# महज 21 साल की उम्र में दो बच्चियों की मां बनी थीं रवीना टंडन, समाज के तानों को दरकिनार कर लिखी थी मिसाल

> नब्बे के दशक की मशहूर अदाकारा रवीना टंडन ने अपने करियर के शुरुआती दौर में ही दो बेटियों को गोद लेकर एक साहसिक फैसला लिया था। तमाम तानों और भविष्य को लेकर की गई भविष्यवाणियों के बावजूद उन्होंने समाज की परवाह किए बिना अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-10-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/mahaj-21-saal-ki-umar-mein-do-bachiyon-ki-maa-bani-thiyan-raveena-tandon-samaj-ke-taanon-ko-darkinara-kar-likhi-thi-misal-51667 · **Language:** Hindi
**Tags:** रवीना टंडन, बॉलीवुड, सेलिब्रिटी एडॉप्शन, फिल्मी हस्तियां, पद्मश्री

नब्बे के दशक में अपने अभिनय और खूबसूरती से सिनेमा प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन न केवल पर्दे पर अपनी कला के लिए पहचानी जाती हैं, बल्कि उनकी दरियादिली और सामाजिक सोच भी उन्हें खास बनाती है। जब अधिकांश अभिनेत्रियां अपने करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब उन्होंने महज 21 साल की उम्र में दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने का ऐतिहासिक फैसला किया था। उनके इस कदम पर उस दौर में कई तरह के सवाल उठाए गए और उन्हें ताने भी सुनने पड़े, लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की।

## मुंबई में हुआ जन्म और फिल्मी परिवार से नाता
उनका जन्म 26 अक्टूबर 1972 को मुंबई शहर में हुआ था। उनके पिता रवि टंडन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक प्रतिष्ठित और जाने-माने निर्देशक रहे हैं। घर का माहौल पूरी तरह से फिल्मी होने के कारण उन्हें बचपन से ही इस दुनिया को बेहद करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। हालांकि, उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद अपनी मेहनत और अभिनय क्षमता के दम पर खुद की एक अलग पहचान बनाई।

## फिल्म 'पत्थर के फूल' से शानदार शुरुआत
उन्होंने साल 1991 में बड़े पर्दे पर फिल्म 'पत्थर के फूल' के जरिए कदम रखा। इस फिल्म में उनके साथ सुपरस्टार सलमान खान मुख्य भूमिका में नजर आए थे। पर्दे पर उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा और उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण यानी बेस्ट फीमेल डेब्यू के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया। इसके बाद उन्होंने 'दिलवाले', 'मोहरा', 'लाडला' और 'अंदाज अपना अपना' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया और नब्बे के दौर की शीर्ष अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।

## 'मोहरा' फिल्म और करियर का सुनहरा दौर
साल 1994 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'मोहरा' उनके अभिनय सफर की सबसे बड़ी फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म के गाने 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' और 'टिप टिप बरसा पानी' ने उस समय तहलका मचा दिया था। विशेष तौर पर 'टिप टिप बरसा पानी' गाने में उनके नृत्य और अंदाज को आज भी दर्शक बेहद चाव से याद करते हैं। इसी धमाकेदार दौर के बीच उनके निजी जीवन में एक बहुत बड़ा और खूबसूरत बदलाव आया।

## रिश्तेदार की बेटियों को बनाया अपना हिस्सा
रवीना ने साल 1995 में अपने ही एक रिश्तेदार की बेटियों पूजा और छाया की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने का फैसला किया। उन्होंने विभिन्न साक्षात्कारों में यह साझा किया है कि वह बचपन से ही अपनी मां के साथ अनाथालयों में जाया करती थीं और जरूरतमंदों की मदद करने वाले सामाजिक कार्यों को करीब से देखती थीं। जब उन्होंने अपनी रिश्तेदार की दोनों बच्चियों को ऐसे हालात में देखा जहां उन्हें बेहतर देखरेख की सख्त जरूरत थी, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के उन्हें अपने साथ रखने का निर्णय लिया।

