# लाइव शो में क्यों भूल जाते हैं अपने ही गानों के बोल, शंकर महादेवन और शान ने खोला राज

> फिल्म दिल चाहता है के 25 साल पूरे होने पर हुई बातचीत में शंकर महादेवन और शान ने बताया कि सुपरहिट गाने के बाद ध्यान आगे बढ़ जाने से गायक अक्सर बोल भूल जाते हैं।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/laiva-sho-men-kyon-bhula-jate-hain-apane-hi-ganon-ke-bola-shankar-mahadevan-aura-shaan-ne-khola-raja-40640 · **Language:** Hindi
**Tags:** शंकर महादेवन, शान, दिल चाहता है, जावेद अख्तर, फरहान अख्तर, बॉलीवुड संगीत, एहसान नूरानी, लॉय मेंडोंसा

संगीत की दुनिया में यह दृश्य अक्सर देखने को मिलता है जब दिग्गज गायक मंच पर या महफिल में अपने ही सबसे मशहूर गानों के बोल याद करने के लिए जूझते दिखाई देते हैं। इस दिलचस्प पहलू पर मशहूर संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने खुलकर बात की है और इसकी असल मनोवैज्ञानिक वजह साझा की है। उनका मानना है कि जब कोई ट्रैक रिकॉर्ड होकर चार्टबस्टर बन जाता है, तो एक कलाकार का ध्यान स्वाभाविक तौर पर नई धुनों और आगामी प्रोजेक्ट्स की ओर चला जाता है। ऐसे में पुरानी रचनाएं उनकी तात्कालिक प्राथमिकता सूची से बाहर हो जाती हैं, जिसके चलते जुबान पर बोल अटकने लगते हैं।

## फिल्म दिल चाहता है के 25 साल के जश्न में जुटे संगीत के महारथी
यह रोचक चर्चा आधुनिक दौर की कल्ट क्लासिक फिल्म 'दिल चाहता है' के रिलीज के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक खास सत्र के दौरान सामने आई। इस बातचीत में शंकर महादेवन के साथ उनके संगीत तिकड़ी के साथी एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा मौजूद थे। उनके अलावा लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर शान और मेयांग चांग भी इस चर्चा का हिस्सा बने। एक डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म के लिए तैयार किए गए वीडियो में गायकी और संगीत से जुड़े कई अनछुए पहलुओं पर तफ्सील से बात हुई। इसी दौरान शान ने सीधा सवाल उठाया कि आखिरकार गायक कई मर्तबा अपने ही गाए गानों की पंक्तियां क्यों भूलने लगते हैं।

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## गाने के सफर और कलाकार के फोकस का खेल
शान के सवाल पर स्थिति स्पष्ट करते हुए शंकर महादेवन ने बताया कि यह पूरी तरह कलाकार के मानसिक फोकस से जुड़ा मामला है। जब कोई गायक किसी गाने को रिकॉर्ड कर लेता है और वह दर्शकों के बीच जाकर सुपरहिट या लोकप्रिय हो जाता है, तो गायक उस सफर से आगे बढ़ चुका होता है। उस ट्रैक को लेकर जो एकाग्रता रिकॉर्डिंग रूम में थी, वह बाद में वैसी नहीं रह जाती।

शंकर महादेवन ने तुलना करते हुए समझाया कि जब कोई धुन बिल्कुल ताजी होती है और उसके बोल नए होते हैं, तब गायक अपनी पूरी ऊर्जा उसी में झोंक देता है। स्टूडियो में इस बात की कड़ी सतर्कता बरती जाती है कि सुर, ताल या उच्चारण में एक भी गलती न हो। यही वजह है कि नए ट्रैक की रिकॉर्डिंग के दौरान भूल होने की संभावना बेहद कम रहती है, जबकि पुराने सफल गानों पर कलाकार का ध्यान ढीला पड़ जाता है।

## जब जावेद अख्तर की रिकॉर्डिंग में शान खुद गढ़ने लगे थे बोल
इस बातचीत को आगे बढ़ाते हुए शान ने रिकॉर्डिंग स्टूडियो से जुड़ा एक बेहद मजेदार संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक गाने के रिकॉर्डिंग सेशन के दौरान वे गाते-गाते अचानक खुद ही नए बोल बनाने लगे थे। गाते समय जब उन्हें अहसास हुआ, तो उन्होंने थोड़े संकोच और हिचक के साथ मशहूर गीतकार जावेद अख्तर से पूछा कि क्या सब कुछ ठीक चल रहा है।

