# मध्य प्रदेश के लोक गायक सुनील लोधी को सोशल मीडिया के जरिए मिला फिल्म 'हनुमान अंश' में गाने का मौका

> मध्य प्रदेश के अगरा गांव निवासी लोक गायक सुनील लोधी को बिना किसी ऑडिशन के फिल्म 'हनुमान अंश' में भजन गाने का मौका मिला है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर उनकी गायकी सुनकर उनसे सीधा संपर्क साधा।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/madhya-pradesh-ke-loka-gayaka-sunil-lodhi-ko-soshala-midiya-ke-jarie-mila-philma-hanuman-ansh-men-gane-ka-mauka-38031 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुनील लोधी, हनुमान अंश, विशाल चतुर्वेदी, बुंदेलखंडी लोकगीत, रोहित साहू, आगरा गांव, भजन गायक

मध्य प्रदेश के एक ग्रामीण अंचल से निकलकर सिनेमाई दुनिया में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाले युवा गायक सुनील लोधी का सफर बेहद प्रेरणादायक है। बचपन में अपने गांव के बुजुर्गों के बीच बैठकर संगीत के सुर सीखने वाले सुनील ने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि उनकी आवाज किसी फीचर फिल्म के साउंडट्रैक की शोभा बढ़ाएगी। इंटरनेट और सोशल मीडिया की ताकत ने उनके हुनर को सही मुकाम तक पहुंचाया, जहां बिना किसी सिफारिश या पारंपरिक ऑडिशन के उन्हें फिल्म जगत से सीधा बुलावा आ गया। आज उनकी गाई प्रस्तुति हर तरफ श्रोताओं का ध्यान खींच रही है।

सुनील लोधी इन दिनों आगामी फिल्म 'हनुमान अंश' में गाए अपने भक्ति गीत 'मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान, सागर में नैया डाल दई...' की वजह से चर्चा के केंद्र में हैं। इस गीत को लेकर सबसे खास बात यह रही कि इसके लिए सुनील को किसी स्टूडियो के चक्कर नहीं काटने पड़े और न ही किसी ऑडिशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। फिल्म के निर्देशक ने इंटरनेट मंचों पर उनका गायन सुना, उनकी अनूठी गायकी से प्रभावित हुए और सीधे उनसे संपर्क कर इस भजन की रिकॉर्डिंग की पेशकश कर दी।

## बचपन में तंबूरा देखकर जगा था संगीत का गहरा लगाव
सुनील मूल रूप से मध्य प्रदेश के छोटे से गांव अगरा के निवासी हैं। उनके मामा रोहित साहू बताते हैं कि सुनील का रुझान बहुत छोटी उम्र से ही गायन और वादन की तरफ होने लगा था। गांव की चौपालों पर जब बुजुर्ग तंबूरा बजाते हुए पारंपरिक लोकगीत गाते थे, तो सुनील घंटों बैठकर उन्हें बेहद एकाग्रता के साथ सुना करते थे। संगीत के इसी स्वाभाविक खिंचाव ने उन्हें करीब 9 साल की उम्र में खुद तंबूरा बजाना सीखने के लिए प्रेरित किया।

तंबूरे की थाप के साथ अभ्यास करते हुए सुनील ने धीरे-धीरे स्थानीय लोकगीतों और पारम्परिक भजनों को अपनी आवाज में ढालना शुरू कर दिया। उनके मामा रोहित ने जब उनकी गायकी में एक खास खनक और गहराई महसूस की, तो उन्होंने इसे व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का फैसला लिया। रोहित ने सुनील के गाए गीतों के छोटे-छोटे वीडियो अपने मोबाइल से रिकॉर्ड किए और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा करना शुरू कर दिया।

## साल 2019 के एक वायरल वीडियो ने बदली जिंदगी की दिशा
साल 2019 में रोहित ने सुनील की आवाज में एक बुंदेलखंडी लोकगीत रिकॉर्ड करके ऑनलाइन अपलोड किया। इस वीडियो ने डिजिटल मंचों पर श्रोताओं का दिल जीत लिया और देखते ही देखते यह क्लिप काफी तेजी से वायरल हो गई। इस प्रस्तुति की लोकप्रियता ने सुनील की पहचान को गांव की सीमाओं से बाहर निकाल दिया और उन्हें स्थानीय स्तर पर बुंदेलखंडी लोकगीतों की प्रस्तुति के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से कार्यक्रम के प्रस्ताव मिलने लगे। जो हुनर पहले केवल गांव-घर के सीमित घेरे तक सिमटा था, वह अब इंटरनेट के माध्यम से हजारों संगीत प्रेमियों के कानों तक पहुंचने लगा था।

