करियर के धक्के और मातृत्व के बाद मानसिक तनाव: एकता कपूर ने बयां किए अपने दो सबसे मुश्किल दौर टेलीविजन निर्माता एकता कपूर ने अपने पेशेवर और निजी जीवन के सबसे कठिन समय का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे साल 2008 में करियर की चुनौतियां और बाद में बेटे के आगमन व महामारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य की जंग ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था। भारतीय टेलीविजन और मनोरंजन जगत की जानी-मानी निर्माता एकता कपूर ने अपने लंबे सफर में आए सबसे भारी उतार-चढ़ावों पर खुलकर बात की है। रणवीर अल्लाहबादिया के शो बियर बाइसेप पर बातचीत के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी पूरी जिंदगी में दो बार ऐसे बेहद नाजुक मोड़ आए, जब वह पूरी तरह टूट चुकी थीं। इनमें से पहला झटका साल 2008 में उनके पेशेवर कामकाज और करियर के मोर्चे पर लगा था, जबकि दूसरा भावनात्मक संकट साल 2020 और 2021 के दौरान उनकी निजी जिंदगी में सामने आया। साल 2008 का पेशेवर संकट और सीख एकता कपूर ने बताया कि साल 2008 उनके कामकाजी जीवन का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण समय साबित हुआ। उस दौर में उनके काम और प्रोजेक्ट्स पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिसने उन्हें पेशेवर स्तर पर बहुत कुछ सहने को मजबूर किया। हालांकि उस कठिन समय ने उन्हें कामकाज की दुनिया के कई कड़े और व्यावहारिक सबक भी सिखाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉर्पोरेट जगत या किसी भी व्यावसायिक समझौते में सारी महत्वपूर्ण शर्तों को लिखित रूप में रखना अनिवार्य है। केवल आपसी विश्वास के आधार पर काम करना पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि कंपनियों में जब अधिकारी या प्रोफेशनल्स बदलते हैं, तो उनके काम करने के नियम और प्राथमिकताएं भी बदल जाती हैं। अति-आत्मविश्वास से बाहर निकलने का अहसास शुरुआती दिनों की उपलब्धियों को याद करते हुए निर्माता ने साझा किया कि करियर की शुरुआत में ही बहुत तेजी से मिली कामयाबी ने उनके भीतर यह धारणा बना दी थी कि वह जो कुछ भी करती हैं, वह एकदम सटीक और शानदार होता है। लेकिन समय के साथ उन्हें यह जमीनी हकीकत समझ आई कि हर इंसान से उत्कृष्ट काम भी हो सकता है और किसी से भी गलतियां हो सकती हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि ओवरकॉन्फिडेंस स्वैग नहीं बल्कि बेवकूफी है, और जीवन में आगे बढ़ने के लिए अति-आत्मविश्वास की कतई जरूरत नहीं होती। उन्होंने रिश्तों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लोगों के साथ ऐसे संबंध बनाने चाहिए जो केवल सफलता या फायदे पर टिके न हों, क्योंकि शोहरत में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं मगर इंसान की विश्वसनीयता और काम के प्रति ईमानदारी बरकरार रहनी चाहिए। महामारी का दौर और मानसिक स्वास्थ्य की जंग कामकाज से इतर अपनी व्यक्तिगत जिंदगी की बात करते हुए एकता कपूर ने बताया कि कोरोना काल उनके निजी जीवन के लिए बेहद दर्दनाक और तनावपूर्ण साबित हुआ। जीवन में पहली बार ऐसा हुआ था जब वह इतने लंबे समय तक अपने घर के भीतर बंद थीं, क्योंकि इससे पहले उन्होंने कभी इतना वक्त घर पर नहीं बिताया था। उस महामारी के दौरान वह अपने आसपास के लोगों को खोते हुए देख रही थीं, और इतनी बड़ी संख्या में लोगों को अपनी आंखों के सामने जाते देखना उनके लिए भारी सदमा था। बेटे के आगमन के बाद अवसाद का सामना इस बातचीत में उन्होंने अपनी मातृत्व यात्रा के मानसिक तनाव का भी उल्लेख किया। एकता ने साझा किया कि भले ही उन्होंने अपने बेटे को जैविक रूप से जन्म नहीं दिया था, फिर भी वह पोस्टपार्टम अवसाद की चपेट में आ गई थीं। इस डिप्रेशन और महामारी के भारी माहौल ने मिलकर साल 