शान के अनुसार, उस वक्त जावेद अख्तर ने चुटकी लेते हुए उनसे कहा, 'आप खुद लिख रहे हैं।' पहले तो शान इस टिप्पणी का मतलब नहीं समझ पाए। इसके बाद जावेद अख्तर ने बात साफ करते हुए कहा कि ये तो सारे उनके अपने गाने हैं, फिर शान ने जवाब दिया कि इन पंक्तियों को उन्होंने नहीं लिखा था। तब जावेद अख्तर ने हंसते हुए खुलासा किया कि गाते समय शान खुद अपनी ओर से नई लाइनें जोड़ते चले जा रहे थे। इस वाकये ने सत्र में मौजूद सभी कलाकारों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।

## फरहान अख्तर के निर्देशन और शहरी सिनेमा का नया दौर
गौरतलब है कि फरहान अख्तर के निर्देशन में बनी फिल्म 'दिल चाहता है' ने अपने 25 साल पूरे कर लिए हैं। यह बतौर निर्देशक फरहान अख्तर की पहली फिल्म थी, जिसने आधुनिक हिंदी सिनेमा की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। फिल्म ने उस दौर के पारंपरिक सिनेमाई ढांचे को तोड़कर एक नई ताजगी पेश की थी।

फिल्म की कहानी में शहरी परिवेश, मजबूत दोस्ती, प्यार और युवाओं की बेबाक सोच को बेहद स्वाभाविक ढंग से पेश किया गया था, जिसने उस दौर के दर्शकों की पूरी पीढ़ी को गहराई से प्रभावित किया। खासकर दोस्तों के साथ गोवा जाने वाली रोड ट्रिप का विचार युवाओं के बीच इतना लोकप्रिय हुआ कि वह आज भी दोस्तों के साथ सफर करने की सबसे बड़ी प्रेरणा माना जाता है। किरदारों का कैजुअल पहनावा, बातचीत की सहज भाषा और यथार्थवादी कहानी ने बॉलीवुड के पर्दे पर शहरी भारत की तस्वीर को एक नया आयाम दिया। इसके अलावा, शंकर, एहसान और लॉय की तिकड़ी द्वारा तैयार किया गया फिल्म का संगीत भी जबरदस्त हिट रहा, जिसमें रॉक, पॉप और पारंपरिक भारतीय संगीत का अनोखा संगम सुनने को मिला था।

## इसका आप पर असर
संगीत प्रेमियों और लाइव कॉन्सर्ट देखने वालों के लिए यह खुलासा मंच पर कलाकारों के मानवीय पक्ष और उनके काम करने के तौर-तरीकों को समझने का मौका देता है।

- **लाइव कॉन्सर्ट के दर्शक:** जब कोई गायक लाइव शो में गानों की लाइनें भूलता दिखे, तो इसे लापरवाही मानने के बजाय संगीतकारों की स्वाभाविक मानसिक आदत के रूप में देखा जाना चाहिए। कई बार गायक ऐसी स्थितियों को नए अंदाज में संभालकर मंच पर तात्कालिक प्रयोग करते हैं।
- **युवा संगीतकार और गायक:** नए उभरते कलाकारों को यह सीख मिलती है कि स्टूडियो रिकॉर्डिंग और मंच प्रदर्शन दोनों में ध्यान का स्तर अलग-अलग होता है। अपने ही लोकप्रिय गानों को दोहराने के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत पड़ती है।
- **सिनेमा और संगीत प्रेमी:** 'दिल चाहता है' के 25 साल पूरे होने पर हुई यह बातचीत दिखाती है कि कैसे 2000 के दशक की शुरुआत में संगीत की रचनात्मक प्रक्रिया ने आज के सिनेमा को गढ़ा। दर्शक अब इन गानों के पीछे की रिकॉर्डिंग की दिलचस्प कहानियों को जान सकते हैं।
- **मनोरंजन उद्योग:** डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म पर ऐसे विशेष सत्र संगीत निर्माण के पर्दे के पीछे की बातचीत को आम लोगों के सामने लाते हैं। इससे कलाकारों और उनके श्रोताओं के बीच एक आत्मीय रिश्ता गहरा होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
गायक अपने ही लोकप्रिय गानों के बोल क्यों भूल जाते हैं, इस सवाल का जवाब कलाकारों की मानसिक प्राथमिकताओं और रचनात्मक प्रक्रिया के बदलाव से जुड़ा है।

