कभी चराते थे बकरियां, अब बॉलीवुड में छाए गौरव देवासी, राजस्थानी सिनेमा को ग्लोबल मंच दिलाने का है बड़ा विजन पाली के छोटे से गाँव से निकलकर मायानगरी मुंबई में अपनी खास जगह बनाने वाले अभिनेता गौरव देवासी के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी। भारतीय सिनेमा के फलक पर एक ऐसा सितारा लगातार चमक रहा है जिसने अपनी मेहनत के बलबूते हर बाधा को पार किया है। राजस्थान के पाली जिले के एक बेहद सामान्य और छोटे से गाँव के परिवेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव देवासी ने शुरुआती दिनों में बकरियां चराने जैसे साधारण काम किए थे। हालांकि उनके भीतर पल रहे अभिनय के बड़े सपनों और अटूट दृढ़ संकल्प ने उन्हें ग्लैमर की दुनिया मुंबई तक पहुँचा दिया। किसी फिल्मी पटकथा की तरह लगने वाले इस सफर में उनके पास कोई फिल्मी गॉडफादर नहीं था, बल्कि उनकी खुद की लगन और प्रतिभा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक का सफर मायानगरी में अपने पैर जमाने के बाद इस युवा कलाकार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अपने अभिनय करियर के दौरान हिंदी, गुजराती और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के कई प्रोजेक्ट्स में काम करते हुए अपनी कला का लोहा मनवाया है। उनके प्रमुख अभिनय कार्यों में हिंदी एक्शन ड्रामा फिल्म ‘द बर्निंग सिग्नल’ शामिल है, जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इसके अलावा उन्होंने गुजराती सिनेमा में ‘हू तने प्रेमो करू छु’ फिल्म के जरिए अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा और ‘द अनटोल्ड स्टोरी’ में अपने बेहद संजीदा अभिनय से दर्शकों की सराहना बटोरी। कई फिल्मों में बिखेरा अभिनय का जलवा अपने अब तक के सफर में उन्होंने लगभग आधा दर्जन से अधिक फिल्मों में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराई है। इन प्रोजेक्ट्स में ‘बॉस’, ‘पैराशूट’ और ‘द मिस्ट्री’ जैसी कई अन्य हिंदी और प्रादेशिक फिल्में भी शुमार हैं, जिन्होंने उन्हें सिनेमा जगत में एक मजबूत पहचान दिलाई है। अलग-अलग जॉनर की इन फिल्मों में अपनी अदायगी से उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे किसी भी तरह के किरदार में पूरी तरह ढल सकते हैं। राजस्थानी सिनेमा की दशा पर गहरी चिंता अन्य उद्योगों में अपनी कला का परचम लहराने के बाद अब उनका पूरा ध्यान अपनी मातृभूमि की कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। राजस्थानी सिनेमा की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यहाँ की माटी में कहानियों, लोक संस्कृति और परंपराओं का अपार खजाना छिपा हुआ है। इसके बावजूद यहाँ की फिल्में उस बड़े मुकाम को हासिल नहीं कर पा रही हैं जिसकी वे असली हकदार हैं। उनके अनुसार, क्षेत्रीय सिनेमा को नई मजबूती देने के लिए अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। कहानी और तकनीकी गुणवत्ता पर जोर किसी भी फिल्म की सफलता के पीछे उसकी पटकथा और कहानी की मजबूती सबसे अहम होती है। केवल किसी खास भाषा में फिल्म बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके संवाद, निर्देशन, कैमरा वर्क और तकनीकी पहलुओं को राष्ट्रीय स्तर का बनाना जरूरी है। आज के युवा दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए ऐसे विषयों का चुनाव करना वक्त की सबसे बड़ी मांग है जो सीधे दिल को छू सकें। दक्षिण और पंजाबी सिनेमा से लेनी होगी प्रेरणा उनका मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री को ऐसे दूरदर्शी निर्देशकों और निर्माताओं की सख्त जरूरत है जो स्थानीय कहानियों को आधुनिक सिनेमाई अंदाज में परोस सकें। जिस तरह से दक्षिण भारतीय और पंजाबी फिल्म उद्योगों ने अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ाव रखते हुए शानदार तकनीक के बल पर पूरे देश में अपनी धाक जमाई है, उसी तर्ज पर राजस्थानी सिनेमा को भी देश के हर कोने तक पहुँचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। आगामी प्रोजेक्ट्स और हॉलीवुड स्टाइल थ्रिलर उनकी रचनात्मक यात्रा यहीं थमने वाली नहीं है, क्योंकि उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म ‘राधे कृष्णा’ की