## मुंबई के वर्सोवा बीच पर आया जिंदगी बदल देने वाला संदेश
सुनील की इस सांगीतिक यात्रा को सबसे बड़ा मोड़ साल 2026 में मिला। 6 फरवरी को रोहित अपने भांजे सुनील को एक फोक सॉन्ग की पेशेवर रिकॉर्डिंग के सिलसिले में मुंबई लेकर गए थे। स्टूडियो में तय काम खत्म करने के बाद दोनों वर्सोवा बीच पर टहलने और आराम करने चले गए। समुद्र किनारे मौजूद रहने के दौरान ही सुनील के इंस्टाग्राम खाते पर एक अनजान व्यक्ति का सीधा संदेश प्राप्त हुआ।

संदेश भेजने वाले ने खुद को फिल्म निर्देशक बताया और सुनील से व्यक्तिगत रूप से मिलने की इच्छा जाहिर करते हुए साथ में एक फोन नंबर भी साझा किया। शुरुआत में सुनील और रोहित को लगा कि शायद यह कोई फर्जी या सामान्य मैसेज होगा। हालांकि, बाद में पुष्टि करने पर सामने आया कि संपर्क करने वाले शख्स कोई और नहीं, बल्कि फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी थे।

## निर्देशक विशाल चतुर्वेदी से मुलाकात और स्टूडियो रिकॉर्डिंग
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने सुनील और उनके मामा रोहित को मुलाकात के लिए आमंत्रित किया। बैठक के दौरान निर्देशक ने खुलासा किया कि वे इंस्टाग्राम पर सुनील के गाए लोकगीतों को पहले ही सुन चुके थे और उनकी ठेठ तथा भावपूर्ण आवाज से खासे प्रभावित थे। इसी वजह से उन्होंने बिना किसी मध्यस्थ के सीधे सोशल मीडिया के जरिए सुनील को ढूंढ निकाला।

बातचीत के दौरान निर्देशक ने सुनील से सीधा सवाल किया कि क्या वे उनकी फिल्म के लिए एक गीत रिकॉर्ड करना चाहेंगे। यह अप्रत्याशित अवसर पाकर सुनील और उनके मामा बेहद रोमांचित हो उठे। औपचारिकताएं पूरी होने के तुरंत बाद सुनील ने स्टूडियो में जाकर फिल्म 'हनुमान अंश' के लिए 'सागर में नैया डाल दई' भजन अपनी आवाज में रिकॉर्ड कराया, जो अब संगीत प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

## इसका आप पर असर
सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय कलाकारों को मुख्यधारा के मनोरंजन उद्योग में सीधे मौके मिलने से प्रतिभा प्रदर्शन के तौर-तरीके पूरी तरह बदल रहे हैं।

- **भारत में:** देश भर के स्वतंत्र गायकों और लोक कलाकारों के लिए यह साबित करता है कि किसी बड़े गॉडफादर या महंगे स्टूडियो के बिना भी इंटरनेट के दम पर फिल्मों में ब्रेक मिल सकता है। उभरते कलाकार अब मोबाइल फोन और ऑनलाइन मंचों को अपने पोर्टफोलियो के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
- **मध्य प्रदेश में:** राज्य के ग्रामीण अंचलों और बुंदेलखंड के लोक कलाकारों को अपनी क्षेत्रीय संस्कृति और पारंपरिक संगीत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का प्रोत्साहन मिला है। स्थानीय कलाकारों में अपनी लोक विधाओं को ऑनलाइन रिकॉर्ड कर साझा करने का विश्वास बढ़ा है।
- **मनोरंजन उद्योग:** पारंपरिक ऑडिशन और सिफारिशी प्रणाली के बजाय फिल्म निर्माता अब डिजिटल मंचों से सीधे मौलिक प्रतिभाओं की खोज करने लगे हैं। इससे क्षेत्रीय और लोक संगीत की मौलिकता को सिनेमाई प्रोजेक्ट्स में नई जगह मिल रही है।
- **संगीत प्रेमियों के लिए:** दर्शकों और श्रोताओं को मुख्यधारा के सिनेमा में पारंपरिक वाद्ययंत्रों और ठेठ क्षेत्रीय गायकी के शुद्ध रूपों को सुनने का अवसर मिल रहा है। इससे लोक विधाओं के संरक्षण और लोकप्रियता को नया जीवन मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
सुनील लोधी को फिल्म में गाने का यह मौका पारंपरिक सिफारिशों के बजाय आधुनिक सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच और उनकी लोक गायकी की मौलिकता के कारण मिला। इंटरनेट पर साझा की गई उनकी प्रस्तुतियों ने बिना किसी बिचौलिए के सीधे फिल्म निर्देशक का ध्यान आकर्षित किया।

