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  "title": "जब 'भीकू म्हात्रे' मनोज बाजपेयी को मराठी समझ बैठे थे बाला साहेब ठाकरे, बिहार का सुनकर रह गए थे हैरान",
  "summary": "मनोज बाजपेयी ने फिल्म 'सत्या' से जुड़ा एक मजेदार वाकया साझा किया है, जब उनके अभिनय से प्रभावित होकर बाला साहेब ठाकरे उन्हें असली मराठी समझ बैठे थे।",
  "content": "जब बाल ठाकरे भी खा गए थे धोखा\n‘मुंबई का किंग कौन? भीकू म्हात्रे!’ यह डायलॉग आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है। फिल्म ‘सत्या’ में मनोज बाजपेयी ने भीकू म्हात्रे के किरदार को इतनी जीवंतता से निभाया कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी मराठी समझने लगे थे। उनकी चाल-ढाल और बोलने के लहजे ने लोगों को इस कदर प्रभावित किया कि शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे भी असमंजस में पड़ गए। उन्हें पूरा विश्वास था कि मनोज बाजपेयी महाराष्ट्र के ही रहने वाले हैं। लेकिन जब उन्हें पता चला कि भीकू म्हात्रे का रोल करने वाला यह अभिनेता असल में बिहार का रहने वाला है, तो वह हैरान रह गए। इस दिलचस्प वाकये का खुलासा खुद मनोज बाजपेयी ने ट्रेंडकिया के साथ एक विशेष बातचीत में किया है।\n\nमातोश्री का बुलावा और वो मजेदार मुलाकात\nमनोज बाजपेयी आजकल अपनी नई फिल्म ‘गवर्नर’ को लेकर चर्चा में हैं, जो साल 1991 के भारत के आर्थिक संकट पर आधारित है। ट्रेंडकिया से बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्मों में किरदारों के लहजे और क्षेत्रीय भाषाओं को पकड़ने की कला पर अपने विचार साझा किए। इसी दौरान उन्होंने 1998 की अपनी ऐतिहासिक फिल्म ‘सत्या’ से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया।\n\nमनोज बाजपेयी ने मुस्कुराते हुए बताया, ‘आम लोगों की तो बात ही अलग है, खुद बाल ठाकरे साहब को भी यही लगता था कि मैं महाराष्ट्र का ही रहने वाला हूं। उन्होंने मुझे अपने घर मातोश्री पर बुलाया था। उन्होंने मेरा बहुत आदर-सत्कार किया। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि मैं महाराष्ट्र से नहीं बल्कि बिहार का रहने वाला हूं, तो वह हैरान रह गए। उन्हें थोड़ी निराशा भी हुई कि इतनी अच्छी मराठी लहजे में बात करने वाला लड़का मराठी नहीं है। इसके बाद उन्होंने हंसते हुए मुझसे कहा कि मुझे अब मराठी सीख लेनी चाहिए। उनके साथ वह मुलाकात बहुत यादगार थी और उन्होंने मुझे आगे के सफर के लिए ढेर सारा आशीर्वाद दिया।’\n\nक्षेत्रीय लहजे को पर्दे पर उतारने की कला\nबातचीत में मनोज बाजपेयी ने फिल्म ‘गवर्नर’ में अपने तमिल लहजे के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि किसी खास क्षेत्र के किरदार को निभाते समय भाषा की बारीकियों पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। हालांकि, अभिनेता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि लहजा इतना भारी न हो जाए कि दर्शक डायलॉग के पीछे की भावनाओं को ही न समझ पाएं। उन्होंने कहा कि एक तमिल, तेलुगु या मलयाली व्यक्ति जब हिंदी बोलता है, तो उसके बोलने का ढंग अलग होता है। एक सच्चे कलाकार का काम इसी बारीकी को सही तरीके से पर्दे पर दिखाना होता है।\n\nफ्लॉप होने के डर से कल्ट क्लासिक बनने तक का सफर\nराम गोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी ‘सत्या’ को आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन गैंगस्टर फिल्मों में गिना जाता है। मनोज बाजपेयी ने बताया कि जब उन्होंने यह फिल्म साइन की थी, तब फिल्म जगत में उनका कोई गॉडफादर नहीं था और वह मुंबई में टिके रहने के लिए संघर्ष कर रहे थे। लेकिन भीकू म्हात्रे के किरदार ने उनकी किस्मत पूरी तरह से बदल दी और उन्हें अभिनय की दुनिया में एक बड़ा नाम बना दिया।\n\n3 जुलाई 1998 को रिलीज हुई इस फिल्म को लेकर शुरुआत में निर्माताओं को डर था कि यह फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन रिलीज के एक हफ्ते बाद फिल्म ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सब देखते रह गए। हालांकि उस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में ‘प्यार तो होना ही था’ दूसरे नंबर पर थी, लेकिन ‘सत्या’ ने धीरे-धीरे अपनी एक अलग पहचान बनाई। यह फिल्म 1998 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में छठे स्थान पर रही थी।\n\nइस शानदार फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ जेडी चक्रवर्ती, सौरभ शुक्ला, परेश रावल, उर्मिला मातोंडकर, गोविंद नामदेव, शैफाली शाह, नीरज वोरा और सुशांत सिंह जैसे कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। वहीं विशाल भारद्वाज के संगीत से सजा गाना ‘सपनों में मिलती है’ आज भी शादियों और पार्टियों में डीजे की पहली पसंद बना हुआ है।\n\nइसका आप पर असर\n• सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह कहानी दिखाती है कि कैसे अभिनय में बारीकियों पर ध्यान देने से एक यादगार किरदार बनता है, जो दशकों बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा रहता है।\n• कलाकारों के लिए: अभिनय में क्षेत्रीय लहजे और उच्चारण पर महारत हासिल करना किसी भी कलाकार के करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मनोज बाजपेयी को किस फिल्म के लिए बाला साहेब ठाकरे ने आमंत्रित किया था?\nउन्हें 1998 की कल्ट क्लासिक फिल्म 'सत्या' में भीकू म्हात्रे के उनके शानदार अभिनय के बाद आमंत्रित किया गया था।\n\n2. बाला साहेब ठाकरे क्यों हैरान रह गए थे?\nवह इसलिए हैरान रह गए थे क्योंकि उन्हें लगा था कि मनोज बाजपेयी महाराष्ट्र से हैं, लेकिन बाद में पता चला कि वह वास्तव में बिहार से हैं।\n\n3. 'सत्या' फिल्म बॉक्स ऑफिस पर किस स्थान पर रही थी?\nयह फिल्म साल 1998 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में छठे स्थान पर रही थी।\n\n4. मनोज बाजपेयी की आने वाली फिल्म कौन सी है और यह किस पर आधारित है?\nउनकी आने वाली फिल्म का नाम 'गवर्नर' है, जो साल 1991 के भारत के आर्थिक संकट पर आधारित है।",
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  "publishedAt": "2026-06-20",
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