## कानूनी अभिभावक बनने का सफर
एक साक्षात्कार में उन्होंने जिक्र किया था कि पूजा और छाया उनकी एक रिश्तेदार की बेटियां थीं। उन बच्चियों की मां के निधन के बाद परिवार में उनकी देखभाल को लेकर गहरी चिंता बनी हुई थी। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों से इस बारे में चर्चा की और उनकी कानूनी अभिभावक बनने की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उस वक्त उनकी अपनी उम्र बहुत कम यानी सिर्फ 21 वर्ष थी।

## शादी को लेकर मिले थे नकारात्मक ताने
उन्होंने यह साहसी फैसला तब लिया जब वह खुद अपनी फिल्मी पारी को आगे बढ़ा रही थीं। उन्होंने बताया कि उस दौरान कुछ लोगों ने उनसे यहां तक कह दिया था कि दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने के बाद उनसे शायद ही कोई शादी करेगा। लेकिन उनका साफ मानना था कि जो इंसान सचमुच उनसे प्रेम करेगा, वह उनके पूरे परिवार को भी स्वीकार करेगा। उन्होंने आगे चलकर फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर अनिल थडानी के साथ विवाह किया। दोनों की शादी साल 2004 में संपन्न हुई और इस दंपती के दो बच्चे राशा और रणबीरवर्धन हुए।

## गंभीर भूमिकाएं और पद्मश्री सम्मान
उन्होंने अपने करियर के आगे के पड़ाव में 'दमन', 'सत्ता', 'शूल' और 'मातृ' जैसी फिल्मों में बेहद गंभीर और संजीदा किरदार निभाए। फिल्म 'दमन' में घरेलू हिंसा का शिकार हुई एक महिला का प्रभावी अभिनय करने के लिए उन्हें साल 2002 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार यानी नेशनल फिल्म अवॉर्ड प्रदान किया गया। फिल्मों के साथ उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और नेटफ्लिक्स की चर्चित सीरीज 'अरण्यक' में पुलिस अधिकारी कस्तूरी डोगरा के रूप में काफी वाहवाही बटोरी। अभिनय और समाज सेवा में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें साल 2023 में प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया।

## सवाल-जवाब

### 1. रवीना टंडन ने कितनी उम्र में दो बच्चियों को गोद लिया था?
रवीना टंडन ने मात्र 21 साल की उम्र में दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया था।

### 2. गोद ली गई बच्चियों के नाम क्या हैं?
रवीना द्वारा गोद ली गई बच्चियों के नाम पूजा और छाया हैं।

### 3. रवीना टंडन का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 26 अक्टूबर 1972 को मुंबई में हुआ था।

### 4. रवीना टंडन ने किस फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी?
उन्होंने साल 1991 में आई फिल्म 'पत्थर के फूल' से बॉलीवुड में कदम रखा था।

### 5. रवीना टंडन को किस फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था?
उन्हें फिल्म 'दमन' में बेहतरीन अभिनय के लिए 2002 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था।

### 6. रवीना टंडन के पति का क्या नाम है?
उन्होंने फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर अनिल थडानी से शादी की है।

### 7. रवीना टंडन को पद्मश्री से कब सम्मानित किया गया था?
उन्हें कला और समाज सेवा में योगदान के लिए साल 2023 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

## प्रेरणा और सबक
रवीना टंडन का जीवन और उनके फैसले समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश देते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी सही निर्णय कैसे लिए जाते हैं।

- **साहसिक निर्णय:** करियर की शुरुआत में ही दो बच्चियों की जिम्मेदारी लेना यह सिखाता है कि मानवीय मूल्य पेशेवर प्राथमिकताओं से बड़े हो सकते हैं।
- **समाज की परवाह न करना:** लोगों के नकारात्मक तानों और भविष्य की आशंकाओं को दरकिनार कर अपने नैतिक मूल्यों पर अडिग रहना चाहिए।
- **दूसरों की मदद:** बचपन से ही सामाजिक कार्यों से जुड़कर जरूरतमंदों की सहायता करने की भावना को जीवन में उतारना आवश्यक है।
- **संतुलन स्थापित करना:** व्यक्तिगत जीवन, पेशेवर सफलता और परिवारिक जिम्मेदारियों को एक साथ बेहतरीन तरीके से निभाया जा सकता है।

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