2020 और 2021 में उनके मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे उनकी निजी जिंदगी में काफी उथल-पुथल रही। इसका आप पर असर यह साक्षात्कार पेशेवर काम-काज और मानसिक स्वास्थ्य दोनों स्तरों पर व्यावहारिक सबक पेश करता है। • कार्यस्थल और अनुबंध: व्यावसायिक समझौतों को हमेशा दस्तावेजी रूप में दर्ज रखें। केवल मौखिक भरोसे पर निर्भर रहने से बचना चाहिए क्योंकि कंपनियों में लोग बदलने पर नीतियां बदल जाती हैं। • अति-आत्मविश्वास से बचाव: शुरुआती सफलता के बाद खुद को अजेय मानने की भूल न करें। निरंतर प्रगति के लिए गलतियों को स्वीकारना और विनम्र बने रहना जरूरी है। • मानसिक स्वास्थ्य की सजगता: बच्चों के आगमन और जीवन के बड़े बदलावों के दौरान मानसिक तनाव की पहचान करें। बिना जैविक प्रसव के भी माता-पिता भावनात्मक अवसाद का शिकार हो सकते हैं, जिसके लिए समय पर संवेदनशीलता जरूरी है। • संबंधों की प्रासंगिकता: कामकाजी दुनिया में रिश्ते केवल वर्तमान सफलता को देखकर न बनाएं। विश्वसनीयता और काम के प्रति समर्पण को हमेशा बनाए रखना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ एकता कपूर ने अपने जीवन के दो सबसे कठिन दौरों के पीछे की परिस्थितियों और कारणों को साझा किया है। • पेशेवर संकट के कारण: साल 2008 में शुरुआती दौर की भारी सफलता से उपजा अति-आत्मविश्वास और कंपनियों के साथ लिखित समझौतों के अभाव ने उनके करियर में बाधाएं खड़ी की थीं। प्रोफेशनल्स के बदलने से पुराने समीकरण बिगड़े और उनके कामकाज पर सीधा असर पड़ा। • निजी और मानसिक तनाव की पृष्ठभूमि: साल 2020 और 2021 के दौरान कोरोना वायरस महामारी के चलते लंबे समय तक घर पर बंद रहने और लोगों की मौतों को देखने का गहरा सदमा लगा। इसके साथ ही बेटे के आगमन के बाद वह पोस्टपार्टम अवसाद से ग्रसित हो गईं, जिसने उनके मानसिक स्वास्थ्य को काफी प्रभावित किया। सवाल-जवाब 1. एकता कपूर ने किस शो पर अपनी जिंदगी के मुश्किल दौर के बारे में बात की? उन्होंने रणवीर अल्लाहबादिया के शो बियर बाइसेप पर अपने जीवन के मुश्किल दौर का जिक्र किया। 2. एकता कपूर के करियर का सबसे मुश्किल साल कौन सा था? साल 2008 उनके करियर और पेशेवर मोर्चे के लिए सबसे कठिन वर्ष साबित हुआ था। 3. साल 2008 के दौर से एकता कपूर ने क्या बड़ा सबक सीखा? उन्होंने सीखा कि कंपनियों के साथ काम करते समय हर महत्वपूर्ण डील को लिखित रूप में रखना चाहिए और अति-आत्मविश्वास से बचना चाहिए। 4. एकता कपूर की निजी जिंदगी के लिए कौन सा समय सबसे चुनौतीपूर्ण रहा? साल 2020 और 2021 का दौर उनके मानसिक स्वास्थ्य और निजी जीवन के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा। 5. कोरोना काल के दौरान एकता कपूर को किस मानसिक समस्या का सामना करना पड़ा? उस दौरान वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जूझ रही थीं और आसपास के लोगों को खोने के सदमे ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला था। प्रेरणा और सबक कठिन समय से उबरने और गलतियों से सीख लेने के बारे में एकता कपूर के सफर से कई व्यावहारिक सबक मिलते हैं। • गलतियों को स्वीकार करना: शुरुआती सफलता के बाद विनम्रता बनाए रखना और यह समझना जरूरी है कि कोई भी व्यक्ति गलतियों से परे नहीं होता। • औपचारिकता और स्पष्टता: काम में केवल निजी रिश्तों के भरोसे न रहकर हर पेशेवर बात को लिखित रूप में दर्ज करने की आदत डालनी चाहिए। • मुश्किलों के बाद लचीलापन: चाहे करियर का सबसे बुरा दौर हो या मानसिक स्वास्थ्य का संकट, अपनी ईमानदारी और विश्वसनीयता बनाए रखकर वापसी की जा सकती है। https://trendkia.com/entertainment/kariyara-ke-dhakke-aura-matritva-ke-bada-manasika-tanava-ekta-kapoor-ne-bayan-kie-apane-do-sabase-mushkila-daura-46668 TrendKia — Har trend, sabse pehle.