# फिल्म हनुमान अंश के भक्ति गीत से चमकी साधु तिवारी की किस्मत, बॉलीवुड से आने लगे नए प्रोजेक्ट्स के ऑफर

> फिल्म हनुमान अंश के गीत 'जब जिद पर आ गईं पार्वती' की बड़ी सफलता के बाद गायक साधु तिवारी को नए प्रोजेक्ट्स मिल रहे हैं, वहीं सुनील लोधी के भजन को भी काफी सराहना मिल रही है।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/film-hanuman-ansh-ke-bhakti-geet-se-chamki-sadhu-tiwari-ki-kismat-bollywood-se-aane-lage-naye-projects-ke-offer-33972 · **Language:** Hindi
**Tags:** हनुमान अंश, साधु तिवारी, सुनील लोधी, भक्ति गीत, बॉलीवुड, गाजियाबाद

धार्मिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' के भक्ति संगीत को श्रोताओं की ओर से जोरदार प्रतिक्रिया मिल रही है। इस फिल्म के भक्ति गीत 'जब जिद पर आ गईं पार्वती' को गायक साधु तिवारी ने अपनी आवाज दी है, जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। फिल्म और उसके संगीत को जिस तरह का व्यापक जनसमर्थन मिला है, उसने खुद इस परियोजना से जुड़े कलाकारों को भी चकित कर दिया है। साधु तिवारी के अनुसार पूरी टीम को यह भरोसा जरूर था कि उनकी मेहनत लोगों के दिलों तक पहुंचेगी, लेकिन यह गीत इस कदर लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड बनाएगा, इसका अंदाजा पहले से किसी को नहीं था।

## मनपसंद काम में संघर्ष का आनंद और करियर का सफर
अपने संगीत के सफर और जीवन की चुनौतियों पर बात करते हुए साधु तिवारी ने कहा कि संघर्ष किसी भी इंसान के जीवन में कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होता। उन्होंने एक व्यावहारिक मिसाल देते हुए समझाया कि यदि कोई व्यक्ति एक छोटी सी दुकान भी शुरू करता है, तो उसे स्थापित करने और चलाने में समय के साथ कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ता है। गायक का मानना है कि जब इंसान अपने दिल की पसंद का काम चुनता है, तो रास्ते में कई कठिन मोड़ और पीड़ा आती है। हालांकि, अपने पसंदीदा क्षेत्र में होने वाली यह पीड़ा असल में एक अनोखा आनंद देती है और इसी तरह जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ती रहती है।

साधु तिवारी हमेशा से ही एक पेशेवर संगीतकार बनना चाहते थे और यही उनका शुरुआती लक्ष्य भी था। हालांकि, जीवन की बुनियादी जरूरतों और परिस्थितियों के चलते उन्हें बीच में कुछ अन्य काम भी करने पड़े थे। इसके बावजूद उन्होंने संगीत से नाता नहीं तोड़ा और इससे पहले भी कई अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पूरे किए। आने वाले समय को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कई नए प्रोजेक्ट्स कतार में हैं, जो जल्द ही दर्शकों के सामने आएंगे और जिनके बारे में आगे विस्तार से जानकारी सामने आएगी। बातचीत के अंत में उन्होंने अपने लोकप्रिय भजन 'जब जिद पर आ गईं पार्वती' की पंक्तियां भी गुनगुनाईं।

## सुनील लोधी का भजन भी लोकप्रिय, गाजियाबाद में साझा किए अनुभव
फिल्म 'हनुमान अंश' का एक अन्य भक्ति गीत 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है। इस गीत को अपनी आवाज देने वाले गायक सुनील लोधी को भी इसके जरिए एक नई और बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में गाजियाबाद पहुंचे गायक ने वहां अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि वे बचपन से ही इन भक्ति भजनों को गुनगुनाते रहे हैं, इसलिए उन्हें कभी ऐसा पूर्वानुमान नहीं था कि यह फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित हो जाएगी।

सुनील लोधी ने अपने प्रशंसकों से वादा किया है कि वे भविष्य में भी इसी तरह के दिल को छू लेने वाले धार्मिक और मधुर भजन लाते रहेंगे। उन्होंने आगे बताया कि इस सफलता के बाद उन्हें बॉलीवुड से पार्श्व गायन के कई बेहतरीन प्रस्ताव मिल रहे हैं और वे जल्द ही श्रोताओं के सामने नए गाने पेश करेंगे। गायक ने इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय पूरी तरह हनुमान जी की कृपा को दिया। साथ ही उन्होंने दर्शकों से अपील की कि वे फिल्म और इसके भजनों को इसी तरह अपना प्यार देते रहें, ताकि परिवार के बुजुर्ग और माता-पिता भी इस भक्तिमय संगीत को देखकर और सुनकर आनंद ले सकें।

## इसका आप पर असर
फिल्म 'हनुमान अंश' के भजनों की सफलता भारतीय भक्ति संगीत और स्वतंत्र कलाकारों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

