कहो ना प्यार है से साथिया तक, 2000 से 2002 के बीच रिलीज हुए बॉलीवुड के वो 12 एल्बम जिन्होंने हर दिल पर किया राज साल 2000 से 2002 के दौर में बिना इंस्टाग्राम, रील्स या म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स के भी बॉलीवुड साउंडट्रैक्स ने युवाओं के बीच जबरदस्त दीवानगी पैदा की थी। सन 2000 से 2002 की समय अवधि भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अनूठा दौर मानी जाती है जब डिजिटल क्रांति का दौर शुरू भी नहीं हुआ था। न ही उस समय इंस्टाग्राम रील्स का कोई वजूद था, न ही सोशल मीडिया पर स्टोरीज लगाने की परंपरा थी और न ही स्पॉटिफाई जैसे आधुनिक म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स मौजूद थे। इसके बावजूद, फिल्मों के गानों का जादू ऐसा था कि ऑडियो कैसेट और सीडी रिलीज होते ही स्कूल परिसरों, कॉलेज के मैदानों, शादियों की महफिलों तथा हर छोटी-बड़ी पार्टी में सिर्फ इन्हीं धुनों की गूंज सुनाई देती थी। इस विशिष्ट कालखंड के दौरान बॉलीवुड ने संगीत प्रेमियों को ऐसे सदाबहार और भावुक नगमे दिए, जिनके सहारे उस दौर की युवा पीढ़ी ने पहली मोहब्बत का अहसास सीखा, गहरी दोस्तियों के रिश्ते निभाए और दिल टूटने के दर्द को भी झेला। चाहे वह पर्दे पर नया कदम रख रहे अभिनेता का हुक स्टेप हो या किसी भव्य रोमांटिक ड्रामा की सुरीली धुन, इन सभी नगमों ने न केवल उस समय के सिनेमाई वातावरण को गुलजार किया बल्कि एक पूरी पीढ़ी के जज्बातों को अपनी आवाज दी। वर्तमान समय में भी जब इनमें से कोई पुरानी धुन अचानक कानों में पड़ती है, तो बीते जमाने की यादें, कॉलेज के बेफिक्र दिन और पुरानी मोहब्बत के हसीन मंजर आंखों के सामने जीवंत हो उठते हैं। एक नए सुपरस्टार का आगाज और वर्ष 2000 का संगीतमय जादू शताब्दी के मोड़ पर यानी साल 2000 की शुरुआत बॉलीवुड के लिए एक अभूतपूर्व बदलाव लेकर आई जब हिंदी सिनेमा को एक नया सुपरस्टार मिला। फिल्म कहो ना प्यार है के साथ ऋतिक रोशन ने रुपहले पर्दे पर कदम रखा और देखते ही देखते वह युवाओं की पहली पसंद बन गए। इस फिल्म का संगीत भी उतना ही भव्य और लोकप्रिय साबित हुआ जितना कि इसका मुख्य कलाकार। फिल्म के गीतों जैसे एक पल का जीना, शीर्षक गीत कहो ना प्यार है, प्यार की कश्ती में, ना तुम जानो ना हम तथा चांद सितारे ने हर उम्र के श्रोताओं को अपना दीवाना बना लिया। विशेष रूप से एक पल का जीना गीत का सिग्नेचर हुक स्टेप युवाओं के सिर चढ़कर बोला और यह डांस स्टेप ऋतिक रोशन की स्थायी पहचान बन गया। इस कालजयी एल्बम की मनमोहक धुनों को संगीतकार राजेश रोशन ने तैयार किया था। साल 2000 में रोमांस और मानवीय भावनाओं को नए आयाम देने वाली एक और बड़ी फिल्म मोहब्बतें पर्दे पर आई। इस रोमांटिक ड्रामा में शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय पर फिल्माया गया नगमा हमको हमी से चुरा लो आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे महान रोमांटिक गीतों की श्रेणी में अपना शीर्ष स्थान बनाए हुए है। इसके साथ ही एल्बम के अन्य गीतों जैसे आंखें खुली, पैरों में बंधन है, सोनी सोनी और चलते