जब पिता की नौकरी छूटी तो 10 रुपये तक का हिसाब रखना पड़ा, भाग्यश्री बोरसे ने सुनाई गरीबी के दिनों की कहानी साउथ सिनेमा की एक्ट्रेस भाग्यश्री बोरसे ने अपने बचपन के संघर्ष के दिनों को याद किया, जब पिता की नौकरी छूटने के बाद उनका परिवार 10-10 रुपये के लिए मोहताज हो गया था और पूरे घर का खर्च महज 300 रुपये में चलता था। साउथ सिनेमा में हाल के बरसों में जिन चेहरों ने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों का दिल जीता है, उनमें एक्ट्रेस भाग्यश्री बोरसे का नाम सबसे ऊपर आता है। मगर इस चमकती कामयाबी के पीछे एक ऐसी भावुक कहानी छिपी है, जिसमें गरीबी, संघर्ष और माता-पिता के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा शामिल है। हाल ही में एक्ट्रेस ने खुद अपने इंटरव्यू में इस दर्दभरे दौर को याद किया। छत्रपति संभाजीनगर में हुआ जन्म, बचपन में झेली तंगी भाग्यश्री बोरसे का जन्म 6 मई 1999 को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर, यानी औरंगाबाद में एक बेहद साधारण लोअर मिडल क्लास परिवार में हुआ था। आज 27 साल की भाग्यश्री अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों पर राज कर रही हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें और उनके परिवार को एक-एक रुपये का हिसाब रखना पड़ता था। बचपन की तंगहाली की यादें आज भी उनके जेहन में ताजा हैं। जन्म के साथ ही चली गई पिता की नौकरी एक्ट्रेस ने बताया कि उनके पैदा होते ही पिता की नौकरी छूट गई थी और इसके बाद पूरे परिवार को गहरी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। घर चलाना मुश्किल हो गया था। पिता नौकरी की तलाश में दर-दर भटकते रहे, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी। परिवार 10-10 रुपये के लिए भी मोहताज हो गया था। भाग्यश्री ने बताया कि जब वो अपने पिता को नौकरी मांगते हुए देखती थीं, तो उनका दिल टूट जाता था। यह मंजर आज भी उन्हें भावुक कर देता है। डायरी में दर्ज था पाई-पाई का हिसाब अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भाग्यश्री ने एक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता घर के हर खर्च का हिसाब एक डायरी में लिखते थे। एक दिन उन्होंने डायरी में देखा कि 10 रुपये की पालक और 10 रुपये की मिर्ची तक का हिसाब दर्ज है। यह देखकर उनका दिल टूट गया। एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि उस दौर में उनके पूरे परिवार का महीने भर का खर्च महज 300 रुपये में चल जाता था, इतनी सीमित रकम में पूरा घर चलाना कितना कठिन रहा होगा, यह बात खुद ही समझी जा सकती है। नाइजीरिया से मुंबई तक, फिर मॉडलिंग में आजमाई किस्मत भाग्यश्री का कुछ समय का बचपन नाइजीरिया में भी बीता। वहां से लौटने के बाद उन्होंने मुंबई से मैनेजमेंट स्टडीज की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के साथ ही उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में भी कदम रखा और यहीं से उनकी किस्मत ने करवट ली। धीरे-धीरे मॉडलिंग से मिले मौकों ने उन्हें फिल्मी दुनिया तक पहुंचा दिया। अपनी कातिलाना मुस्कान, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और शानदार अभिनय के दम पर उन्होंने बेहद कम समय में साउथ सिनेमा के बड़े निर्देशकों और दर्शकों, दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आज वही भाग्यश्री, जो कभी 10-10 रुपये का हिसाब रखने को मजबूर थीं, अपनी डेब्यू फिल्म से स्टारडम की बुलंदियों को छू रही हैं। सवाल-जवाब 1. भाग्यश्री बोरसे का जन्म कब और कहां हुआ था? उनका जन्म 6 मई 1999 को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर, यानी औरंगाबाद में हुआ था। 2. भाग्यश्री के परिवार को आर्थिक तंगी का सामना क्यों करना पड़ा? भाग्यश्री के पैदा होते ही उनके पिता की नौकरी छूट गई थी, जिसके बाद परिवार को गहरी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी। 3. उनके घर का महीने भर का खर्च कितने रुपये में चलता था? एक्ट्रेस के मुताबिक उनके पूरे परिवार का खर्च महज 300 रुपये में चल जाता था। 4. डायरी वाले वाकये में भाग्यश्री ने क्या बताया? उन्होंने बताया कि डायरी में 10 रुपये की पालक और 10 रुपये की मिर्ची तक का हिसाब लिखा होता था, जिसे देखकर उनका दिल टूट गया। 5. भाग्यश्री का बचपन कहां-कहां बीता? उनका बचपन महाराष्ट्र के साथ-साथ कुछ समय के लिए नाइजीरिया में भी बीता। 6. विदेश से लौटने के बाद भाग्यश्री ने क्या किया? उन्होंने मुंबई से मैनेजमेंट स्टडीज की पढ़ाई पूरी की और साथ ही मॉडलिंग में किस्मत आजमाई, जहां से उनका करियर मुड़ा। 7. भाग्यश्री अभी कितने साल की हैं? एक्ट्रेस अभी 27 साल की हैं। प्रेरणा और सबक भाग्यश्री बोरसे का सफर बताता है कि गरीबी और तंगी को पीछे छोड़कर भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है, बशर्ते धैर्य और मेहनत साथ न छूटे। • पैसों का अनुशासन सीखें: उनके माता-पिता हर छोटे-बड़े खर्च का हिसाब डायरी में लिखते थे, यह आदत आज भी तंगी के दौर में परिवार को संभाले रखने का सबक देती है। • पढ़ाई को प्राथमिकता दें: मुश्किल हालात के बावजूद भाग्यश्री ने मुंबई से मैनेजमेंट स्टडीज पूरी की, जिससे उन्हें एक मजबूत आधार मिला। • छोटे मौके को बड़ी शुरुआत बनाएं: पढ़ाई के साथ मॉडलिंग में आजमाई किस्मत ने ही उन्हें फिल्मों तक पहुंचाया। • संघर्ष की यादों को ताकत बनाएं: बचपन की तंगहाली को भुलाने के बजाय भाग्यश्री ने उसे अपनी मेहनत की वजह बनाया। • धैर्य रखें: कामयाबी रातोंरात नहीं मिली, बल्कि नाइजीरिया से मुंबई तक के लंबे सफर और लगातार कोशिशों के बाद मिली। https://trendkia.com/entertainment/jaba-pita-ki-naukari-chhuti-to-10-rupaye-taka-ka-hisaba-rakhana-para-bhagyashree-borse-ne-sunai-garibi-ke-dinon-ki-kahani-7642 TrendKia — Har trend, sabse pehle.