- **श्रोताओं और परिवारों के लिए:** दर्शकों को मुख्यधारा के सिनेमा में एक बार फिर स्वच्छ और परिवार के साथ सुनने योग्य भक्ति संगीत मिल रहा है। इससे घर के बुजुर्ग और माता-पिता बिना किसी संकोच के इन भजनों का आनंद ले सकते हैं।
- **स्वतंत्र संगीत कलाकारों के लिए:** क्षेत्रीय और गैर-पारंपरिक गायकों को भक्ति संगीत के जरिए सीधे बॉलीवुड में पार्श्व गायन के नए अवसर मिल रहे हैं। इससे नए गायकों को साबित होता है कि अपनी पसंद के क्षेत्र में निरंतर काम करने से मुख्यधारा में पहचान बनाई जा सकती है।
- **संगीत उद्योग के रुझान पर:** पारंपरिक भक्ति रचनाओं को जब आधुनिक प्रस्तुति मिलती है, तो वे युवा और व्यापक दर्शकों को तेजी से आकर्षित करती हैं। फिल्म निर्माताओं के लिए यह सफलता भक्ति शैली में और निवेश करने का मार्ग प्रशस्त करती है।
- **संस्कृति और नई पीढ़ी के जुड़ाव पर:** लोक और पारंपरिक भजनों का फिल्मों में शामिल होना सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखता है। यह युवाओं को अपनी जड़ों और पारंपरिक उपासना गीतों से जोड़ने में मदद करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म 'हनुमान अंश' के गीतों की अप्रत्याशित सफलता के पीछे प्रामाणिक भक्ति भावना, कलाकारों का जमीनी जुड़ाव और समर्पित प्रयास प्रमुख वजह रहे हैं।

- **पवित्र और ईमानदार प्रस्तुति:** कलाकारों ने इन भजनों को किसी औपचारिकता के बजाय पूरे मन और बचपन से चली आ रही भक्ति के साथ तैयार किया। इसी भावनात्मक गहराई और सादगी ने आम श्रोताओं के दिलों को सीधे छुआ।
- **पारंपरिक भजनों से गहरा नाता:** गायक सुनील लोधी बचपन से ही इन भजनों को गुनगुनाते रहे हैं, जिससे उनकी गायकी में एक स्वाभाविक ठहराव और आकर्षण दिखा। इस स्वाभाविक जुड़ाव ने गीत को बनावटीपन से दूर रखा।
- **चुनौतियों के बाद भी लगन:** गायक साधु तिवारी ने जीवन की विभिन्न जरूरतों के बीच संघर्ष करते हुए भी अपने संगीत के लक्ष्य को नहीं छोड़ा। इसी निरंतरता और रियाज का प्रतिफल उन्हें इस बड़ी सफलता के रूप में मिला।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म हनुमान अंश के किस गीत को साधु तिवारी ने गाया है?
साधु तिवारी ने इस फिल्म का लोकप्रिय भक्ति गीत 'जब जिद पर आ गईं पार्वती' गाया है।

### 2. फिल्म में गायक सुनील लोधी ने कौन सा भजन गाया है?
सुनील लोधी ने फिल्म का प्रसिद्ध भक्ति भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' गाया है।

### 3. साधु तिवारी ने संघर्ष को लेकर क्या विचार व्यक्त किए हैं?
उन्होंने कहा कि संघर्ष जीवन में कभी खत्म नहीं होता और मनपसंद काम में आने वाली कठिनाइयां असल में एक आनंद देती हैं।

### 4. सुनील लोधी ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान किस शहर में बातचीत की?
सुनील लोधी ने गाजियाबाद के दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए।

### 5. फिल्म के गानों की सफलता के बाद गायकों को क्या नए अवसर मिल रहे हैं?
इस सफलता के बाद कलाकारों को बॉलीवुड से पार्श्व गायन और नए प्रोजेक्ट्स के कई ऑफर मिल रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
साधु तिवारी और सुनील लोधी की यह सफलता यात्रा बताती है कि सपनों के प्रति ईमानदार समर्पण अंततः पहचान दिलाता है।

- **संघर्ष से कभी घबराएं नहीं:** साधु तिवारी के अनुसार संघर्ष हर क्षेत्र का हिस्सा है, चाहे काम छोटा हो या बड़ा। कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए लक्ष्य पर डटे रहना ही सबसे बड़ा गुण है।
- **पसंद के काम में दर्द भी सुखद है:** जब आप अपनी रुचि का काम चुनते हैं, तो रास्ते की मुश्किलें और तनाव भी संतुष्टि देते हैं। अपने मनपसंद पेशे में आने वाली चुनौतियों को सीखने का अवसर मानना चाहिए।
- **जरूरतों के समझौते से मूल सपना न छोड़ें:** जीवन में आवश्यकताओं के कारण अन्य काम करने पड़ सकते हैं, लेकिन अपनी मुख्य प्रतिभा को कभी न भूलें। साधु तिवारी ने भी बीच में अन्य काम किए मगर संगीत साधना जारी रखी।
- **अपनी जड़ों और परंपराओं पर भरोसा रखें:** सुनील लोधी बचपन से भक्ति भजन गाते रहे और वही परंपरा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति वफादार रहना आपको नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

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