किरदार गढ़ने में संगीत का सहारा लेते हैं रघुबीर यादव, बिना फॉर्मल एक्टिंग कोर्स ऐसे तय किया सफर वेब शो हुंकार: द रोर के रिस्पॉन्स के बीच रघुबीर यादव ने बताया कि एक्टिंग उनकी योजना नहीं बल्कि इत्तेफाक थी, जिसे उन्होंने स्टेज क्राफ्ट और संगीत के दम पर संवारा। हालिया वेब सीरीज ‘हुंकार: द रोर’ को मिल रही दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बीच जाने-माने अभिनेता रघुबीर यादव ने अपनी अभिनय यात्रा और कला को लेकर अहम बातें साझा की हैं। उनका कहना है कि अभिनय के क्षेत्र में कदम रखना उनके किसी तय मंसूबे या योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह इत्तेफाक से उनकी जिंदगी में आया। शुरुआत में मजबूरी जैसा लगने वाला यह पेशा बाद में उनका जुनून बन गया और वे इसे पूरी शिद्दत से पसंद करने लगे। संगीत के जरिए किरदारों की भावनाएं पकड़ते हैं रघुबीर रघुबीर यादव के मुताबिक, वे किसी भी भूमिका को गहराई से महसूस करने और उसकी आत्मा तक पहुंचने के लिए संगीत का सहारा लेते हैं। उनका मानना है कि धुन और सुरों से इंसानी जज्बात बेहद तेजी से जुड़ते हैं। इंसान की जिंदगी जीने का तरीका, उसकी खुशियां और उसकी मनोदशा जिस रंग की होती है, उसी तरह की लय उसके भीतर उतरती है। बचपन से ही सुरों और धुनों से उनका गहरा लगाव रहा है। उन्होंने बातचीत में यह भी दोहराया कि अभिनय तो अनचाहे तरीके से उनके जिम्मे आ गया था, जिसके चलते उन्हें इस रास्ते पर आगे बढ़ना पड़ा। स्टेज क्राफ्ट पर ध्यान, एक्टिंग का नहीं किया कोई अलग कोर्स अभिनय की विधा पर अपनी समझ रखते हुए रघुबीर यादव ने स्पष्ट किया कि एक कलाकार के लिए केवल डायलॉग बोलना या बुनियादी कलाकारी जानना पर्याप्त नहीं है। एक बेहतर परफॉर्मर बनने के लिए जीवन के हर पहलू और कई विधाओं की समझ होना अनिवार्य है, जिसमें संगीत भी शामिल है। उनका मानना है कि दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं होनी चाहिए जिसके बारे में एक अभिनेता पूरी तरह अनजान रहे। इसी सोच की वजह से उन्होंने एक्टिंग का कोई तयशुदा कोर्स करने के बजाय स्टेज क्राफ्ट में विशेषज्ञता हासिल की, ताकि मंच और प्रस्तुति की हर बारीकी को समझा जा सके। जियो हॉटस्टार पर मौजूद ‘हुंकार: द रोर’ की पृष्ठभूमि रघुबीर यादव की मौजूदगी वाली वेब सीरीज ‘हुंकार: द रोर’ इस समय जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है। इस शो का ताना-बाना सामाजिक रसूख, अंध आस्था और ताकत के इर्द-गिर्द बुना गया है। कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब 17 साल की लड़की मीनू रावत एक प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाती है। इसके बाद मामले की पड़ताल शुरू होती है और कानूनी दांव-पेच अदालत के कटघरे तक पहुंच जाते हैं। यह सीरीज दिखाती है कि इंसाफ पाने की लड़ाई आस्था और प्रभाव के टकराव में कितनी पेचीदा हो जाती है। शो में ‘सैयारा’ से पहचानी जाने वाली अनीत पड्डा ने मीनू रावत का मुख्य किरदार निभाया है। वहीं फातिमा सना शेख इसमें एसीपी जसलीन सिंह के किरदार में नजर आ रही हैं। इनके अलावा मोहम्मद जीशान अय्यूब, राम कपूर और अर्जुन माथुर जैसे नामी कलाकारों ने भी शो में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इस वेब सीरीज का निर्देशन करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा ने मिलकर किया है। इसका आप पर असर मनोरंजन प्रेमियों और उभरते थिएटर कलाकारों के लिए रघुबीर यादव का यह अनुभव अभिनय की समझ और नए ओटीटी कंटेंट के चयन में मददगार साबित होता है। • कला प्रेमियों के लिए: अभिनय के पारंपरिक तरीकों से हटकर संगीत और स्टेज क्राफ्ट को समझने का नजरिया मिलता है। दर्शक अब कलाकारों के परफॉर्मेंस को उनकी बैकग्राउंड स्किल्स के नजरिए से भी आंक सकते हैं। • ओटीटी दर्शकों के लिए: जियो हॉटस्टार पर गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर आधारित एक नई भारतीय कोर्टरूम सीरीज देखने का विकल्प उपलब्ध है। इसमें 17 साल की लड़की के आरोपों और न्याय प्रणाली के टकराव को प्रमुखता से दिखाया