# हनुमान अंश के भजन मैंने तेरे ही भरोसे की जड़ें निकलीं बुंदेली लोकगायकी में, सुनील लोधी ने खुद बताया

> फिल्म हनुमान अंश में सुनील लोधी की आवाज में गूंज रहा भजन मैंने तेरे ही भरोसे असल में सदियों पुराना बुंदेली लोकगीत है, जिसे उनसे पहले चंद्रभूषण पाठक और देशराज पटेरिया गा चुके हैं.

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/hanuman-ansh-ke-bhajana-maine-tere-hi-bharose-ki-jaren-nikalin-bundeli-lokagayaki-men-sunil-lodhi-ne-khuda-bataya-28137 · **Language:** Hindi
**Tags:** हनुमान अंश, सुनील लोधी, मैंने तेरे ही भरोसे, बुंदेली लोकगीत, चंद्रभूषण पाठक, देशराज पटेरिया, अनुप्रिया नागर

हनुमान अंश फिल्म के भजन मैंने तेरे ही भरोसे को लेकर दर्शकों में जो उत्सुकता बनी हुई थी, उसका जवाब अब खुद सिंगर सुनील लोधी ने दे दिया है. सुधीर चौधरी के साथ शो डिकोड में हुई बातचीत में सुनील लोधी ने बताया कि यह भजन उनकी अपनी रचना नहीं, बल्कि बरसों पुरानी बुंदेली परंपरा का हिस्सा है, जिसे उनसे पहले भी दो जाने-माने लोकगायक अपनी आवाज दे चुके हैं.

फिल्म हनुमान अंश की कामयाबी के साथ इसके भजनों को भी खूब पसंद किया जा रहा है, और मैंने तेरे ही भरोसे इनमें सबसे आगे है. सुनील लोधी की आवाज में यह गीत सिनेमाघरों और सोशल मीडिया दोनों जगह छाया हुआ है, लेकिन बहुत कम लोगों को इसकी असली उम्र और परंपरा के बारे में पता था.

## बुंदेली लोकगायकी की पुरानी विरासत निकली मैंने तेरे ही भरोसे
सुनील लोधी ने बातचीत में साफ किया कि मैंने तेरे ही भरोसे कोई नया बनाया गया फिल्मी भजन नहीं है. यह बहुत पुराना पारंपरिक बुंदेली गीत है, जो लंबे समय से लोकगायकी की महफिलों और भजन संध्याओं का हिस्सा रहा है. यानी जिस गीत को अब हनुमान अंश के जरिए नई पहचान और बड़ा दर्शक वर्ग मिला है, वह असल में बुंदेलखंड की लोक संस्कृति और भजन परंपरा में पहले से रचा-बसा था.

## सुनील लोधी से पहले किन दो गायकों ने गाया ये भजन
सुनील लोधी ने इस दौरान दो नाम खासतौर पर लिए. पहला नाम था बुंदेली लोकगायक चंद्रभूषण पाठक का, जिन्होंने पहले भी इस भजन को अपनी आवाज दी थी. दूसरा नाम था देशराज पटेरिया का, जो बुंदेली लोकगीतों और पारंपरिक गायकी में जाना-पहचाना नाम रहे हैं. सुनील लोधी के मुताबिक पटेरिया जी की आवाज ने भी मैंने तेरे ही भरोसे को अपने दौर में पहचान दिलाई थी. इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया कि हनुमान अंश में सुनाई दे रहा यह भजन असल में पुरानी बुंदेली परंपरा और आज की नई सिनेमाई पीढ़ी के बीच एक कड़ी बनकर सामने आया है.

इस पूरी बातचीत के दौरान सुनील लोधी भावुक भी हो गए. उन्होंने फिल्म के मेकर्स का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन्हें इतना खूबसूरत मौका देने के लिए वह उनके आभारी हैं. उन्होंने इसे हनुमान जी की कृपा और चमत्कार बताया कि यह पुराना भजन हनुमान अंश का हिस्सा बन सका और इतना लोकप्रिय हुआ.

## प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर की जोखिम भरी कहानी
इसी बातचीत में फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर भी मौजूद थीं. जेन जी से ताल्लुक रखने वाली अनुप्रिया ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि सिर्फ 21 साल की उम्र में उन्होंने नीम करोली बाबा से प्रेरित फिल्म बनाने का बड़ा जोखिम उठाया था. उन्होंने कहा कि यह फिल्म बहुत पहले ही बन जानी चाहिए थी, क्योंकि आज की युवा पीढ़ी इसे खुले दिल से पसंद कर रही है. अनुप्रिया ने यह भी कहा कि बहुत कम लोग नीम करोली बाबा और उनकी महानता के बारे में जानते हैं, और यही वजह थी कि उन्होंने इस विषय पर फिल्म बनाने का फैसला किया.

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म हनुमान अंश का भजन मैंने तेरे ही भरोसे किसने गाया है?
फिल्म में यह भजन सुनील लोधी की आवाज में सुनाई देता है.

### 2. क्या मैंने तेरे ही भरोसे फिल्म के लिए खासतौर पर लिखा गया गीत है?
नहीं, सुनील लोधी के मुताबिक यह बरसों पुराना पारंपरिक बुंदेली भजन है.

### 3. सुनील लोधी से पहले यह भजन और किसने गाया था?
यह भजन पहले बुंदेली लोकगायक चंद्रभूषण पाठक और देशराज पटेरिया गा चुके हैं.

### 4. यह खुलासा सुनील लोधी ने कहां किया?
यह जानकारी सुनील लोधी ने सुधीर चौधरी के साथ शो डिकोड में हुई बातचीत में दी.

### 5. फिल्म हनुमान अंश की प्रोड्यूसर कौन हैं?
फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर हैं, जिन्होंने महज 21 साल की उम्र में यह फिल्म बनाई.

### 6. अनुप्रिया नागर ने किस पर फिल्म बनाई है?
उन्होंने नीम करोली बाबा से प्रेरित होकर यह फिल्म बनाई है.

## प्रेरणा और सबक
प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर की कहानी बताती है कि उम्र नहीं, बल्कि विश्वास और तैयारी मायने रखती है.

- **कम उम्र में बड़ा फैसला:** सिर्फ 21 साल की उम्र में अनुप्रिया ने एक आध्यात्मिक विषय पर फिल्म बनाने का जोखिम उठाया, जो आमतौर पर अनुभवी निर्माता ही उठाते हैं.
- **अनदेखे विषयों पर भरोसा:** उन्होंने महसूस किया कि नीम करोली बाबा जैसी शख्सियत के बारे में कम लोग जानते हैं, और इसी कमी को उन्होंने अपनी फिल्म की वजह बनाया.
- **पुरानी विरासत को नए मंच पर लाना:** टीम ने बुंदेली लोक परंपरा के भजन को फिल्म का हिस्सा बनाकर यह दिखाया कि पुरानी सांस्कृतिक धरोहर आज की युवा पीढ़ी तक भी पहुंच सकती है.

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._