीं पहनती हैं। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने मुगल काल की कई पेंटिंग्स और कलाकृतियां देखी हैं जिनमें महिलाएं पारदर्शी कुर्ते पहनती थीं और उस समय ब्रा जैसी चीजें भी नहीं हुआ करती थीं। उनके अनुसार, स्तनों को पूरी तरह ढकने की यह व्यवस्था विक्टोरियन काल से आई है और ब्लाउज पहनने का चलन भी विक्टोरियन संस्कृति की ही देन है, जिसे हमारा मूल भारतीय कल्चर नहीं माना जा सकता है।

इस इंटरव्यू के सोशल मीडिया पर आने के बाद यूजर्स ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमित कुमार सिंधी द्वारा साझा किए गए इस वीडियो पर एक यूजर ने सवाल उठाते हुए लिखा कि जब कपड़ों का आविष्कार तक नहीं हुआ था, तब इंसान बिना कपड़ों के घूमते थे, तो फिर उन्होंने वस्त्र पहनना क्यों शुरू किया और आज के समय में भी वे खानाबदोशों की तरह बिना कपड़ों के क्यों नहीं रहते हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि दिया मिर्जा इस बात का जिक्र नहीं करेंगी कि भारत में इस्लामी आक्रमण के बाद ही महिलाओं के कपड़े पहनने और खुद को ढकने का चलन तेजी से बढ़ा, वरना हमारा देश ऐसी स्वतंत्र महिलाओं का देश था जिन्हें न तो पर्दा करने की कोई आवश्यकता थी और न ही कम उम्र में शादियां करने की जरूरत पड़ती थी। इसी तरह तमाम सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बयान के बाद पुराने समय के इतिहास, राजनीतिक हालात और सामाजिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी।

## सवाल-जवाब

### 1. दिया मिर्जा और ऋचा चड्ढा ने इंटरव्यू में क्या बयान दिया?
दिया मिर्जा ने कहा कि मुगल काल में महिलाएं साड़ी के नीचे कुछ नहीं पहनती थीं और ब्लाउज पहनने की संस्कृति विक्टोरियन काल की देन है।

### 2. ब्लाउज के इतिहास को लेकर अभिनेत्रियों का क्या तर्क था?
उन्होंने तर्क दिया कि पारंपरिक रूप से साड़ियां बिना ब्लाउज के पहनी जाती थीं और स्तनों को ढकने का यह चलन भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है।

### 3. सोशल मीडिया पर इस बयान पर कैसी प्रतिक्रिया आई?
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इतिहास और पारंपरिक परिधानों के बदलाव को लेकर अभिनेत्रियों के इस बयान की आलोचना की और अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।

### 4. यह पूरा विवाद किस चर्चा से शुरू हुआ था?
यह चर्चा महिलाओं के पहनावे और उससे संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर एक वायरल इंटरव्यू के दौरान शुरू हुई थी।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._