चलते ने कॉलेज जीवन तथा युवाओं की बेफिक्र उमंगों को बखूबी संगीत में पिरोया। जतीन-ललित के सुरीले संगीत और आनंद बख्शी के दिल को छू लेने वाले बोलों से सजे इस म्यूजिक एल्बम ने बिक्री के नए कीर्तिमान स्थापित किए। विभिन्न व्यावसायिक रिपोर्ट्स के अनुसार इस एल्बम की 50 लाख से भी अधिक ऑडियो यूनिट्स बिकी थीं। उसी वर्ष यानी 2000 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई फिल्म मिशन कश्मीर हालांकि एक बेहद गंभीर और संवेदनशील पृष्ठभूमि पर आधारित थी, लेकिन इसके एक खास गीत ने हर उत्सव के माहौल को खुशियों से भर दिया। ऋतिक रोशन और प्रीति जिंटा पर दर्शाया गया कश्मीरी लोक-संस्कृति के रंगों में रंगा गीत बुमरो देश भर में जबरदस्त रूप से लोकप्रिय हुआ। संगीतकार त्रयी शंकर-एहसान-लॉय द्वारा तैयार की गई कर्णप्रिय धुन और शायर राहत इंदौरी के उत्कृष्ट बोलों ने इस गीत को एक अनूठी पहचान दी। यह फिल्म साल 2000 में दिवाली के शुभ अवसर पर रिलीज हुई थी और उस वर्ष की सबसे सफल व्यावसायिक फिल्मों की सूची में प्रमुखता से शामिल रही। वर्ष 2000 की चौथी प्रमुख संगीतमय प्रस्तुति जोश थी, जिसमें शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय, चंद्रचूड़ सिंह और शरद कपूर जैसे दिग्गजों ने अभिनय किया था। इस फिल्म ने तटीय माहौल के बीच युवाओं की आपसी खींचतान, दोस्ती और भाईचारे के जज्बे को एक अनूठे अंदाज में पेश किया। फिल्म के संगीत पक्ष को संभालते हुए संगीतकार अनु मलिक ने कई यादगार धुनें बनाईं, जिनमें अपुन बोला और है मेरा दिल युवाओं की जुबान पर चढ़ गए। उस दौर के कॉलेज जाने वाले छात्रों के लिए इन गानों की धुनें उनकी दैनिक मस्ती और आपसी बॉन्डिंग का अभिन्न हिस्सा बन गई थीं। दोस्ती, शादी और रोमांच: वर्ष 2001 के नए संगीत प्रयोग साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म दिल चाहता है ने बॉलीवुड में युवाओं के बीच दोस्ती के मायने और उसके चित्रण को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। निर्देशक फरहान अख्तर की इस आधुनिक कहानी में आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना की मुख्य तिकड़ी की केमिस्ट्री के साथ-साथ इसके प्रोग्रेसिव म्यूजिक ने युवाओं को खुद से बहुत गहराई से जोड़ा। फिल्म का धमाकेदार गीत कोई कहे कहता रहे युवाओं की आजादी और मस्ती का राष्ट्रीय गान बन गया, जबकि तन्हाई गीत ने प्यार में टूटे दिलों की पीड़ा को एक सशक्त आवाज दी। वहीं दूसरी ओर वो लड़की है कहां ने प्यार की मजाकीय अंदाज में तलाश करने के भाव को बेहतरीन तरीके से पकड़ा। इस पूरे एल्बम को शंकर-एहसान-लॉय ने अपने आधुनिक संगीत से संवारा था और इसके अर्थपूर्ण बोल गीतकार जावेद अख्तर ने लिखे थे। साल 2001 की ही एक अन्य भव्य और मल्टीस्टारर फिल्म का संगीत भी किसी बहुत बड़े पारिवारिक उत्सव से कम नहीं था। पारिवारिक रिश्तों पर आधारित इस फिल्म के गीत बोले चूड़ियां ने भारतीय शादियों, सगाई और पारिवारिक आयोजनों की प्लेलिस्ट में अपनी ऐसी जगह स्थापित की जो रिलीज के दो दशकों बाद आज भी उतनी ही कायम है। इसी एल्बम का रोमांटिक गीत सूरज