- **सफलता के बाद ध्यान का हटना:** शंकर महादेवन के अनुसार जब कोई गाना तैयार होकर सुपरहिट हो जाता है, तो गायक उसे पूरा मानकर आगे बढ़ जाता है। कलाकार का दिमाग नए प्रोजेक्ट्स और नई धुनों में लग जाता है, जिससे पुराने बोल दिमाग की सक्रिय स्मृति से हट जाते हैं।
- **रिकॉर्डिंग के दौरान सतर्कता का स्तर:** स्टूडियो में नए गाने को रिकॉर्ड करते समय गायक पर कोई गलती न करने का भारी दबाव रहता है। नई धुन और नए शब्दों के कारण पूरी एकाग्रता उसी पल पर केंद्रित रहती है, जो बाद में दोहराव के दौरान कम हो जाती है।
- **लाइव माहौल और सुधार की आदत:** शान के किस्से से यह भी स्पष्ट होता है कि कई बार गायक फ्लो में आकर अनजाने में खुद नई पंक्तियां गढ़ने लगते हैं। रिकॉर्डिंग या गायन के स्वाभाविक बहाव में कभी-कभी वास्तविक बोलों की जगह तात्कालिक विचार ले लेते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. शंकर महादेवन के अनुसार गायक अपने ही गानों के बोल क्यों भूल जाते हैं?
शंकर महादेवन ने बताया कि जब कोई गाना सुपरहिट हो जाता है, तो गायक का ध्यान नए गानों और धुनों पर चला जाता है, जिससे पुराने बोल प्राथमिकता में नहीं रहते।

### 2. शान ने रिकॉर्डिंग स्टूडियो का कौन सा मजेदार किस्सा सुनाया?
शान ने बताया कि एक रिकॉर्डिंग के दौरान वे गाते-गाते खुद ही नए बोल गढ़ने लगे थे, जिस पर गीतकार जावेद अख्तर ने चुटकी लेते हुए कहा था कि वे खुद लिख रहे हैं।

### 3. फिल्म दिल चाहता है के कितने साल पूरे होने पर यह चर्चा हुई?
यह खास बातचीत फिल्म 'दिल चाहता है' के रिलीज के 25 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई थी।

### 4. दिल चाहता है के 25 साल पूरे होने के कार्यक्रम में कौन-कौन से संगीतकार शामिल थे?
इस सत्र में शंकर महादेवन, एहसान नूरानी, लॉय मेंडोंसा, गायक शान और मेयांग चांग शामिल हुए थे।

### 5. फिल्म दिल चाहता है के निर्देशक कौन थे?
फिल्म 'दिल चाहता है' का निर्देशन फरहान अख्तर ने किया था और यह बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म थी।

### 6. नए गाने की रिकॉर्डिंग के समय गलतियां कम क्यों होती हैं?
शंकर महादेवन के अनुसार नए गाने, नई धुन और नए बोल के समय गायक का पूरा ध्यान और सतर्कता गलती न करने पर केंद्रित रहती है।

## प्रेरणा और सबक
यह बातचीत दिखाती है कि महान कलाकार भी गलतियों और भूलने की मानवीय आदतों से अछूते नहीं हैं, जिसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए।

- **कमियों को सहजता से स्वीकारना:** मंच या काम के दौरान होने वाली चूक को छिपाने के बजाय उस पर खुलकर बात करना और हंसना आत्मविश्वास को दर्शाता है। शान और शंकर महादेवन ने अपनी इस आदत को बिना किसी हिचक के साझा किया।
- **आगे बढ़ते रहने की मानसिकता:** किसी एक काम की सफलता के बाद उसी में बंधे रहने के बजाय नए लक्ष्यों और नई धुनों की तरफ ध्यान केंद्रित करना ही एक कलाकार को प्रासंगिक बनाए रखता है।
- **रचनात्मकता में तात्कालिकता:** रिकॉर्डिंग में गलत बोल आने पर भी खुद से नई लाइनें गढ़ लेना यह सिखाता है कि रचनात्मक इंसान किसी भी स्थिति में अपनी मौलिक सोच नहीं छोड़ता।

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