शूटिंग पहले ही पूरी कर ली है। इसके साथ ही उन्होंने हॉलीवुड फिल्मों की तर्ज पर बनाई जाने वाली एक सस्पेंस से भरपूर थ्रिलर फिल्म ‘द लास्ट ब्रीथ’ का भी आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिससे उनके चाहने वालों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। उनका यह पक्का विश्वास है कि राजस्थान की कहानियों में पूरी दुनिया को अपने साथ बांधकर रखने की अद्भुत ताकत है, जो इस क्षेत्र के कलाकारों के बीच एक नई उम्मीद की किरण जगा रहा है। इसका आप पर असर यह सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और अपनी मेहनत के दम पर उन्हें सच करने का माद्दा रखते हैं। • प्रेरणा और संघर्ष: Across India: यह कहानी साबित करती है कि बिना गॉडफादर के भी अपने दम पर मुकाम हासिल किया जा सकता है। यह युवाओं को अपनी कला और मेहनत पर भरोसा रखने की सीख देती है। • क्षेत्रीय संस्कृति: In Pali: पाली और आसपास के स्थानीय कलाकारों को अपने हुनर को निखारने और बड़े मंच तक पहुँचने की प्रेरणा मिलती है। इससे क्षेत्रीय कला के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह बदलाव और सफलता व्यक्तिगत कड़ी मेहनत, कला के प्रति जुनून और क्षेत्रीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की सोच के कारण संभव हुई है। • कड़ी मेहनत और लगन: संघर्षपूर्ण शुरुआत: सीमित पारिवारिक संसाधनों और बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर मायानगरी तक का सफर तय करने में उनकी अपनी अटूट मेहनत ने मुख्य भूमिका निभाई। • अभिनय का जुनून: कला के प्रति समर्पण: बचपन के सपनों को जीवंत रखने की इच्छा ने उन्हें तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए सिनेमा की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया। • क्षेत्रीय दृष्टिकोण: नया विजन: राजस्थानी सिनेमा की दयनीय स्थिति को बदलकर उसे आधुनिक तकनीक और मजबूत कहानियों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की मजबूत सोच ने उन्हें प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. गौरव देवासी मूल रूप से कहाँ के रहने वाले हैं? गौरव देवासी राजस्थान के पाली जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले हैं। 2. उन्होंने अपने करियर में किन प्रमुख फिल्मों में काम किया है? उन्होंने ‘द बर्निंग सिग्नल’, ‘हू तने प्रेमो करू छु’, ‘द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘बॉस’, ‘पैराशूट’ और ‘द मिस्ट्री’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। 3. राजस्थानी सिनेमा को लेकर उनका क्या विजन है? उनका मानना है कि राजस्थानी सिनेमा को आधुनिक तकनीकों, मजबूत कहानियों और पेशेवर रवैये के साथ राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए। 4. उनकी आगामी फिल्में कौन सी हैं? उनकी आगामी फिल्मों में ‘राधे कृष्णा’ और हॉलीवुड तर्ज पर बनने वाली थ्रिलर फिल्म ‘द लास्ट ब्रीथ’ शामिल हैं। प्रेरणा और सबक गौरव देवासी के जीवन और संघर्ष से कई महत्वपूर्ण सबक सीखे जा सकते हैं जो हर महत्वाकांक्षी युवा के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। • शुरुआत मायने नहीं रखती: लक्ष्य पर फोकस: जीवन में आपकी शुरुआती परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि आपके इरादे पक्के हैं तो आप बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। • कड़ी मेहनत का विकल्प नहीं: निरंतर प्रयास: बिना किसी गॉडफादर के इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए आपको अपनी प्रतिभा और लगातार मेहनत पर भरोसा रखना होगा। • अपनी जड़ों से जुड़ाव: क्षेत्रीय पहचान: सफलता मिलने के बाद भी अपनी मूल संस्कृति और क्षेत्रीय जड़ों को न भूलकर उन्हें आगे बढ़ाना सच्ची उपलब्धि है। • नवाचार को अपनाना: आधुनिक दृष्टिकोण: किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पुराने ढर्रे को छोड़कर आधुनिक तकनीकों और नए विचारों को अपनाना बेहद जरूरी है। https://trendkia.com/entertainment/kabhi-charate-the-bakariyan-aba-bollywood-men-chhae-gaurav-dewasi-rajasthan-i-cinema-ko-global-mncha-dilane-ka-hai-bara-vijana-49217 TrendKia — Har trend, sabse pehle.