हुआ मद्धम प्रेमी जोड़ों का सर्वकालिक पसंदीदा नगमा बन गया, जबकि यू आर माई सोनिया ने क्लबों और यूथ पार्टियों के मूड को पूरी तरह से बदल दिया। इस विस्तृत एल्बम के अलग-अलग नगमों को संगीतकार जतीन-ललित, संदेश शांडिल्य और आदेश श्रीवास्तव ने मिलकर स्वरबद्ध किया था। यह फिल्म अपने समय की विशाल ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके गाने 15 साल बाद भी म्यूजिक चार्ट्स पर ब्लॉकबस्टर बने रहे। इसी साल रिलीज हुई फिल्म अजनबी में दर्शकों को रोमांस के साथ-साथ सस्पेंस और थ्रिलर का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। अक्षय कुमार, बॉबी देओल, करीना कपूर और बिपाशा बसु के अभिनय से सजी इस फिल्म के गानों ने चार्टबस्टर सूची में अपना अलग ही रंग जमाया। एल्बम के प्रमुख गीत जैसे मोहब्बत नाम है किसका, मेरी जिंदगी में अजनबी, कसम से तेरी आंखें और महबूबा महबूबा श्रोताओं द्वारा बार-बार सुने गए। संगीतकार अनु मलिक के संगीत और गीतकार समीर के लिखे शब्दों से बने इस एल्बम में हर तरह के मूड के लिए गीत मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर करीना कपूर और बिपाशा बसु के बीच हुई कैट फाइट की खबरें भी मीडिया की सुर्खियों में छाई रही थीं। साल 2001 की ऐतिहासिक सफलता की बात करें तो सनी देओल और अमीषा पटेल स्टारर फिल्म गदर ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने का काम किया, और इसके गानों ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े। फिल्म का ऊर्जावान गाना मैं निकला गड्डी लेके आज भी किसी भी लंबे सफर और दोस्तों की गाड़ियों की सैर का सबसे पसंदीदा गाना माना जाता है। दूसरी तरफ उड़ जा काले कावा ने मुख्य पात्रों तारा और सकीना की पाकीज़ा प्रेम कहानी की संवेदनाओं को बहुत गहराई प्रदान की। इस पूरे एल्बम में कुल 5 मुख्य गाने शामिल थे और अपनी रिलीज के समय यह भारत में सबसे अधिक बिकने वाले साउंडट्रैक्स में अग्रणी स्थान पर रहा। महागाथा, खौफ और सुरमई सुकून: वर्ष 2002 की सदाबहार धुनें साल 2002 में प्रख्यात फिल्मकार संजय लीला भंसाली की महागाथा देवदास जब सिनेमाघरों में पहुंची तो इसके संगीत ने मोहब्बत और जुदाई के दर्द को एक बेहद भव्य, कलात्मक और शायराना धरातल प्रदान किया। फिल्म के बहुचर्चित नृत्य गीत डोला रे डोला में माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय की अभूतपूर्व जुगलबंदी और जुगलबंदी भरे डांस ने देश भर में तहलका मचा दिया। इसके अलावा सिलसिले ये चाहत का, मार डाला, बैरी पिया तथा हमेशा तुमको चाहा जैसे गानों ने शास्त्रीय संगीत की चाशनी में डूबकर किरदार के विरह और प्रेम को अपनी आवाज दी। संगीतकार इस्माइल दरबार के निर्देशन में तैयार हुए इस ऐतिहासिक एल्बम में कुल 10 ट्रैक शामिल थे। वर्ष 2002 में ही प्रदर्शित हुई फिल्म राज ने दर्शकों के सामने हॉरर और रोमांस का ऐसा अनोखा और खूबसूरत संगम पेश किया कि दर्शक थिएटर में डरने के साथ-साथ गानों को गुनगुनाने पर मजबूर हो जाते थे। फिल्म के सदाबहार गीत जैसे आपके प्यार में हम, जो भी कसमें, मैं अगर सामने और कितना प्यारा है