गया है। • थिएटर व अभिनय छात्रों के लिए: केवल डायलॉग डिलीवरी के बजाय मंच शिल्प और जीवन के बहुआयामी अनुभवों को सीखने की सीख मिलती है। बिना किसी औपचारिक एक्टिंग कोर्स के भी स्टेज क्राफ्ट की समझ के दम पर मजबूत पकड़ बनाई जा सकती है। • कंटेंट चयन के लिए: दर्शक आस्था और कानूनी व्यवस्था के पेचीदा रिश्तों पर आधारित एक ड्रामा चुन सकते हैं। इसमें कई अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी कहानी के प्रभाव को गहरा बनाती है। ऐसा क्यों हुआ रघुबीर यादव ने अपने हालिया शो को मिले दर्शकों के प्यार के बाद अपने करियर और कलात्मक नजरिए की यह व्याख्या सामने रखी। उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपने आगमन को एक सुखद संयोग बताते हुए अपने नजरिए की वजहें गिनाईं। • कला के प्रति सोच: उनका मानना है कि एक संपूर्ण अभिनेता बनने के लिए जीवन के हर हुनर की बुनियादी जानकारी जरूरी होती है। इसलिए उन्होंने किसी औपचारिक एक्टिंग कोर्स में दाखिला लेने के बजाय मंच की संपूर्ण कला यानी स्टेज क्राफ्ट में विशेषज्ञता चुनी। • संगीत से पुराना नाता: बचपन से ही संगीत से गहरा जुड़ाव होने के कारण वे किरदारों की मनोदशा को धुनों के माध्यम से आसानी से समझ पाते हैं। संगीत के जरिए भावनाएं तेजी से जुड़ती हैं, जिससे किरदार की रूह को पकड़ना आसान हो जाता है। • संयोग से एक्टिंग में प्रवेश: अभिनय उनके जीवन में किसी पूर्व निर्धारित योजना से नहीं आया था। उनके अपने शब्दों में यह जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ पड़ी थी, जिसे उन्होंने बाद में पूरी दिलचस्पी के साथ आत्मसात किया। सवाल-जवाब 1. रघुबीर यादव के मुताबिक उन्होंने एक्टिंग का कोर्स क्यों नहीं किया? रघुबीर यादव का मानना है कि एक अभिनेता को हर विधा की समझ होनी चाहिए, इसलिए उन्होंने किसी औपचारिक एक्टिंग कोर्स के बजाय स्टेज क्राफ्ट में विशेषज्ञता हासिल की। 2. रघुबीर यादव किरदारों की तैयारी के लिए किस विधा की मदद लेते हैं? वे किरदारों की भावनाओं और उनकी मनोदशा को गहराई से समझने के लिए संगीत का सहारा लेते हैं, जिससे उनका बचपन से जुड़ाव रहा है। 3. वेब सीरीज ‘हुंकार : द रोर’ किस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है? यह वेब सीरीज वर्तमान में जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। 4. ‘हुंकार : द रोर’ की कहानी किस विषय पर आधारित है? यह कहानी 17 साल की लड़की मीनू रावत द्वारा एक प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यक्ति पर लगाए गए गंभीर आरोपों और उसके बाद चलने वाली कानूनी जांच पर आधारित है। 5. सीरीज में एसीपी जसलीन सिंह का किरदार किसने निभाया है? सीरीज में एसीपी जसलीन सिंह की भूमिका अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने निभाई है। 6. ‘हुंकार : द रोर’ का निर्देशन किन निर्देशकों ने किया है? इस सीरीज का निर्देशन करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा ने मिलकर किया है। प्रेरणा और सबक रघुबीर यादव का जीवन यह सीख देता है कि करियर में योजनाएं न होने के बावजूद मेहनत और समर्पण से किसी भी अनपेक्षित विधा में महारत हासिल की जा सकती है। • अनपेक्षित अवसरों को स्वीकारना: जब जीवन में कोई जिम्मेदारी बिन बुलाए आ जाए, तो उससे भागने के बजाय उसे पूरे मन से अपनाना चाहिए। रघुबीर यादव ने अप्रत्याशित रूप से मिली एक्टिंग को अपना सबसे बड़ा हुनर बना लिया। • हुनर का दायरा बढ़ाना: किसी एक विधा में सीमित रहने के बजाय जीवन के अन्य माध्यमों जैसे संगीत और मंच शिल्प से लगातार सीखना चाहिए। विभिन्न विधाओं का ज्ञान आपके मुख्य काम को और अधिक निखारता है। • औपचारिक डिग्रियों से परे हुनर: सिर्फ पारंपरिक कोर्स करने से सफलता की गारंटी नहीं मिलती, बल्कि वास्तविक शिल्प की समझ और निरंतर रियाज ज्यादा मायने रखता है। https://trendkia.com/entertainment/kiradara-garhane-men-sngita-ka-sahara-lete-hain-raghubir-yadav-bina-phormala-ektinga-korsa-aise-taya-kiya-saphara-40757 TrendKia — Har trend, sabse pehle.