- **सोशल मीडिया पर शुरुआती वीडियो की लोकप्रियता:** साल 2019 में सुनील के मामा रोहित साहू द्वारा अपलोड किया गया बुंदेलखंडी लोकगीत ऑनलाइन काफी पसंद किया गया। इस वीडियो के व्यापक प्रसार ने सुनील की गायकी की चर्चा दूर-दूर तक पहुंचा दी थी।
- **पारंपरिक गायकी और तंबूरा वादन की विशिष्टता:** नौ वर्ष की उम्र से तंबूरा बजाने और बुंदेलखंडी लोकगीत गाने के कारण सुनील की आवाज में एक ठेठ और रूहानी खिंचाव था। यही मौलिकता निर्देशक के ध्यान में आई, जो अपनी फिल्म के लिए एक प्रामाणिक आवाज ढूंढ रहे थे।
- **निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की सीधी तलाश:** फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इंस्टाग्राम पर सुनील के गायन क्लिप्स सुने और आवाज पसंद आने पर सीधे संपर्क साधने का फैसला किया। इस सीधी पहल ने किसी भी ऑडिशन प्रक्रिया की जरूरत को समाप्त कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. सुनील लोधी किस गांव के रहने वाले हैं?
सुनील लोधी मध्य प्रदेश के अगरा गांव के निवासी हैं।

### 2. सुनील लोधी ने किस फिल्म के लिए भजन गाया है?
उन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की फिल्म 'हनुमान अंश' के लिए भजन रिकॉर्ड किया है।

### 3. फिल्म 'हनुमान अंश' में सुनील लोधी ने कौन सा भजन गाया है?
सुनील ने 'मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान, सागर में नैया डाल दई...' भजन गाया है।

### 4. सुनील को संगीत सीखने की प्रेरणा कब और कैसे मिली?
बचपन में गांव के बुजुर्गों को तंबूरा बजाते देखकर उन्होंने करीब 9 साल की उम्र में तंबूरा बजाना और लोकगीत गाना शुरू किया।

### 5. सुनील लोधी के गानों के वीडियो सोशल मीडिया पर किसने साझा किए?
उनके मामा रोहित साहू ने सुनील की आवाज पहचानकर उनके वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए।

### 6. सुनील को फिल्म निर्देशक का संदेश कब और कहां मिला था?
6 फरवरी 2026 को मुंबई के वर्सोवा बीच पर सुनील के इंस्टाग्राम खाते पर निर्देशक विशाल चतुर्वेदी का संदेश आया था।

### 7. क्या सुनील लोधी को इस फिल्म के लिए कोई ऑडिशन देना पड़ा था?
नहीं, निर्देशक ने सोशल मीडिया पर उनकी गायकी देखकर सीधे संपर्क किया और बिना किसी ऑडिशन के उन्हें गाने का मौका दिया।

## प्रेरणा और सबक
सुनील लोधी की यह सांगीतिक यात्रा बताती है कि यदि कला में सच्चाई हो और साधन सीमित हों, तो भी लगन और निरंतरता से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

- **रुचि को हुनर में बदलना:** बचपन में गांव के बुजुर्गों को सुनकर महज 9 साल की उम्र में तंबूरा सीखने की पहल यह दर्शाती है कि प्रेरणा कहीं से भी ली जा सकती है। अपने आस-पास के माहौल से सीखकर किसी भी विधा में महारत हासिल की जा सकती है।
- **डिजिटल साधनों का सही सदुपयोग:** आधुनिक स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर अपनी प्रतिभा को दुनिया तक पहुंचाने के लिए करना चाहिए। सुनील के मामा द्वारा बनाए गए वीडियो उनके करियर के लिए जीवन बदलने वाले साबित हुए।
- **अपनी जड़ों और लोक परंपरा पर भरोसा:** किसी पश्चिमी शैली या आधुनिक ट्रेंड्स की अंधी नकल करने के बजाय सुनील ने अपनी बुंदेलखंडी लोक विधा और भजनों को अपना मुख्य आधार बनाया। अपनी संस्कृति से जुड़ाव ही अंततः उनकी विशिष्ट पहचान बना।
- **धैर्य और निरंतर प्रयास:** साल 2019 में पहला वीडियो वायरल होने के बाद भी सुनील लगातार रियाज और छोटे कार्यक्रमों में गाते रहे। साल 2026 में जाकर उन्हें बड़ा सिनेमाई ब्रेक मिला, जो सिखाता है कि धैर्य का फल हमेशा सार्थक होता है।

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