अत्यधिक लोकप्रिय हुए। संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण और गीतकार समीर की जुगलबंदी ने इस हॉरर फिल्म के संगीत में बेहद गहरा रोमांस और कसक भर दी थी। आज भी दो दशक बीत जाने के बाद इस एल्बम के सभी गीत 2000 के दशक की रोमांटिक प्लेलिस्ट्स में शान से सुने जाते हैं। इसी कालखंड की अंतिम महान कृतियों में शामिल विवेक ओबेरॉय और रानी मुखर्जी की फिल्म साथिया का संगीत आज भी 2000 के दशक की सबसे हसीन और सुरीली यादों में गिना जाता है। महान संगीतकार ए.आर. रहमान और वरिष्ठ गीतकार गुलजार की कालजयी जोड़ी ने इस फिल्म के लिए साथिया, ओ हमदम सुनियो रे, चुपके से, छलका छलका रे तथा ऐ उड़ी उड़ी उड़ी जैसे नायाब नगमे तैयार किए। इस म्यूजिक एल्बम की सबसे खास बात यह थी कि इसमें युवाओं के प्यार के साथ-साथ गृहस्थ जीवन की उलझनों और रिश्तों की सादगी को बहुत ही संजीदगी से महसूस किया जा सकता था। यह ऐतिहासिक एल्बम 18 अक्टूबर 2002 को आधिकारिक तौर पर रिलीज किया गया था। साल 2002 के इसी स्वर्णिम संगीत दौर में फिल्म यह दिल आशिकाना भी शामिल थी, जिसके गानों ने अपने समय में युवाओं और संगीत प्रेमियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी थी। बिना किसी डिजिटल प्रचार और रील्स के उस दौर में इन सभी 12 फिल्मों के गानों ने अपनी शुद्ध धुनों और बेहतरीन गायकी के बल पर भारत के कोने-कोने में अपनी स्थायी जगह बनाई थी। यही कारण है कि आज दो दशक बाद भी ये धुनें बजते ही हर संगीत प्रेमी अतीत की उन खूबसूरत और सुहानी यादों में खो जाता है। इसका आप पर असर भारत में: 2000-2002 के ये सदाबहार गाने आज भी शादियों, दोस्तों के सफर और पारिवारिक समारोहों की प्लेलिस्ट में मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। संगीत प्रेमियों के लिए: बिना किसी डिजिटल प्रमोशन के भी इन गानों की लोकप्रियता यह साबित करती है कि शुद्ध सुरीली धुनें और गहरे बोल ही लंबे समय तक याद रखे जाते हैं। सवाल-जवाब 1. 2000 से 2002 के दौरान बॉलीवुड के किस नए कलाकार ने संगीत के क्षेत्र में सबसे बड़ा तहलका मचाया? साल 2000 में फिल्म 'कहो ना प्यार है' से ऋतिक रोशन ने डेब्यू किया और फिल्म के गानों विशेषकर 'एक पल का जीना' के हुक स्टेप ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। 2. साल 2000 की किस फिल्म के संगीत एल्बम की 50 लाख से अधिक प्रतियां बिकी थीं? शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय स्टारर फिल्म 'मोहब्बतें' के संगीत एल्बम की जतीन-ललित के संगीत के कारण 50 लाख से अधिक यूनिट्स बिकी थीं। 3. फिल्म 'साथिया' का आधिकारिक म्यूजिक एल्बम किस तारीख को रिलीज हुआ था? ए.आर. रहमान और गुलजार की जोड़ी वाली फिल्म 'साथिया' का म्यूजिक एल्बम 18 अक्टूबर 2002 को रिलीज किया गया था। 4. फिल्म 'देवदास' के म्यूजिक एल्बम में कुल कितने गाने या ट्रैक शामिल थे? संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' के संगीतकार इस्माइल दरबार द्वारा तैयार किए गए एल्बम में कुल 10 ट्रैक शामिल थे। 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