# गोविंदा और कादर खान की वो यादगार कॉमेडी फिल्में जिन्होंने नब्बे के दशक के बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

> नब्बे के दशक में गोविंदा और कादर खान की ऑन-स्क्रीन कॉमिक टाइमिंग ने कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। आंखें, कुली नंबर 1 से लेकर दूल्हे राजा तक, इस जोड़ी के किरदारों ने दर्शकों को खूब हंसाया।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/govinda-aura-kader-khan-ki-vo-yadagara-komedi-philmen-jinhonne-nabbe-ke-dashaka-ke-boksa-phisa-para-racha-itihasa-36438 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोविंदा, कादर खान, डेविड धवन, बॉलीवुड कॉमेडी, दूल्हे राजा, कुली नंबर 1

हिंदी सिनेमा में जब भी बेहतरीन हास्य और सटीक कॉमिक टाइमिंग का जिक्र होता है, तो गोविंदा और कादर खान का नाम सबसे पहले सामने आता है। हालांकि बड़े पर्दे पर कादर खान ने ज्यादातर मौकों पर पिता, ससुर या परिवार के बड़े बुजुर्ग के किरदार निभाए, लेकिन उनका स्क्रीन प्रेजेंस किसी भी मुख्य अभिनेता से कम नहीं रहा। इन दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने सिनेमाघरों में लगातार कई सफल फिल्में दीं और यह साबित कर दिया कि जब दो कुशल कलाकार एक साथ आते हैं, तो हास्य का स्तर अलग ही ऊंचाई पर पहुंच जाता है।

## 1993 में आंखें ने तोड़े कमाई के रिकॉर्ड
साल 1993 में डेविड धवन के निर्देशन में रिलीज हुई फिल्म आंखें उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म में गोविंदा ने दोहरी भूमिका निभाई थी, जबकि कादर खान उनके पिता हसमुख राय के किरदार में नजर आए थे। पिता और बेटे के बीच की उलझनें, गलतफहमियां और कादर खान की अनोखी डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया। इस फिल्म ने टिकट खिड़की पर जबर्दस्त कमाई करते हुए उस दौर के तमाम पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे।

## राजा बाबू और सख्त पिता की भूमिका
इसके ठीक अगले साल 1994 में राजा बाबू रिलीज हुई, जिसने इस जोड़ी की लोकप्रियता को एक नया आयाम दिया। फिल्म में कादर खान ने किशन सिंह नाम के एक ऐसे पिता का रोल निभाया जो अनुशासनप्रिय होने के साथ-साथ अपने बेटे से गहरा लगाव रखता था। दूसरी तरफ गोविंदा ने गांव के एक दिलदार लेकिन थोड़े बिगड़े हुए युवक का किरदार निभाया था। कादर खान के तीखे संवाद और गोविंदा के चेहरे के अनोखे हाव-भाव ने इस फिल्म को हर परिवार की पसंदीदा फिल्म बना दिया।

## कुली नंबर 1 से शुरू हुआ नंबर 1 का सफर
साल 1995 में आई कुली नंबर 1 वह फिल्म थी जिसने बॉलीवुड में नंबर 1 टाइटल की बेहद कामयाब सीरीज की नींव रखी। इस कहानी में कादर खान ने एक बेहद घमंडी और रईस व्यक्ति चौधरी होशियार चंद का रोल निभाया, जिसकी ख्वाहिश अपनी बेटी का ब्याह किसी बेहद अमीर घराने में करने की थी। वहीं गोविंदा ने एक आम कुली राजू का किरदार निभाया, जो शादी के लिए नकली अमीर बनने का ढोंग करता है। दोनों कलाकारों की नोकझोंक और परिस्थितियों से उपजे हास्य ने दर्शकों को सिनेमाघरों में खूब हंसाया और यह 1995 की सबसे बड़ी हिट बन गई।

## दो शादियों की उलझन और साजन चले ससुराल
1996 में पर्दे पर आई साजन चले ससुराल में गोविंदा और कादर खान के किरदारों के बीच की केमिस्ट्री कमाल की थी। इस फिल्म में कादर खान ने खुराना का किरदार निभाया था, जो गोविंदा के ससुर बने थे। कहानी में गोविंदा दो पत्नियों, करिश्मा कपूर और तब्बू, के बीच फंस जाते हैं और उनकी इस दोहरी जिंदगी से परेशान ससुर बने कादर खान के दृश्य बेहद मजेदार बन पड़े। यह फिल्म भी टिकट खिड़की पर बेहद सफल रही और इसके दृश्य आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

## बावर्ची बनकर दिल जीतने की कवायद: हीरो नं. 1
साल 1997 की चर्चित फिल्म हीरो नं. 1 में कादर खान एक रूढ़िवादी और सख्त स्वभाव वाले अमीर शख्स दीनानाथ त्रिपाठी की भूमिका में दिखे। कहानी में गोविंदा अपनी प्रेमिका करिश्मा का दिल और उनके परिवार की मंजूरी पाने के लिए उनके घर में नौकर और बावर्ची बनकर दाखिल होते हैं। अपनी मेहनत, सादगी और हाजिरजवाबी से कादर खान को प्रभावित करने की गोविंदा की कोशिशों और दोनों के बीच की मजेदार बहसों ने फिल्म को अंत तक बांधे रखा। यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई।

