लावारिस के 45 साल: अमिताभ बच्चन और जीनत अमान का 'कब के बिछड़े हुए' आज भी क्यों है सुपरहिट साल 1981 की ब्लॉकबस्टर फिल्म लावारिस का सदाबहार गाना 'कब के बिछड़े हुए' चार दशक बाद भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है। किशोर कुमार और आशा भोसले की आवाज से सजे इस गीत में अमिताभ बच्चन और जीनत अमान की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने नया इतिहास रचा था। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं को पार कर दशकों बाद भी अपनी ताजगी बनाए रखते हैं। साल 1981 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'लावारिस' का बेहद लोकप्रिय रोमांटिक गीत 'कब के बिछड़े हुए' ऐसा ही एक यादगार नगमा है। अमिताभ बच्चन और जीनत अमान पर फिल्माया गया यह चुलबुला गाना आज साढ़े चार दशक बीत जाने के बावजूद संगीत प्रेमियों और खास तौर पर युवाओं के बीच एक रोमांटिक एंथम की तरह सुना जाता है। संगीत और बोल का बेजोड़ संगम इस सदाबहार नगमे की सबसे बड़ी ताकत इसका संगीत संयोजन और कर्णप्रिय धुन है। संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने इस गीत के लिए एक ऐसा संगीत तैयार किया, जो चंचलता और गहरे अहसास दोनों को एक साथ समेटे हुए है। गीतकार अनजान ने बेहद सरल लेकिन दिल को छू लेने वाले शब्दों में इसे पिरोया था। गाने के बोल दो ऐसे प्रेमियों के लंबे अरसे बाद अचानक आमने-सामने आने के रोमांच और खुशी को सहजता से बयां करते हैं। किशोर कुमार और आशा भोसले की जुगलबंदी इस गीत को अमर बनाने में महान पार्श्व गायक किशोर कुमार और आशा भोसले की गायकी का सबसे बड़ा योगदान रहा। दोनों गायकों ने अपनी आवाज के उतार-चढ़ाव से किरदारों की मस्ती और उनके बीच की नोकझोंक को जीवंत बना दिया। पर्दे पर अमिताभ बच्चन का अनोखा अंदाज और जीनत अमान की सहज अदाकारी ने इस आवाज को ऐसा रूप दिया जो सिनेप्रेमियों के जेहन में हमेशा के लिए बस गया। सिल्वर स्क्रीन पर यादगार केमिस्ट्री अमिताभ बच्चन और जीनत अमान की जोड़ी सत्तर और अस्सी के दशक में दर्शकों की बेहद पसंदीदा जोड़ियों में शुमार थी। 'लावारिस' के इस गाने में दोनों कलाकारों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने पर्दे पर एक नया जादू बिखेरा था। अचानक बिछड़कर मिलने की स्थिति में उपजी खुशी, हैरानी और प्यार की भावनाओं को जिस तरह से पर्दे पर उतारा गया, उसने इस गीत को हर दौर के प्रेमियों के लिए एक सदाबहार पसंद बना दिया। इसका आप पर असर संगीत और सिनेमा के शौकीनों के लिए पुराने कालजयी गीतों का सांस्कृतिक महत्व बना रहता है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह गीत क्लासिक हिंदी सिनेमा की धुन और सादगी को समझने का बेहतरीन जरिया है। नई पीढ़ी के श्रोता भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसे बड़े चाव से सुन रहे हैं। • संगीत जगत में: चार दशक पुराने इस गीत की बनावट दिखाती है कि सरल बोल और जीवंत गायकी गानों को लंबी उम्र देते हैं। आज के दौर के संगीतकारों के लिए यह गीत एक प्रेरणा बना हुआ है। ऐसा क्यों हुआ फिल्म 'लावारिस' का यह गीत अपनी विशिष्ट रचना और कलाकारों के अभिनय के चलते दशकों से दर्शकों की स्मृति में बसा हुआ है। • दमदार रचनात्मक टीम: कल्याणजी-आनंदजी का संगीत और अनजान के लिखे बोल सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंचे। इस गीत की रचना में कहानी की स्थिति को बहुत सटीकता से पिरोया गया था। • दिग्गज गायकों की संगत: किशोर कुमार और आशा भोसले की विशिष्ट गायकी ने पर्दे पर किरदारों के संवाद को संगीतमय विस्तार दिया। उनके गायन की सहजता ने इसे हर उम्र के श्रोताओं के बीच लोकप्रिय बनाया। • कलाकारों की लोकप्रियता: अमिताभ बच्चन और जीनत अमान दोनों उस दौर के शीर्ष सितारों में शामिल थे। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने इस गीत को दृश्यात्मक रूप से भी बेहद आकर्षक बना दिया। सवाल-जवाब 1. गाना 'कब के बिछड़े हुए' किस फिल्म का है? यह गीत साल 1981 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'लावारिस' का है। 2. इस गीत को किन गायकों ने गाया है? इस सदाबहार गाने को मशहूर पार्श्व गायक किशोर कुमार और आशा भोसले ने गाया है। 3. इस गीत के संगीतकार और गीतकार कौन हैं? गीत का संगीत कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल अनजान ने लिखे थे। 4. पर्दे पर यह गाना किन कलाकारों पर फिल्माया गया था? यह गाना सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री जीनत अमान पर फिल्माया गया था। https://trendkia.com/entertainment/lawaaris-ke-45-sala-amitabh-bachchan-aura-zeenat-aman-ka-kaba-ke-bichhare-hue-aja-bhi-kyon-hai-suparahita-43691 TrendKia — Har trend, sabse pehle.