## दूल्हा राजा में ढाबे बनाम फाइव स्टार होटल की जंग
दूल्हा राजा को इस जोड़ी के करियर की सबसे बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म में कादर खान केके सिंघानिया नाम के एक आलीशान फाइव-स्टार होटल के मालिक बने थे, जबकि गोविंदा ने राजा का रोल किया था जो उनके होटल के ठीक सामने अपना छोटा सा ढाबा खोल लेता है। होटल के सामने से ढाबा हटवाने की जद्दोजहद से लेकर राजा के आखिरकार सिंघानिया का दामाद बनने तक की कहानी हंसी के अनगिनत मौके देती है। इस फिल्म के चुटीले संवाद आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं।

## हसीना मान जाएगी से अंखियों से गोली मारे तक का सफर
गोविंदा और कादर खान का यह जादुई सफर नब्बे के दशक के अंत और दो हजार के दशक की शुरुआत में भी बदस्तूर जारी रहा। 1999 में रिलीज हुई हसीना मान जाएगी में कादर खान ने सेठ अमीरचंद का किरदार निभाया, जबकि 2002 की फिल्म अंखियों से गोली मारे में वे माखन भुवा के रूप में दिखाई दिए। इन फिल्मों ने साफ तौर पर रेखांकित किया कि गोविंदा की असीम ऊर्जा और कादर खान के संवाद लेखन व अभिनय की विविधता का कोई सानी नहीं था।

## इसका आप पर असर
यह विश्लेषण हिंदी सिनेमा के दर्शकों और क्लासिक कॉमेडी के प्रेमियों को नब्बे के दशक के सफल सिनेमाई फॉर्मूले को समझने में मदद करता है।

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह जानकारी क्लासिक फिल्मों की सूची तैयार करने और ओटीटी पर बेहतरीन कॉमिक फिल्में चुनने में काम आती है। दर्शक नब्बे के दशक की लोकप्रिय फिल्मों की विरासत को आसानी से समझ सकते हैं।
- **कंटेंट रचनाकारों के लिए:** हास्य संवाद और सटीक कॉमिक टाइमिंग के बुनियादी नियमों को समझने का यह बेहतरीन अवसर है। युवा लेखक और अभिनेता इन किरदारों के आपसी तालमेल से बहुत कुछ सीख सकते हैं।
- **मनोरंजन उद्योग पर:** मजबूत संवाद और स्वाभाविक अभिनय की अहमियत फिर से रेखांकित होती है। बड़े बजट की जगह सटीक कहानी और किरदारों की जुगलबंदी ही फिल्मों को लंबे समय तक याद रखती है।
- **टेलीविजन और डिजिटल दर्शकों के लिए:** इन फिल्मों के दृश्य आज भी वीडियो प्लेटफॉर्म्स और मीम्स में व्यापक रूप से पसंद किए जाते हैं। पुरानी फिल्मों की डिजिटल मांग और री-वॉच वैल्यू लगातार बनी रहती है।

## ऐसा क्यों हुआ
गोविंदा और कादर खान की साझेदारी की जबर्दस्त सफलता के पीछे दोनों कलाकारों की स्वाभाविक कॉमिक टाइमिंग, तीखा संवाद लेखन और परिवारों से जुड़ने वाली कहानियां मुख्य कारण थीं।

- **सटीक कॉमिक केमिस्ट्री:** दोनों कलाकारों के काम करने का अंदाज एक-दूसरे को पूरा करता था। गोविंदा की तेज तर्रार शारीरिक कॉमेडी और कादर खान की संयमित संवाद अदायगी ने हर दृश्य को स्वाभाविक और मजेदार बना दिया।
- **कादर खान का कुशल लेखन:** कादर खान एक मंझे हुए संवाद लेखक भी थे जो आम बोलचाल के मुहावरों को पर्दे पर जिंदा करना जानते थे। उनके लिखे संवादों ने किरदारों के बीच की नोकझोंक को दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बैठा दिया।
- **पारिवारिक और मनोरंजक विषय:** डेविड धवन और अन्य निर्देशकों ने आम आदमी की महत्वाकांक्षाओं और पारिवारिक उलझनों पर आधारित कहानियां चुनीं। इन विषयों ने आम दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में बड़ी भूमिका निभाई।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म आंखें किस वर्ष रिलीज हुई थी और इसमें कादर खान का क्या किरदार था?
फिल्म आंखें साल 1993 में रिलीज हुई थी और इसमें कादर खान ने गोविंदा के पिता हसमुख राय का किरदार निभाया था।

### 2. फिल्म कुली नंबर 1 में कादर खान के किरदार का क्या नाम था?
कुली नंबर 1 में कादर खान ने एक घमंडी अमीर व्यक्ति चौधरी होशियार चंद का किरदार निभाया था।

### 3. दूल्हा राजा फिल्म में गोविंदा और कादर खान के बीच किस बात को लेकर मुकाबला दिखाया गया था?
दूल्हा राजा में कादर खान एक फाइव-स्टार होटल के मालिक थे और गोविंदा ने उनके होटल के ठीक सामने अपना ढाबा खोल लिया था, जिसे हटाने को लेकर दोनों के बीच मजेदार जंग दिखाई गई थी।

### 4. फिल्म साजन चले ससुराल में गोविंदा के साथ कौन सी दो अभिनेत्रियां मुख्य भूमिकाओं में थीं?
इस फिल्म में गोविंदा के साथ करिश्मा कपूर और तब्बू मुख्य अभिनेत्रियों के रूप में थीं।

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